आईआईटी में पांच साल में 53 छात्रों की मौत, आधे से अधिक एससी, एसटी, ओबीसी

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार 2020-21 से 2024-25 के बीच देश के आईआईटी संस्थानों में कम से कम 53 छात्रों की मौत हुई, जिनमें 45 आत्महत्याएं और आठ अस्वाभाविक मौतें शामिल हैं। एससी, एसटी और ओबीसी छात्रों की 29 (54.7%), सामान्य वर्ग की 23 और ईडब्ल्यूएस की एक मौत दर्ज हुई। मौतें 2020-21 में पांच से बढ़कर 2023-24 में 17 और 2024-25 में 19 हो गईं। आईआईटी खड़गपुर, दिल्ली और हैदराबाद में सात-सात मौतें हुईं। 23 परिसरों में 108 काउंसलर हैं।

स्रोत

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डेस्क जाँच · कुछ दावे ध्यान से पढ़ें

डेस्क ने क्या जाँचा (5)
  • 53 students died across IITs between 2020-21 and 2024-25, including 45 suicides and eight unnatural deaths. — Attributed to official data accessed by HT, based on IITs' submissions to the education ministry; figure appears in source.
  • SC, ST and OBC students accounted for 29 deaths, or 54.7% of the total. — Category-wise breakdown (general 23, OBC 12, SC 10, ST 7, EWS 1) appears in source and totals 53, internally consistent.
  • DoHE under secretary Nilesh Chandra Srivastava wrote to IITs on December 1, 2025 seeking data for a Lok Sabha question scheduled December 8, 2025, but the data was not tabled. — Attributed to correspondence seen by HT; source also notes the question's listed title related to PG and PhD enrolment.
  • IIT Kharagpur, IIT Delhi and IIT Hyderabad reported seven deaths each, the highest. — Institution-wise figures appear in source, drawn from the same official dataset; not independently verifiable.
  • IITs had 108 counsellors across 23 campuses as of December 1, 2025. — Attributed to official data; no document cited by name.

विश्लेषकों की राय राय

AI नीति विश्लेषक

यह केवल व्यक्तिगत त्रासदियों का जोड़ नहीं है — यह आंकड़ा संस्थागत नीति-रचना की कमियों की ओर इशारा करता है। 2020-21 में पाँच मौतों से 2024-25 में 19 तक पहुँचना, और इनमें 84.9% आत्महत्याएँ होना बताता है कि सहायता तंत्र माँग के अनुपात में नहीं बढ़ा। 23 परिसरों में मात्र 108 काउंसलर क्षमता की समस्या दर्शाते हैं, लेकिन स्टोरी में उद्धृत शिक्षाविदों का तर्क भी अहम है कि केवल काउंसलिंग समाधान नहीं है।

  • 2022-23 तक मौतें छह या उससे कम थीं, फिर 2023-24 में 17 और 2024-25 में 19 हो गईं; यह वास्तविक वृद्धि है या बेहतर दर्ज-प्रक्रिया का नतीजा — किसी भी नीति समीक्षा का पहला प्रश्न यही है।
  • एससी, एसटी और ओबीसी विद्यार्थियों की मौतें 54.7% (29) हैं, जो स्टोरी के अनुसार इन वर्गों के प्रवेश अनुपात के अनुरूप है; पर इन वर्गों की लगभग सभी मौतें आत्महत्याएँ हैं, जबकि सामान्य वर्ग की 23 में सात अस्वाभाविक — यह अंतर अलग से जाँच माँगता है।
  • 23 परिसरों पर 108 काउंसलर यानी औसतन प्रति परिसर पाँच से भी कम — यह स्तर रोकथाम के बजाय संकट-प्रबंधन भर के लिए पर्याप्त है।
  • जुलाई 2023 में मंत्रालय ने संसद को 2018-2023 के बीच 39 आत्महत्याएँ बताई थीं; अब पाँच वर्षों में 45 आत्महत्याएँ यह संकेत देती हैं कि दीर्घकालिक प्रवृत्ति कम नहीं हो रही।
  • स्टोरी के अनुसार मंत्रालय को आईआईटी से जवाब मिले, पर आंकड़े संसद में पेश नहीं किए गए — यह पारदर्शिता और जवाबदेही का प्रश्न भी है।

किस पर नज़र रखें — देखना होगा कि यूजीसी (समता प्रोत्साहन) विनियम, 2012 का अमल कहाँ पहुँचा है, जाति-भेदभाव की शिकायतों का डेटा क्या कहता है, और ये आंकड़े औपचारिक रूप से संसद के समक्ष रखे जाते हैं या नहीं।

यह डेटा मौतों के कारण स्थापित नहीं करता; स्टोरी में इन मौतों को सीधे जातिगत भेदभाव, शैक्षणिक दबाव या संस्थागत चूक से जोड़ने वाला प्रमाण नहीं है, न ही परिसरों के नामांकन के अनुपात में दर दी गई है।

गहराई से

शोध सारांश · 8 तथ्य · 6 तारीख़ें · परीक्षा के लिए

सार

पृष्ठभूमि

एचटी द्वारा प्राप्त आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार 2020-21 से 2024-25 के बीच देश के आईआईटी संस्थानों में कम से कम 53 छात्रों की मौत हुई, जिनमें 45 आत्महत्याएं और आठ अस्वाभाविक मौतें शामिल हैं। ये आंकड़े आईआईटी द्वारा शिक्षा मंत्रालय को दी गई जानकारी पर आधारित हैं, जो लोकसभा के एक प्रश्न के जवाब में मांगी गई थी, लेकिन संसद में पेश नहीं की गई। आंकड़ों में आधे से अधिक मौतें एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग के छात्रों की हैं, जिससे कैंपस में शैक्षणिक दबाव, सामाजिक अलगाव और समावेशन से जुड़े ढांचागत सवाल उठे हैं।

मुख्य तथ्य

  • 2020-21 से 2024-25 के बीच आईआईटी संस्थानों में कम से कम 53 छात्रों की मौत — 45 आत्महत्याएं और 8 अस्वाभाविक मौतें; कुल मौतों में आत्महत्याओं की हिस्सेदारी 84.9%।
  • वर्षवार मौतें: 2020-21 में 5, 2021-22 में 6, 2022-23 में 6, 2023-24 में 17 और 2024-25 में 19।
  • श्रेणीवार: सामान्य वर्ग 23 (43.4%), ओबीसी 12 (22.6%), एससी 10 (18.9%), एसटी 7 (13.2%), ईडब्ल्यूएस 1 (1.9%); एससी-एसटी-ओबीसी मिलाकर 29 यानी 54.7%।
  • सभी 12 ओबीसी, सभी 7 एसटी और एकमात्र ईडब्ल्यूएस मौत आत्महत्या दर्ज हुई; 10 एससी मौतों में 9 आत्महत्याएं; 23 सामान्य वर्ग मौतों में 7 अस्वाभाविक।
  • संस्थानवार सर्वाधिक मौतें: आईआईटी खड़गपुर, आईआईटी दिल्ली और आईआईटी हैदराबाद में सात-सात; आईआईटी कानपुर व आईआईटी (बीएचयू) वाराणसी में छह-छह; आईआईटी मद्रास में पांच।
  • केवल आत्महत्याओं में आईआईटी हैदराबाद सबसे आगे (7), उसके बाद खड़गपुर, दिल्ली और कानपुर (6-6); अस्वाभाविक मौतों में बीएचयू वाराणसी व पटना (2-2)।
  • 1 दिसंबर 2025 तक 23 आईआईटी परिसरों में कुल 108 काउंसलर थे।
  • जुलाई 2023 में शिक्षा मंत्रालय ने संसद को बताया था कि 2018 से 2023 के बीच आईआईटी में 39 छात्रों ने आत्महत्या की।

समयरेखा

  1. 2018 से 2023मंत्रालय के अनुसार आईआईटी में इस पांच वर्ष की अवधि में 39 छात्रों ने आत्महत्या की।
  2. जुलाई 2023केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने संसद में आईआईटी में 39 छात्र आत्महत्याओं की जानकारी दी।
  3. 2023-24आईआईटी में मौतों की संख्या बढ़कर 17 हुई (2022-23 में 6 के मुकाबले)।
  4. 2024-25मौतें 19 दर्ज; इनमें 6 अस्वाभाविक मौतें, सामान्य वर्ग 9 और ओबीसी-एससी-एसटी मिलाकर 10।
  5. 1 दिसंबर 2025उच्च शिक्षा विभाग के अवर सचिव नीलेश चंद्र श्रीवास्तव ने आईआईटी को पत्र लिखकर जानकारी मांगी; इसी तिथि तक 23 परिसरों में 108 काउंसलर।
  6. 8 दिसंबर 2025कांग्रेस सांसद के.सी. वेणुगोपाल का लोकसभा प्रश्न (डायरी संख्या 3682) निर्धारित; मंत्रालय को उत्तर मिले, पर आंकड़े संसद में पेश नहीं हुए।

किसका दाँव

  • आईआईटी छात्र, विशेषकर एससी/एसटी/ओबीसी और ईडब्ल्यूएस वर्ग — शैक्षणिक दबाव, सामाजिक अलगाव और भेदभाव के आरोपों के बीच जीवन, मानसिक स्वास्थ्य और शिक्षा की निरंतरता।
  • 23 आईआईटी परिसर और उनके प्रशासन — मौतों की बढ़ती संख्या, केवल 108 काउंसलर की क्षमता और रोकथाम तंत्र की जवाबदेही।
  • शिक्षा मंत्रालय / उच्च शिक्षा विभाग (डीओएचई) — आईआईटी से आंकड़े जुटाना और संसद में जानकारी रखने की पारदर्शिता; आंकड़े पेश न होने पर सवाल।
  • संसद एवं सांसद के.सी. वेणुगोपाल — नामांकन, जातिगत भेदभाव की शिकायतों, आत्महत्याओं और यूजीसी (समता प्रोत्साहन) विनियम, 2012 के अनुपालन पर विधायी निगरानी।
  • शिक्षाविद व संकाय सदस्य (जैसे प्रो. वी. रामगोपाल राव, कुलपति, बिट्स पिलानी और पूर्व निदेशक, आईआईटी दिल्ली) — संकाय-छात्र संवाद बढ़ाने और संकट प्रबंधन से रोकथाम की ओर बढ़ने की सिफारिश।
  • आईआईटी बॉम्बे परिसर व प्रदर्शनकारी — दूसरे वर्ष के छात्र की आत्महत्या के मामले में न्याय की मांग; पवई में कांग्रेस कार्यकर्ताओं का मोमबत्ती प्रदर्शन।

क्यों अहम है

देश के सबसे प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थानों में मौतों की संख्या 2020-21 के पांच से बढ़कर 2024-25 में 19 हो गई, और आधे से अधिक मौतें वंचित वर्गों के छात्रों की हैं — यह उच्च शिक्षा में समावेशन और मानसिक स्वास्थ्य ढांचे की गंभीर कमी दर्शाता है। 23 परिसरों के लिए मात्र 108 काउंसलर होने से पता चलता है कि सहायता तंत्र मांग के अनुपात में नहीं है। आंकड़े मंत्रालय के पास पहुंचने के बाद भी संसद में पेश न होना पारदर्शिता और जवाबदेही का प्रश्न खड़ा करता है।

UPSC नज़रिया

प्रीलिम्स संकेत

  • 2020-21 से 2024-25: आईआईटी में 53 छात्र मौतें — 45 आत्महत्याएं (84.9%) और 8 अस्वाभाविक मौतें।
  • एससी+एसटी+ओबीसी मौतें 29 (54.7%); सामान्य 23 (43.4%), ईडब्ल्यूएस 1 (1.9%)।
  • सर्वाधिक मौतें: आईआईटी खड़गपुर, दिल्ली, हैदराबाद — सात-सात; आत्महत्याओं में हैदराबाद सर्वाधिक (7)।
  • 1 दिसंबर 2025 तक 23 आईआईटी परिसरों में 108 काउंसलर।
  • यूजीसी (समता प्रोत्साहन) विनियम, 2012 — जातिगत भेदभाव रोकने से जुड़े विनियम, जिसके अनुपालन पर लोकसभा में प्रश्न पूछा गया।
  • जुलाई 2023: मंत्रालय ने संसद को बताया — 2018-2023 में आईआईटी में 39 छात्र आत्महत्याएं।

मेन्स दृष्टिकोण

आईआईटी में 2020-21 से 2024-25 के बीच 53 छात्रों की मौत (45 आत्महत्याएं) और इनमें 54.7% हिस्सेदारी एससी, एसटी व ओबीसी छात्रों की होना भारत के उच्च शिक्षा तंत्र में मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक समावेशन के दोहरे संकट को उजागर करता है। स्रोत के अनुसार शिक्षाविद इसके कारणों में शैक्षणिक दबाव, सापेक्ष ग्रेडिंग, सामाजिक अलगाव, संकाय-छात्र संवाद की कमी, रोजगार संबंधी चिंता और समावेशन से जुड़े ढांचागत मुद्दे गिनाते हैं; यह भी उल्लेखनीय है कि सभी ओबीसी और एसटी मौतें तथा 10 में 9 एससी मौतें आत्महत्या के रूप में दर्ज हुईं, जबकि सामान्य वर्ग की 23 में 7 अस्वाभाविक थीं। संस्थागत क्षमता की सीमा स्पष्ट है — 23 परिसरों के लिए केवल 108 काउंसलर। जवाबदेही का पहलू भी है: मंत्रालय ने 1 दिसंबर 2025 को आईआईटी से आंकड़े मांगे, उत्तर मिले, पर 8 दिसंबर 2025 के प्रश्न के लिए ये आंकड़े संसद में पेश नहीं किए गए। आगे का रास्ता, जैसा प्रो. वी. रामगोपाल राव सुझाते हैं, संकट प्रबंधन से रोकथाम की ओर बढ़ना है — कल्याण (wellbeing) को कैंपस जीवन में एकीकृत करना, संकाय-छात्र संवाद मजबूत करना, तथा यूजीसी (समता प्रोत्साहन) विनियम, 2012 के प्रभावी अनुपालन एवं जातिगत भेदभाव की शिकायतों के पारदर्शी निपटान के साथ केवल काउंसलिंग पर निर्भरता से आगे जाना।

मुख्य शब्द

अस्वाभाविक मौत (Unnatural death)
आत्महत्या से भिन्न श्रेणी की मौत; आईआईटी आंकड़ों में पांच वर्षों में 8 ऐसी मौतें दर्ज, जिनमें 2024-25 में 6।
यूजीसी (समता प्रोत्साहन) विनियम, 2012
उच्च शिक्षा संस्थानों में समता सुनिश्चित करने से जुड़े यूजीसी विनियम, जिसके कार्यान्वयन की स्थिति लोकसभा प्रश्न में पूछी गई।
तारांकित प्रश्न (Starred Question)
लोकसभा में मौखिक उत्तर वाला प्रश्न; यहां अस्थायी रूप से स्वीकृत प्रश्न (डायरी संख्या 3682) 8 दिसंबर 2025 के लिए निर्धारित था।
ईडब्ल्यूएस (EWS)
आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग; आईआईटी आंकड़ों में इस वर्ग की एक मौत (1.9%) दर्ज, जो आत्महत्या थी।
उच्च शिक्षा विभाग (डीओएचई)
शिक्षा मंत्रालय का विभाग, जिसके अवर सचिव ने 1 दिसंबर 2025 को आईआईटी से मौत संबंधी आंकड़े मांगे।
सापेक्ष ग्रेडिंग (Relative grading)
अन्य छात्रों के प्रदर्शन की तुलना में अंक देने की प्रणाली, जिसे शिक्षाविद कैंपस में शैक्षणिक दबाव का एक कारण बताते हैं।

अभ्यास प्रश्न

  1. आईआईटी में छात्र आत्महत्याओं में एससी, एसटी और ओबीसी छात्रों की असमान हिस्सेदारी के कारणों का परीक्षण करें और उच्च शिक्षा संस्थानों में समावेशन मजबूत करने के उपाय सुझाएं।
  2. "तकनीकी संस्थानों में मानसिक स्वास्थ्य के लिए केवल काउंसलिंग पर निर्भरता पर्याप्त नहीं है।" आईआईटी के हाल के आंकड़ों के आलोक में इस कथन का मूल्यांकन करें।
  3. संसद में मांगे गए आंकड़े मंत्रालय को प्राप्त होने के बाद भी पेश न होना विधायी जवाबदेही के लिए क्या संकेत देता है? चर्चा करें।

सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।

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