ब्रिक्स दिल्ली घोषणापत्र भारत की कूटनीतिक सफलता, विशेषज्ञों का मत
पूर्व राजनयिकों और सामरिक विशेषज्ञों ने पिछले सप्ताह हुए ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को भारत की कूटनीतिक सफलता बताया, जिसमें सर्वसम्मत नई दिल्ली घोषणापत्र स्वीकार हुआ। दस्तावेज़ में पश्चिम एशिया संघर्ष पर किसी देश का नाम नहीं है और यूक्रेन का कोई उल्लेख भी नहीं। पूर्व विदेश सचिव निरुपमा मेनन राव ने कहा कि ईरान-यूएई मतभेदों के बावजूद सामान्य भाषा से सहमति बनी। ब्रह्म चेलानी ने चीन के निर्यात प्रतिबंधों को दोहरा मानदंड कहा।
स्रोत
BRICS / G20 / SCO / Quad · मूल ख़बर पढ़ें ↗
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डेस्क ने क्या जाँचा (5)
- The BRICS Summit adopted a unanimous New Delhi Declaration naming no countries on the West Asia conflict and omitting Ukraine. — Stated in the source as reporting; no official document citation given beyond the text.
- Former foreign secretary Nirupama Menon Rao called it a significant diplomatic success achieved through generalised language. — Directly attributed to her post on X.
- Brahma Chellaney said the sanctions language exposes a double standard, citing China's export curbs on critical minerals and rare earths. — Attributed quote from Chellaney; his characterisation, not independently verified.
- About 100 of the 140 paragraphs in the declaration cover development cooperation, per economist Golam Rasul in Asia Times. — Figure attributed to Rasul's Asia Times article as it appears in the source.
- The summit enabled the highest-level Iran-UAE engagement since the start of the US-Israel war against Tehran. — Asserted by the source without named attribution.
विश्लेषकों की राय राय
బ్రిక్స్ ఢిల్లీ డిక్లరేషన్ ఏకాభిప్రాయంతో ఆమోదం పొందడం ప్రధానంగా భారత దౌత్య నిర్వహణ సామర్థ్యానికి — అంటే "కన్వీనింగ్ పవర్"కు — దక్కిన రాజకీయ లాభం; 2023 జీ20 న్యూఢిల్లీ డిక్లరేషన్ తర్వాత మూడేళ్లలో ఇది రెండోసారి. ఇరాన్–యూఏఈ విభేదాలు, రష్యా సున్నితత్వాల మధ్య పేర్లు ప్రస్తావించని సాధారణ భాషతో ముందుకు సాగడం భారత "వ్యూహాత్మక స్వతంత్రత"కు గెలుపుగా చూపబడుతుంది. కానీ అదే సాధారణ భాషే విమర్శకులకు ఆయుధం: బాధ్యతను ఎవరిపైనా మోపని పత్రం, ఏకపక్ష ఆంక్షల విషయంలో చైనాకు మినహాయింపు ఇచ్చిన ద్వంద్వ ప్రమాణం అన్న ఆరోపణలు కూడా వెంటనే బయటికొచ్చాయి.
- ఇది ఇంటి రాజకీయాల్లో వాడుకోగలిగే దౌత్య విజయం — ప్రభుత్వం దీన్ని "గ్లోబల్ సౌత్కు నాయకత్వం" కథనంగా ముందుకు తీసుకెళ్లే అవకాశం ఉంది.
- ఎరిక్ సోల్హీమ్ చెప్పిన "నాన్-వెస్టర్న్ కానీ యాంటీ-వెస్టర్న్ కాదు" అనే ఫ్రేమింగ్ భారతానికి రాజకీయంగా కీలకం: పశ్చిమ దేశాలతో సంబంధాలు దెబ్బతినకుండా బ్రిక్స్లో ఉండగలగడం.
- నిరుపమా మీనన్ రావు ఎత్తిచూపిన పరిమితి — ఏకాభిప్రాయం నిలిచింది కానీ కేవలం జాగ్రత్తగా సాధారణీకరించిన భాష ద్వారానే — భవిష్యత్తులో ప్రతిపక్షం లేవనెత్తగల ప్రశ్న.
- బ్రహ్మ చెల్లానీ విమర్శ చైనా అంశాన్ని దేశీయ రాజకీయ చర్చలోకి తెస్తుంది: క్రిటికల్ మినరల్స్, ఎగుమతి నియంత్రణలపై బ్రిక్స్ మౌనం భారత ప్రయోజనాలకు ఎంతవరకు అనుకూలం అన్న ప్రశ్న.
- గోలం రసూల్ లేవనెత్తిన "ఆశయం vs అమలు సామర్థ్యం" వాదన — 140 పేరాల్లో దాదాపు అన్నీ స్వచ్ఛంద చట్రాలే అన్న విమర్శ — వేడుక కథనానికి ప్రధాన ప్రతివాదన.
किस पर नज़र रखें — డిక్లరేషన్లోని అంశాలు — ప్రత్యేకించి సంతకాలు ఇంకా పెండింగ్లో ఉన్న కస్టమ్స్ సహకార ఒప్పందం లాంటివి — వాస్తవ నిబద్ధతలుగా మారుతాయా, లేక వర్కింగ్ గ్రూపుల స్థాయిలోనే ఉండిపోతాయా అన్నది గమనించాలి.
ఈ కథనం భారత ప్రభుత్వ అధికారిక స్పందనను, ప్రతిపక్షాల వైఖరిని, లేదా చైనా–ఇతర సభ్య దేశాల ప్రతిస్పందనను ఏమీ నిర్ధారించడం లేదు; ఇందులో ఉన్నవి ప్రధానంగా విశ్లేషకుల, మాజీ దౌత్యవేత్తల వ్యక్తిగత అభిప్రాయాలే.
गहराई से
शोध सारांश · 8 तथ्य · 4 तारीख़ें · परीक्षा के लिएसार
पृष्ठभूमि
पिछले सप्ताह नई दिल्ली में हुए ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में सदस्य देशों ने सर्वसम्मति से "नई दिल्ली घोषणापत्र" स्वीकार किया। ईरान और यूएई के बीच पश्चिम एशिया को लेकर तीखे मतभेदों तथा अमेरिका-इस्राइल के ईरान के विरुद्ध युद्ध के बीच यह सहमति बनी, जिसे भारत की "सामरिक स्वायत्तता" (स्ट्रैटेजिक ऑटोनॉमी) नीति की सफलता माना जा रहा है। यह तीन वर्षों में दूसरा अवसर है जब भारतीय कूटनीति ने ऐसा किया — सितंबर 2023 में जी-20 में भी भारत ने रूस और पश्चिमी देशों के मतभेदों के बीच नई दिल्ली घोषणापत्र निकलवाया था। पूर्व राजनयिकों और विशेषज्ञों ने सफलता के साथ-साथ दस्तावेज़ की सीमाएँ भी रेखांकित की हैं।
मुख्य तथ्य
- ब्रिक्स के नई दिल्ली घोषणापत्र में पश्चिम एशिया संघर्ष के संदर्भ में किसी देश का नाम नहीं लिया गया और चिंता सामान्य शब्दों में व्यक्त की गई।
- घोषणापत्र में यूक्रेन का कोई उल्लेख नहीं; 2025 के रियो डी जनेरियो घोषणापत्र में यूक्रेन का एक संदर्भ था, जो इस बार रूसी संवेदनशीलताओं को देखते हुए टाल दिया गया।
- सितंबर 2023 में जी-20 में भारत ने रूस और पश्चिमी देशों के मतभेदों के बीच नई दिल्ली घोषणापत्र स्वीकार करवाया था — तीन साल में दूसरी ऐसी उपलब्धि।
- पूर्व विदेश सचिव निरुपमा मेनन राव: सर्वसम्मति बची, लेकिन केवल सावधानी से सामान्यीकृत भाषा के जरिए; ब्रिक्स जिम्मेदारी तय करने या सामूहिक कार्रवाई में संघर्ष करता है।
- सी. उदय भास्कर (सोसाइटी फॉर पॉलिसी स्टडीज़ के निदेशक) ने दस्तावेज़ को 'बहुत व्यापक' कहा और विदेश मंत्रालय तथा समिट शेरपा सचिव दलेला की सराहना की।
- ब्रह्म चेलानी: एकपक्षीय प्रतिबंधों पर ब्रिक्स की भाषा मुख्यतः पश्चिमी वित्तीय प्रतिबंधों की ओर है, जबकि चीन के महत्वपूर्ण खनिज, रेयर अर्थ व विनिर्माण उपकरण निर्यात प्रतिबंध भी आर्थिक दबाव हैं — दोहरा मानदंड।
- ढाका स्थित अर्थशास्त्र प्रोफेसर गोलाम रसूल (एशिया टाइम्स): दिल्ली घोषणापत्र के 140 पैराग्राफ में से लगभग 100 स्वास्थ्य, खाद्य सुरक्षा, ऊर्जा, वित्त, व्यापार, जलवायु जैसे क्षेत्रों की संरचना बनाते हैं।
- रसूल के अनुसार विकास अध्यायों में 'वेलकम', 'नोट', 'एनकरेज', 'लुक फॉरवर्ड टू', 'एक्नॉलेज' जैसे क्रियापद हावी हैं; न्यू डेवलपमेंट बैंक को हटा दें तो शेष अधिकतर स्वैच्छिक ढाँचे हैं।
समयरेखा
- सितंबर 2023जी-20 शिखर सम्मेलन में भारतीय कूटनीति ने रूस–पश्चिम मतभेदों के बीच नई दिल्ली घोषणापत्र स्वीकार करवाया।
- 2025ब्रिक्स का रियो डी जनेरियो घोषणापत्र, जिसमें यूक्रेन का एक संदर्भ शामिल था।
- वर्ष भर (शिखर सम्मेलन से पहले)ईरान–यूएई मतभेदों के कारण ब्रिक्स में सर्वसम्मति नहीं बन पा रही थी।
- पिछला सप्ताहनई दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन; सर्वसम्मत नई दिल्ली घोषणापत्र स्वीकृत तथा ईरान-यूएई के बीच युद्ध शुरू होने के बाद उच्चतम स्तर की बातचीत।
किसका दाँव
- भारत / विदेश मंत्रालय एवं समिट शेरपा सचिव दलेला — सर्वसम्मति गढ़ने वाली कूटनीतिक साख; ग्लोबल साउथ के नेतृत्व और सामरिक स्वायत्तता की प्रतिष्ठा।
- ईरान और यूएई — पश्चिम एशिया पर तीखे मतभेद; शिखर सम्मेलन ने युद्ध के बीच उच्चतम स्तर की आपसी बातचीत का मंच दिया।
- रूस — यूक्रेन के उल्लेख से बचाव — घोषणापत्र में रूसी संवेदनशीलताओं का ध्यान रखा गया।
- चीन — एकपक्षीय प्रतिबंधों की निंदा के बीच स्वयं भारत सहित साझेदारों पर निर्यात नियंत्रण व बाज़ार पहुँच प्रतिबंध लगाने के आरोप।
- ब्रिक्स समूह — कठिन संवाद जीवित रखने की क्षमता, पर जिम्मेदारी तय करने और संसाधन प्रतिबद्धता में सीमाएँ उजागर।
- न्यू डेवलपमेंट बैंक — रसूल के अनुसार घोषणापत्र में वास्तविक बैलेंस शीट वाली एकमात्र संस्था — क्रियान्वयन क्षमता का केंद्र।
क्यों अहम है
युद्धरत पक्षों से एक साथ संबंध बनाए रखने की भारत की सामरिक स्वायत्तता नीति ने बहुपक्षीय मंचों पर सर्वसम्मति बनवाने की उसकी क्षमता को दो बार सिद्ध किया — 2023 का जी-20 और अब ब्रिक्स। यह भारत की "कन्वीनिंग पावर" और ग्लोबल साउथ में उसकी भूमिका को मजबूत करता है, जिसे नॉर्वेजियन राजनयिक एरिक सोलहाइम ने "गैर-पश्चिमी, लेकिन पश्चिम-विरोधी नहीं" कहा। साथ ही यह बहुपक्षवाद की सीमा भी दिखाता है: सामान्यीकृत भाषा से सहमति बनती है, पर बाध्यकारी प्रतिबद्धता और सामूहिक कार्रवाई नहीं।
UPSC नज़रिया
प्रीलिम्स संकेत
- नई दिल्ली घोषणापत्र (ब्रिक्स) — पश्चिम एशिया संघर्ष पर किसी देश का नाम नहीं, यूक्रेन का कोई उल्लेख नहीं।
- 2025 का ब्रिक्स घोषणापत्र रियो डी जनेरियो में स्वीकृत हुआ था और उसमें यूक्रेन का एक संदर्भ था।
- सितंबर 2023: भारत की अध्यक्षता में जी-20 का नई दिल्ली घोषणापत्र सर्वसम्मति से स्वीकृत।
- न्यू डेवलपमेंट बैंक — ब्रिक्स की वित्तीय संस्था; स्रोत के अनुसार वास्तविक बैलेंस शीट वाली संस्था।
- दिल्ली घोषणापत्र में कुल 140 पैराग्राफ, जिनमें लगभग 100 विकास-सहयोग से संबंधित।
- सी. उदय भास्कर — सोसाइटी फॉर पॉलिसी स्टडीज़ के निदेशक; निरुपमा मेनन राव — पूर्व विदेश सचिव।
मेन्स दृष्टिकोण
ब्रिक्स का नई दिल्ली घोषणापत्र भारत की सामरिक स्वायत्तता की कूटनीतिक उपयोगिता का प्रमाण है: राष्ट्रीय स्थितियों को ध्यान में रखकर स्वीकार्य भाषा गढ़ने की वही रणनीति, जो सितंबर 2023 के जी-20 घोषणापत्र में रूस–पश्चिम मतभेदों के बीच काम आई थी, इस बार ईरान–यूएई मतभेदों के बीच सफल हुई — और अमेरिका-इस्राइल के ईरान विरुद्ध युद्ध के दौरान ईरान-यूएई के उच्चतम स्तरीय संपर्क का मंच भी बना। किंतु सीमाएँ स्पष्ट हैं। निरुपमा मेनन राव के अनुसार सर्वसम्मति केवल सावधानी से सामान्यीकृत भाषा से बची; ब्रिक्स कठिन संवाद जीवित रख सकता है, पर सदस्यों के हितों के टकराव पर जिम्मेदारी तय करने या सामूहिक कार्रवाई में असमर्थ रहता है। ब्रह्म चेलानी एकपक्षीय दबाव-विरोधी भाषा में दोहरा मानदंड देखते हैं, क्योंकि चीन स्वयं महत्वपूर्ण खनिज, रेयर अर्थ, विनिर्माण उपकरण और तकनीकी विशेषज्ञता पर निर्यात नियंत्रण व गैर-टैरिफ बाधाएँ ब्रिक्स साझेदारों, विशेषकर भारत, पर लगाता है। गोलाम रसूल के आकलन में 140 पैराग्राफ में से लगभग 100 विकास-संरचना बनाते हैं, पर उनकी क्रिया-भाषा प्रतिबद्धता नहीं, केवल गतिविधि की घोषणा है। आगे का रास्ता: न्यू डेवलपमेंट बैंक जैसी वास्तविक संसाधन-आधारित संस्थाओं को मजबूत करना, हस्ताक्षर की प्रतीक्षा में पड़े सीमा-शुल्क सहयोग समझौते जैसे लंबित दस्तावेज़ पूरे करना, और समयबद्ध, बाध्यकारी प्रतिबद्धताओं की ओर बढ़ना — भारत के लिए ब्रिक्स को "गैर-पश्चिमी, पर पश्चिम-विरोधी नहीं" रखते हुए ग्लोबल साउथ की सामरिक एजेंसी का माध्यम बनाना।
मुख्य शब्द
- सामरिक स्वायत्तता (स्ट्रैटेजिक ऑटोनॉमी)
- भारत की दीर्घकालिक नीति जो उसे लगभग हर गुट के युद्धरत पक्षों से एक साथ संबंध बनाए रखने की छूट देती है।
- नई दिल्ली घोषणापत्र (ब्रिक्स)
- पिछले सप्ताह के ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का सर्वसम्मत दस्तावेज़; 140 पैराग्राफ, पश्चिम एशिया पर नाम नहीं, यूक्रेन का उल्लेख नहीं।
- न्यू डेवलपमेंट बैंक
- ब्रिक्स की विकास वित्त संस्था; स्रोत के अनुसार घोषणापत्र में वास्तविक बैलेंस शीट वाली संस्था।
- एकपक्षीय दबावकारी उपाय (यूनिलैटरल कोअर्सिव मेजर्स)
- एकतरफा प्रतिबंध व निर्यात नियंत्रण जैसे आर्थिक दबाव के साधन, जिनकी घोषणापत्र में निंदा की गई।
- समिट शेरपा
- शिखर सम्मेलन की बातचीत व दस्तावेज़ तैयार करने वाला वरिष्ठ अधिकारी; भारत के लिए सचिव दलेला।
- ग्लोबल साउथ
- विकासशील व उभरती अर्थव्यवस्थाओं का समूह, जिसके नेतृत्व के लिए एरिक सोलहाइम ने भारत को उपयुक्त बताया।
अभ्यास प्रश्न
- भारत की सामरिक स्वायत्तता की नीति ने जी-20 (2023) और ब्रिक्स (नई दिल्ली) दोनों में सर्वसम्मति बनाने में कैसे मदद की? उदाहरणों सहित परीक्षण करें।
- "ब्रिक्स कठिन संवाद जीवित रख सकता है, पर सामूहिक कार्रवाई नहीं कर सकता।" नई दिल्ली घोषणापत्र के संदर्भ में इस कथन का मूल्यांकन कीजिए।
- एकपक्षीय प्रतिबंधों की निंदा करने वाले ब्रिक्स के भीतर निर्यात नियंत्रण और गैर-टैरिफ बाधाओं का प्रयोग समूह की विश्वसनीयता के लिए क्या चुनौती खड़ी करता है?
सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।
