18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के साथ भारत की अध्यक्षता संपन्न
नई दिल्ली में 12–13 सितंबर को हुए 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के साथ भारत की चौथी अध्यक्षता संपन्न हुई, इससे पहले 2012, 2016 और 2021 में अध्यक्षता रही। नई दिल्ली घोषणापत्र में 30 भारतीय शहरों में 400 से अधिक बैठकों का स्वागत किया गया। भारत मंडपम में ब्रिक्स भारत इनोवेट्स प्रदर्शनी में 37 डीप-टेक स्टार्टअप प्रस्तुत हुए। स्वास्थ्य, कर सहयोग, स्थानीय मुद्रा व्यापार, क्वांटम और एआई पर चर्चा हुई। 2027 की अध्यक्षता चीन करेगा।
स्रोत
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डेस्क ने क्या जाँचा (5)
- The 18th BRICS Summit was held in New Delhi on 12-13 September, ending India's fourth chairship after 2012, 2016 and 2021. — Stated in the source article; no external document cited beyond the New Delhi Declaration.
- The Declaration welcomed more than 400 meetings and engagements across 30 Indian cities. — Figure appears in source, attributed to the New Delhi Declaration.
- The BRICS Bharat Innovates Exposition at Bharat Mandapam on 11-12 September showcased 37 Indian deep-tech startups, drawn from 120 ventures presented in Nice, France, in June 2026. — Figures appear in source; the June 2026 date implies a future/forward-dated timeline an editor should check.
- China takes over the BRICS chairship for 2027 and will host the 19th Summit. — Stated in source without separate attribution.
- NIMHANS is to coordinate a BRICS mental health Training Hub Network and Network of Centres of Excellence. — Attributed to the New Delhi Declaration in the source.
विश्लेषकों की राय राय
ब्रिक्स अध्यक्षता भारत सरकार के लिए कूटनीतिक ही नहीं, राजनीतिक मंच भी रही — 30 शहरों में 400 से अधिक बैठकें विदेश नीति को दिल्ली के कमरों से निकालकर राज्यों और मतदाताओं तक दिखाई देने वाली बनाती हैं। सरकार का सबसे मजबूत दावा नतीजा नहीं, प्रक्रिया है: एक बड़े और विविध ब्रिक्स को नई दिल्ली घोषणापत्र पर सहमति तक लाना। लेकिन स्थानीय मुद्रा में लेनदेन और नए निवेश मंच पर घोषणापत्र की 'चरणबद्ध, सहमति-आधारित' भाषा सोच-समझकर बरती गई राजनीतिक सावधानी है। 2027 में अध्यक्षता चीन के पास जाने के साथ असली परीक्षा यही है कि यह एजेंडा कितना टिकता है।
- बहुपक्षीय अध्यक्षता को देशव्यापी आयोजन में बदलना सरकार को विदेश नीति की उपलब्धि को घरेलू राजनीतिक पूंजी में बदलने का अवसर देता है।
- 37 डीप-टेक स्टार्टअप्स की प्रदर्शनी और क्वांटम-एआई पर जोर 'तकनीकी शक्ति भारत' के कथानक से मेल खाता है, पर सौदे होने तक यह प्रतीकात्मक ही है।
- सहमति और राष्ट्रीय परिस्थितियों पर बार-बार जोर नई दिल्ली को इस आरोप से बचाता है कि ब्रिक्स डॉलर-विरोधी गुट बना रहा है।
- संयुक्त राष्ट्र सुधार और विकासशील देशों के बड़े प्रतिनिधित्व की मांग दोहराना विस्तारित समूह में भारत के नेतृत्व दावे की रक्षा का तरीका है।
- अगले वर्ष चीनी अध्यक्षता में प्राथमिकताएं बदल सकती हैं, इसलिए भारतीय पहलों को जीवित रखने के लिए लगातार तकनीकी अनुसरण जरूरी होगा।
किस पर नज़र रखें — देखना होगा कि 19वें सम्मेलन तक भारत की पहलें — इन्क्यूबेटर नेटवर्क, स्टार्टअप इनोवेशन फंड, ग्रेन एक्सचेंज, गिफ्ट सिटी रिस्क लैब — कितनी आगे बढ़ पाती हैं।
यह खबर न कोई मापने योग्य आर्थिक नतीजा या सौदा साबित करती है, न घरेलू चुनावी असर; साथ ही यह एक केंद्रीय मंत्री द्वारा लिखे प्रचार-संबंधी लेख पर आधारित है, स्वतंत्र रिपोर्टिंग पर नहीं।
गहराई से
शोध सारांश · 8 तथ्य · 6 तारीख़ें · परीक्षा के लिएसार
पृष्ठभूमि
नई दिल्ली में 12–13 सितंबर को आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के साथ भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता (चेयरशिप) का वर्ष समाप्त हुआ। यह भारत की चौथी अध्यक्षता थी — इससे पहले 2012, 2016 और 2021 में भारत ने समूह की अध्यक्षता की थी। यह वर्ष ब्रिक्स सहयोग के दो दशक पूरे होने के साथ भी जुड़ा, जब समूह की सदस्यता पहले से बहुत बड़ी और भौगोलिक पहुँच व्यापक हो चुकी है। सम्मेलन में नई दिल्ली घोषणापत्र स्वीकार किया गया और 2027 की अध्यक्षता चीन को सौंपी गई, जो 19वें शिखर सम्मेलन की मेज़बानी करेगा। (स्रोत लेख केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार द्वारा लिखा गया है।)
मुख्य तथ्य
- 18वाँ ब्रिक्स शिखर सम्मेलन नई दिल्ली में 12–13 सितंबर को हुआ; यह भारत की चौथी अध्यक्षता थी (पहले 2012, 2016, 2021)।
- नई दिल्ली घोषणापत्र ने 30 भारतीय शहरों में 400 से अधिक बैठकों व कार्यक्रमों का स्वागत किया, जिनमें मंत्री, सांसद, अधिकारी, विशेषज्ञ और व्यवसायी शामिल रहे।
- भारत मंडपम में 11–12 सितंबर को ब्रिक्स भारत इनोवेट्स प्रदर्शनी हुई, जिसमें 37 भारतीय डीप-टेक स्टार्टअप व उद्यम प्रदर्शित हुए।
- ये 37 उद्यम जून 2026 में नीस (फ्रांस) में हुई पहली भारत इनोवेट्स प्रदर्शनी के 120 उद्यमों से चुने गए थे।
- घोषणापत्र ने ब्रिक्स इन्क्यूबेटर नेटवर्क, ब्रिक्स साइंस एंड रिसर्च रिपॉजिटरी, क्वांटम तकनीक पर कार्य तथा ब्रिक्स स्टार्टअप इनोवेशन फंड पर आगे विचार का उल्लेख किया।
- वित्त पक्ष पर 'स्ट्रैटेजी फॉर ब्रिक्स इकोनॉमिक पार्टनरशिप 2030' की प्रगति की सराहना; भुगतान/संदेश प्रणालियों की इंटरऑपरेबिलिटी और स्थानीय मुद्रा में व्यापार निपटान पर तकनीकी कार्य जारी।
- भारत ने गिफ्ट सिटी के इंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विसेज सेंटर में बीमा-पुनर्बीमा क्षमता निर्माण हेतु 'ब्रिक्स रिस्क लैब' का प्रस्ताव रखा।
- स्वास्थ्य में 'ब्रिक्स मिशन फॉर हेल्दी लाइफस्टाइल' और 2026–2029 का संयुक्त रोडमैप; मानसिक स्वास्थ्य के लिए ट्रेनिंग हब नेटवर्क व सेंटर्स ऑफ एक्सीलेंस नेटवर्क, जिसमें NIMHANS समन्वयक केंद्र।
समयरेखा
- 2012, 2016, 2021भारत की पहली तीन ब्रिक्स अध्यक्षताएँ।
- जून 2026नीस, फ्रांस में पहली 'भारत इनोवेट्स' प्रदर्शनी, जिसमें 120 उद्यम प्रस्तुत हुए।
- 11–12 सितंबरभारत मंडपम में ब्रिक्स भारत इनोवेट्स प्रदर्शनी, ब्रिक्स बिजनेस फोरम के साथ; 37 डीप-टेक स्टार्टअप प्रदर्शित।
- 12–13 सितंबरनई दिल्ली में 18वाँ ब्रिक्स शिखर सम्मेलन; 13 सितंबर को समाप्त और नई दिल्ली घोषणापत्र स्वीकृत।
- फरवरी (आगामी)भारत एआई इम्पैक्ट समिट की मेज़बानी करेगा, जिसे घोषणापत्र ने मान्यता दी।
- 2027चीन ब्रिक्स अध्यक्षता संभालेगा और 19वें शिखर सम्मेलन की मेज़बानी करेगा।
किसका दाँव
- भारत सरकार / प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी — 'जन-केंद्रित और मानवता-प्रथम' दृष्टिकोण के साथ अध्यक्षता; विस्तारित व विविध ब्रिक्स को घोषणापत्र पर सहमति तक लाना।
- ब्रिक्स सदस्य देश — अलग-अलग आर्थिक संरचनाएँ व प्राथमिकताएँ; भुगतान, कराधान, स्वास्थ्य व तकनीक में व्यावहारिक सहयोग के क्षेत्र खोजना।
- चीन — 2027 की अध्यक्षता और 19वें शिखर सम्मेलन की मेज़बानी; भारत की पहलों को आगे बढ़ाने की ज़िम्मेदारी।
- भारतीय डीप-टेक स्टार्टअप व उद्यमी — 37 उद्यमों को ब्रिक्स देशों के निवेशकों व संस्थानों तक पहुँच, तकनीकी साझेदारी और बाज़ार अवसर।
- शिक्षा मंत्रालय एवं विदेश मंत्रालय — भारत इनोवेट्स प्रदर्शनी के आयोजक; कूटनीति और वाणिज्यिक अवसरों को जोड़ना।
- NIMHANS — ब्रिक्स मानसिक स्वास्थ्य सेंटर्स ऑफ एक्सीलेंस नेटवर्क का समन्वयक केंद्र।
- ग्लोबल साउथ के भागीदार देश — आउटरीच/ब्रिक्स प्लस संवाद तथा संयुक्त राष्ट्र सुधार व विकासशील देशों के अधिक प्रतिनिधित्व की मांग।
- युवा, महिलाएँ, शोधकर्ता व नागरिक समाज — संसदीय, व्यापार, अकादमिक, युवा, महिला-व्यापार, थिंक-टैंक और नागरिक समाज मंचों के ज़रिए भागीदारी; कोच्चि में महिला मंत्रिस्तरीय बैठक।
क्यों अहम है
विस्तारित ब्रिक्स में सदस्यों के हित हर मुद्दे पर एक समान नहीं हैं, इसलिए एक बड़े और विविध समूह को नई दिल्ली घोषणापत्र पर सहमति तक लाना उल्लेखनीय कूटनीतिक उपलब्धि मानी गई है। अध्यक्षता ने कूटनीति को विदेश मंत्रालयों से आगे बढ़ाकर 30 शहरों के विश्वविद्यालयों, शोध संस्थानों और कंपनियों तक पहुँचाया, तथा स्थानीय मुद्रा व्यापार, कर सहयोग, क्वांटम-एआई और स्वास्थ्य जैसे व्यावहारिक क्षेत्रों पर काम शुरू किया। असली कसौटी यह होगी कि सत्ता-हस्तांतरण के बाद इनमें से कितनी पहलें अगले शिखर सम्मेलन तक जीवित रहती हैं।
UPSC नज़रिया
प्रीलिम्स संकेत
- 18वाँ ब्रिक्स शिखर सम्मेलन: नई दिल्ली, 12–13 सितंबर; भारत की चौथी अध्यक्षता (2012, 2016, 2021 के बाद)।
- अध्यक्षता का औपचारिक विषय: लचीलापन (resilience), नवाचार, सहयोग और स्थिरता।
- नई दिल्ली घोषणापत्र: 30 शहरों में 400+ बैठकें; संप्रभु समानता, पारस्परिक सम्मान और सहमति की पुष्टि।
- ब्रिक्स भारत इनोवेट्स प्रदर्शनी: भारत मंडपम, 11–12 सितंबर; 37 डीप-टेक स्टार्टअप; आयोजक शिक्षा मंत्रालय व विदेश मंत्रालय।
- ब्रिक्स रिस्क लैब का प्रस्ताव गिफ्ट सिटी के IFSC में; मानसिक स्वास्थ्य नेटवर्क का समन्वयक NIMHANS।
- 2027 की ब्रिक्स अध्यक्षता और 19वाँ शिखर सम्मेलन: चीन।
मेन्स दृष्टिकोण
भारत की चौथी ब्रिक्स अध्यक्षता का महत्व शिखर सम्मेलन की घोषणाओं से अधिक उसकी प्रक्रिया में था: 30 शहरों में 400 से अधिक बैठकों, संसदीय, व्यापार, अकादमिक, युवा, महिला और नागरिक समाज मंचों तथा भारत मंडपम की डीप-टेक प्रदर्शनी के माध्यम से कूटनीति को विदेश मंत्रालयों के दायरे से बाहर ले जाना। इसका कारण यह मान्यता है कि शोधकर्ता, उद्यमी और युवा पेशेवर ही देशों के बीच टिकाऊ संबंध बनाते हैं। एजेंडा तकनीक और वित्त पर केंद्रित रहा — ब्रिक्स इन्क्यूबेटर नेटवर्क, साइंस एंड रिसर्च रिपॉजिटरी, क्वांटम तकनीक, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, सबमरीन केबल सहित लचीली कनेक्टिविटी, सुरक्षित एआई, 'इकोनॉमिक पार्टनरशिप 2030' रणनीति, भुगतान प्रणालियों की इंटरऑपरेबिलिटी, स्थानीय मुद्रा में व्यापार निपटान, चरणबद्ध न्यू इन्वेस्टमेंट प्लेटफॉर्म, ब्रिक्स टैक्स सपोर्ट नेटवर्क तथा संभावित ब्रिक्स ग्रेन एक्सचेंज। निहितार्थ दोहरा है: विस्तारित ब्रिक्स में सहमति, परामर्श और 'राष्ट्रीय परिस्थितियों' का बार-बार उल्लेख गति को धीमा कर सकता है, पर यही समूह की डिज़ाइन-विशेषता भी है क्योंकि इसका मूल्य एकरूपता में नहीं, व्यावहारिक सहयोग के क्षेत्र खोजने में है। आगे का रास्ता तकनीकी कार्य और समन्वय की निरंतरता है — स्वास्थ्य रोडमैप (2026–2029), गिफ्ट सिटी का रिस्क लैब, स्टार्टअप-निवेशक संपर्क को वास्तविक सौदों में बदलना — और यह देखना कि चीन की 2027 अध्यक्षता में कितनी पहलें जीवित रहती हैं, साथ ही संयुक्त राष्ट्र सुधार व ग्लोबल साउथ के प्रतिनिधित्व की मांग को आगे बढ़ाना।
मुख्य शब्द
- नई दिल्ली घोषणापत्र
- 18वें शिखर सम्मेलन का परिणामी दस्तावेज़, जिसने संप्रभु समानता, पारस्परिक सम्मान, सहमति और अधिक प्रतिनिधिक बहुपक्षीय व्यवस्था की पुष्टि की।
- ब्रिक्स भारत इनोवेट्स प्रदर्शनी
- भारत मंडपम में 11–12 सितंबर को ब्रिक्स बिजनेस फोरम के साथ आयोजित प्रदर्शनी, जिसमें 37 भारतीय डीप-टेक उद्यम निवेशकों के सामने प्रस्तुत हुए।
- स्ट्रैटेजी फॉर ब्रिक्स इकोनॉमिक पार्टनरशिप 2030
- ब्रिक्स की भावी क्षेत्रवार आर्थिक कार्यक्रमों की रूपरेखा, जिसकी प्रगति की घोषणापत्र में सराहना की गई।
- ब्रिक्स रिस्क लैब
- भारत का प्रस्ताव — गिफ्ट सिटी के IFSC में बीमा और पुनर्बीमा क्षमता निर्माण के लिए मंच।
- ब्रिक्स टैक्स सपोर्ट नेटवर्क व टैक्स क्रॉस-लर्निंग लैब
- अंतरराष्ट्रीय कराधान, ट्रांसफर प्राइसिंग और राजस्व आँकड़ों पर ज्ञान-साझाकरण के ब्रिक्स मंच।
- आउटरीच / ब्रिक्स प्लस संवाद
- भागीदार देशों को जोड़ने वाला संवाद, जिसका उद्देश्य ग्लोबल साउथ की प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाना है।
अभ्यास प्रश्न
- विस्तारित ब्रिक्स में सहमति-आधारित कार्यप्रणाली इसकी ताकत है या सीमा? भारत की 18वें शिखर सम्मेलन की अध्यक्षता के अनुभव के आधार पर परीक्षण कीजिए।
- स्थानीय मुद्राओं में व्यापार निपटान और भुगतान प्रणालियों की इंटरऑपरेबिलिटी पर ब्रिक्स का कार्य विकासशील देशों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है? नई दिल्ली घोषणापत्र के संदर्भ में चर्चा कीजिए।
- 'अध्यक्षताएँ उनके लिए याद नहीं रहतीं जो घोषित होता है, बल्कि उसके लिए जो हस्तांतरण के बाद बचता है।' भारत की ब्रिक्स पहलों की निरंतरता के संदर्भ में इस कथन का मूल्यांकन कीजिए।
सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।
