कांग्रेस के बिना मोर्चा बनाने के लिए डीएमके की बातचीत तेज
कांग्रेस के बिना राष्ट्रीय मोर्चा बनाने के लिए डीएमके ने तृणमूल कांग्रेस, शिवसेना (यूबीटी) और एनसीपी (शरदचंद्र पवार) सहित क्षेत्रीय दलों से बातचीत शुरू की है, घटनाक्रम से परिचित लोगों ने शुक्रवार को यह बताया। डीएमके सांसद कनिमोझी करुणानिधि ने ममता बनर्जी, उद्धव ठाकरे और सुप्रिया सुले से मुलाकात की। एक वरिष्ठ डीएमके नेता ने कहा कि परिसीमन और जाति गणना जनगणना 2027 पर भी चर्चा हुई। मई में टीवीके को कांग्रेस का समर्थन मिलने के बाद डीएमके इंडिया गठबंधन से अलग हो गई थी।
स्रोत
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डेस्क जाँच · कुछ दावे ध्यान से पढ़ें
डेस्क ने क्या जाँचा (5)
- DMK has begun talks with TMC, Shiv Sena (UBT) and NCP (Sharadchandra Pawar) for a national front without Congress. — Attributed only to unnamed 'people aware of the development'; no on-record confirmation in source.
- Kanimozhi met Mamata Banerjee in south Kolkata on Thursday and Uddhav Thackeray and Supriya Sule in Mumbai. — Attributed to an unnamed Trinamool Congress leader and unnamed sources.
- A senior DMK leader said discussions also covered delimitation and the caste enumeration census 2027. — Direct quote attributed to an unnamed DMK leader; appears as given in source.
- DMK exited the INDIA alliance after Congress backed TVK, which won the Tamil Nadu Assembly polls in May. — Stated as background in the source without separate attribution; internally consistent.
- MDMK MP Durai Vaiko alleged DMK is trying to weaken the INDIA bloc and is in talks to support the BJP. — On-record allegation by a named political opponent; unverified claim, not established fact.
विश्लेषकों की राय राय
तमिलनाडु में सत्ता गंवाने के बाद डीएमके राष्ट्रीय स्तर पर अपनी सौदेबाजी की ताकत फिर खड़ी करने की कोशिश में दिखती है — कांग्रेस से टूटे रिश्ते को कमजोरी की जगह क्षेत्रीय दलों के मोर्चे की अगुवाई करने के अवसर में बदलने की रणनीति। तृणमूल, शिवसेना (यूबीटी) और एनसीपी (शरदचंद्र पवार) — ये सभी मजबूत राज्य आधार वाले दल हैं जिनका कांग्रेस के साथ सीट बंटवारे पर अपना तनाव रहा है, इसलिए यह संपर्क राजनीतिक रूप से स्वाभाविक है। परिसीमन और 2027 की जातिगत गणना को आगे रखकर डीएमके यह भी जताना चाहती है कि यह केवल सत्ता का खेल नहीं, एक नीतिगत एजेंडा है।
- विधानसभा चुनाव में हार के बाद डीएमके के पास राज्य की सत्ता नहीं है, इसलिए राष्ट्रीय प्रासंगिकता ही उसकी सबसे बड़ी बची हुई राजनीतिक पूंजी है।
- कांग्रेस का टीवीके को समर्थन देने का फैसला डीएमके को दूसरे क्षेत्रीय दलों से नजदीकी बढ़ाने का तैयार बहाना देता है।
- तृणमूल, शिवसेना (यूबीटी) और एनसीपी (एसपी) के पास कांग्रेस-केंद्रित गठबंधन ढांचे पर अपनी असहजता के कारण हैं, इसलिए पहला संपर्क इन्हीं से हुआ।
- परिसीमन और जातिगत गणना जैसे मुद्दे डीएमके को केवल तमिलनाडु तक सीमित न रहकर व्यापक क्षेत्रीय नेतृत्व का दावा पेश करने का मौका देते हैं।
- एमडीएमके और टीवीके के मंत्री के ये आरोप कि डीएमके भाजपा से समझौते की राह पर है, सीधे उसकी भाजपा-विरोधी साख पर चोट हैं — तमिलनाडु में यह आरोप राजनीतिक रूप से महंगा पड़ सकता है।
किस पर नज़र रखें — देखना होगा कि ये बैठकें किसी औपचारिक मंच या साझा बयान में बदलती हैं, या इंडिया गठबंधन में अपनी शर्तें फिर तय कराने का दबाव भर रह जाती हैं — और तृणमूल, शिवसेना (यूबीटी) व एनसीपी (एसपी) सार्वजनिक रूप से क्या कहती हैं।
यह खबर अनाम सूत्रों पर आधारित है; इसमें किसी दल का नया मोर्चा बनाने का औपचारिक निर्णय या डीएमके-भाजपा तालमेल का कोई प्रमाण नहीं है — भाजपा से जुड़े दावे विरोधियों के आरोप मात्र हैं।
गहराई से
शोध सारांश · 8 तथ्य · 6 तारीख़ें · परीक्षा के लिएसार
पृष्ठभूमि
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के बाद राष्ट्रीय विपक्षी राजनीति में फेरबदल दिख रहा है। कांग्रेस ने डीएमके से नाता तोड़कर टीवीके को समर्थन दिया, जिसने मई में तमिलनाडु विधानसभा चुनाव जीता; इसके बाद डीएमके इंडिया गठबंधन से बाहर हो गई। अब डीएमके कांग्रेस के बिना क्षेत्रीय दलों का राष्ट्रीय मोर्चा खड़ा करने के लिए तृणमूल कांग्रेस, शिवसेना (यूबीटी) और एनसीपी (शरदचंद्र पवार) से बातचीत कर रही है। परिसीमन और जाति गणना जनगणना 2027 जैसे मुद्दे इस बातचीत का हिस्सा बताए गए हैं।
मुख्य तथ्य
- शुक्रवार को घटनाक्रम से परिचित लोगों ने बताया कि डीएमके ने कांग्रेस के बिना राष्ट्रीय मोर्चा बनाने के लिए क्षेत्रीय दलों से बातचीत शुरू की है।
- बातचीत में तृणमूल कांग्रेस, शिवसेना (यूबीटी) और एनसीपी (शरदचंद्र पवार) शामिल हैं।
- डीएमके सांसद और उपमहासचिव कनिमोझी करुणानिधि ने सुप्रिया सुले, ममता बनर्जी और उद्धव ठाकरे से चर्चा की।
- कनिमोझी ने गुरुवार को दक्षिण कोलकाता में ममता बनर्जी के आवास पर बंद कमरे में बातचीत की; मुंबई में ठाकरे और सुले से मुलाकात की।
- कांग्रेस ने डीएमके से अलग होकर टीवीके को समर्थन दिया, जिसने मई में तमिलनाडु विधानसभा चुनाव जीता।
- डीएमके ने जून में इंडिया गठबंधन की बैठक में हिस्सा नहीं लिया; कनिमोझी ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को अलग बैठने की व्यवस्था के लिए पत्र लिखा।
- 13 अगस्त को बिरला द्वारा आयोजित चाय पार्टी में कनिमोझी की मौजूदगी से अटकलें तेज हुईं; 15 अगस्त को तमिलनाडु मंत्री सी.टी.आर. निर्मल कुमार ने डीएमके-भाजपा समझौते का आरोप लगाया।
- वाइको के नेतृत्व वाली एमडीएमके, जो डीएमके के धर्मनिरपेक्ष प्रगतिशील गठबंधन की पुरानी सहयोगी थी, टीवीके के नेतृत्व वाले गठबंधन में शामिल हो गई है।
समयरेखा
- मईटीवीके ने तमिलनाडु विधानसभा चुनाव जीता; कांग्रेस ने डीएमके से नाता तोड़कर टीवीके को समर्थन दिया, जिसके बाद डीएमके इंडिया गठबंधन से बाहर हुई।
- जूनडीएमके ने इंडिया गठबंधन की बैठक में हिस्सा नहीं लिया।
- 13 अगस्तलोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की चाय पार्टी में कनिमोझी की उपस्थिति से राजनीतिक अटकलें शुरू हुईं।
- 15 अगस्ततमिलनाडु के ऊर्जा व कानून मंत्री सी.टी.आर. निर्मल कुमार ने आरोप लगाया कि डीएमके भाजपा से समझौता कर रही है।
- गुरुवारकनिमोझी ने कोलकाता में ममता बनर्जी से बंद कमरे में बातचीत की; एमडीएमके सांसद दुरै वाइको ने डीएमके पर इंडिया गठबंधन कमजोर करने का आरोप लगाया।
- शुक्रवारसूत्रों ने बताया कि डीएमके कांग्रेस के बिना राष्ट्रीय मोर्चा बनाने की कोशिश में है।
किसका दाँव
- डीएमके — कांग्रेस से अलग होने के बाद समान विचार वाले क्षेत्रीय दलों को एक छतरी के नीचे लाकर राष्ट्रीय भूमिका बनाए रखना।
- कांग्रेस — तमिलनाडु में टीवीके को समर्थन देने के बाद इंडिया गठबंधन में अपनी केंद्रीय स्थिति पर खतरा।
- तृणमूल कांग्रेस, शिवसेना (यूबीटी), एनसीपी (शरदचंद्र पवार) — इंडिया गठबंधन में रहना या कांग्रेस-मुक्त क्षेत्रीय मोर्चे में शामिल होने का विकल्प तौलना।
- टीवीके — मई में तमिलनाडु विधानसभा चुनाव जीतने के बाद कांग्रेस व एमडीएमके के समर्थन से गठबंधन का विस्तार।
- एमडीएमके (वाइको, दुरै वाइको) — डीएमके का पुराना सहयोगी अब टीवीके गठबंधन में; डीएमके पर भाजपा से नजदीकी का आरोप लगा रहा है।
- भाजपा — डीएमके से संभावित समझौते के आरोपों के केंद्र में; परिसीमन पर डीएमके के रुख से लाभ-हानि का सवाल।
क्यों अहम है
कांग्रेस के बिना क्षेत्रीय दलों के मोर्चे की कोशिश विपक्षी एकता के ढांचे को बदल सकती है और इंडिया गठबंधन को कमजोर कर सकती है। परिसीमन और जाति गणना जनगणना 2027 जैसे मुद्दे इस पुनर्संरेखण के केंद्र में हैं, जो संघीय राजनीति और राज्यों के प्रतिनिधित्व से जुड़े हैं। तमिलनाडु में सत्ता परिवर्तन के बाद यह राष्ट्रीय स्तर पर गठबंधन राजनीति की दिशा तय कर सकता है।
UPSC नज़रिया
प्रीलिम्स संकेत
- डीएमके सांसद व उपमहासचिव: कनिमोझी करुणानिधि; उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को अलग बैठने की व्यवस्था हेतु पत्र लिखा।
- टीवीके ने मई में तमिलनाडु विधानसभा चुनाव जीता; कांग्रेस ने डीएमके छोड़कर टीवीके को समर्थन दिया।
- एमडीएमके के नेता वाइको; यह पहले डीएमके नेतृत्व वाले धर्मनिरपेक्ष प्रगतिशील गठबंधन (SPA) में थी, अब टीवीके गठबंधन में।
- डीएमके नेता के अनुसार बातचीत के मुद्दे: परिसीमन और जाति गणना जनगणना 2027।
- डीएमके जून में इंडिया गठबंधन की बैठक में शामिल नहीं हुई।
- तमिलनाडु के ऊर्जा संसाधन व कानून मंत्री: सी.टी.आर. निर्मल कुमार।
मेन्स दृष्टिकोण
तमिलनाडु में मई के विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस के टीवीके को समर्थन देने से डीएमके-कांग्रेस रिश्ता टूटा और डीएमके इंडिया गठबंधन से बाहर हो गई; इसके बाद डीएमके तृणमूल कांग्रेस, शिवसेना (यूबीटी) और एनसीपी (शरदचंद्र पवार) से बातचीत कर कांग्रेस-मुक्त राष्ट्रीय मोर्चे की संभावना तलाश रही है। यह प्रकरण भारतीय गठबंधन राजनीति की दो स्थायी प्रवृत्तियों को दिखाता है — राज्य-स्तरीय चुनावी हिसाब राष्ट्रीय गठबंधनों को तय करता है, और क्षेत्रीय दल राष्ट्रीय दल के नेतृत्व के बजाय मुद्दा-आधारित साझेदारी चाहते हैं। डीएमके नेता के अनुसार बातचीत में परिसीमन और जाति गणना जनगणना 2027 भी शामिल थे, जो प्रतिनिधित्व व संघीय संतुलन के मुद्दे हैं; वहीं एमडीएमके सांसद दुरै वाइको का आरोप है कि डीएमके इंडिया गठबंधन व कांग्रेस को कमजोर कर भाजपा को समर्थन देने की दिशा में बढ़ रही है, और परिसीमन में भाजपा के पक्ष में काम करेगी। आगे का रास्ता स्रोत में नहीं बताया गया; लेकिन उत्तर में यह तर्क रखा जा सकता है कि किसी भी विपक्षी पुनर्संरेखण की विश्वसनीयता साझा न्यूनतम कार्यक्रम, सीट-बंटवारे की स्पष्टता और परिसीमन जैसे संघीय मुद्दों पर एकरूप रुख पर निर्भर करेगी।
मुख्य शब्द
- इंडिया गठबंधन (INDIA bloc)
- विपक्षी दलों का गठबंधन, जिसकी जून की बैठक में डीएमके शामिल नहीं हुई और जिससे वह कांग्रेस से टूटने के बाद अलग हो गई।
- टीवीके
- वह दल जिसने मई में तमिलनाडु विधानसभा चुनाव जीता और जिसे कांग्रेस ने समर्थन दिया; अब एमडीएमके भी इसके गठबंधन में है।
- परिसीमन (Delimitation)
- निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं/संख्या के पुनर्निर्धारण की आगामी प्रक्रिया, जिस पर डीएमके की बातचीत में चर्चा हुई।
- जाति गणना जनगणना 2027
- जाति गणना से जुड़ी 2027 की जनगणना, जिसे डीएमके नेता ने चर्चा का महत्वपूर्ण विषय बताया।
- धर्मनिरपेक्ष प्रगतिशील गठबंधन (SPA)
- डीएमके के नेतृत्व वाला गठबंधन, जिसमें वाइको की एमडीएमके पहले सहयोगी थी।
- तीसरा मोर्चा
- कांग्रेस और भाजपा से अलग क्षेत्रीय दलों का संभावित गठबंधन; डीएमके नेता ने इस सवाल पर सीधा उत्तर नहीं दिया।
अभ्यास प्रश्न
- तमिलनाडु के 2025 के चुनावी नतीजों के बाद डीएमके-कांग्रेस अलगाव राष्ट्रीय विपक्षी गठबंधन की राजनीति को कैसे प्रभावित कर सकता है? समीक्षा करें।
- क्षेत्रीय दलों द्वारा कांग्रेस के बिना मोर्चा बनाने के प्रयास भारतीय संघीय राजनीति में क्षेत्रीय दलों की बढ़ती सौदेबाजी शक्ति को दर्शाते हैं। चर्चा करें।
- परिसीमन और जाति गणना जनगणना 2027 जैसे मुद्दे किस प्रकार दलगत गठजोड़ों के निर्माण को प्रभावित कर रहे हैं? उदाहरणों सहित समझाइए।
सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।
