गुंड्रेवुला परियोजना लंबित; 2.65 लाख एकड़ को लाभ का अनुमान
तुंगभद्रा नदी पर सुंकेसुला जलाशय से 15 किलोमीटर ऊपर सी. बेलगल मंडल में 20.15 टीएमसी क्षमता की प्रस्तावित गुंड्रेवुला परियोजना अब तक नहीं बनी है, साक्षी ने बताया। विस्तृत परियोजना रिपोर्ट 30 अप्रैल 2011 को सरकार को सौंपी गई और 21 फरवरी 2019 के जीओ 154 से 2,890 करोड़ रुपये की प्रशासनिक मंजूरी दी गई। पूरा होने पर 2.65 लाख एकड़ को सिंचाई तथा कर्नूल शहर व आसपास के गांवों को पेयजल मिलने का अनुमान है।
स्रोत
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डेस्क ने क्या जाँचा (5)
- Proposed Gundrevula reservoir would have 20.15 TMC storage, 15 km upstream of Sunkesula on the Tungabhadra in C. Belagal mandal — Figures and location appear in source; no official document cited beyond the DPR reference.
- DPR was submitted to the government on 30 April 2011 by then EE Subbarayudu; Rs 53 lakh was sanctioned for the DPR in 2009 — Dates, amount and official named in source; not independently verifiable here.
- GO 154 of 21 February 2019 gave administrative sanction for Rs 2,890 crore — GO number, date and amount specified in source; attributed to the then government.
- Over 200 TMC on average flows yearly from Sunkesula into the Krishna, and 341.99 TMC was released downstream last year — Figures appear in source with no issuing agency named.
- Project would irrigate 2.65 lakh acres and solve drinking water problems in Kurnool city and nearby villages — Presented as projected benefit; partly echoed by retired deputy superintending engineer Srinivasa Reddy, no official study cited.
विश्लेषकों की राय राय
गुंड्रेवुला मूलतः लागत-लाभ का सवाल है: 2019 में दी गई 2,890 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति के बदले अनुमानित लाभ है 2.65 लाख एकड़ की सिंचाई और कर्नूल शहर सहित आसपास के गांवों को पेयजल। यानी प्रति एकड़ पूंजी लागत एक लाख रुपये से भी कम — ऐसे बेसिन में यह आमतौर पर आकर्षक अनुपात है, जहां रिपोर्ट के अनुसार सुंकेसुला से औसतन हर साल 200 टीएमसी से अधिक पानी नीचे चला जाता है (पिछले साल 341.99 टीएमसी)। फिर भी डीपीआर 2011 में सरकार तक पहुंचा, जीओ 2019 में आया, और काम शुरू नहीं हुआ — यही देरी असली कीमत है, क्योंकि निर्माण और पुनर्वास का खर्च समय के साथ बढ़ता है।
- लाभ दोहरा है: वर्षा-आधारित खेती पर निर्भर किसानों के लिए उपज की स्थिरता, और कर्नूल नगर निगम के लिए भरोसेमंद जलापूर्ति — दोनों उत्पादन बढ़ाने से ज्यादा आय की अनिश्चितता घटाते हैं।
- रिपोर्ट के मुताबिक जहां दस में आठ साल सूखा रहता है, वहां भंडारण क्षमता बीमे की तरह काम करती है और फसल-ऋण संकट व पलायन का दबाव कम कर सकती है।
- 2019 का 2,890 करोड़ रुपये का अनुमान आज की कीमत नहीं माना जा सकता; सामग्री और मजदूरी की बढ़ी लागत के हिसाब से संशोधित आंकड़ा खबर में नहीं है।
- पुनर्वास लागत तुलनात्मक रूप से सीमित रह सकती है, क्योंकि रिपोर्ट के अनुसार 2007 की बाढ़ के बाद वाईएस सरकार ने कुछ डूब-क्षेत्र गांवों को आरएंडआर मुआवजा दिया था — पर शेष गांवों की देनदारी का आकलन नहीं है।
- सुंकेसुला की क्षमता केवल 1.2 टीएमसी होना और विभाजन के बाद उसका अंतरराज्यीय परियोजना बन जाना — ऊपरी भंडारण में निवेश का यही मुख्य आर्थिक तर्क है।
किस पर नज़र रखें — देखने वाली बात: संशोधित लागत अनुमान, बजट में वास्तविक आवंटन और निविदा प्रक्रिया की प्रगति — धन आवंटन के बिना प्रशासनिक स्वीकृति का अर्थ आमतौर पर एक और बजट चक्र गंवाना होता है।
2.65 लाख एकड़ और 2,890 करोड़ रुपये प्रस्ताव-चरण के अनुमान हैं; खबर स्वतंत्र लाभ-लागत मूल्यांकन, वर्तमान संशोधित लागत, पर्यावरण मंजूरी, अंतरराज्यीय जल आवंटन की स्थिति या देरी के सरकारी कारणों को स्थापित नहीं करती।
गहराई से
शोध सारांश · 8 तथ्य · 7 तारीख़ें · परीक्षा के लिएसार
पृष्ठभूमि
तुंगभद्रा नदी पर सुंकेसुला जलाशय से 15 किलोमीटर ऊपर, कोडुमूरु निर्वाचन क्षेत्र के सी. बेलगल मंडल में गुंड्रेवुला और रंगापुरम के इलाके में 20.15 टीएमसी भंडारण क्षमता का जलाशय बनाने का प्रस्ताव लंबे समय से लंबित है। रायलसीमा राज्य का सबसे सूखाग्रस्त इलाका है, जहां हर दस साल में आठ साल सूखा रहता है और खेती मुख्यतः वर्षा पर निर्भर है। सुंकेसुला जलाशय से हर साल औसतन 200 टीएमसी से अधिक पानी कृष्णा नदी में जाकर समुद्र में बह जाता है, जबकि कर्नूल और वाईएसआर जिले पानी की किल्लत से जूझते हैं। साक्षी की रिपोर्ट के अनुसार डीपीआर 2011 में ही सरकार को सौंप दी गई थी, लेकिन निर्माण अब तक शुरू नहीं हुआ।
मुख्य तथ्य
- प्रस्तावित गुंड्रेवुला जलाशय की भंडारण क्षमता 20.15 टीएमसी है; स्थान सी. बेलगल मंडल में गुंड्रेवुला–रंगापुरम परिधि, सुंकेसुला जलाशय से 15 किमी ऊपर।
- परियोजना पूरी होने पर 2.65 लाख एकड़ आयकट को सिंचाई तथा आसपास के गांवों व कर्नूल नगर निगम को पेयजल मिलने का अनुमान।
- सुंकेसुला जलाशय से हर साल औसतन 200 टीएमसी से अधिक पानी कृष्णा में मिलकर समुद्र में चला जाता है; पिछले साल 341.99 टीएमसी से अधिक पानी नीचे छोड़ा गया।
- 30 अप्रैल 2011 को तत्कालीन ईई सुब्बरायुडु ने गुंड्रेवुला परियोजना की डीपीआर सरकार को सौंपी।
- 21 फरवरी 2019 को जीओ 154 जारी कर 2,890 करोड़ रुपये की प्रशासनिक मंजूरी दी गई।
- 2009 में तत्कालीन सरकार ने डीपीआर के लिए 53 लाख रुपये मंजूर किए थे।
- सुंकेसुला बैराज की क्षमता केवल 1.2 टीएमसी है; राज्य विभाजन के बाद यह अंतरराज्यीय परियोजना बन गई और तुम्मिला लिफ्ट के जरिये तेलंगाना पानी खींच रहा है।
- 2007 में तुंगभद्रा की बाढ़ के बाद वाईएस राजशेखर रेड्डी सरकार ने आर एंड आर पैकेज के तहत कुछ डूब क्षेत्र गांवों को मुआवजा दिया था।
समयरेखा
- वाईएस राजशेखर रेड्डी के कार्यकाल मेंजनप्रतिनिधियों और जन संगठनों की मांग पर सीएम ने परियोजना की व्यवहार्यता जांचने के निर्देश दिए; बाद में उनका निधन हो गया।
- 2007तुंगभद्रा में बाढ़; तटवर्ती गांव डूबे, सरकार ने आर एंड आर पैकेज के तहत कुछ गांवों को मुआवजा देकर सुरक्षित स्थानों पर जाने को कहा।
- 2009तत्कालीन सरकार ने डीपीआर तैयार करने के लिए 53 लाख रुपये मंजूर किए।
- 30 अप्रैल 2011तत्कालीन ईई सुब्बरायुडु ने परियोजना की डीपीआर सरकार को सौंपी।
- राज्य विभाजन के बादपरियोजना प्रस्ताव किनारे रख दिया गया; किरण कुमार रेड्डी और बाद में चंद्रबाबू सरकारों ने निर्माण की अनदेखी की।
- 21 फरवरी 2019चुनाव से पहले चंद्रबाबू सरकार ने जीओ 154 जारी कर 2,890 करोड़ रुपये की प्रशासनिक मंजूरी दी।
- अब तकपरियोजना का निर्माण नहीं हुआ।
किसका दाँव
- कर्नूल जिले के किसान (एम्मिगनूरु, मंत्रालयम, आदोनी व पश्चिमी क्षेत्र) — परियोजना बनने पर सिंचाई और पेयजल की समस्या हल होने की उम्मीद; 2.65 लाख एकड़ आयकट को लाभ।
- वाईएसआर जिला और केसी कैनाल आयकट — भविष्य में केसी कैनाल को भरपूर पानी मिलने के लिए गुंड्रेवुला जरूरी बताया गया है।
- कर्नूल नगर निगम व आसपास के गांव — पेयजल संकट से राहत की संभावना।
- डूब क्षेत्र के गांव — कुछ गांवों को 2007 में ही मुआवजा मिल चुका; शेष कुछ गांवों को ही मुआवजा देना होगा।
- आंध्र प्रदेश सरकार / जल संसाधन विभाग — डीपीआर और 2,890 करोड़ रुपये की प्रशासनिक मंजूरी के बावजूद निर्माण शुरू न होने की जवाबदेही।
- तेलंगाना — विभाजन के बाद सुंकेसुला अंतरराज्यीय परियोजना बनी; तुम्मिला लिफ्ट के जरिये पानी का उपयोग।
क्यों अहम है
रायलसीमा में हर दस साल में आठ साल सूखा रहता है और सिंचाई संसाधन सबसे कम हैं, जबकि तुंगभद्रा का सैकड़ों टीएमसी पानी हर साल बिना उपयोग समुद्र में चला जाता है। 20.15 टीएमसी भंडारण वाली गुंड्रेवुला परियोजना इस अपवाह को रोककर 2.65 लाख एकड़ सिंचाई और कर्नूल की पेयजल जरूरतें पूरी कर सकती है। डीपीआर (2011) और प्रशासनिक मंजूरी (2019) के बाद भी काम शुरू न होना दिखाता है कि सूखाग्रस्त क्षेत्रों की जल परियोजनाएं प्राथमिकता सूची में कैसे पीछे छूट जाती हैं।
UPSC नज़रिया
प्रीलिम्स संकेत
- गुंड्रेवुला प्रस्तावित जलाशय: तुंगभद्रा नदी पर, सुंकेसुला जलाशय से 15 किमी ऊपर, सी. बेलगल मंडल (कर्नूल), क्षमता 20.15 टीएमसी।
- डीपीआर 30 अप्रैल 2011 को सौंपी गई; 2009 में डीपीआर के लिए 53 लाख रुपये मंजूर।
- जीओ 154 (21 फरवरी 2019) — 2,890 करोड़ रुपये की प्रशासनिक मंजूरी।
- अनुमानित लाभ: 2.65 लाख एकड़ सिंचाई + कर्नूल नगर निगम और आसपास के गांवों को पेयजल।
- सुंकेसुला बैराज की क्षमता मात्र 1.2 टीएमसी; विभाजन के बाद यह अंतरराज्यीय परियोजना बनी।
- पिछले साल सुंकेसुला से 341.99 टीएमसी से अधिक पानी नीचे छोड़ा गया।
मेन्स दृष्टिकोण
गुंड्रेवुला परियोजना का मामला सूखाग्रस्त रायलसीमा में जल-भंडारण ढांचे की कमी और नीतिगत निरंतरता के अभाव, दोनों को उजागर करता है। कारण स्पष्ट हैं: सुंकेसुला बैराज की भंडारण क्षमता मात्र 1.2 टीएमसी है, जिससे तुंगभद्रा का औसतन 200 टीएमसी से अधिक (पिछले साल 341.99 टीएमसी) पानी कृष्णा के रास्ते समुद्र में चला जाता है, विभाजन के बाद सुंकेसुला अंतरराज्यीय परियोजना बन गई और तुम्मिला लिफ्ट के जरिये पानी का उपयोग बढ़ा, जबकि क्षेत्र में हर दस साल में आठ साल सूखा पड़ता है और खेती वर्षा पर निर्भर है। परिणाम यह है कि केसी कैनाल का आयकट अनिश्चित है और कर्नूल व वाईएसआर जिलों में सिंचाई तथा पेयजल दोनों संकट में हैं। सकारात्मक पक्ष यह है कि डीपीआर 2011 में तैयार हो चुकी, 2019 में जीओ 154 से 2,890 करोड़ रुपये की प्रशासनिक मंजूरी मिल चुकी और 2007 की बाढ़ के बाद आर एंड आर पैकेज के तहत कई डूब गांवों को मुआवजा पहले ही दिया जा चुका है, इसलिए पुनर्वास का बोझ सीमित रहेगा। आगे का रास्ता निर्माण को वास्तविक रूप से शुरू करना, शेष गांवों का मुआवजा और पुनर्वास पूरा करना, बैकवाटर से लिफ्ट इरिगेशन की संभावना का उपयोग तथा अंतरराज्यीय जल-बंटवारे के पहलुओं को सुलझाना है।
मुख्य शब्द
- टीएमसी (TMC)
- एक हजार मिलियन घन फुट — जल भंडारण और प्रवाह मापने की इकाई; गुंड्रेवुला की प्रस्तावित क्षमता 20.15 टीएमसी।
- डीपीआर
- विस्तृत परियोजना रिपोर्ट, जिसमें परियोजना की तकनीकी व वित्तीय रूपरेखा होती है; गुंड्रेवुला की डीपीआर 30 अप्रैल 2011 को सौंपी गई।
- जीओ 154
- 21 फरवरी 2019 का सरकारी आदेश, जिसके तहत परियोजना को 2,890 करोड़ रुपये की प्रशासनिक मंजूरी दी गई।
- आयकट (Ayacut)
- किसी सिंचाई परियोजना से सींचा जाने वाला कृषि क्षेत्र; यहां अनुमानित 2.65 लाख एकड़।
- आर एंड आर पैकेज
- पुनर्वास और पुनःस्थापन पैकेज; 2007 की बाढ़ के बाद कुछ डूब गांवों को इसके तहत मुआवजा दिया गया।
- केसी कैनाल
- कर्नूल–कडप्पा नहर प्रणाली, जिसका आयकट तुंगभद्रा के पानी पर निर्भर है।
अभ्यास प्रश्न
- रायलसीमा जैसे सूखाग्रस्त क्षेत्रों में जल-भंडारण ढांचे की कमी कृषि संकट को कैसे गहरा करती है? गुंड्रेवुला परियोजना के उदाहरण से समझाइए।
- डीपीआर और प्रशासनिक मंजूरी मिलने के बावजूद सिंचाई परियोजनाएं वर्षों लंबित क्यों रहती हैं? कारणों और समाधानों की चर्चा कीजिए।
- राज्य पुनर्गठन के बाद अंतरराज्यीय बन जाने वाली जल परियोजनाओं के प्रबंधन में कौन-सी चुनौतियां आती हैं? सुंकेसुला के संदर्भ में परीक्षण कीजिए।
सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।
