आंकड़ों की जांच: ब्रिक्स शिखर वादे कितने पूरे हुए

18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में हुआ, जिसके घोषणापत्र में 140 क्रमांकित पैराग्राफ हैं। टोरंटो विश्वविद्यालय के ब्रिक्स रिसर्च ग्रुप की गणना के अनुसार 2023 जोहानिसबर्ग सम्मेलन के बाद समूह का अनुपालन 40 प्रतिशत तक गिरा और 2024 कजान के बाद 61 प्रतिशत पर पहुंचा, जबकि भारत 25 से 69 प्रतिशत पर आया। न्यू डेवलपमेंट बैंक ने 139 परियोजनाओं के लिए 43 अरब डॉलर मंजूर किए और 24.2 अरब डॉलर वितरित किए। आईएमएफ कोटा हिस्सेदारी 2010 से अपरिवर्तित है।

स्रोत

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डेस्क जाँच · स्रोत से तुलना की

डेस्क ने क्या जाँचा (5)
  • The 18th BRICS summit was held in New Delhi on September 12-13, producing a declaration with 140 numbered paragraphs. — Stated in source; year not specified in the text, so avoid adding one.
  • Grouping-wide compliance fell to 40 per cent after the 2023 Johannesburg summit and recovered to 61 per cent after Kazan 2024; India fell to 25 per cent and returned to 69 per cent. — Attributed to the BRICS Research Group at the University of Toronto; source itself notes the Toronto table prints an apparent error for 2016 and 2018 averages.
  • NDB cumulative approvals stand at $43.0 billion for 139 projects, with cumulative disbursements of $24.2 billion. — Attributed to the NDB Annual Report 2025; reference list gives a July 2026 publication date while the text says July, an internal inconsistency.
  • Local-currency financing reached 45.9 per cent of 2025 approvals and 29.3 per cent of the portfolio, against a 30 per cent target; renminbi alone is 21.5 per cent. — Figures appear in source, drawn from the bank's own strategy document and report; source notes flow and stock measures are not identical bases.
  • IMF quota shares have not shifted since 2010; the US holds 17.42 per cent and can block realignment requiring an 85 per cent supermajority. — Figure appears in source with an IMF press release cited in references.

विश्लेषकों की राय राय

AI रणनीतिक मामलों के विश्लेषक

ब्रिक्स की घोषणाएँ लंबी होती जा रही हैं, लेकिन सामरिक दृष्टि से इस समूह का वज़न वादों की संख्या में कभी नहीं था — वह इसमें है कि कितने वादे सरकारों, संस्थाओं और पैसे की कसौटी पर टिकते हैं। टोरंटो के आँकड़ों में जोहान्सबर्ग 2023 के बाद अनुपालन 40 प्रतिशत तक गिरना और कज़ान के बाद 61 प्रतिशत तक लौटना, तथा भारत का 25 से 69 प्रतिशत तक सुधरना, विस्तारित सदस्यता की समन्वय लागत और अध्यक्षता वर्ष के अनुशासन, दोनों की ओर इशारा करता है। न्यू डेवलपमेंट बैंक के 43 अरब डॉलर की मंज़ूरी बनाम 24.2 अरब डॉलर के वितरण और 2010 से अपरिवर्तित आईएमएफ कोटा के साथ पढ़ें, तो ब्रिक्स अभी वैकल्पिक व्यवस्था से ज़्यादा मौजूदा व्यवस्था पर दबाव का औज़ार दिखता है।

  • सैन्य गठबंधन जैसी कोई संधि और निर्णय लागू कराने वाला कोई केंद्रीय अधिकार न होने से राजनीतिक सहमति ही एकमात्र साधन है, इसलिए अनुपालन दर ही इसकी वास्तविक सामरिक ताक़त का सबसे ईमानदार पैमाना है।
  • 40 प्रतिशत तक की गिरावट और 61 प्रतिशत तक की आंशिक वापसी बताती है कि बड़ी सदस्यता में साझा रुख़ को साझा कार्रवाई में बदलना कठिन होता है।
  • भारत का स्कोर अध्यक्षता वर्षों में चढ़ना और बाद में गिरना, स्थायी सामरिक प्रतिबद्धता से ज़्यादा मेज़बानी से केंद्रित हुए नौकरशाही ध्यान का संकेत देता है।
  • 43 अरब डॉलर मंज़ूर और 24.2 अरब डॉलर वितरित के बीच का फ़ासला घोषणा की राजनीति और क्रियान्वयन क्षमता का अंतर है, जो एनडीबी की प्रतिस्पर्धी हैसियत सीमित करता है।
  • 2010 से जमे आईएमएफ कोटा हिस्से बताते हैं कि समूह समानांतर संस्थाएँ क्यों खड़ी करता रहता है — ब्रिक्स की मूल शिकायत अब तक अनसुनी है।

किस पर नज़र रखें — देखना यह है कि अगले अध्यक्षता चक्र में अनुपालन 61 प्रतिशत के आसपास टिकता है या नहीं, और एनडीबी का वितरण अनुपात सुधरता है या नहीं — घोषणा की लंबाई से ज़्यादा ये दो रेखाएँ विस्तारित समूह का असली वज़न बताएँगी।

अनुपालन के आँकड़े एक विश्वविद्यालय शोध समूह द्वारा चुने गए कुछ वादों का मूल्यांकन हैं, और यह खबर न किसी सदस्य देश की मंशा तय करती है, न समूह की आगे की सामरिक दिशा।

गहराई से

शोध सारांश · 8 तथ्य · 10 तारीख़ें · परीक्षा के लिए

सार

पृष्ठभूमि

ब्रिक्स उभरती और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं का समूह है, जो पश्चिम-निर्मित संस्थाओं के प्रभुत्व वाली वैश्विक व्यवस्था में बड़ी भूमिका चाहता है। यह ब्राज़ील, रूस, भारत और चीन के चार-देशीय समूह के रूप में शुरू हुआ, 2011 में दक्षिण अफ्रीका के जुड़ने पर ब्रिक्स बना और 2020 के दशक में इसका विस्तार हुआ। इसके पास कोई संधि या निर्णय लागू कराने वाला केंद्रीय प्राधिकरण नहीं है; इसका मुख्य साधन राजनीतिक सहमति और शिखर घोषणापत्र हैं। 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में 18वें शिखर सम्मेलन के बाद यह सवाल फिर उठा कि घोषणापत्रों के वादों का आगे क्या होता है।

मुख्य तथ्य

  • नई दिल्ली में 12-13 सितंबर को हुए 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का घोषणापत्र श्रृंखला का 18वां वार्षिक घोषणापत्र है और इसमें 140 क्रमांकित पैराग्राफ हैं।
  • टोरंटो विश्वविद्यालय के ब्रिक्स रिसर्च ग्रुप के अनुसार 2009 येकातेरिनबर्ग शिखर में 15 प्रतिबद्धताएँ थीं, 2024 कजान में 137; ब्राज़ीली अध्यक्षता ने 2025 रियो घोषणापत्र में 126 गिनीं।
  • समूह का अनुपालन 2016 गोवा के बाद 89 प्रतिशत और 2018 जोहानिसबर्ग के बाद 85 प्रतिशत रहा, 2023 जोहानिसबर्ग के बाद 40 प्रतिशत गिरा, कजान 2024 के बाद 61 प्रतिशत।
  • भारत ने 2011 सान्या के बाद पूर्ण अनुपालन और 2016 गोवा में 95 प्रतिशत दर्ज किया; 2023 में 25 प्रतिशत (पाँच सदस्यों में सबसे कम), कजान के बाद 69 प्रतिशत।
  • न्यू डेवलपमेंट बैंक (2014 फोर्तालेज़ा) की प्रारंभिक अधिकृत पूँजी 100 अरब डॉलर, अभिदत्त पूँजी 50 अरब डॉलर; इसने 139 परियोजनाओं के लिए 43.0 अरब डॉलर मंजूर किए, 24.2 अरब डॉलर वितरित।
  • एनडीबी पोर्टफोलियो में चीन 9.41 अरब डॉलर (26.4%), भारत 8.86 अरब डॉलर (24.9%), ब्राज़ील 6.69, दक्षिण अफ्रीका 6.41, रूस 3.78 अरब डॉलर; रूस के लेन-देन मार्च 2022 से रोके गए।
  • 2025 में स्थानीय-मुद्रा वित्तपोषण वर्ष की मंजूरियों का 45.9 प्रतिशत रहा और पोर्टफोलियो हिस्सा 29.3 प्रतिशत; रॅन्मिन्बी अकेले 21.5%, रैंड 6.8%, रुपया 1.0%; डॉलर 65.5% से 59.5% पर आया।
  • आईएमएफ का 14वाँ कोटा पुनरीक्षण 2010 में स्वीकृत, 2016 में प्रभावी; दिसंबर 2023 के 16वें पुनरीक्षण में 50 प्रतिशत समानुपातिक वृद्धि हुई पर मत-हिस्सेदारी नहीं बदली; अमेरिका के पास 17.42% कोटा।

समयरेखा

  1. 2009येकातेरिनबर्ग में पहला शिखर सम्मेलन; 15 प्रतिबद्धताएँ; आईएमएफ कोटा पुनर्संयोजन की मांग तब से हर घोषणापत्र में।
  2. 2010आईएमएफ के 14वें कोटा पुनरीक्षण को सदस्यों ने मंजूरी दी।
  3. 2011दक्षिण अफ्रीका के शामिल होने पर समूह ब्रिक्स बना; सान्या शिखर से अनुपालन आकलन शुरू; भारत का पूर्ण अनुपालन।
  4. 2014फोर्तालेज़ा में न्यू डेवलपमेंट बैंक पर सहमति और 100 अरब डॉलर की आकस्मिक आरक्षित व्यवस्था (सीआरए) संधि पर हस्ताक्षर।
  5. 2016एनडीबी ने शंघाई से पहला ऋण दिया; 14वाँ आईएमएफ पुनरीक्षण अमेरिकी कांग्रेस की पुष्टि के बाद प्रभावी; गोवा घोषणापत्र में रेटिंग एजेंसी पर विचार, फैसला टला; अनुपालन 89%।
  6. 2017श्यामेन घोषणापत्र में ब्रिक्स रेटिंग एजेंसी पर कोई उल्लेख नहीं।
  7. मार्च 2022एनडीबी ने रूस से जुड़े लेन-देन रोक दिए।
  8. 2022-2026एनडीबी की सामान्य रणनीति में कुल वित्तपोषण के 30 प्रतिशत को सदस्य देशों की स्थानीय मुद्राओं में देने का लक्ष्य (2021 के अंत में 23 प्रतिशत से)।
  9. अक्टूबर 2023एनडीबी का पहला रुपया बॉन्ड जारी करने का लक्ष्य, जो पूरा नहीं हुआ।
  10. 2023 जोहानिसबर्ग शिखर के बादसमूह का अनुपालन 40 प्रतिशत, भारत का 25 प्रतिशत।

किसका दाँव

  • ब्रिक्स सदस्य सरकारें — घोषणापत्रों में की गई प्रतिबद्धताओं का पालन ही समूह की विश्वसनीयता तय करता है; लागू कराने वाला कोई प्राधिकरण नहीं।
  • भारत (अध्यक्षता और दूसरा सबसे बड़ा उधारकर्ता) — अनुपालन स्कोर में तीव्र उतार-चढ़ाव; एनडीबी में 8.86 अरब डॉलर पोर्टफोलियो, 60% वितरण; डॉलर-विरोध से स्पष्ट दूरी।
  • न्यू डेवलपमेंट बैंक (एनडीबी), शंघाई — मंजूरी-वितरण के अंतर, स्थानीय मुद्रा लक्ष्य और रुपया बॉन्ड कार्यक्रम पर उसकी साख टिकी है।
  • आईएमएफ और अमेरिका — कोटा पुनर्संयोजन के लिए 85 प्रतिशत सुपरमेजॉरिटी आवश्यक; अमेरिका के 17.42 प्रतिशत कोटा से अकेले वीटो संभव।
  • चीन — एनडीबी पोर्टफोलियो में सबसे बड़ा हिस्सा (26.4%), स्थानीय-मुद्रा ऋण का लगभग तीन-चौथाई रॅन्मिन्बी में; सीआरए में 41 अरब डॉलर की प्रतिबद्धता।
  • रूस — मार्च 2022 से एनडीबी लेन-देन रुके; मंजूरियाँ 3.78 अरब डॉलर पर ठहरी हुईं।
  • मध्य प्रदेश के ग्रामीण उपयोगकर्ता — एनडीबी वित्तपोषित जिला-सड़क परियोजना से औसत यात्रा 83 से 37 मिनट और स्वास्थ्य केंद्र तक 52 से 28 मिनट हुई।
  • टोरंटो विश्वविद्यालय का ब्रिक्स रिसर्च ग्रुप — 2009 से प्रतिबद्धताओं की गणना और 2011 सान्या से अनुपालन आकलन; जी7-जी20 से तुलना संभव बनाता है।

क्यों अहम है

ब्रिक्स के पास न संधि है न प्रवर्तन तंत्र, इसलिए उसकी कसौटी घोषणापत्रों की लंबाई नहीं बल्कि यह है कि वादे सरकारों, संस्थाओं और पैसे की परीक्षा में कितने टिकते हैं। एनडीबी के आंकड़े दिखाते हैं कि मंजूरी और वितरण के बीच बड़ा अंतर है और डॉलर अब भी बैंक के तीन-पाँचवें हिस्से को वित्तपोषित करता है। साथ ही, 16 वर्ष की मांग के बाद भी आईएमएफ मत-हिस्सेदारी अपरिवर्तित है, जो वैश्विक शासन सुधार की सीमाएँ उजागर करती है।

UPSC नज़रिया

प्रीलिम्स संकेत

  • 18वाँ ब्रिक्स शिखर सम्मेलन: 12-13 सितंबर, नई दिल्ली; घोषणापत्र में 140 क्रमांकित पैराग्राफ।
  • न्यू डेवलपमेंट बैंक: 2014 फोर्तालेज़ा में सहमति, मुख्यालय शंघाई, पहला ऋण 2016; अधिकृत पूँजी 100 अरब डॉलर, अभिदत्त 50 अरब डॉलर।
  • आकस्मिक आरक्षित व्यवस्था (सीआरए): 2014 फोर्तालेज़ा संधि, 100 अरब डॉलर; किसी सदस्य ने कभी उपयोग नहीं किया; 70% अधिकतम पहुँच आईएमएफ कार्यक्रम से जुड़ी।
  • आईएमएफ: 14वाँ कोटा पुनरीक्षण 2010 में स्वीकृत, 2016 में प्रभावी; 16वाँ (दिसंबर 2023) 50% समानुपातिक वृद्धि; पुनर्संयोजन के लिए 85% सुपरमेजॉरिटी, अमेरिका के पास 17.42%।
  • उभरती व विकासशील अर्थव्यवस्थाएँ विश्व उत्पादन का लगभग 60 प्रतिशत करती हैं पर मताधिकार लगभग 40 प्रतिशत है।
  • एनडीबी की 2022-26 रणनीति: कुल वित्तपोषण का 30 प्रतिशत स्थानीय मुद्राओं में; 2025 के अंत में पोर्टफोलियो हिस्सा 29.3 प्रतिशत।

मेन्स दृष्टिकोण

ब्रिक्स की प्रभावशीलता का प्रश्न इसकी संस्थागत बुनावट से जुड़ा है: कोई संधि, कोई सचिवालय-सदृश प्रवर्तन प्राधिकरण नहीं, केवल राजनीतिक सहमति। इसका परिणाम यह है कि घोषणापत्र लंबे होते गए (2009 में 15 प्रतिबद्धताएँ, 2024 कजान में 137, 2025 रियो में 126, दिल्ली में 140 पैराग्राफ) पर अनुपालन अस्थिर रहा—2016 में 89 प्रतिशत से 2023 में 40 प्रतिशत और 2024 में 61 प्रतिशत; भारत का स्कोर 25 से 69 प्रतिशत के बीच झूला, और मेज़बानी का वर्ष अगले चक्र में स्कोर बढ़ाता दिखता है, जो प्रशासनिक ध्यान की भूमिका बताता है। दूसरा पैमाना संस्थागत उत्पाद है: एनडीबी ने 139 परियोजनाओं के लिए 43 अरब डॉलर मंजूर किए पर वितरण 24.2 अरब डॉलर रहा—अर्थात मंजूरी राजनीतिक इच्छा दर्शाती है, वितरण क्रियान्वयन क्षमता; मध्य प्रदेश सड़क परियोजना (350 मिलियन डॉलर ऋण, 1,551 किमी सड़कें, यात्रा समय 83 से 37 मिनट) लाभ दिखाती है, पर मूल्यांकन में बैंक का प्रदर्शन 'मध्यम असंतोषजनक' आँका गया। तीसरा, मुद्रा: स्थानीय-मुद्रा हिस्सा 2025 में 29.3 प्रतिशत तक पहुँचा, पर इसका लगभग तीन-चौथाई रॅन्मिन्बी है, रुपया केवल 1.0 प्रतिशत, और डॉलर 59.5 प्रतिशत—साथ ही भारत (जयशंकर, मार्च 2025; दास, दिसंबर 2024) डॉलर-विरोधी एजेंडे से स्पष्ट दूरी रखता है। सुधार की दिशा वही है जो स्रोत बताता है: वितरण-दर सुधारना, भुगतान प्रणालियों की अंतर-संचालनीयता के लिए संदेश-प्रारूप, विधिक कवच और पर्यवेक्षण पर सहमति, वॉस्ट्रो खातों व स्थानीय-मुद्रा व्यापार समझौतों का विस्तार, और आईएमएफ कोटा पुनर्संयोजन की मांग जारी रखना—जहाँ 85 प्रतिशत सुपरमेजॉरिटी की शर्त और अमेरिकी वीटो-क्षमता निर्णायक अड़चन है।

मुख्य शब्द

अनुपालन स्कोर (Compliance Score)
टोरंटो विश्वविद्यालय के ब्रिक्स रिसर्च ग्रुप द्वारा आकलन कि सदस्य ने चुनी हुई शिखर प्रतिबद्धताएँ पूरी कीं, आंशिक कीं या नहीं कीं।
न्यू डेवलपमेंट बैंक (एनडीबी)
2014 फोर्तालेज़ा में सहमत, शंघाई स्थित बैंक जो सरकारों व राज्य संस्थाओं को अधोसंरचना व संधारणीय विकास हेतु ऋण देता है, मुख्यतः बॉन्ड बाज़ार से धन जुटाकर।
आकस्मिक आरक्षित व्यवस्था (सीआरए)
पाँच संस्थापक केंद्रीय बैंकों की 100 अरब डॉलर की परस्पर हार्ड-करेंसी ऋण व्यवस्था; अब तक केवल परीक्षण-अभ्यास हुए, वास्तविक उपयोग नहीं।
आईएमएफ कोटा
किसी सदस्य की आईएमएफ में शेयरधारिता, जो उसका अंशदान, उधार सीमा और मतशक्ति तय करती है; पुनर्संयोजन के लिए 85 प्रतिशत बहुमत आवश्यक।
वॉस्ट्रो खाता
विदेशी बैंक द्वारा भारतीय बैंक में रुपये में रखा खाता, जिससे द्विपक्षीय व्यापार तीसरी मुद्रा के बिना निपटाया जा सके।
अंतर-संचालनीयता (Interoperability)
ऐसी भुगतान व्यवस्था जिसमें भारत के बैंक से भेजा भुगतान ब्राज़ील के बैंक को सीधे मिले, विदेशी बैंकों की श्रृंखला और डॉलर रूपांतरण के बिना।

अभ्यास प्रश्न

  1. ब्रिक्स जैसे गैर-संधि आधारित समूहों की प्रभावशीलता को कैसे मापा जाए? अनुपालन स्कोर और एनडीबी के मंजूरी-वितरण अंतर के आलोक में परीक्षण कीजिए।
  2. 'न्यू डेवलपमेंट बैंक का स्थानीय-मुद्रा लक्ष्य पूरा होने के करीब है, फिर भी डी-डॉलरीकरण दूर है।' आंकड़ों के आधार पर इस कथन का मूल्यांकन कीजिए।
  3. आईएमएफ कोटा पुनर्संयोजन 2010 के बाद ठहर गया है। इसके कारण क्या हैं और वैश्विक वित्तीय शासन में विकासशील देशों के प्रतिनिधित्व के लिए इसके क्या निहितार्थ हैं?

सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।

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