एर्दोगान ने सुरक्षा परिषद का वीटो खत्म करने की मांग की

तुर्किये के राष्ट्रपति रेचप तईप एर्दोगान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्यों का वीटो अधिकार समाप्त करने की मांग की है। न्यूयॉर्क में पत्रकारों से उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था अन्यायपूर्ण है और वैश्विक स्थिरता व शांति में बाधा है। उन्होंने स्थायी सदस्यता खत्म कर महासभा द्वारा सभी सदस्यों के चुनाव का सुझाव दिया। वीटो हटाने के लिए चार्टर संशोधन, महासभा की दो-तिहाई मंजूरी और सभी पांच स्थायी सदस्यों सहित दो-तिहाई देशों की पुष्टि जरूरी है। रूस ने वीटो बनाए रखने की बात कही।

स्रोत

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डेस्क ने क्या जाँचा (5)
  • Erdogan called for abolishing the UNSC veto and permanent membership, seeking a UN model covering all members. — Directly quoted from his remarks to journalists in New York and a September 22 Bloomberg article, as reported in the source.
  • Ending the veto requires a UN Charter amendment under Article 108: two-thirds of the UNGA plus ratification by two-thirds of members including all five permanent members. — Stated in the source with reference to Article 108; procedural detail appears internally consistent.
  • The France-Mexico initiative now has 128 supporting states, one short of the number needed to pass a UNGA resolution. — Figure attributed in the source to the French government; 21 recent backers cited, including the UK.
  • Russia/USSR has cast 163 of 331 vetoes; the US 95, about 28 percent; France and the UK 50 combined, none since 1989. — Figures appear in the source without an named external statistical source.
  • Russia says permanent members should keep the veto but supports expanding permanent membership. — Attributed to Russia in the source without a named official or document.

विश्लेषकों की राय राय

AI रणनीतिक मामलों के विश्लेषक

प्रक्रियात्मक रूप से एर्दोगान की मांग लगभग निश्चित रूप से आगे नहीं बढ़ेगी — संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 108 के तहत वीटो समाप्त करने के लिए उन्हीं पाँच देशों की सहमति चाहिए जिन्हें यह अधिकार छोड़ना होगा। लेकिन यह संस्थागत खाका कम और सामरिक दांव अधिक है — गाजा और यूक्रेन पर परिषद के गतिरोध का उपयोग करके तुर्किये खुद को व्यापक सदस्यता और ग्लोबल साउथ की आवाज़ के रूप में स्थापित कर रहा है। रूस की प्रतिक्रिया ने दरार साफ कर दी: वीटो बना रहे, पर स्थायी सदस्यता बढ़े।

  • असली अड़चन संशोधन की शर्त है — महासभा में दो-तिहाई समर्थन और पाँचों स्थायी सदस्यों सहित दो-तिहाई देशों का अनुमोदन।
  • एर्दोगान परिषद की साख को हुए नुकसान का लाभ उठा रहे हैं: तीन वर्षों में इजरायल-फिलिस्तीन प्रस्तावों पर अमेरिका के सात वीटो और 2022 से यूक्रेन पर रूस के तीन वीटो।
  • वीटो समाप्ति की तुलना में परिषद का विस्तार अधिक व्यावहारिक रास्ता है; पाँचों स्थायी सदस्यों ने किसी रूप में विस्तार का समर्थन जताया है, पर कौन शामिल हो और नए सदस्यों को वीटो मिले या नहीं, इस पर सहमति नहीं।
  • सामूहिक अत्याचारों के मामलों में स्वेच्छा से वीटो रोकने की फ्रांस-मेक्सिको पहल को 128 देशों का समर्थन मिल चुका है, लेकिन स्वैच्छिक और गैर-बाध्यकारी होने से उसका असर सीमित रहेगा।
  • स्थायी सदस्य भी एकमत नहीं हैं: फ्रांस और ब्रिटेन ने 1989 के बाद वीटो का प्रयोग नहीं किया और संयम का समर्थन करते हैं, जबकि रूस, अमेरिका और चीन इस विशेषाधिकार की मजबूती से रक्षा करते रहे हैं।

किस पर नज़र रखें — देखना यह है कि फ्रांस-मेक्सिको पहल महासभा में प्रस्ताव पारित कराने की सीमा पार करती है या नहीं, और अफ्रीकी देशों के लिए नई सीटों की चर्चा आगे बढ़ती है या नहीं — असली हलचल के यही संकेतक हैं।

यह रिपोर्ट यह स्पष्ट नहीं करती कि एर्दोगान के प्रस्ताव को औपचारिक रूप से कितने देशों का समर्थन है, तुर्किये इसे संयुक्त राष्ट्र में किस रूप में आगे बढ़ाएगा, या अमेरिका और चीन ने इस ताज़ा आह्वान पर कोई प्रतिक्रिया दी है या नहीं।

गहराई से

शोध सारांश · 8 तथ्य · 8 तारीख़ें · परीक्षा के लिए

सार

पृष्ठभूमि

तुर्किये के राष्ट्रपति रेचप तईप एर्दोगान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के पांच स्थायी सदस्यों (अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, रूस, चीन) के वीटो अधिकार को समाप्त करने की मांग की है। UNSC में 5 स्थायी और 10 अस्थायी (आवर्ती) सदस्य होते हैं, और गाजा में इजराइल के युद्ध, यूक्रेन में रूस के युद्ध तथा होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे मुद्दों पर परिषद गतिरोध में फंसी है। एर्दोगान चाहते हैं कि स्थायी सदस्यता ही खत्म हो और महासभा निर्धारित कार्यकाल के लिए सभी सदस्यों का चुनाव करे। वीटो खत्म करने के लिए संयुक्त राष्ट्र चार्टर में संशोधन आवश्यक है, जिसमें पांचों स्थायी सदस्यों की सहमति भी शामिल है।

मुख्य तथ्य

  • एर्दोगान ने न्यूयॉर्क में गुरुवार को पत्रकारों से कहा: "वीटो व्यवस्था समाप्त की जाए... केवल पांच सदस्यों की रक्षा करने वाले संयुक्त राष्ट्र मॉडल से सभी सदस्यों को समाहित करने वाली व्यवस्था की ओर बढ़ें।"
  • UNSC में 5 स्थायी सदस्य (अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, रूस, चीन) और 10 आवर्ती अस्थायी सदस्य हैं; 15 में से 14 के पक्ष में वोट देने पर भी एक वीटो प्रस्ताव गिरा सकता है।
  • संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 108 के तहत संशोधन के लिए महासभा के दो-तिहाई की मंजूरी और सभी पांच स्थायी सदस्यों सहित दो-तिहाई सदस्य देशों की पुष्टि आवश्यक है।
  • 22 सितंबर को ब्लूमबर्ग में लिखे लेख में एर्दोगान ने कहा कि आठ दशक पहले बनी UNSC संरचना आज की दुनिया की जरूरतों को पूरा नहीं करती।
  • अमेरिका ने पिछले तीन वर्षों में इजराइल-फिलिस्तीन संघर्ष से जुड़े सात प्रस्तावों पर वीटो किया, जिनमें गाजा में युद्धविराम की मांग वाले पांच प्रस्ताव शामिल हैं।
  • ऐतिहासिक रूप से रूस/सोवियत संघ ने सर्वाधिक वीटो किए हैं — कुल 331 में से 163; अमेरिका दूसरे स्थान पर 95 वीटो (लगभग 28%) के साथ।
  • 2022 में यूक्रेन पर पूर्ण आक्रमण के बाद रूस ने उस संघर्ष से जुड़े तीन प्रस्तावों पर वीटो किया है।
  • 2015 के फ्रांस-मेक्सिको प्रस्ताव (सामूहिक अत्याचारों पर वीटो रोकने का स्वैच्छिक समझौता) का समर्थन अब 128 देशों तक पहुंचा — फ्रांसीसी सरकार के अनुसार महासभा में प्रस्ताव पारित करने के लिए आवश्यक संख्या से केवल एक कम; पिछले चार माह में ब्रिटेन सहित 21 देश जुड़े।

समयरेखा

  1. 1947फ्रांस ने इंडोनेशियाई संघर्ष से जुड़े प्रस्ताव पर अकेले वीटो किया (उसके दो एकल वीटो में से एक)।
  2. 1989इसके बाद से फ्रांस और ब्रिटेन ने कोई वीटो नहीं किया; दोनों के कुल मिलाकर 50 वीटो रहे हैं।
  3. 1991 से पहलेसोवियत संघ के रूप में रूस ने सर्वाधिक वीटो किए; कुल 331 में से 163।
  4. 2015फ्रांस और मेक्सिको ने नरसंहार व मानवता विरुद्ध अपराध जैसे सामूहिक अत्याचारों के प्रस्तावों पर P5 के वीटो स्थगन का प्रस्ताव रखा।
  5. 2022रूस के यूक्रेन पर पूर्ण आक्रमण के बाद रूस ने तीन संबंधित प्रस्तावों पर वीटो किया; लॉफेयर लेख में विश्लेषकों ने ऐसी पहलों को केवल 'आकांक्षात्मक' बताया।
  6. पिछले तीन वर्षअमेरिका ने इजराइल-फिलिस्तीन से जुड़े सात प्रस्तावों पर वीटो किया, जिनमें गाजा युद्धविराम के पांच प्रस्ताव।
  7. 22 सितंबरएर्दोगान का ब्लूमबर्ग में लेख; महासभा संबोधन में भी उन्होंने यह पहल आगे बढ़ाई।
  8. गुरुवार (हाल में)न्यूयॉर्क में पत्रकारों से एर्दोगान ने वीटो व्यवस्था समाप्त करने की मांग दोहराई; रूस ने वीटो बनाए रखने के पक्ष में प्रतिक्रिया दी।

किसका दाँव

  • तुर्किये और राष्ट्रपति एर्दोगान — UNSC के पूर्ण पुनर्गठन — स्थायी सदस्यता व वीटो की समाप्ति और महासभा द्वारा सभी सदस्यों के चुनाव — की मांग के अग्रणी पैरोकार।
  • P5 (अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, रूस, चीन) — वीटो विशेषाधिकार दांव पर; अमेरिका और चीन पहले भी वीटो का पुरजोर बचाव कर चुके हैं, चार्टर संशोधन के लिए इनकी सहमति अनिवार्य।
  • रूस — कहता है कि स्थायी सदस्य वीटो बनाए रखें, पर स्थायी सदस्यों की संख्या बढ़ाने का समर्थन करता है।
  • फ्रांस और मेक्सिको — 2015 की स्वैच्छिक पहल के प्रवर्तक कि सामूहिक अत्याचारों के मामलों में P5 वीटो न करें; 128 देशों का समर्थन।
  • संयुक्त राष्ट्र महासभा (190 से अधिक देश) — एर्दोगान के प्रस्ताव में महासभा को अधिक शक्तियां और UNSC सदस्यों के चुनाव का अधिकार मिलेगा।
  • भारत, ब्राजील, जर्मनी, जापान व अफ्रीकी देश — ब्रिटेन और फ्रांस ने इनके लिए स्थायी सीटों का समर्थन किया है; अफ्रीका के किसी देश के पास स्थायी सदस्यता नहीं।
  • गाजा व यूक्रेन के प्रभावित नागरिक — वीटो के कारण युद्धविराम व ठोस प्रस्ताव अटकने से सीधा असर।

क्यों अहम है

वीटो के कारण UNSC गाजा और यूक्रेन जैसे सबसे गंभीर संकटों पर निष्क्रिय पड़ी है, जिससे संयुक्त राष्ट्र की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं। वीटो या स्थायी सदस्यता में कोई भी बदलाव चार्टर संशोधन और खुद P5 की सहमति पर निर्भर है — यही सुधार की सबसे बड़ी संरचनात्मक बाधा है। भारत के लिए यह बहस सीधे प्रासंगिक है, क्योंकि ब्रिटेन और फ्रांस भारत के लिए स्थायी सीट का समर्थन करते हैं, पर विस्तार के लिए भी सभी P5 का समर्थन जरूरी है।

UPSC नज़रिया

प्रीलिम्स संकेत

  • UNSC: 5 स्थायी सदस्य (अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, रूस, चीन) + 10 अस्थायी आवर्ती सदस्य = कुल 15।
  • संयुक्त राष्ट्र चार्टर का अनुच्छेद 108: संशोधन हेतु महासभा के दो-तिहाई की मंजूरी + सभी P5 सहित दो-तिहाई सदस्यों की पुष्टि।
  • सर्वाधिक वीटो: रूस/सोवियत संघ 163 (कुल 331 में से), अमेरिका 95 (~28%); फ्रांस व ब्रिटेन मिलकर 50, 1989 के बाद कोई वीटो नहीं।
  • फ्रांस-मेक्सिको पहल (2015): सामूहिक अत्याचार संबंधी प्रस्तावों पर P5 वीटो का स्वैच्छिक स्थगन; समर्थक देश 128।
  • एर्दोगान का प्रस्ताव: स्थायी सदस्यता समाप्त, वीटो समाप्त, महासभा निर्धारित कार्यकाल के लिए सभी UNSC सदस्यों का चुनाव करे।
  • ब्रिटेन व फ्रांस ने ब्राजील, जर्मनी, भारत, जापान और अफ्रीकी देशों के लिए स्थायी सीटों का समर्थन किया है।

मेन्स दृष्टिकोण

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की वैधता का संकट इसकी 1945 की शक्ति-संरचना से उपजा है: 15 सदस्यीय परिषद में केवल पांच देशों के पास वीटो है, जिससे 190 से अधिक देशों की इच्छा एक राजधानी के निर्णय से रुक सकती है — जैसा गाजा युद्धविराम के पांच प्रस्तावों पर अमेरिकी वीटो और यूक्रेन पर रूसी वीटो से दिखा। एर्दोगान का सुझाव कि स्थायी सदस्यता व वीटो समाप्त हो और महासभा सभी सदस्यों को निर्वाचित करे, प्रतिनिधित्व व जवाबदेही बढ़ाएगा, लेकिन अनुच्छेद 108 के तहत चार्टर संशोधन के लिए स्वयं P5 की सहमति अनिवार्य है — अर्थात सुधार की चाबी उन्हीं के हाथ में है जिनकी शक्ति घटेगी। रूस ने वीटो बनाए रखने की बात कही है, अमेरिका व चीन पहले भी बचाव कर चुके हैं; अफ्रीका, भारत, ब्राजील, जर्मनी, जापान के लिए सीटों वाला विस्तार अधिक संभाव्य है, पर उसमें भी नए सदस्यों को वीटो देने का प्रश्न अनसुलझा है। इसलिए व्यावहारिक रास्ता क्रमिक है: फ्रांस-मेक्सिको जैसी स्वैच्छिक आचार-संहिता (128 समर्थक) से नैतिक दबाव, महासभा की भूमिका का विस्तार और सीमित विस्तार पर सहमति — यद्यपि विश्लेषकों के अनुसार गैर-बाध्यकारी होने से ये सिद्धांत "आकांक्षात्मक" बने रहते हैं, और जैसा प्रोफेसर इब्राहिम गंबारी ने कहा, "यथास्थिति को बदलाव में वास्तविक रुचि नहीं है"।

मुख्य शब्द

वीटो
UNSC के पांच स्थायी सदस्यों को प्राप्त विशेषाधिकार जिससे वे किसी भी सारवान (substantive) प्रस्ताव को अकेले रोक सकते हैं।
P5
सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्य — अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, रूस और चीन।
अनुच्छेद 108
संयुक्त राष्ट्र चार्टर का प्रावधान: संशोधन के लिए महासभा के दो-तिहाई की स्वीकृति और सभी P5 सहित दो-तिहाई सदस्यों की पुष्टि।
फ्रांस-मेक्सिको पहल
2015 का प्रस्ताव कि नरसंहार व मानवता विरुद्ध अपराध जैसे सामूहिक अत्याचारों के प्रस्तावों पर P5 स्वैच्छिक रूप से वीटो न करें।
संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA)
सभी सदस्य देशों का मंच; एर्दोगान के अनुसार इसे अधिक शक्तियां और UNSC सदस्यों के चुनाव का अधिकार मिलना चाहिए।
अस्थायी (आवर्ती) सदस्य
UNSC के 10 गैर-स्थायी सदस्य, जिनके पास वीटो अधिकार नहीं होता।

अभ्यास प्रश्न

  1. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में वीटो अधिकार की समाप्ति की मांग के पक्ष और विपक्ष के तर्कों का परीक्षण कीजिए। अनुच्छेद 108 इस सुधार में किस प्रकार बाधा है?
  2. क्या स्वैच्छिक व गैर-बाध्यकारी पहलें (जैसे फ्रांस-मेक्सिको प्रस्ताव) सामूहिक अत्याचारों पर UNSC के गतिरोध का व्यावहारिक समाधान हो सकती हैं? समीक्षा कीजिए।
  3. सुरक्षा परिषद के विस्तार बनाम वीटो-उन्मूलन — भारत के हितों के संदर्भ में दोनों विकल्पों की तुलना कीजिए।

सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।

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