बड़ी घटनाओं के दौरान एक्स पर अप्रत्यक्ष आक्रामकता अधिक: अध्ययन
एक्स पर भारतीय बातचीत में अप्रत्यक्ष आक्रामकता बड़ी सामाजिक, वित्तीय, खेल और राजनीतिक घटनाओं के दौरान सबसे अधिक होती है, यह गोवा इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट और गोवा बिजनेस स्कूल के शोधकर्ताओं ने पाया। मशीन लर्निंग मॉडल से उन्होंने 1.31 लाख से अधिक पोस्ट का विश्लेषण कर उन्हें प्रत्यक्ष आक्रामक, अप्रत्यक्ष आक्रामक और गैर-आक्रामक श्रेणियों में बांटा। प्रत्यक्ष आक्रामकता 11 से 37 प्रतिशत रही, जो भारत की टी20 विश्व कप हार के दौरान 37 प्रतिशत पर सर्वाधिक थी। अध्ययन 'एडवांसेस इन कंज्यूमर रिसर्च' जर्नल में प्रकाशित हुआ।
स्रोत
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डेस्क जाँच · स्रोत से तुलना की
डेस्क ने क्या जाँचा (5)
- Researchers analysed more than 1.31 lakh X posts using machine learning models. — Figure appears in source; attributed to a study by Goa Institute of Management and Goa Business School.
- Overtly aggressive responses ranged from 11 per cent to 37 per cent across four domains. — Figures appear in source and are internally consistent with the stated T20 World Cup peak.
- Open aggression was highest at 37 per cent during India's T20 World Cup loss. — Attributed directly to Professor Lakshmi Vishnu Murthy Tunuguntla speaking to PTI.
- Findings were published in the journal 'Advances in Consumer Research'. — Stated in source; journal name given but no issue or date details, unverifiable here.
- Aggression detection differs from sentiment analysis as hostile language may not match negative sentiment. — Attributed to Associate Professor P Balasubramanyam of GIM.
विश्लेषकों की राय राय
इस अध्ययन की सबसे दिलचस्प बात यह नहीं है कि टी20 हार या राजनीतिक घटनाओं के समय भारतीय उपयोगकर्ता ऑनलाइन भड़कते हैं — बात यह है कि ज़्यादातर आक्रामकता परोक्ष है, और परोक्ष आक्रामकता ही वह चीज़ है जिसे आज के मॉडरेशन सिस्टम सबसे कम पकड़ पाते हैं। कीवर्ड फ़िल्टर और सेंटिमेंट विश्लेषण गाली-गलौज और खुली आक्रामकता पकड़ लेते हैं, लेकिन तंज़, इशारों और कोडेड कटाक्ष 'नकारात्मक पर स्वीकार्य' मानकर निकल जाते हैं। 1.31 लाख से अधिक पोस्ट का विश्लेषण करते हुए भावना और आक्रामकता को अलग करके गोवा इंस्टिट्यूट ऑफ मैनेजमेंट और गोवा बिजनेस स्कूल का अध्ययन किसी एक प्लेटफ़ॉर्म की चूक नहीं, बल्कि भारतीय भाषाओं की बातचीत की निगरानी में एक ढांचागत कमी की ओर इशारा करता है।
- शोधकर्ताओं का मुख्य तकनीकी तर्क — कि आक्रामकता और भावना दो अलग संकेत हैं — व्यावसायिक रूप से भी अहम है, क्योंकि प्रचलित मॉडरेशन और ब्रांड-सेफ्टी उपकरण अब भी बड़े पैमाने पर सेंटिमेंट वर्गीकरण पर निर्भर हैं।
- भारत की टी20 विश्व कप हार के दौरान खुली आक्रामकता 37 प्रतिशत तक पहुंचना घटना-आधारित उछाल दिखाता है, जिससे यह तर्क बनता है कि मॉडरेशन क्षमता तय बड़ी घटनाओं के इर्द-गिर्द बढ़ाई जाए, स्थिर न रखी जाए।
- हर घटना के बाद आक्रामकता में गिरावट, और वह भी अलग-अलग रफ़्तार से, बताती है कि प्लेटफ़ॉर्म के पास हस्तक्षेप की खिड़की छोटी होती है, जहां घर्षण या नियंत्रण सबसे असरदार होगा।
- भारत की बहुभाषी और मिश्रित-भाषा फ़ीड नैचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग के लिए कठिन चुनौती है, और इस तरह के स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षित मॉडल वही आधारभूत काम हैं जिनमें वैश्विक प्लेटफ़ॉर्म पारंपरिक रूप से कम निवेश करते रहे हैं।
- प्रतिस्पर्धियों और विज्ञापनदाताओं के लिए आक्रामकता-संवेदी वर्गीकरण ट्रस्ट-एंड-सेफ्टी तकनीक की संभावित अगली परत है, हालांकि यह अध्ययन स्वयं शोध है, कोई तैयार उत्पाद नहीं।
किस पर नज़र रखें — देखना यह होगा कि प्लेटफ़ॉर्म, भारतीय नियामक या ट्रस्ट-एंड-सेफ्टी कंपनियां परोक्ष आक्रामकता को मॉडरेशन और अनुपालन रिपोर्टिंग में एक मापने योग्य श्रेणी मानना शुरू करती हैं या उसे सामान्य 'नकारात्मक भावना' में ही समेटती रहती हैं।
यह खबर यह स्थापित नहीं करती कि मॉडल की सटीकता क्या रही, घटनाएं और 1.31 लाख पोस्ट कैसे चुने गए, परोक्ष आक्रामकता का ठीक प्रतिशत क्या है, या एक्स ने इन निष्कर्षों पर कोई प्रतिक्रिया या कार्रवाई की है।
गहराई से
शोध सारांश · 8 तथ्य · 3 तारीख़ें · परीक्षा के लिएसार
पृष्ठभूमि
सोशल मीडिया मंच एक्स (पूर्व ट्विटर) पर भारतीय उपयोगकर्ताओं की आक्रामक भाषा के स्वरूप को समझने के लिए गोवा इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (जीआईएम) और गोवा बिजनेस स्कूल के शोधकर्ताओं ने मशीन लर्निंग आधारित अध्ययन किया। "Indian Aggression Detection through Multiple ML Models from Twitter Data" शीर्षक वाले इस अध्ययन में 1.31 लाख से अधिक पोस्ट का विश्लेषण किया गया। पोस्ट को तीन श्रेणियों — प्रत्यक्ष आक्रामक (OAG), अप्रत्यक्ष आक्रामक (CAG) और गैर-आक्रामक (NAG) — में बांटा गया। निष्कर्ष प्रतिष्ठित जर्नल "एडवांसेस इन कंज्यूमर रिसर्च" में प्रकाशित हुए हैं।
मुख्य तथ्य
- शोधकर्ताओं ने एक्स पर भारतीय बातचीत के 1.31 लाख से अधिक पोस्ट का मशीन लर्निंग मॉडलों से विश्लेषण किया।
- अध्ययन का शीर्षक: "Indian Aggression Detection through Multiple ML Models from Twitter Data"; संस्थान — गोवा इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट और गोवा बिजनेस स्कूल।
- पोस्ट तीन श्रेणियों में वर्गीकृत: Overtly Aggressive (OAG), Covertly Aggressive (CAG) और Non-Aggressive (NAG)।
- चार क्षेत्रों की घटनाओं में प्रत्यक्ष आक्रामकता (OAG) तुलनात्मक रूप से कम रही — 11 प्रतिशत से 37 प्रतिशत के बीच।
- भारत की टी20 विश्व कप हार के दौरान खुली आक्रामकता सर्वाधिक 37 प्रतिशत दर्ज हुई।
- अप्रत्यक्ष आक्रामकता बड़ी सामाजिक, वित्तीय, खेल और राजनीतिक घटनाओं के दौरान सबसे आम पाई गई।
- प्रत्येक घटना के बाद आक्रामकता का स्तर समय के साथ घटने की प्रवृत्ति दिखाता है, पर गिरावट की दर घटनाओं में काफी भिन्न रही।
- निष्कर्ष जर्नल "एडवांसेस इन कंज्यूमर रिसर्च" में प्रकाशित।
समयरेखा
- अध्ययन में शामिल घटना (तिथि स्रोत में नहीं)भारत की टी20 विश्व कप हार, जिसके दौरान खुली आक्रामकता 37 प्रतिशत के शीर्ष स्तर पर रही।
- प्रत्येक घटना के बादआक्रामकता के स्तर में सामान्यतः गिरावट, पर दर घटनाओं के अनुसार अलग-अलग।
- अध्ययन प्रकाशन (तिथि स्रोत में नहीं)निष्कर्ष "एडवांसेस इन कंज्यूमर रिसर्च" जर्नल में प्रकाशित; प्रोफेसरों ने पीटीआई को विवरण दिया।
किसका दाँव
- गोवा इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एवं गोवा बिजनेस स्कूल के शोधकर्ता — बहुभाषी भारतीय डिजिटल परिवेश में आक्रामकता पहचान के लिए एनएलपी और मशीन लर्निंग के उपयोग को आगे बढ़ाना।
- प्रो. लक्ष्मी विष्णु मूर्ति तुनुगुंटला (जीआईएम) — बताया कि OAG 11-37 प्रतिशत के बीच रहा और समय के साथ आक्रामकता घटती है।
- एसोसिएट प्रो. पी. बालासुब्रमण्यम (जीआईएम, बिग डेटा एनालिटिक्स विभाग) — भावना विश्लेषण और आक्रामकता पहचान के बीच अंतर तथा नीति-निहितार्थ रेखांकित किए।
- एक्स जैसे सोशल मीडिया मंच — ऑनलाइन मॉडरेशन प्रणालियों को सुधारने के लिए सांस्कृतिक रूप से अनुकूल एआई उपकरणों की जरूरत।
- सरकार व नीति-निर्माता — जिम्मेदार संचार नीतियों के मार्गदर्शन में इन निष्कर्षों का व्यावहारिक उपयोग।
- सोशल मीडिया उपयोगकर्ता — घटनाओं के दौरान शत्रुतापूर्ण या नुकसानदेह भाषा के संपर्क में आना।
क्यों अहम है
अध्ययन दिखाता है कि भारत में ऑनलाइन नुकसानदेह भाषा अधिकतर खुली गाली-गलौज के रूप में नहीं, बल्कि अप्रत्यक्ष रूप में सामने आती है — जिसे पकड़ना मॉडरेशन प्रणालियों के लिए कठिन है। यह भी स्पष्ट करता है कि भावना विश्लेषण (पॉजिटिव/नेगेटिव/न्यूट्रल) आक्रामकता पकड़ने के लिए पर्याप्त नहीं है। बहुभाषी भारतीय संदर्भ में सांस्कृतिक रूप से अनुकूल एआई उपकरण और जिम्मेदार संचार नीतियों की जरूरत उभरती है।
UPSC नज़रिया
प्रीलिम्स संकेत
- अध्ययन: "Indian Aggression Detection through Multiple ML Models from Twitter Data" — गोवा इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट व गोवा बिजनेस स्कूल।
- प्रकाशन: जर्नल "एडवांसेस इन कंज्यूमर रिसर्च"।
- विश्लेषित पोस्ट: 1.31 लाख से अधिक; तीन श्रेणियां — OAG, CAG, NAG।
- प्रत्यक्ष आक्रामकता की सीमा 11%–37%; सर्वाधिक 37% भारत की टी20 विश्व कप हार के दौरान।
- चार क्षेत्र: सामाजिक, वित्तीय, खेल और राजनीतिक घटनाएं।
- भावना विश्लेषण बनाम आक्रामकता पहचान का अंतर — नकारात्मक भावना का मतलब हमेशा आक्रामकता नहीं।
मेन्स दृष्टिकोण
भारत के डिजिटल परिवेश में ऑनलाइन आक्रामकता का स्वरूप जटिल है: जीआईएम और गोवा बिजनेस स्कूल के 1.31 लाख से अधिक एक्स पोस्ट के मशीन लर्निंग विश्लेषण के अनुसार खुली आक्रामकता (OAG) चार क्षेत्रों — सामाजिक, वित्तीय, खेल, राजनीतिक — की घटनाओं में 11 से 37 प्रतिशत के बीच ही रही (सर्वाधिक 37 प्रतिशत भारत की टी20 विश्व कप हार के दौरान), जबकि अप्रत्यक्ष आक्रामकता (CAG) कई घटनाओं में आम पाई गई। कारण घटना-केंद्रित भावनात्मक उत्तेजना और उसकी अवधि से जुड़े हैं; आक्रामकता प्रत्येक घटना के बाद घटती है पर गिरावट की दर एकसमान नहीं। निहितार्थ: भावना विश्लेषण मात्र से नुकसानदेह भाषा नहीं पकड़ी जा सकती, क्योंकि आक्रामकता हमेशा नकारात्मक भावना के साथ नहीं आती; बहुभाषी संदर्भ में व्यंग्य और संकेतात्मक शत्रुता का पता लगाना और कठिन है। आगे का रास्ता, स्रोत के अनुसार, स्थानीय संदर्भ पर केंद्रित, सांस्कृतिक रूप से अनुकूल एआई अनुप्रयोग, बेहतर ऑनलाइन मॉडरेशन प्रणालियां, सरकार द्वारा जिम्मेदार संचार नीतियां और डिजिटल व्यवहार के मनोविज्ञान-समाजशास्त्र पर आगे शोध है।
मुख्य शब्द
- Overtly Aggressive (OAG) / प्रत्यक्ष आक्रामक
- खुले तौर पर शत्रुतापूर्ण या हमलावर भाषा वाली पोस्ट; अध्ययन में इसका हिस्सा 11-37 प्रतिशत रहा।
- Covertly Aggressive (CAG) / अप्रत्यक्ष आक्रामक
- छिपी या परोक्ष रूप से आक्रामक भाषा; बड़ी घटनाओं के दौरान सबसे आम पाई गई।
- Non-Aggressive (NAG) / गैर-आक्रामक
- अध्ययन की तीसरी श्रेणी, जिसमें आक्रामकता रहित पोस्ट रखी गईं।
- भावना विश्लेषण (Sentiment Analysis)
- संवाद को सकारात्मक, नकारात्मक या तटस्थ में बांटने की तकनीक; आक्रामकता पहचान से भिन्न।
- प्राकृतिक भाषा प्रसंस्करण (NLP)
- मशीनों द्वारा मानव भाषा के विश्लेषण की तकनीक, जिसका इस अध्ययन में उपयोग हुआ।
- कम्प्यूटेशनल सोशल साइंस
- डेटा व एल्गोरिद्म की मदद से सामाजिक व्यवहार का अध्ययन; अध्ययन इसी क्षेत्र में योगदान का दावा करता है।
अभ्यास प्रश्न
- भावना विश्लेषण और आक्रामकता पहचान में क्या अंतर है? भारत जैसे बहुभाषी डिजिटल परिवेश में अप्रत्यक्ष आक्रामकता की पहचान क्यों कठिन है?
- गोवा इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट के अध्ययन के निष्कर्ष ऑनलाइन कंटेंट मॉडरेशन और जिम्मेदार संचार नीतियों को कैसे प्रभावित कर सकते हैं? चर्चा करें।
- "बड़ी सामाजिक, वित्तीय, खेल और राजनीतिक घटनाएं ऑनलाइन आक्रामकता के शिखर बनाती हैं" — अध्ययन के आंकड़ों के आधार पर परखें।
सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।