राष्ट्रीय पीर पंजाल

पीर पंजाल में आतंकियों की आवाजाही रोकने की नई रणनीति

जम्मू और कश्मीर को बांटने वाले पीर पंजाल पर्वतों में सुरक्षा बल अस्थायी ऑपरेशनल बेस (टीओबी) की रणनीति अपना रहे हैं। अधिकारियों के मुताबिक सेना, पैरा बल, जम्मू-कश्मीर पुलिस और अर्धसैनिक बल 10 दिन से कई महीनों तक पहाड़ों में तैनात रहते हैं और गुफाओं या गुज्जर ढोक का उपयोग करते हैं। एक अधिकारी ने कहा कि एक समय में 40-50 ऐसे बेस सक्रिय रहते हैं। चार महीने के अभियान के बाद 4 सितंबर को अशदर गली में लश्कर-ए-तैयबा का आतंकी मारा गया; इस माह तीन आतंकी मारे गए।

स्रोत

Indian Express — India · मूल ख़बर पढ़ें ↗

#pir panjal#security forces#counter-terrorism#jammu kashmir#let

डेस्क जाँच · स्रोत से तुलना की

डेस्क ने क्या जाँचा (5)
  • An LeT terrorist was killed in Ashdar Gali in the upper Pir Panjal on September 4 after a four-month joint forces effort. — Date and detail appear in source; operation described by security officials, not independently documented.
  • Security forces use Temporary Operational Bases (TOBs), with around 40-50 operational at a given time. — Figure attributed to an unnamed officer quoted in the source.
  • J&K Police created new SOG units named 'Snow Leopards' and 'Markhor' after the Pahalgam attack. — Attributed to officials in the source.
  • The Pahalgam attack killed 25 tourists and one local. — Figure stated in source; source says attack occurred in April 'last year' while also calling it the only major attack in the last 1.5 years — internal timeline is inconsistent, so avoid repeating the year.
  • Three terrorists were killed this month — two in Udhampur forests and one in Ashdar Gali. — Stated in source and attributed to officials.

विश्लेषकों की राय राय

AI राजनीतिक विश्लेषक

पीर पंजाल में अस्थायी ऑपरेशनल बेस (टीओबी) की रणनीति केवल सामरिक बदलाव नहीं, इसका राजनीतिक संदेश भी साफ है। पहलगाम हमले के बाद सुरक्षा चूक पर आलोचना झेल रही केंद्र सरकार के लिए अधिकारियों का यह दावा—कि हाल की सभी मुठभेड़ें "हमारी पहल" पर हुईं—एक अनुकूल कथा गढ़ता है। साथ ही जम्मू-कश्मीर पुलिस की विशेष इकाइयों का बढ़ता कद, निर्वाचित राज्य सरकार और केंद्र के बीच सुरक्षा अधिकारों की अनसुलझी बहस में नया आयाम जोड़ता है।

  • एक दिखने वाली "नई रणनीति" केंद्र और सुरक्षा तंत्र को पहलगाम हमले के बाद बने राजनीतिक दबाव का जवाब देने का आधार देती है।
  • एक आतंकवादी को मार गिराने में चार महीने लगे—यह तथ्य विपक्ष को यह कहने का मौका भी देता है कि नतीजे धीमे और महंगे हैं।
  • पुंछ-राजौरी और चिनाब घाटी में लंबे समय तक तैनाती स्थानीय आबादी के साथ संबंधों पर टिकी है, जिसमें गुज्जर ढोकों वाले इलाके भी शामिल हैं—यह राजनीतिक रूप से संवेदनशील ज़मीन है।
  • 'स्नो लेपर्ड्स' और 'मारखोर' जैसी इकाइयों से जम्मू-कश्मीर पुलिस की मज़बूती क्षेत्रीय दलों को राज्य तंत्र की भूमिका पर तर्क देती है।
  • 2012 में आतंकमुक्त घोषित इलाके में फिर महीनों की तैनाती की ज़रूरत, पिछले दशक के "सामान्य स्थिति" के दावों पर सवाल खड़े करती है।

किस पर नज़र रखें — पीर पंजाल और चिनाब घाटी को संभागीय दर्जा देने जैसे प्रस्तावों की चर्चा के बीच देखना होगा कि दल इन सुरक्षा नतीजों को राजनीतिक तर्क में कैसे बदलते हैं।

यह खबर यह साबित नहीं करती कि हमलों में कमी केवल टीओबी रणनीति से आई—आकलन मुख्यतः अनाम अधिकारियों के हैं, स्वतंत्र पुष्टि नहीं है और किसी दल की प्रतिक्रिया इसमें दर्ज नहीं है।

गहराई से

शोध सारांश · 8 तथ्य · 7 तारीख़ें · परीक्षा के लिए

सार

पृष्ठभूमि

पीर पंजाल पर्वत श्रृंखला जम्मू और कश्मीर संभागों को विभाजित करती है — दक्षिण में पुंछ-राजौरी (जो नियंत्रण रेखा से जुड़े हैं) और उत्तर में कश्मीर घाटी। घने जंगलों और दुर्गम इलाके के कारण यह क्षेत्र लंबे समय से आतंकियों को बढ़त देता रहा है, क्योंकि विशाल क्षेत्र, खतरनाक पहाड़ और रसद संबंधी दिक्कतों के चलते स्थायी चौकियां बनाना व्यावहारिक नहीं था। अब सुरक्षा बलों ने 'अस्थायी ऑपरेशनल बेस' (टीओबी) की रणनीति अपनाई है, जिसके तहत सेना, पैरा कमांडो, राष्ट्रीय राइफल्स, जम्मू-कश्मीर पुलिस और अर्धसैनिक बल महीनों तक पहाड़ों में मौजूद रहते हैं। 4 सितंबर को अशदर गली में लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी का मारा जाना इसी बदली रणनीति का उदाहरण बताया गया है।

मुख्य तथ्य

  • 4 सितंबर को कश्मीर को जम्मू के पुंछ से जोड़ने वाले पीर पंजाल के ऊपरी इलाके अशदर गली में लश्कर-ए-तैयबा का एक आतंकी मारा गया; यह चार महीने के संयुक्त अभियान का नतीजा था।
  • अधिकारियों के अनुसार एक समय में क्षेत्र में लगभग 40-50 अस्थायी ऑपरेशनल बेस (टीओबी) सक्रिय रहते हैं; संख्या खुफिया सूचनाओं के आधार पर बदलती है।
  • टीओबी में बल 10 दिन से कई महीनों तक तैनात रहते हैं; प्राकृतिक आश्रय जैसे गुज्जर ढोक या गुफा उपलब्ध हो तो उसका उपयोग करते हैं, वरना बिना आश्रय घने जंगल से काम करते हैं।
  • इस महीने कुल तीन आतंकी मारे गए — दो उधमपुर के जंगलों में (16 सितंबर को दो जैश-ए-मोहम्मद आतंकी) और तीसरा अशदर गली में पाकिस्तान स्थित लश्कर आतंकी।
  • पहाड़ों को तीन ज़ोन में बांटा गया है: ऊपरी इलाकों में सेना के पैराट्रूपर्स, मध्य में राष्ट्रीय राइफल्स या जेके पुलिस-अर्धसैनिक संयुक्त टीमें, और निचले इलाकों में जेके पुलिस व अर्धसैनिक बल।
  • अप्रैल में पहलगाम हमले में 25 पर्यटक और एक स्थानीय मारे गए; इसके बाद जेके पुलिस ने एसओजी के भीतर 'स्नो लेपर्ड्स' और 'मारखोर' नामक नई विशिष्ट इकाइयां बनाईं।
  • 2003 में भारतीय सेना ने स्थानीय लोगों की मदद से 'ऑपरेशन सर्प विनाश' चलाया था; 2012 में यह क्षेत्र आतंकवाद-मुक्त घोषित किया गया था।
  • फरवरी में किश्तवाड़ के चातरू में दो साल की तलाश के बाद जैश कमांडर सैफुल्लाह समेत तीन आतंकी मारे गए; उसके फोन से गैस स्टोव और सर्दियों के खाद्य भंडार वाला भूमिगत ठिकाना पकड़ा गया।

समयरेखा

  1. 2003भारतीय सेना ने स्थानीय लोगों की मदद से पीर पंजाल में आतंकियों के सफाए के लिए 'ऑपरेशन सर्प विनाश' चलाया।
  2. 2012पुंछ-राजौरी क्षेत्र को आतंकवाद-मुक्त घोषित किया गया।
  3. 2020 के बादआतंकियों ने स्थानीय लोगों की मदद के बिना नए ठिकाने बनाने शुरू किए, जिससे उनका पता लगाना कठिन हो गया।
  4. फरवरीकिश्तवाड़ के चातरू में दो साल की तलाश के बाद जैश कमांडर सैफुल्लाह समेत तीन आतंकी मारे गए।
  5. अप्रैल (पिछले साल)पहलगाम में पर्यटकों पर हमला, 25 पर्यटक और एक स्थानीय मारे गए; इसके बाद एसओजी में नई विशिष्ट इकाइयां बनीं।
  6. 4 सितंबरचार महीने के अभियान के बाद अशदर गली में लश्कर-ए-तैयबा का आतंकी मारा गया।
  7. 16 सितंबरउधमपुर में चल रहे आतंकवाद-रोधी अभियान में दो जैश-ए-मोहम्मद आतंकी मारे गए।

किसका दाँव

  • भारतीय सेना और उसके पैरा कमांडो — ऊंचाई वाले इलाकों में तैनाती, ड्रोन से निगरानी और उच्च-ऊंचाई युद्ध की विशेष क्षमता का उपयोग।
  • जम्मू-कश्मीर पुलिस (एसओजी सहित) — मध्य व निचले इलाकों में तैनाती; 'स्नो लेपर्ड्स' व 'मारखोर' इकाइयों के जरिए कठिन भूभाग में क्षमता बढ़ाना।
  • राष्ट्रीय राइफल्स और अर्धसैनिक बल — मध्य और निचली रेंज में आतंकवाद-रोधी अभियानों की जिम्मेदारी।
  • स्थानीय आबादी और गुज्जर समुदाय — गुज्जर ढोक अस्थायी बेस के रूप में उपयोग; अभियान क्षेत्र में रहने के कारण सीधा असर।
  • लश्कर-ए-तैयबा व जैश-ए-मोहम्मद — कश्मीर और जम्मू के बीच ऊंचाई वाले पारगमन मार्गों का लाभ खत्म होना; ठिकाने और कमांडर खोना।
  • पर्यटक और पर्यटन क्षेत्र — पहलगाम हमले में 25 पर्यटकों की मौत के बाद सुरक्षा और विश्वास बहाली का प्रश्न।

क्यों अहम है

पीर पंजाल कश्मीर और जम्मू के बीच आतंकियों की आवाजाही का गलियारा रहा है, जहां बल एक तरफ दबाव बनाते तो आतंकी दूसरी तरफ खिसक जाते थे। अस्थायी ऑपरेशनल बेस इस 'भूगोल के लाभ' को छीनने की कोशिश है, और अधिकारियों के दावे के अनुसार पिछले डेढ़ साल में इस क्षेत्र में केवल एक बड़ा हमला (पहलगाम) हुआ। यह दिखाता है कि आतंकवाद-रोधी रणनीति स्थायी चौकियों की जगह गतिशील, खुफिया-आधारित तैनाती की ओर बढ़ रही है।

UPSC नज़रिया

प्रीलिम्स संकेत

  • पीर पंजाल श्रेणी जम्मू और कश्मीर संभागों को विभाजित करती है; दक्षिण में पुंछ-राजौरी, उत्तर में अनंतनाग से बडगाम तक कश्मीर घाटी।
  • चिनाब घाटी में डोडा, किश्तवाड़ और रामबन जिले शामिल हैं; कश्मीर में यह श्रेणी गुलमर्ग व बारामुला तक फैली है।
  • ऑपरेशन सर्प विनाश — 2003, भारतीय सेना; क्षेत्र 2012 में आतंकवाद-मुक्त घोषित।
  • 'स्नो लेपर्ड्स' (सर्दियों में उच्च-ऊंचाई युद्ध) और 'मारखोर' (घने जंगल में मुठभेड़) — जेके पुलिस के एसओजी की नई इकाइयां।
  • एक समय में 40-50 अस्थायी ऑपरेशनल बेस (टीओबी) सक्रिय; तैनाती 10 दिन से कई महीनों तक।
  • अशदर गली दूधपथरी घास के मैदान के ऊपर स्थित है; वहां का टीओबी कई महीनों तक बनाए रखा गया।

मेन्स दृष्टिकोण

पीर पंजाल में आतंकवाद-रोधी अभियानों की मुख्य चुनौती भूगोल रही है: विशाल क्षेत्र, घने जंगल, खतरनाक ढलानें और रसद की कठिनाइयों ने स्थायी चौकियों को तकनीकी रूप से अव्यावहारिक बना दिया, जिससे आतंकियों को स्थिर ऊंचाई वाली स्थिति, एम4 कार्बाइन जैसे अत्याधुनिक हथियार और जम्मू-कश्मीर के बीच आवाजाही का लाभ मिला। अस्थायी ऑपरेशनल बेस (टीओबी) की रणनीति खुफिया सूचनाओं और जमीनी आकलन के आधार पर बिखरी हुई, लंबी अवधि की उपस्थिति बनाकर इस लाभ को समाप्त करने का प्रयास है, जिसे तीन-ज़ोन तैनाती (पैराट्रूपर्स, राष्ट्रीय राइफल्स, पुलिस-अर्धसैनिक), ड्रोन निगरानी, नाइट विजन उपकरण और एसओजी की 'स्नो लेपर्ड्स'/'मारखोर' इकाइयों से मजबूती मिली है। किंतु चुनौतियां बनी हुई हैं — 2020 से आतंकी स्थानीय मदद के बिना ठिनाने बना रहे हैं (सैफुल्लाह के फोन से मिले साक्ष्य), ओवरग्राउंड वर्कर नेटवर्क बदल रहे हैं, और पहलगाम हमला दिखाता है कि जोखिम खत्म नहीं हुआ। आगे का रास्ता स्रोत के अनुसार निरंतर दबाव, खुफिया-आधारित लचीली तैनाती, विशेष प्रशिक्षण और उपकरणों में समानता बनाए रखने में है; व्यापक नीतिगत निष्कर्ष स्रोत में नहीं दिए गए हैं।

मुख्य शब्द

अस्थायी ऑपरेशनल बेस (टीओबी)
पहाड़ों में अस्थायी व्यवस्था जिसके जरिए बल 10 दिन से कई महीनों तक टिककर स्थायी जैसी उपस्थिति बनाए रखते हैं।
गुज्जर ढोक
पहाड़ों में गुज्जर समुदाय की झोपड़ी, जिसे बल प्राकृतिक आश्रय मिलने पर अस्थायी बेस के रूप में उपयोग करते हैं।
ऑपरेशन सर्प विनाश
2003 में भारतीय सेना द्वारा स्थानीय लोगों की मदद से पीर पंजाल में आतंकियों के सफाए हेतु चलाया गया अभियान।
राष्ट्रीय राइफल्स
सेना का आतंकवाद-रोधी बल, जिसे पीर पंजाल की मध्य रेंज में तैनात किया जाता है।
स्नो लेपर्ड्स और मारखोर
जेके पुलिस के एसओजी की नई विशिष्ट इकाइयां — क्रमशः सर्दियों में उच्च-ऊंचाई युद्ध और घने जंगल की मुठभेड़ के लिए प्रशिक्षित।
ओवरग्राउंड वर्कर (ओजीडब्ल्यू)
आतंकियों को जमीनी सहायता देने वाला स्थानीय नेटवर्क; अधिकारियों के मुताबिक पुराने ओजीडब्ल्यू अब नहीं हैं।

अभ्यास प्रश्न

  1. पीर पंजाल की भौगोलिक विशेषताएं आतंकवाद-रोधी अभियानों को कैसे प्रभावित करती हैं? अस्थायी ऑपरेशनल बेस की रणनीति इन चुनौतियों का समाधान किस हद तक करती है?
  2. स्थायी चौकियों की तुलना में खुफिया-आधारित गतिशील तैनाती के लाभ और सीमाएं क्या हैं? जम्मू-कश्मीर के उदाहरण से समझाइए।
  3. स्थानीय सहयोग के बिना बनाए जा रहे आतंकी ठिकाने और बदलते ओवरग्राउंड वर्कर नेटवर्क सुरक्षा बलों की खुफिया रणनीति के लिए क्या निहितार्थ रखते हैं?

सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।

अगली ख़बरनिठारी मामले में बरी कोली हरिद्वार में मृत मिले →
← सभी ख़बरें