सीजीपीएससी मामले में बघेल के पूर्व ओएसडी गिरफ्तार
प्रवर्तन निदेशालय ने छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के कार्यालय में तत्कालीन ओएसडी रहे चेतन बोरघरिया को सीजीपीएससी राज्य सेवा परीक्षा 2020 और 2021 में कथित अनियमितताओं से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में 11 सितंबर को पीएमएलए के तहत गिरफ्तार किया। वे वर्तमान में बलरामपुर-रामानुजगंज के अपर कलेक्टर हैं। ईडी के अनुसार तीन लोगों ने अभ्यर्थियों से तीन करोड़ रुपये से अधिक वसूले और बोरघरिया के खाते में 170 लेनदेन से 66.64 लाख रुपये जमा हुए। उन्हें छह दिन की ईडी हिरासत में भेजा गया।
स्रोत
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डेस्क जाँच · कुछ दावे ध्यान से पढ़ें
डेस्क ने क्या जाँचा (5)
- ED arrested Chetan Borghariya, then OSD in ex-CM Bhupesh Baghel's office, on September 11 under PMLA, 2002. — Attributed to ED; arrest date and legal provision appear in source.
- Three men allegedly collected over Rs 3 crore from CGPSC 2021 candidates promising advance question papers. — Attributed to ED investigation findings; remains an allegation, not proven in court.
- Cash deposits totalling Rs 66.64 lakh through 170 transactions were found in Borghariya's bank account. — Figure quoted directly from ED press statement of Monday.
- Leaked papers were distributed at Siddhi Vinayak Marriage Palace, Raipur, and coaching given at Barnawapara Sanctuary Resort. — Stated as allegations established by ED; no independent confirmation in source.
- Searches at Borghariya's premises were conducted on 01.09.2026. — Date as printed in source; internally inconsistent with the timeline, likely a typographical error.
गहराई से
शोध सारांश · 8 तथ्य · 6 तारीख़ें · परीक्षा के लिएसार
पृष्ठभूमि
छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (सीजीपीएससी) की राज्य सेवा परीक्षा 2020 और 2021 में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार, पेपर लीक और चयन में हेराफेरी के आरोप हैं। फरवरी 2024 में रायपुर की ईओडब्ल्यू/एसीबी द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मनी लॉन्ड्रिंग जांच शुरू की, जबकि मूल मामला बाद में सीबीआई ने अपने हाथ में लिया। सीबीआई ने तत्कालीन सीजीपीएससी अध्यक्ष तमन सिंह सोनवानी व अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर आरोपपत्र दाखिल किए। इसी कड़ी में ईडी ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के कार्यालय में तत्कालीन ओएसडी रहे चेतन बोरघरिया को गिरफ्तार किया है।
मुख्य तथ्य
- ईडी ने चेतन बोरघरिया को 11 सितंबर को पीएमएलए, 2002 के प्रावधानों के तहत गिरफ्तार किया।
- बोरघरिया पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के कार्यालय में तत्कालीन ओएसडी थे और वर्तमान में बलरामपुर-रामानुजगंज के अपर कलेक्टर पद पर तैनात थे।
- ईडी जांच फरवरी 2024 में रायपुर की ईओडब्ल्यू/एसीबी द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू हुई।
- ईडी के अनुसार उत्कर्ष चंद्राकर, अनिल चंद्राकर और डॉ. विकाश चंद्राकर ने सीजीपीएससी राज्य सेवा परीक्षा 2021 के अभ्यर्थियों से 3 करोड़ रुपये से अधिक अवैध रकम वसूली।
- वित्तीय जांच में संबंधित अवधि में बोरघरिया के बैंक खाते में 170 लेनदेन के जरिये कुल 66.64 लाख रुपये नकद जमा पाए गए।
- आरोप है कि प्रारंभिक परीक्षा से पहले रायपुर के सिद्धि विनायक मैरिज पैलेस में अभ्यर्थियों को इकट्ठा कर लीक प्रश्नपत्र बांटे गए।
- मुख्य परीक्षा से जुड़े लीक प्रश्नपत्रों के आधार पर बरनवापारा सैंक्चुअरी रिजॉर्ट में अभ्यर्थियों को कोचिंग दी गई।
- ईडी ने बोरघरिया के परिसरों पर तलाशी में मोबाइल फोन सहित कई डिजिटल उपकरण जब्त किए; उन्हें गिरफ्तारी के दिन से छह दिन की ईडी हिरासत में भेजा गया।
समयरेखा
- सीजीपीएससी राज्य सेवा परीक्षा 2020 और 2021परीक्षाओं में कथित अनियमितता, प्रश्नपत्र लीक और चयन में हेराफेरी के आरोप।
- फरवरी 2024रायपुर की ईओडब्ल्यू/एसीबी ने बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार व हेराफेरी की एफआईआर दर्ज की; इसी आधार पर ईडी जांच शुरू।
- इसके बादमामला सीबीआई ने अपने हाथ में लिया, तत्कालीन सीजीपीएससी अध्यक्ष तमन सिंह सोनवानी व अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर आरोपपत्र दाखिल किए।
- 01.09.2026 (ईडी बयान में उल्लिखित तिथि)ईडी ने पीएमएलए के तहत बोरघरिया के परिसरों पर तलाशी ली, मोबाइल फोन सहित डिजिटल उपकरण जब्त किए।
- 11 सितंबरबोरघरिया की पीएमएलए के तहत गिरफ्तारी; छह दिन की ईडी हिरासत।
- सोमवारईडी ने प्रेस बयान जारी कर वित्तीय लेनदेन और डिजिटल सबूतों का ब्योरा दिया।
किसका दाँव
- प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) — पीएमएलए के तहत अपराध की आय (प्रोसीड्स ऑफ क्राइम) के अर्जन, कब्जे, छिपाव और उपयोग को साबित करना।
- चेतन बोरघरिया — पूर्व ओएसडी व अपर कलेक्टर; गिरफ्तार, ईडी हिरासत में, खाते में 66.64 लाख रुपये के नकद जमा पर सवाल।
- भूपेश बघेल का पूर्व मुख्यमंत्री कार्यालय — आरोपियों ने कथित रूप से सीएम कार्यालय में पहुंच और प्रभाव का हवाला देकर अभ्यर्थियों को आश्वासन दिए।
- सीजीपीएससी और तत्कालीन अध्यक्ष तमन सिंह सोनवानी — आयोग की विश्वसनीयता; सीबीआई एफआईआर और आरोपपत्र का सामना।
- सीबीआई और ईओडब्ल्यू/एसीबी, रायपुर — मूल भ्रष्टाचार मामले की जांच और अभियोजन।
- सीजीपीएससी अभ्यर्थी — पेपर लीक व चयन में हेराफेरी से योग्य उम्मीदवारों के अवसर प्रभावित।
- उत्कर्ष, अनिल व डॉ. विकाश चंद्राकर — अभ्यर्थियों से 3 करोड़ रुपये से अधिक वसूलने के आरोपी; उत्कर्ष, बघेल के तत्कालीन निजी सहायक केके चंद्रवंशी के भांजे/भतीजे।
क्यों अहम है
राज्य लोक सेवा आयोग की परीक्षा में प्रश्नपत्र लीक और पैसे के बदले चयन के आरोप सार्वजनिक भर्ती की निष्पक्षता और संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सीधा प्रहार हैं। मामले में मुख्यमंत्री कार्यालय के तत्कालीन ओएसडी और निजी सहायक के रिश्तेदार का नाम आना राजनीतिक-प्रशासनिक गठजोड़ के सवाल खड़ा करता है। साथ ही यह दिखाता है कि भ्रष्टाचार के मामलों में अब ईओडब्ल्यू, सीबीआई और ईडी की समांतर जांच व पीएमएलए का प्रयोग बढ़ता जा रहा है।
UPSC नज़रिया
प्रीलिम्स संकेत
- पीएमएलए (धन शोधन निवारण अधिनियम), 2002 के तहत ईडी गिरफ्तारी और 'प्रोसीड्स ऑफ क्राइम' की जांच करता है।
- सीजीपीएससी = छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग; विवादित परीक्षाएं – राज्य सेवा परीक्षा 2020 व 2021।
- मूल एफआईआर फरवरी 2024 में ईओडब्ल्यू/एसीबी, रायपुर द्वारा; बाद में मामला सीबीआई को।
- सीबीआई ने तत्कालीन सीजीपीएससी अध्यक्ष तमन सिंह सोनवानी व अन्य के खिलाफ एफआईआर व आरोपपत्र दाखिल किए।
- ईडी के अनुसार बोरघरिया के खाते में 170 लेनदेन से 66.64 लाख रुपये नकद जमा; आरोपियों ने 3 करोड़ रुपये से अधिक वसूले।
- फर्म M/s Figurecave E-Com (OPC) Private Limited पर धन की लेयरिंग व आवाजाही का संदेह।
मेन्स दृष्टिकोण
सीजीपीएससी मामला दर्शाता है कि राज्य स्तर की भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी अक्सर अकेले किसी अधिकारी की चूक नहीं, बल्कि आयोग के नेतृत्व, बिचौलियों और सत्ता-केंद्र से जुड़े पदाधिकारियों के कथित नेटवर्क का परिणाम होती है — ईडी के अनुसार यहां तीन व्यक्तियों ने 'सीएम कार्यालय में पहुंच' का हवाला देकर अभ्यर्थियों से 3 करोड़ रुपये से अधिक वसूले, प्रश्नपत्र मैरिज पैलेस में बांटे गए और रिजॉर्ट में कोचिंग दी गई। इसके प्रभाव तीन स्तरों पर हैं: योग्य अभ्यर्थियों के साथ अन्याय, लोक सेवा आयोग जैसी संवैधानिक संस्था की वैधता का क्षरण, और भ्रष्टाचार की आय के शोधन के लिए कंपनियों व बैंक खातों के दुरुपयोग (यहां 170 लेनदेन से 66.64 लाख रुपये और एक ओपीसी कंपनी के जरिये लेयरिंग का संदेह)। आगे का रास्ता जांच एजेंसियों — ईओडब्ल्यू/एसीबी, सीबीआई और ईडी — के बीच स्पष्ट समन्वय व समयबद्ध अभियोजन, आयोग की परीक्षा-प्रक्रिया में प्रश्नपत्र सुरक्षा एवं डिजिटल ऑडिट ट्रेल, तथा आयोग के नियुक्ति-चयन में पारदर्शिता पर आधारित होना चाहिए; साथ ही आरोपी को कानून के तहत निर्दोषता की धारणा और उचित प्रक्रिया का संरक्षण भी आवश्यक है, क्योंकि आरोप अभी अदालत में सिद्ध होने बाकी हैं।
मुख्य शब्द
- पीएमएलए, 2002
- धन शोधन निवारण अधिनियम, जिसके तहत ईडी अपराध की आय से जुड़े मामलों में तलाशी, बयान दर्ज करने और गिरफ्तारी की कार्रवाई करता है।
- प्रोसीड्स ऑफ क्राइम
- अपराध की आय — अपराध से अर्जित संपत्ति/धन, जिसका अर्जन, कब्जा, छिपाव या उपयोग मनी लॉन्ड्रिंग माना जाता है।
- ओएसडी (ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी)
- मुख्यमंत्री या मंत्री कार्यालय में विशेष कार्य के लिए तैनात अधिकारी; बोरघरिया बघेल के कार्यालय में तत्कालीन ओएसडी थे।
- ईओडब्ल्यू/एसीबी
- आर्थिक अपराध शाखा/भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो; रायपुर इकाई ने फरवरी 2024 में मूल एफआईआर दर्ज की।
- लेयरिंग
- मनी लॉन्ड्रिंग का चरण जिसमें कई लेनदेन/कंपनियों के जरिये धन के स्रोत को छिपाया जाता है; यहां एक ओपीसी कंपनी पर संदेह।
- सीजीपीएससी राज्य सेवा परीक्षा
- छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग द्वारा राज्य प्रशासनिक सेवाओं में भर्ती हेतु आयोजित प्रारंभिक व मुख्य परीक्षा।
अभ्यास प्रश्न
- सार्वजनिक भर्ती परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक और चयन में हेराफेरी संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता को कैसे प्रभावित करती है? सीजीपीएससी मामले के आलोक में परीक्षा-सुरक्षा सुधार सुझाइए।
- पीएमएलए, 2002 के तहत ईडी की शक्तियों और 'प्रोसीड्स ऑफ क्राइम' की अवधारणा की व्याख्या कीजिए। भ्रष्टाचार के मामलों में ईओडब्ल्यू, सीबीआई और ईडी की समांतर जांच से उठने वाले मुद्दों पर चर्चा कीजिए।
- मुख्यमंत्री कार्यालय जैसे सत्ता-केंद्रों में तैनात अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए कौन-से संस्थागत उपाय आवश्यक हैं? उदाहरण सहित परीक्षण कीजिए।
सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।
