भारत की आतंकवाद रोधी रणनीति संयम से कार्रवाई की ओर बढ़ी: विश्लेषक

11 सितंबर 2001 के हमलों के बाद के 25 वर्षों में भारत की आतंकवाद रोधी नीति निष्क्रिय रुख से सक्रिय रणनीति की ओर बढ़ी है, ऐसा सेवानिवृत्त कर्नल राजीव अग्रवाल ने लिखा है। उनके अनुसार 1993 के मुंबई धमाकों और 26/11 हमलों के बाद कोई सैन्य कार्रवाई नहीं हुई, जबकि 2016 के उड़ी हमले के बाद सर्जिकल स्ट्राइक, पुलवामा के बाद 2019 में बालाकोट हमले और अप्रैल 2025 के पहलगाम हमले के बाद ऑपरेशन सिंदूर हुआ। भारत ने 23 फरवरी 2026 को 'प्रहार' नीति जारी की।

स्रोत

The Hindu — National · मूल ख़बर पढ़ें ↗

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डेस्क जाँच · कुछ दावे ध्यान से पढ़ें

डेस्क ने क्या जाँचा (5)
  • India unveiled 'PRAHAAR', its first comprehensive National Counter-Terrorism Policy and Strategy, on February 23, 2026. — Date and name appear in the source; no official document or agency cited by the author.
  • Operation Sindoor was launched on May 6-7, 2025 after the April 22, 2025 Pahalgam attack, destroying LeT and JeM leadership and headquarters within 96 hours. — Stated by the author without independent attribution; outcome claims are assessments, not sourced figures.
  • The March 1993 Mumbai serial blasts killed over 250 people in 13 coordinated blasts. — Figure appears in the source; no agency attribution given.
  • India released Ahmed Omar Sheikh and Masood Azhar in exchange for more than 160 hostages after the IC-814 hijack of December 24, 1999. — Detail appears in the source as historical record; no source cited.
  • Modi at the SCO Summit in Bishkek on September 1 said terrorism can never be a strategic asset for anyone. — Direct quote attributed to the Prime Minister in the source; year of the summit not specified.

विश्लेषकों की राय राय

AI రాజకీయ విశ్లేషకులు · తెలుగు

ఇది ముఖ్యంగా ఒక వ్యూహ విశ్లేషణ అయినా, దాని రాజకీయ సందేశం స్పష్టం: ఉగ్రవాదంపై 'నిష్క్రియ' గతం వర్సెస్ 'క్రియాశీల' వర్తమానం అనే విభజన రేఖను 2014 అధికార మార్పు వద్ద గీయడం — ఇది ఇప్పటికే భారత ఎన్నికల చర్చలో బలంగా ఉన్న కథనం. అధికార పక్షానికి ఇది జాతీయ భద్రతను తన అత్యంత బలమైన ఆస్తిగా నిలబెట్టుకునే అవకాశం; ప్రతిపక్షానికి 1993, 26/11 తర్వాత స్పందన లేదన్న ఆరోపణను ఎదుర్కోవాల్సిన భారం. 'ప్రహార్' విధానం ఆవిష్కరణ కూడా ఉగ్రవాద వ్యతిరేక చర్యలను వ్యక్తిగత నిర్ణయాల నుంచి సంస్థాగత చట్రంలోకి మార్చి, భవిష్యత్ ప్రభుత్వాలకు కూడా కట్టుబాటు సృష్టించే ప్రయత్నంగా చూడవచ్చు.

  • '2014 తర్వాత మార్పు' అనే చట్రం విశ్లేషణాత్మకమైనదే అయినా రాజకీయంగా తటస్థం కాదు — ఇది ఉగ్రవాద ప్రతిస్పందనను ప్రభుత్వాల మధ్య పోలికగా మార్చి, ఎన్నికల ప్రచార భాషకు దగ్గరగా ఉంటుంది.
  • ఉరి, బాలాకోట్, ఆపరేషన్ సిందూర్ అనే వరుసను చూపడం ద్వారా ప్రతి ఉగ్ర దాడి తర్వాత సైనిక ప్రతిస్పందన కోసం ప్రజల అంచనాలు పెరుగుతాయి — ఇది ప్రభుత్వానికి రాజకీయ లాభమే అయినా, స్పందించే ఒత్తిడిని కూడా పెంచుతుంది.
  • 'ఉగ్రదాడిని యుద్ధ చర్యగా పరిగణిస్తాం', 'అణు బెదిరింపు అడ్డుకాదు' అనే ప్రకటిత వైఖరులు దేశీయంగా దృఢత్వ సందేశాన్ని ఇస్తాయి, కానీ భవిష్యత్తులో ప్రభుత్వ ఎంపికల పరిధిని కుదిస్తాయి.
  • ప్రతిపక్షం సాధారణంగా రెండు మార్గాలలో ఒకటి ఎంచుకుంటుంది — భద్రతా చర్యలకు మద్దతు ఇస్తూ నిఘా వైఫల్యాలు, జవాబుదారీతనం గురించి ప్రశ్నించడం; లేదా చారిత్రక పోలికను వ్యతిరేకించడం — రెండూ రాజకీయంగా ప్రమాదకరమైనవే.
  • SCO, బ్రిక్స్ వేదికలపై ఉగ్రవాదాన్ని ప్రస్తావించడం అంతర్జాతీయ దౌత్య విజయంగా దేశీయంగా ప్రదర్శించుకోగల అంశం — విదేశాంగ విధానం, ఎన్నికల కథనం కలిసిపోయే చోటు ఇది.

किस पर नज़र रखें — 'ప్రహార్' విధానం అమలుకు కేంద్ర–రాష్ట్ర సమన్వయం ఎలా సాగుతుందో, డీ-రాడికలైజేషన్ వంటి అంశాలపై ప్రతిపక్ష పాలిత రాష్ట్రాలు ఎలా స్పందిస్తాయో గమనించాలి — ఇది కేంద్ర–రాష్ట్ర రాజకీయ ఘర్షణకు కొత్త వేదిక కావచ్చు.

ఇది ఒక విశ్రాంత అధికారి వ్యక్తిగత విశ్లేషణ; సైనిక చర్యల వాస్తవ నిరోధక ప్రభావం, 'ప్రహార్' విధాన వివరాలు, లేదా ఈ వైఖరికి ఓటర్ల స్పందన గురించి ఈ కథనం ఎటువంటి ఆధారాలను నిర్ధారించడం లేదు.

गहराई से

शोध सारांश · 8 तथ्य · 10 तारीख़ें · परीक्षा के लिए

सार

पृष्ठभूमि

11 सितंबर 2001 को अमेरिका में अल-कायदा के हमले के बाद दुनिया भर में आतंकवाद से लड़ने का तरीका बदल गया। सेवानिवृत्त कर्नल राजीव अग्रवाल के इस विश्लेषण में बताया गया है कि पिछले 25 वर्षों में भारत की आतंकवाद रोधी नीति केवल पाकिस्तान को चेतावनी देने वाली निष्क्रिय नीति से हटकर सीमा पार सैन्य कार्रवाई करने वाली सक्रिय रणनीति बन गई है। 1990 के दशक की शुरुआत में कश्मीर में सीमा पार आतंकवाद की शुरुआत से लेकर 2016 की सर्जिकल स्ट्राइक, 2019 के बालाकोट हमले और 2025 के ऑपरेशन सिंदूर तक यह बदलाव दिखता है। 23 फरवरी 2026 को भारत ने अपनी पहली व्यापक राष्ट्रीय आतंकवाद रोधी नीति एवं रणनीति 'प्रहार' जारी की।

मुख्य तथ्य

  • मार्च 1993 के मुंबई सिलसिलेवार धमाकों में 13 समन्वित विस्फोटों में 250 से अधिक लोग मारे गए; फरवरी 1998 में कोयंबटूर में भी एक साथ धमाके हुए।
  • 24 दिसंबर 1999 को इंडियन एयरलाइंस की उड़ान IC-814 के अपहरण में भारत ने 160 से अधिक बंधकों के बदले अहमद उमर शेख और मसूद अजहर को रिहा किया।
  • 13 दिसंबर 2001 को जैश-ए-मोहम्मद द्वारा संसद पर हमले के बाद 'ऑपरेशन पराक्रम' के तहत बड़ी सैन्य तैनाती हुई, पर लगभग दो साल के गतिरोध के बाद बिना सीधी कार्रवाई सेना हटा ली गई।
  • 18 सितंबर 2016 को उड़ी सेना शिविर पर JeM हमले के बाद 28-29 सितंबर को पहली सीमा पार सर्जिकल स्ट्राइक की गई।
  • 14 फरवरी 2019 के पुलवामा में CRPF काफिले पर हमले के बाद भारतीय वायुसेना ने बालाकोट में JeM शिविर पर हमला किया — पहली बार IAF ने पाकिस्तानी वायुक्षेत्र में प्रवेश किया।
  • 22 अप्रैल 2025 के पहलगाम हमले के बाद 6-7 मई को ऑपरेशन सिंदूर शुरू हुआ; 96 घंटों में LeT और JeM के नेतृत्व व मुख्यालय नष्ट किए गए।
  • 23 फरवरी 2026 को 'प्रहार' नीति जारी हुई, जो 'whole-of-government' और 'whole-of-society' दृष्टिकोण पर आधारित है।
  • 21 मई 1991 को श्रीपेरुमबुदूर (तमिलनाडु) में LTTE ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या की; 7 सितंबर 2011 को दिल्ली उच्च न्यायालय के बाहर ब्रीफकेस बम से 15 लोग मारे गए।

समयरेखा

  1. 21 मई 1991श्रीपेरुमबुदूर में LTTE द्वारा पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या।
  2. मार्च 1993मुंबई में 13 सिलसिलेवार धमाके, 250 से अधिक मौतें।
  3. फरवरी 1998कोयंबटूर शहर में एक साथ सिलसिलेवार धमाके।
  4. 24 दिसंबर 1999IC-814 का अपहरण; मसूद अजहर व अहमद उमर शेख की रिहाई।
  5. 22 दिसंबर 2000लश्कर-ए-तैयबा ने लाल किले के सेना गैरिसन पर हमला किया, तीन सैनिक शहीद।
  6. 11 सितंबर 2001न्यूयॉर्क के ट्विन टावर्स पर अल-कायदा का हमला।
  7. 13 दिसंबर 2001संसद पर JeM का हमला; इसके बाद ऑपरेशन पराक्रम।
  8. अक्टूबर 2005दिल्ली के सरोजिनी नगर व पहाड़गंज सहित बाजारों में धमाकों में 60 से अधिक मौतें।
  9. सितंबर 2008कनॉट प्लेस, ग्रेटर कैलाश, करोल बाग सहित दिल्ली के व्यापारिक इलाकों में धमाके।
  10. नवंबर 200826/11 मुंबई आतंकी हमले; विश्व भारत के साथ खड़ा हुआ, पर सैन्य कार्रवाई नहीं हुई।

किसका दाँव

  • भारत सरकार व सशस्त्र बल — सीमा पार आतंकवाद का जवाब देने की नीति, सर्जिकल स्ट्राइक, बालाकोट और ऑपरेशन सिंदूर जैसे अभियानों का संचालन।
  • पाकिस्तान — भारत की घोषणा के अनुसार भविष्य के किसी आतंकी हमले की सीधी और भारी कीमत चुकानी पड़ेगी; परमाणु ब्लैकमेल अब बाधा नहीं।
  • जैश-ए-मोहम्मद व लश्कर-ए-तैयबा — संसद, उड़ी, पुलवामा, लाल किला हमलों के जिम्मेदार; ऑपरेशन सिंदूर में उनके नेतृत्व व मुख्यालय नष्ट।
  • जम्मू-कश्मीर की जनता व सुरक्षा एजेंसियां — आतंकी घटनाएं घटी हैं, पर LoC पार से घुसपैठ का खतरा बना हुआ है।
  • अंतरराष्ट्रीय समुदाय (SCO, BRICS) — बिश्केक SCO शिखर और 18वें ब्रिक्स शिखर की दिल्ली घोषणा में पहलगाम पर अलग पैरा — आतंकवाद पर बढ़ती वैश्विक सहमति।
  • युवा व संभावित कट्टरपंथ के शिकार — व्यापक डी-रैडिकलाइजेशन कार्यक्रम का लक्ष्य उन्हें मुख्यधारा से जोड़ना।

क्यों अहम है

यह विश्लेषण दिखाता है कि भारत की सुरक्षा नीति में सीमा पार आतंकवाद को अब 'युद्ध की कार्रवाई' माना जाता है, जिससे भारत-पाकिस्तान संबंधों में जवाबी कार्रवाई की सीमा (थ्रेशहोल्ड) बदल गई है। 'प्रहार' नीति पहली बार आतंकवाद रोधी प्रयासों को एक राष्ट्रीय ढांचे में जोड़ती है, जिसमें रोकथाम, कट्टरपंथ-विरोध और समन्वय शामिल है। साथ ही यह चेतावनी भी है कि आतंकवाद ड्रोन, साइबर और AI जैसे नए रूपों तथा लोन-वुल्फ हमलों में बदल चुका है।

UPSC नज़रिया

प्रीलिम्स संकेत

  • 'प्रहार' — 23 फरवरी 2026 को जारी भारत की पहली व्यापक राष्ट्रीय आतंकवाद रोधी नीति व रणनीति।
  • ऑपरेशन पराक्रम — 13 दिसंबर 2001 के संसद हमले के बाद बड़ी सैन्य तैनाती, लगभग दो वर्ष का गतिरोध।
  • बालाकोट (2019) — पहली बार भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तानी वायुक्षेत्र में घुसकर JeM शिविर पर हमला किया।
  • ऑपरेशन सिंदूर — 6-7 मई 2025, पहलगाम (22 अप्रैल 2025) हमले के जवाब में; 96 घंटे तक चला।
  • IC-814 अपहरण (24 दिसंबर 1999) — 160 से अधिक बंधकों के बदले मसूद अजहर व अहमद उमर शेख रिहा।
  • 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन (नई दिल्ली) की दिल्ली घोषणा में पहलगाम हमले पर अलग पैराग्राफ।

मेन्स दृष्टिकोण

1990 के दशक में कश्मीर में सीमा पार आतंकवाद की शुरुआत के समय भारत के पास स्पष्ट आतंकवाद रोधी रणनीति नहीं थी; 1993 के मुंबई धमाके, 1998 के कोयंबटूर धमाके और आंतरिक सुरक्षा तंत्र की खामियां इसका प्रमाण थीं। IC-814 अपहरण में आतंकियों की रिहाई, संसद हमले के बाद ऑपनरेशन पराक्रम का बिना दंड समाप्त होना और 26/11 के बाद सैन्य कार्रवाई का अभाव — इन सबने परमाणु-छाया में संयम की नीति को उजागर किया। मई 2014 के बाद रणनीति बदली: उड़ी के बाद सर्जिकल स्ट्राइक, पुलवामा के बाद बालाकोट और पहलगाम के बाद ऑपरेशन सिंदूर के साथ भारत ने तीन घोषणाएं कीं — संयम का युग समाप्त, सीमा पार आतंकवाद 'युद्ध की कार्रवाई', और परमाणु ब्लैकमेल अस्वीकार्य। आगे का रास्ता लेखक के अनुसार चार-स्तरीय है: देश और कश्मीर में बचे आतंकी नेटवर्क का सफाया; LoC पार लॉन्च पैड सहित उभरते खतरों पर पूर्व-निरोधक (pre-emptive) सैन्य कार्रवाई; देशव्यापी गहन डी-रैडिकलाइजेशन कार्यक्रम; और मित्र देशों के सहयोग से आतंकी वित्तपोषण पर रोक। साथ ही SCO और ब्रिक्स जैसे मंचों पर दोहरे मानदंडों को उजागर करते हुए वैश्विक सहमति बनाना अहम है, क्योंकि आतंकवाद छोटे स्वायत्त समूहों, लोन-वुल्फ हमलों तथा ड्रोन, साइबर और AI जैसे उपकरणों में बदल चुका है।

मुख्य शब्द

प्रहार (PRAHAAR)
23 फरवरी 2026 को जारी भारत की पहली व्यापक राष्ट्रीय आतंकवाद रोधी नीति व रणनीति, जो सरकार व समाज के समग्र दृष्टिकोण पर आधारित है।
ऑपरेशन सिंदूर
पहलगाम हमले के जवाब में 6-7 मई 2025 को शुरू अभियान, जिसमें 96 घंटों में LeT व JeM के मुख्यालय और पाकिस्तानी सैन्य ठिकाने नष्ट किए गए।
ऑपरेशन पराक्रम
2001 के संसद हमले के बाद भारत की बड़े पैमाने पर सैन्य तैनाती, जो लगभग दो वर्ष बाद सीधी कार्रवाई के बिना समाप्त हुई।
'एक्ट ऑफ वॉर' घोषणा
ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत का रुख कि पाकिस्तान से उत्पन्न कोई भी सीमा पार आतंकी कृत्य युद्ध की कार्रवाई माना जाएगा।
लोन-वुल्फ हमला
किसी बड़े संगठन के सीधे निर्देश के बिना अकेले व्यक्ति द्वारा किया गया आतंकी हमला, जो अब वैश्विक रूप से आम होता जा रहा है।
HUJI
हरकत-उल-जिहाद इस्लामी — अल-कायदा से जुड़ा, मुख्यतः पाकिस्तान आधारित संगठन, जिसने 2011 के दिल्ली हाईकोर्ट धमाके की जिम्मेदारी ली।

अभ्यास प्रश्न

  1. 9/11 के बाद के 25 वर्षों में भारत की आतंकवाद रोधी रणनीति निष्क्रिय से सक्रिय कैसे हुई? प्रमुख घटनाओं के आधार पर विश्लेषण करें।
  2. 'प्रहार' नीति के 'whole-of-government' और 'whole-of-society' दृष्टिकोण से भारत की आंतरिक सुरक्षा को क्या लाभ हो सकता है? चर्चा करें।
  3. सीमा पार आतंकवाद को 'युद्ध की कार्रवाई' मानने की नीति के सामरिक और कूटनीतिक निहितार्थ क्या हैं?

सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।

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