रिजिजू ने कांग्रेस को 'भस्मासुर' कहा, टीएमसी चिह्न विवाद तेज
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने शुक्रवार को कहा कि कांग्रेस 'भस्मासुर' जैसी है और जो भी उसके साथ रहता है, वह नष्ट हो जाता है। उन्होंने कहा कि टीएमसी और एनसीपी कांग्रेस से ही निकली थीं। चुनाव आयोग ने गुरुवार को ममता बनर्जी और रीतब्रत बनर्जी के गुटों के परस्पर दावों के बीच टीएमसी का नाम और 'फूल' चिह्न फ्रीज कर दिया। राहुल गांधी ने बीजेपी-आयोग की मिलीभगत का आरोप लगाया, ममता ने आदेश को अवैध बताया।
स्रोत
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डेस्क ने क्या जाँचा (5)
- Kiren Rijiju called Congress 'Bhasmasur', saying whoever stays with it is destroyed — Directly quoted and attributed to the Union Minister, with an ANI video reference in the source
- ECI froze TMC's name and 'flower' symbol on Thursday after contesting claims from factions led by Mamata Banerjee and Ritabrata Banerjee — Attributed to the Election Commission in the source; the symbol is described both as 'flower' and 'flowers and grass' within the same text
- Rahul Gandhi alleged BJP and the Election Commission collude to split parties, citing Shiv Sena and NCP — Quoted from his post on X; an allegation, not established fact
- Mamata Banerjee said 92 lakh votes were deleted and the margin was only 32 lakh even after EVMs were hijacked — Unverified allegation quoted from Banerjee; no independent source or data given
- Sanchita Dey Pradhan withdrew her Nandigram candidature after meeting West Bengal CM Suvendu Adhikari — Stated in the source without attribution to a named official or document
विश्लेषकों की राय राय
टीएमसी के नाम और चुनाव चिन्ह पर रोक सिर्फ एक प्रक्रियागत विवाद नहीं है — बंगाल उपचुनावों से ठीक पहले यह नैरेटिव और विपक्षी एकता की लड़ाई है। राहुल गांधी इसे शिवसेना से एनसीपी और अब टीएमसी तक चलने वाले एक "पैटर्न" के रूप में पेश कर रहे हैं और संस्थागत विश्वसनीयता को केंद्र में ला रहे हैं; किरेन रिजिजू "भस्मासुर" शब्द के जरिए पलटवार करते हुए याद दिला रहे हैं कि टीएमसी और एनसीपी दोनों कांग्रेस से ही निकले थे, यानी पीड़ित की जगह कांग्रेस से छीनने की कोशिश। तत्काल राजनीतिक असर साफ है: ममता बनर्जी कांग्रेस के करीब जा रही हैं, और नंदीग्राम में कांग्रेस उम्मीदवार को समर्थन इसका संकेत है।
- नाम और चिन्ह पर रोक से मतदाता पहचान की समस्या खड़ी होती है, और नई पहचान के साथ उपचुनाव लड़ना किसी भी दल के लिए ढांचागत नुकसान है।
- ममता की "हम झुकेंगे नहीं" वाली भाषा उन्हें तैयार पीड़ित नैरेटिव देती है, जो प्रचार के दौरान उनका आधार जोड़ने का पुराना तरीका है।
- राहुल गांधी की देर रात की बातचीत और ममता का कांग्रेस उम्मीदवार को समर्थन बंगाल में आमतौर पर आपस में लड़ने वाली दो ताकतों के बीच बढ़ती निर्भरता का संकेत है।
- रिजिजू के जवाब का दोहरा मकसद है: पार्टी तोड़ने के आरोप को कांग्रेस के इतिहास की तरफ मोड़ना, और चुनाव आयोग पर आलोचना को दलगत राजनीति बताना।
- ऋतब्रत बनर्जी गुट को कितना समर्थन मिलेगा, यह अभी अपरीक्षित है; असली फायदा उस गुट को होगा या वोट बंटवारे से बीजेपी को, यह नतीजे ही बताएंगे।
किस पर नज़र रखें — देखना होगा कि नए नाम और चिन्ह के साथ ममता का गुट अपने मतदाताओं को कितना बांधे रख पाता है, और कांग्रेस–टीएमसी तालमेल टिकाऊ गठबंधन बनता है या एक बार का प्रयोग रह जाता है।
यह खबर मिलीभगत के आरोप दर्ज करती है, उसका सबूत नहीं देती, और दोनों गुटों के दावों की कानूनी योग्यता या विवाद का अंतिम नतीजा तय नहीं करती।
गहराई से
शोध सारांश · 8 तथ्य · 5 तारीख़ें · परीक्षा के लिएसार
पृष्ठभूमि
पश्चिम बंगाल उपचुनावों से पहले चुनाव आयोग (ECI) ने गुरुवार को तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) का नाम और 'फूल' (फूल और घास) चिह्न फ्रीज कर दिया, क्योंकि पार्टी पर दो गुटों — पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और पूर्व टीएमसी नेता रीतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले — ने 'असली टीएमसी' होने के परस्पर दावे किए। इसके बाद कांग्रेस सांसद व नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने बीजेपी और चुनाव आयोग के बीच 'मिलीभगत' का आरोप लगाया और शिवसेना तथा एनसीपी के मामलों से तुलना की। इसी पर पलटवार करते हुए संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने शुक्रवार को कांग्रेस को 'भस्मासुर' कहा और याद दिलाया कि टीएमसी और एनसीपी खुद कांग्रेस से ही निकली थीं।
मुख्य तथ्य
- चुनाव आयोग ने गुरुवार को टीएमसी का नाम और 'फूल' (फूल व घास) चिह्न फ्रीज किया, कारण — दो गुटों के परस्पर दावे और 'असली टीएमसी' विवाद।
- दो प्रतिद्वंद्वी गुट: एक पूर्व पश्चिम बंगाल मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व में, दूसरा पूर्व टीएमसी नेता रीतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में।
- केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने शुक्रवार को कहा — 'कांग्रेस पार्टी भस्मासुर की तरह है; जो भी उसके साथ रहता है, अंत में नष्ट हो जाता है।'
- रिजिजू का दावा: टीएमसी और एनसीपी दोनों कांग्रेस से ही निकली थीं; बीजेपी पीएम मोदी के नेतृत्व में किसी पार्टी को तोड़े बिना दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी बनी।
- राहुल गांधी ने X पर लिखा — 'पहले शिवसेना, फिर NCP और अब तृणमूल कांग्रेस… हर बार एक ही पैटर्न', और कहा कि आयोग की संवैधानिक जिम्मेदारी जनादेश की रक्षा है।
- ममता बनर्जी ने आयोग के आदेश को 'अवैध' बताया और कहा — '92 लाख वोट डिलीट किए गए, EVM हाईजैक के बाद भी अंतर केवल 32 लाख रहा।'
- ममता ने नंदीग्राम उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार को समर्थन देने की घोषणा की।
- ममता गुट की उम्मीदवार संचिता डे प्रधान ने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से मिलने के बाद नंदीग्राम सीट से नामांकन वापस ले लिया।
समयरेखा
- गुरुवार (17 सितंबर 2026, स्रोत में तारीख स्पष्ट नहीं)चुनाव आयोग ने दो गुटों के परस्पर दावों के बीच टीएमसी का नाम और 'फूल' चिह्न फ्रीज किया।
- 18 सितंबर 2026राहुल गांधी ने X पर बीजेपी–चुनाव आयोग की मिलीभगत का आरोप लगाया; ममता ने आदेश को अवैध बताया।
- 18 सितंबर 2026 (शुक्रवार)किरेन रिजिजू ने कांग्रेस को 'भस्मासुर' कहा; ANI पर बयान जारी।
- तारीख स्रोत में नहींममता गुट की उम्मीदवार संचिता डे प्रधान ने सीएम शुभेंदु अधिकारी से मिलने के बाद नंदीग्राम से उम्मीदवारी वापस ली; ममता ने कांग्रेस प्रत्याशी को समर्थन दिया।
- 18 सितंबर 2026, 18:32 ISTरिपोर्ट का पहला प्रकाशन।
किसका दाँव
- चुनाव आयोग (ECI) — चिह्न-विवाद पर निर्णय की संवैधानिक जिम्मेदारी; निष्पक्षता पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
- ममता बनर्जी गुट (टीएमसी) — पार्टी का नाम व 'फूल' चिह्न फ्रीज; उपचुनावों में पहचान और वोट-आधार का जोखिम।
- रीतब्रत बनर्जी गुट — 'असली टीएमसी' होने का दावा और चिह्न पर हक।
- कांग्रेस / राहुल गांधी — विपक्षी एकता व 'वोट चोरी' नैरेटिव; नंदीग्राम में उसका उम्मीदवार ममता के समर्थन से लड़ रहा है।
- बीजेपी / किरेन रिजिजू — पार्टी तोड़ने के आरोपों का खंडन; कांग्रेस पर ही दलों को तोड़ने का आरोप।
- पश्चिम बंगाल के मतदाता — उपचुनावों में बदले नाम-चिह्न से भ्रम की स्थिति; प्रतिनिधित्व का प्रश्न।
क्यों अहम है
चुनाव चिह्न किसी दल की चुनावी पहचान का आधार होता है, इसलिए उसका फ्रीज होना उपचुनावों में सीधे मतदाता व्यवहार को प्रभावित करता है। शिवसेना और एनसीपी के बाद टीएमसी का मामला चुनाव आयोग की भूमिका, दल-विभाजन और संस्थागत निष्पक्षता पर बहस को और तेज करता है। यह विवाद 2026 के बंगाल उपचुनावों में विपक्षी गठजोड़ के समीकरण भी बदल रहा है।
UPSC नज़रिया
प्रीलिम्स संकेत
- चुनाव आयोग ने टीएमसी का नाम और 'फूल एवं घास' चिह्न फ्रीज किया — कारण: दो गुटों के परस्पर दावे।
- टीएमसी के दो दावेदार गुट: ममता बनर्जी और रीतब्रत बनर्जी।
- राहुल गांधी नेता प्रतिपक्ष (LoP) व कांग्रेस सांसद; किरेन रिजिजू केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री।
- राहुल गांधी ने क्रम बताया — पहले शिवसेना, फिर एनसीपी, अब तृणमूल कांग्रेस।
- ममता का दावा: 92 लाख वोट डिलीट, अंतर केवल 32 लाख; उन्होंने नंदीग्राम में कांग्रेस उम्मीदवार को समर्थन दिया।
- शुभेंदु अधिकारी — स्रोत में पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री के रूप में उल्लिखित।
मेन्स दृष्टिकोण
टीएमसी के नाम और चिह्न के फ्रीज होने का प्रकरण भारतीय दलीय राजनीति के दो पुराने तनावों को उजागर करता है — दलों के भीतर उत्तराधिकार व गुटबंदी, और विवाद निपटाने वाली संस्था की विश्वसनीयता। स्रोत के अनुसार आयोग ने दो गुटों (ममता बनर्जी व रीतब्रत बनर्जी) के 'असली टीएमसी' दावों के चलते नाम-चिह्न फ्रीज किया; राहुल गांधी इसे शिवसेना और एनसीपी जैसे मामलों की कड़ी बताते हुए बीजेपी-आयोग मिलीभगत का आरोप लगाते हैं और कहते हैं कि आयोग की संवैधानिक जिम्मेदारी जनादेश की रक्षा है। दूसरी ओर रिजिजू का तर्क है कि टीएमसी और एनसीपी स्वयं कांग्रेस से टूटकर बनीं, इसलिए कांग्रेस के आरोप विरोधाभासी हैं और बीजेपी किसी दल को तोड़े बिना बड़ी बनी। परिणाम-आधारित प्रभाव भी स्पष्ट है: नंदीग्राम में ममता गुट की उम्मीदवार के नाम वापस लेने के बाद ममता ने कांग्रेस प्रत्याशी को समर्थन दे दिया, यानी चिह्न-विवाद तत्काल गठबंधन समीकरण बदल रहा है। आगे का रास्ता यह मांग करता है कि चिह्न-दावों के निपटारे में पारदर्शी, समयबद्ध और तर्कसंगत प्रक्रिया दिखे, विवाद के दोनों पक्षों को समान सुनवाई मिले और मतदाताओं को नए नाम-चिह्न की स्पष्ट जानकारी उपलब्ध कराई जाए; शेष विवरण स्रोत में नहीं हैं।
मुख्य शब्द
- चिह्न फ्रीज करना
- किसी दल के चुनाव चिह्न व नाम के उपयोग पर रोक, जब दो गुट उस पर परस्पर दावा करें — यहाँ टीएमसी के 'फूल व घास' चिह्न पर।
- भस्मासुर
- पौराणिक पात्र जो जिसे स्पर्श करे उसे भस्म कर दे; रिजिजू ने इसी रूपक से कांग्रेस पर हमला किया।
- 'असली टीएमसी' विवाद
- ममता बनर्जी और रीतब्रत बनर्जी गुटों के बीच यह दावा कि असली तृणमूल कांग्रेस कौन है।
- नेता प्रतिपक्ष (LoP)
- स्रोत के अनुसार यह पद राहुल गांधी के पास है, जो कांग्रेस सांसद भी हैं।
- नंदीग्राम उपचुनाव
- पश्चिम बंगाल की वह सीट जहाँ ममता गुट की उम्मीदवार के नाम वापस लेने पर ममता ने कांग्रेस प्रत्याशी को समर्थन दिया।
अभ्यास प्रश्न
- चुनाव चिह्न विवादों में चुनाव आयोग की भूमिका पर उठ रहे प्रश्नों का परीक्षण कीजिए। संस्थागत विश्वसनीयता बनाए रखने के उपाय सुझाइए।
- दल-विभाजन और गुटबंदी भारतीय दलीय व्यवस्था तथा मतदाता के चयन को कैसे प्रभावित करते हैं? टीएमसी प्रकरण के आलोक में चर्चा कीजिए।
- क्या चुनाव चिह्न पर दावे का निपटारा केवल विधायी संख्या-बल के आधार पर होना चाहिए? तर्क सहित उत्तर दीजिए।
सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।
