पराली जलाने पर 15 महीने की 'रेड एंट्री' का केंद्र का मसौदा

दिल्ली-एनसीआर की सर्दियों की वायु प्रदूषण से निपटने के लिए केंद्र ने पराली जलाने वाले किसानों पर 'रेड एंट्री' व्यवस्था सख्त कर दी है। 16 सितंबर को प्रकाशित मसौदा नियमों के अनुसार ऐसे किसानों की जमीन पर राजस्व रिकॉर्ड में 15 महीने के लिए रेड एंट्री होगी, दोबारा घटना या पर्यावरण मुआवजा न चुकाने पर यह 15 महीने और बढ़ेगी। रेड एंट्री से कर्ज और बंधक लेना मुश्किल होता है। आपत्तियों के लिए दो महीने का समय दिया गया है। किसान संगठन इसका विरोध कर रहे हैं।

स्रोत

Indian Express — Cities · मूल ख़बर पढ़ें ↗

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डेस्क जाँच · स्रोत से तुलना की

डेस्क ने क्या जाँचा (5)
  • Draft Rules mark land of farmers found burning stubble with a red entry in revenue records for up to 15 months, extendable by another 15 months for repeat incidents or non-payment of compensation. — Attributed in source to the draft Commission for Air Quality Management rules published on September 16; figures appear in source.
  • Stubble burning contributes up to 35 per cent of Delhi-NCR pollutants on some days. — Figure appears in source without attribution to a specific study or agency.
  • The Centre has given a two-month window for objections and suggestions to the draft. — Stated in source; attributed to the draft process, no document number cited.
  • Bharatiya Kisan Union (Dakaunda)'s Jagmohan Singh said pollution cannot be solved by force and farmers need financial assistance. — Direct quote attributed by name and organisation in the source.
  • A February 2025 parliamentary standing committee report headed by MP Milind Deora recommended an incentive-based red entry removal system. — Attributed to a named committee and report in the source; report text not independently seen.

विश्लेषकों की राय राय

AI राजनीतिक विश्लेषक

पर्यावरण नियम के रूप में सामने आया यह कदम राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील है। इससे केंद्र दिल्ली-एनसीआर के शहरी मतदाताओं को यह दिखा सकता है कि सर्दियों के प्रदूषण पर कार्रवाई हो रही है, लेकिन साथ ही पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी यूपी की किसान राजनीति में एक नया टकराव बिंदु भी बन जाता है। रेड एंट्री सीधे कर्ज और गिरवी पर असर डालती है, इसलिए किसान संगठनों को गोलबंदी का आसान मुद्दा मिल गया है। दो महीने की आपत्ति अवधि का अर्थ है कि आने वाली धान कटाई खत्म होने तक ये बदलाव लागू होने की संभावना कम है — और यही टाइमिंग राजनीतिक रूप से सबसे अहम बात है।

  • मुआवजे की राशि में बदलाव किए बिना रेड एंट्री की अवधि तय करने से केंद्र इसे 'स्पष्टता' कहकर बचाव कर सकता है, जबकि व्यवहार में दंड सख्त होता है।
  • कर्ज, गिरवी और योजनाओं के लाभ को छूने वाला दंड किसी जुर्माने से कहीं ज्यादा राजनीतिक असर रखता है — इसीलिए भारतीय किसान यूनियन (डकौंदा) जैसे संगठन इसका विरोध कर रहे हैं।
  • खबर के मुताबिक राज्यों में असर अलग-अलग रहा है, यानी नियम केंद्र बनाता है पर जमीनी राजनीतिक टकराव बड़े हिस्से में राज्य तंत्र झेलता है।
  • किसान संगठनों का यह दावा कि पहले आंदोलन और याचिकाओं से रेड एंट्री हटवाई गई, बताता है कि स्थानीय राजनीतिक दबाव अमल को कमजोर कर सकता है।
  • संसदीय स्थायी समिति की प्रोत्साहन-आधारित रेड एंट्री हटाने की सिफारिश सत्तारूढ़ खेमे के भीतर नरम रुख की मांग करने वालों को आधार देती है।

किस पर नज़र रखें — देखना होगा कि दो महीने की आपत्ति अवधि में पंजाब-हरियाणा के किसान संगठन विरोध को कितना तेज करते हैं और अंतिम नियमों में प्रोत्साहन-आधारित राहत जगह पाती है या नहीं।

खबर के अनुसार 15 महीने की अवधि के तर्क पर पर्यावरण मंत्रालय का जवाब अभी नहीं आया है; यह भी तय नहीं है कि मसौदा इसी रूप में लागू होगा या कोई दल औपचारिक रूप से क्या प्रतिक्रिया देगा।

गहराई से

शोध सारांश · 8 तथ्य · 4 तारीख़ें · परीक्षा के लिए

सार

पृष्ठभूमि

दिल्ली-एनसीआर में हर सर्दी में जहरीली हवा की एक बड़ी वजह पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और उत्तर प्रदेश में धान की कटाई के बाद पराली (फसल अवशेष) जलाना है, जो कुछ दिनों में प्रदूषकों में 35 प्रतिशत तक योगदान देता है। इससे निपटने के लिए 2023 में अधिसूचित नियमों में पराली जलाने वालों के राजस्व रिकॉर्ड में 'रेड एंट्री' दर्ज करने का प्रावधान था, जिसका किसान संगठन विरोध करते रहे हैं। अब पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने 16 सितंबर को नया मसौदा प्रकाशित कर पहली बार रेड एंट्री की वैधता अवधि तय की है। रेड एंट्री से किसानों को कर्ज और जमीन बंधक रखने में कठिनाई हो सकती है।

मुख्य तथ्य

  • मसौदा नियमों के तहत पराली जलाने वाले किसान की जमीन पर राजस्व रिकॉर्ड में 15 महीने तक रेड एंट्री दर्ज होगी।
  • दोबारा पराली जलाने की घटना पाई गई या लगाया गया पर्यावरण मुआवजा जमा नहीं किया गया, तो रेड एंट्री की वैधता 15 महीने और बढ़ जाएगी।
  • रेड एंट्री घटना की तारीख से 15 महीने वैध रहेगी और बाद में कोई घटना न मिलने पर या मुआवजा जमा करने पर समाप्त हो जाएगी।
  • नया मसौदा 16 सितंबर को प्रकाशित हुआ; आपत्तियों और सुझावों के लिए दो महीने की अवधि दी गई है।
  • मसौदा नाम: कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट इन नेशनल कैपिटल रीजन एंड एडजॉइनिंग एरियाज (पराली जलाने पर पर्यावरण मुआवजा लगाने, वसूली और उपयोग) नियम, 2026।
  • पराली जलाना दिल्ली-एनसीआर में कुछ दिनों में 35 प्रतिशत तक प्रदूषकों का कारण बनता है; किसान मध्य सितंबर से शुरुआती दिसंबर के बीच गेहूं बोने से पहले खेत जलाते हैं।
  • मसौदे में भूमि-जोत आधारित मुआवजे की राशि में बदलाव नहीं किया गया, केवल रेड एंट्री की वैधता तय की गई है।
  • फरवरी 2025 की रिपोर्ट में शिवसेना सांसद मिलिंद देवड़ा की अध्यक्षता वाली अधीनस्थ विधान संबंधी संसदीय स्थायी समिति ने 'प्रोत्साहन-आधारित' रेड एंट्री हटाने की व्यवस्था की सिफारिश की।

समयरेखा

  1. 2023पराली जलाने पर पर्यावरण मुआवजा लगाने, वसूली और उपयोग से जुड़े नियम पहली बार अधिसूचित; इनमें रेड एंट्री के प्रावधान शामिल थे।
  2. फरवरी 2025मिलिंद देवड़ा की अध्यक्षता वाली अधीनस्थ विधान संबंधी संसदीय स्थायी समिति ने प्रोत्साहन-आधारित रेड एंट्री हटाने की सिफारिश की।
  3. 16 सितंबरपर्यावरण मंत्रालय ने नया मसौदा प्रकाशित किया, जिसमें पहली बार रेड एंट्री की 15 महीने की वैधता तय की गई; दो महीने की आपत्ति अवधि।
  4. आगामी धान कटाई सीजन के अंत तकटिप्पणियों की अवधि के कारण केंद्र के बदलाव प्रभावी होने की संभावना नहीं।

किसका दाँव

  • पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और उत्तर प्रदेश के किसान — रेड एंट्री से कर्ज, सब्सिडी और जमीन बंधक रखने में कठिनाई; पर्यावरण मुआवजा भुगतान का बोझ।
  • पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय — मसौदा नियम बनाकर रेड एंट्री की वैधता तय करना और दिल्ली-एनसीआर प्रदूषण पर नियंत्रण।
  • वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM), एनसीआर व आसपास के क्षेत्र — इन नियमों के तहत पराली जलाने पर पर्यावरण मुआवजा लगाने, वसूलने और उपयोग का ढांचा।
  • भारतीय किसान यूनियन (दकौंदा) व अन्य किसान संगठन — रेड एंट्री का विरोध; पराली प्रबंधन के लिए वित्तीय सहायता की मांग; पहले प्रदर्शन कर एंट्री हटवाई।
  • दिल्ली-एनसीआर के निवासी — सर्दियों में जहरीली हवा से स्वास्थ्य पर असर; पराली कुछ दिनों में 35% तक प्रदूषक देती है।
  • राज्य प्रशासन (जैसे हरियाणा का कुरुक्षेत्र) — मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर रेड एंट्री और दो साल के प्रतिबंध से कृषि योजनाओं के लाभ रोकना।

क्यों अहम है

दिल्ली-एनसीआर की सर्दियों की वायु गुणवत्ता का संकट सार्वजनिक स्वास्थ्य का मुद्दा है और पराली जलाना इसका बड़ा कारण है, इसलिए केंद्र दंडात्मक कदम कड़े कर रहा है। दूसरी ओर रेड एंट्री सीधे किसानों की कर्ज, सब्सिडी और भूमि बंधक तक पहुंच को प्रभावित करती है, जिससे पर्यावरण नियमन और कृषि आजीविका के बीच टकराव खड़ा होता है। संसदीय समिति की प्रोत्साहन-आधारित सिफारिश बताती है कि केवल दंड के बजाय समाधान-आधारित रास्ते पर बहस जारी है।

UPSC नज़रिया

प्रीलिम्स संकेत

  • मसौदा नियम: CAQM (पराली जलाने पर पर्यावरण मुआवजा लगाने, वसूली और उपयोग) नियम, 2026 — 16 सितंबर को प्रकाशित।
  • रेड एंट्री की वैधता 15 महीने; दोबारा घटना या मुआवजा न चुकाने पर 15 महीने का विस्तार।
  • मूल नियम 2023 में अधिसूचित हुए थे और उनमें रेड एंट्री के प्रावधान थे।
  • पराली जलाना कुछ दिनों में दिल्ली-एनसीआर के प्रदूषकों में 35% तक योगदान देता है।
  • हरियाणा के कुरुक्षेत्र जैसे जिलों में रेड एंट्री 'मेरी फसल मेरा ब्योरा' पोर्टल पर; ऐसे किसानों पर दो साल का प्रतिबंध।
  • अधीनस्थ विधान संबंधी संसदीय स्थायी समिति (अध्यक्ष: मिलिंद देवड़ा) की फरवरी 2025 रिपोर्ट में प्रोत्साहन-आधारित रेड एंट्री हटाने की सिफारिश।

मेन्स दृष्टिकोण

दिल्ली-एनसीआर की सर्दियों की वायु प्रदूषण समस्या में पराली जलाना प्रमुख कारक है—स्रोत के अनुसार कुछ दिनों में 35 प्रतिशत तक—क्योंकि धान की कटाई और मध्य सितंबर से शुरुआती दिसंबर के बीच गेहूं की बुआई के छोटे अंतराल में किसान खेत जलाते हैं। केंद्र की प्रतिक्रिया मुख्यतः दंडात्मक है: 2023 के नियमों में शामिल रेड एंट्री को अब 16 सितंबर के मसौदे में 15 महीने की स्पष्ट वैधता दी गई है, जो दोबारा घटना या पर्यावरण मुआवजा न चुकाने पर 15 महीने और बढ़ेगी। इसका आर्थिक प्रभाव गंभीर है—पंजाब में किसान संगठनों ने कर्ज, सब्सिडी और भूमि बंधक से जुड़ी शिकायतें उठाई हैं, तो हरियाणा में मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर दो साल के प्रतिबंध से सभी कृषि योजनाओं के लाभ रुक सकते हैं। किसान संगठनों का तर्क है कि 'जबरदस्ती' से समाधान नहीं होगा और पराली प्रबंधन के लिए वित्तीय सहायता चाहिए। आगे का रास्ता स्रोत में संकेतित दो दिशाओं में है: एक, वसूले गए पर्यावरण मुआवजे का उपयोग फसल विविधीकरण, बायोमास उपयोग, फसल अवशेष प्रबंधन में शोध और अवशेष प्रबंधन तकनीक पर सब्सिडी के लिए; दो, संसदीय स्थायी समिति की प्रोत्साहन-आधारित रेड एंट्री हटाने की सिफारिश, जिससे सतत खेती में भागीदारी करने वाले किसानों को जल्द राहत मिले। दो महीने की आपत्ति अवधि हितधारकों के परामर्श का अवसर है।

मुख्य शब्द

रेड एंट्री
राजस्व रिकॉर्ड में जमीन के विरुद्ध दर्ज नकारात्मक प्रविष्टि, जिससे कर्ज और जमीन बंधक रखना मुश्किल हो सकता है।
पराली जलाना (Stubble Burning)
धान कटाई के बाद बचे फसल अवशेष को खेत में जलाना, जो दिल्ली-एनसीआर के प्रदूषण का बड़ा कारण है।
पर्यावरण मुआवजा
पराली जलाने पर भूमि-जोत के आधार पर लगाया जाने वाला जुर्माना, जिसकी वसूली और उपयोग नियमों में तय है।
CAQM नियम, 2026 (मसौदा)
एनसीआर व आसपास के क्षेत्रों में पराली जलाने पर पर्यावरण मुआवजा लगाने, वसूली और उपयोग से जुड़ा प्रस्तावित नियम।
मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल
हरियाणा का कृषि पोर्टल, जिस पर रेड एंट्री होने पर किसान दो साल तक योजनाओं के लाभ से वंचित हो सकते हैं।
अधीनस्थ विधान संबंधी संसदीय स्थायी समिति
नियमों-अधिसूचनाओं की समीक्षा करने वाली समिति; फरवरी 2025 में मिलिंद देवड़ा की अध्यक्षता में सिफारिशें दीं।

अभ्यास प्रश्न

  1. दिल्ली-एनसीआर की सर्दियों की वायु प्रदूषण समस्या में पराली जलाने की भूमिका बताइए और 'रेड एंट्री' जैसे दंडात्मक उपायों की प्रभावशीलता का मूल्यांकन कीजिए।
  2. क्या पर्यावरण अनुपालन के लिए किसानों की साख (कर्ज व बंधक) तक पहुंच सीमित करना उचित है? दंड और प्रोत्साहन आधारित दृष्टिकोणों की तुलना कीजिए।
  3. पराली जलाने पर वसूले गए पर्यावरण मुआवजे का उपयोग फसल विविधीकरण, बायोमास उपयोग और अवशेष प्रबंधन तकनीक में कैसे किया जा सकता है? चर्चा कीजिए।

सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।

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