डूसू चुनाव की मतगणना शुरू; एबीवीपी, एनएसयूआई के बीच मुकाबला
दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) चुनाव 2026-27 की मतगणना शनिवार सुबह आठ बजे नॉर्थ कैंपस स्थित यूनिवर्सिटी स्पोर्ट्स स्टेडियम के मल्टीपरपज हॉल में शुरू हुई। अधिकारियों के अनुसार दो हजार से अधिक पुलिस और अर्धसैनिक बल तैनात किए गए हैं। शुक्रवार को हुए मतदान में 40.46 प्रतिशत वोटिंग दर्ज की गई। अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव पदों के नतीजे घोषित होंगे। अध्यक्ष पद पर एबीवीपी से यश डबास और एनएसयूआई से विजय शंकर मीना मैदान में हैं।
स्रोत
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डेस्क जाँच · स्रोत से तुलना की
डेस्क ने क्या जाँचा (5)
- Voter turnout in the DUSU 2026 polls held on Friday was 40.46%. — Figure appears in source; no issuing authority named for the turnout number.
- Counting began at 8am Saturday at the Multipurpose Hall, University Sports Stadium, North Campus, with over 2,000 police and paramilitary personnel deployed. — Attributed in source to officials.
- Around 960 EVMs were used across 48 colleges and 12 university departments, with 40 in reserve. — Attributed to chief election officer Professor Raj Kishore Sharma.
- ABVP claimed clean sweeps in several college union polls including SRCC, Shivaji College and Aditi Mahavidyalaya. — Self-reported claim by ABVP; not independently confirmed in source.
- NSUI chief Vinod Jakhar said NSUI would win all four central panel posts. — Direct quote attributed to a named party office-bearer; a prediction, not a result.
विश्लेषकों की राय राय
डूसू चुनाव छात्र लोकतंत्र की झलक हैं, लेकिन शासन-व्यवस्था के नज़रिये से देखें तो यह एक बड़ी प्रशासनिक कवायद बन गया है — 48 कॉलेजों और 12 विभागों में करीब 960 ईवीएम, 2,000 से अधिक पुलिस व अर्धसैनिक बल, और नॉर्थ कैंपस में यातायात प्रतिबंध, यानी एक छोटे आम चुनाव जैसा तामझाम। 40.46 प्रतिशत मतदान का मतलब है कि ज़्यादातर छात्र प्रक्रिया से दूर रहे; इससे जीतने वाले की जीत कम नहीं होती, पर विजयी पैनल के जनादेश की प्रतिनिधित्व-क्षमता पर सवाल उठता है। खबर के मुताबिक दिल्ली हाई कोर्ट की बार-बार की टिप्पणियों के बावजूद प्रचार सामग्री, तेज़ संगीत बजाते वाहन और झड़पें जारी रहीं — यानी दिक्कत नियम बनाने में नहीं, उन्हें लागू कराने में है।
- करीब 960 ईवीएम, 40 रिज़र्व मशीनें और पुलिस सुरक्षा में उनका परिवहन दिखाता है कि छात्र चुनाव कितने संस्थागत हो चुके हैं, और लागत व सुरक्षा का बोझ हर साल बढ़ता दिख रहा है।
- सुबह और शाम दो शिफ्टों में मतदान के बावजूद 40.46 प्रतिशत मतदान बताता है कि बाधा सुविधा की नहीं, बल्कि रुचि या भरोसे की है — हालांकि खबर इसका कारण नहीं बताती।
- रिपोर्ट कहती है कि अदालती टिप्पणियों के बाद भी प्रचार नियमों का उल्लंघन जारी रहा, जो कमज़ोर दंड-व्यवस्था की ओर इशारा करता है; बिना ठोस नतीजे वाले नियम बार-बार तोड़े जाते हैं।
- एबीवीपी और एनएसयूआई के आरोप-प्रत्यारोप — गलत पैनल नंबर बांटने और एक कार्यकर्ता की हिरासत — यह परखेंगे कि शिकायत निवारण तंत्र कितना स्वतंत्र और पारदर्शी है।
- डूसू के चार केंद्रीय पद कॉलेज स्तर की अलग यूनियनों से ऊपर हैं, इसलिए किसी कॉलेज में क्लीन स्वीप का दावा केंद्रीय नतीजे का पैमाना नहीं है, और खबर में इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं है।
किस पर नज़र रखें — देखना होगा कि नतीजों के बाद विश्वविद्यालय या मुख्य चुनाव अधिकारी प्रचार-नियम उल्लंघनों पर कोई कार्रवाई करते हैं या नहीं, और इतनी बड़ी सुरक्षा तैनाती आगे हर साल का सामान्य नियम बन जाती है या नहीं।
यह खबर नतीजे, विजेता, कम मतदान के कारण या किसी भी पक्ष के आरोपों की सच्चाई स्थापित नहीं करती — क्लीन स्वीप के दावे संबंधित संगठनों के अपने बयान हैं।
गहराई से
शोध सारांश · 8 तथ्य · 5 तारीख़ें · परीक्षा के लिएसार
पृष्ठभूमि
दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) के 2026-27 सत्र के चुनाव के लिए शुक्रवार, 18 सितंबर 2026 को मतदान हुआ, जिसमें 40.46 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। शनिवार, 19 सितंबर 2026 को सुबह आठ बजे नॉर्थ कैंपस स्थित यूनिवर्सिटी स्पोर्ट्स स्टेडियम के मल्टीपरपज हॉल में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव — चार केंद्रीय पैनल पदों — की मतगणना शुरू हुई। मुकाबला एबीवीपी, कांग्रेस से संबद्ध एनएसयूआई और आइसा-एसएफआई गठबंधन के बीच है। मतगणना के दौरान दो हजार से अधिक पुलिस और अर्धसैनिक बल तैनात किए गए तथा प्रमुख सड़कों पर प्रतिबंध लगाए गए।
मुख्य तथ्य
- शुक्रवार को संपन्न डूसू चुनाव में मतदान प्रतिशत 40.46 रहा।
- मतगणना 19 सितंबर 2026 को सुबह 8 बजे नॉर्थ कैंपस के यूनिवर्सिटी स्पोर्ट्स स्टेडियम के मल्टीपरपज हॉल में शुरू हुई।
- अधिकारियों के अनुसार विश्वविद्यालय भर में 2,000 से अधिक पुलिस और अर्धसैनिक कर्मी तैनात किए गए।
- मुख्य चुनाव अधिकारी प्रोफेसर राज किशोर शर्मा के अनुसार 48 कॉलेजों और 12 विश्वविद्यालय विभागों में लगभग 960 ईवीएम लगाए गए, 40 रिजर्व में रखे गए — कुल 1,000।
- मतदान दो पालियों में हुआ: सुबह के कॉलेजों में 8.30 बजे से, शाम के कॉलेजों में दोपहर 3 बजे से शाम 7.30 बजे तक।
- चार केंद्रीय पैनल पद हैं — अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव।
- अध्यक्ष पद पर एबीवीपी से यश डबास, एनएसयूआई से विजय शंकर मीना और आइसा-एसएफआई से अनन्या रतूड़ी मैदान में हैं।
- शुक्रवार शाम 7 बजे तक 43 ईवीएम मतगणना केंद्र पहुंच चुके थे (एएनआई)।
समयरेखा
- 18 सितंबर 2026 (शुक्रवार) सुबह 8.30 बजेसुबह के कॉलेजों में मतदान शुरू; 11 बजे के बाद रफ्तार बढ़ी
- 18 सितंबर 2026, दोपहर 3 बजे से शाम 7.30 बजेशाम के कॉलेजों में मतदान; लॉ सेंटर-I में एबीवीपी कार्यकर्ताओं की पुलिस अधिकारी से झड़प और नारेबाजी
- 18 सितंबर 2026, शाम 7 बजे तक43 ईवीएम मतगणना केंद्र पहुंचे; एबीवीपी ने कई कॉलेज छात्र संघ चुनावों में जीत का दावा किया
- 19 सितंबर 2026 (शनिवार) सुबह 8 बजेचार केंद्रीय पैनल पदों की मतगणना मल्टीपरपज हॉल में शुरू
- 19 सितंबर 2026, सुबह 9 बजे से शाम 6 बजेदिल्ली ट्रैफिक पुलिस के अनुसार नॉर्थ कैंपस में यातायात प्रभावित रहने की संभावना
किसका दाँव
- अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) — चारों केंद्रीय पैनल पदों पर जीत का भरोसा; कई कॉलेज संघों में क्लीन स्वीप का दावा; यश डबास अध्यक्ष पद के उम्मीदवार
- एनएसयूआई (कांग्रेस से संबद्ध) — राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ ने चारों सीटों पर 'क्लीन स्वीप' का दावा किया; विजय शंकर मीना अध्यक्ष पद के उम्मीदवार
- आइसा-एसएफआई गठबंधन — 'वैकल्पिक राजनीति' और 'धनबल-बाहुबल की राजनीति' के विरोध के दावे के साथ छात्र-नेतृत्व वाले डूसू की वकालत
- दिल्ली विश्वविद्यालय प्रशासन / मुख्य चुनाव अधिकारी राज किशोर शर्मा — 960 ईवीएम, मतगणना और सुरक्षित परिवहन सहित चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता व व्यवस्था
- दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बल — 2,000 से अधिक कर्मियों की तैनाती; मतगणना केंद्र की सुरक्षा और सड़कों पर प्रतिबंध
- डीयू के छात्र व पहली बार मतदान करने वाले — प्रतिनिधित्व; कैंपस में प्रचार सामग्री, तेज आवाज वाले वाहन और झड़पों जैसे उल्लंघनों का सामना
क्यों अहम है
डूसू देश के सबसे बड़े और राजनीतिक रूप से सबसे चर्चित छात्र संघों में है, जिसे राष्ट्रीय दलों की युवा राजनीति का संकेतक माना जाता है। 40.46 प्रतिशत मतदान, 2,000 से अधिक सुरक्षाकर्मियों की तैनाती और दिल्ली उच्च न्यायालय की बार-बार टिप्पणियों के बावजूद प्रचार दिशानिर्देशों के उल्लंघन यह दिखाते हैं कि छात्र चुनावों में धनबल, शक्ति-प्रदर्शन और अनुशासन के सवाल अनसुलझे हैं।
UPSC नज़रिया
प्रीलिम्स संकेत
- डूसू 2026-27 चुनाव में मतदान प्रतिशत: 40.46%
- डूसू के चार केंद्रीय पैनल पद: अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव, संयुक्त सचिव
- मतगणना स्थल: यूनिवर्सिटी स्पोर्ट्स स्टेडियम का मल्टीपरपज हॉल, नॉर्थ कैंपस
- कुल 1,000 ईवीएम — 960 मतदान में, 40 रिजर्व; 48 कॉलेज व 12 विभाग
- मुख्य चुनाव अधिकारी: प्रोफेसर राज किशोर शर्मा
- प्रमुख संगठन: एबीवीपी, एनएसयूआई (कांग्रेस से संबद्ध), आइसा-एसएफआई गठबंधन
मेन्स दृष्टिकोण
डूसू 2026-27 चुनाव छात्र राजनीति की दो प्रवृत्तियों को एक साथ उजागर करते हैं — एक ओर राष्ट्रीय दलों से जुड़े संगठनों (एबीवीपी, एनएसयूआई) का वर्चस्व और आइसा-एसएफआई जैसे गठबंधन का 'वैकल्पिक राजनीति' का दावा; दूसरी ओर प्रक्रिया की गुणवत्ता पर प्रश्न। स्रोत के अनुसार 40.46% मतदान यह दर्शाता है कि बड़ी संख्या में छात्र प्रक्रिया से बाहर रहे, जबकि दिल्ली उच्च न्यायालय की प्रचार दिशानिर्देशों पर बार-बार टिप्पणियों और सख्त उपायों के बावजूद कैंपस में प्रचार सामग्री फैली रही, तेज आवाज वाले वाहन चले और छात्र समूहों में हाथापाई की खबरें आईं। आरोप-प्रत्यारोप भी बढ़े — एबीवीपी ने एनएसयूआई कार्यकर्ता द्वारा गलत पैनल नंबर बांटने का आरोप लगाया, तो एनएसयूआई ने अपने पूर्व राष्ट्रीय सचिव की 'बिना कारण' हिरासत का आरोप लगाया; कन्हैया कुमार ने इसे 'छात्र बनाम सरकार' की लड़ाई कहा। आगे का रास्ता स्रोत-आधारित तत्वों में दिखता है: ईवीएम की सुरक्षित आवाजाही और मतगणना के दिन निगरानी जैसे प्रक्रियात्मक कड़े इंतजाम, न्यायालय की टिप्पणियों के अनुरूप प्रचार नियमों का वास्तविक अनुपालन, और धनबल-बाहुबल के बजाय छात्र-मुद्दों पर केंद्रित प्रतिस्पर्धा — जिससे मतदान में भागीदारी और संघ की विश्वसनीयता दोनों बढ़ सकें।
मुख्य शब्द
- डूसू (DUSU)
- दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ, जिसके चार केंद्रीय पैनल पदों के लिए चुनाव होते हैं
- एबीवीपी
- अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद; इसने यश डबास, ईशु मौर्य, रिया छावड़ी और लक्ष्य राज सिंह को उतारा
- एनएसयूआई
- नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया, कांग्रेस से संबद्ध; उम्मीदवार विजय शंकर मीना, वीर छत्राथ, नम्रता चौधरी, गोपाल चौधरी
- आइसा-एसएफआई गठबंधन
- वामपंथी झुकाव वाला छात्र गठबंधन; अनन्या रतूड़ी, अक्षत शिखर, स्तांजिन देसक्योंग, बी पारिजात उम्मीदवार
- केंद्रीय पैनल
- डूसू के चार शीर्ष पद — अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव
- मुख्य चुनाव अधिकारी
- डीयू चुनाव संचालन के प्रभारी; इस बार प्रोफेसर राज किशोर शर्मा
अभ्यास प्रश्न
- डूसू जैसे छात्र संघ चुनावों में कम मतदान प्रतिशत और प्रचार नियमों के उल्लंघन के कारणों तथा समाधानों की चर्चा करें।
- क्या राष्ट्रीय राजनीतिक दलों से संबद्ध छात्र संगठनों की उपस्थिति परिसर लोकतंत्र को मजबूत करती है या कमजोर? डूसू 2026 के उदाहरण से तर्क दें।
- विश्वविद्यालय चुनावों में ईवीएम का उपयोग, सुरक्षित परिवहन और मतगणना व्यवस्था प्रक्रिया की विश्वसनीयता कैसे प्रभावित करती है?
सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।
