शिक्षा चेन्नै

अधिक नामांकन वाले पाठ्यक्रमों में शिक्षक भर्ती को प्राथमिकता

तमिलनाडु के उच्च शिक्षा सचिव धीरज कुमार ने शुक्रवार को मद्रास विश्वविद्यालय सीनेट को बताया कि राज्य संचालित विश्वविद्यालयों में अधिक छात्र नामांकन वाले पाठ्यक्रमों में रिक्तियां भरने को प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने कहा कि विभागवार रिक्तियों की सूची और शिक्षक-छात्र अनुपात मांगा गया है। शिक्षकों ने कहा कि स्वीकृत 540 पदों में 175 से कम कार्यरत हैं और 12 वर्षों से भर्ती नहीं हुई। ₹500 करोड़ की एकमुश्त सहायता मांगी गई।

स्रोत

The Hindu — National · मूल ख़बर पढ़ें ↗

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डेस्क जाँच · स्रोत से तुलना की

डेस्क ने क्या जाँचा (5)
  • Higher Education Department will prioritise filling vacancies in programmes with high student enrolment at State-run universities. — Attributed to Higher Education Secretary Dheeraj Kumar at the UoM Senate meeting.
  • University of Madras has a sanctioned strength of 540 faculty but fewer than 175 are employed, with no recruitment for 12 years and over 20 departments having a single faculty member. — Attributed to S.S. Sundaram, Head, Department of History; figures appear in source.
  • ₹77 crore was withdrawn from the corpus fund this year for terminal benefits, reducing it to a little over ₹300 crore. — Attributed to V. Chandra Kumar, Head, Department of Library and Information Science.
  • A one-time grant of ₹500 crore was sought for the university. — Attributed to C. Murugan, Head, Department of Sanskrit; a request, not a sanctioned amount.
  • Career Advancement Scheme approvals are delayed and the process will be expedited. — Delay claim attributed to department heads; expediting assurance attributed to the Higher Education Secretary.

विश्लेषकों की राय राय

AI नीति विश्लेषक

यह भर्ती की घोषणा से ज़्यादा इस बात का नियम है कि पहले किसे भरा जाएगा। दाख़िला संख्या और शिक्षक-छात्र अनुपात के आधार पर रिक्तियों की प्राथमिकता तय करना सीमित पैसे को वहाँ लगाने का तर्कसंगत तरीका है जहाँ सबसे ज़्यादा छात्र प्रभावित हैं — और 12 साल तक भर्ती न होने के दावे को देखते हुए यह व्यावहारिक भी है। लेकिन यही नियम कम दाख़िले वाले विभागों को, जिनमें 20 से अधिक विभाग एक ही शिक्षक के बल पर चलने बताए गए हैं, कतार में और पीछे धकेल सकता है। वित्त पर सरकार का रुख़ साफ़ है: स्वायत्त विश्वविद्यालय पहले अपनी आय के रास्ते खोजे, कमी रह जाए तो सरकार आगे आएगी।

  • दाख़िले और शिक्षक-छात्र अनुपात को आधार बनाना मापनीय और पारदर्शी नीति-रचना है, पर यह छात्र-मांग का अनुसरण करती है, शैक्षणिक आवश्यकता का नहीं।
  • शिक्षकों के अनुसार 540 स्वीकृत पदों के मुक़ाबले 175 से कम कार्यरत हैं — इस पैमाने पर प्राथमिकता समाधान नहीं, बड़े अंतर की राशनिंग जैसी लगती है।
  • घाटे का बजट, सेवानिवृत्ति लाभों के लिए कोष से ₹77 करोड़ की निकासी और ₹500 करोड़ की एकमुश्त ग्रांट की मांग वेतन-पेंशन के ढांचागत घाटे की ओर इशारा करती है, अस्थायी नक़दी संकट की नहीं।
  • "स्वायत्त संस्था अपनी आय बढ़ाए" और "कमी हुई तो सरकार मदद करेगी" के बीच कोई स्पष्ट सीमा तय न होना जवाबदेही की कमज़ोरी है।
  • सक्षम अधिकारियों की मंज़ूरी के बाद भी करियर एडवांसमेंट स्कीम की फ़ाइलें कई चरणों में घूमना वही जाना-पहचाना शासन-पैटर्न है, जहाँ पुराने रिकवरी आदेशों का डर प्रक्रियागत देरी बन जाता है।

किस पर नज़र रखें — देखना यह होगा कि राज्य विश्वविद्यालयों से विभागवार रिक्ति और अनुपात के आंकड़े जुटने के बाद वास्तविक भर्ती अधिसूचना, समयसीमा और बजट आवंटन आता है या बात प्राथमिकता की घोषणा पर ही रुक जाती है।

कितने पद कब तक और किस मद से भरे जाएंगे, तथा ₹500 करोड़ की मांग पर सरकार का निर्णय क्या है — यह ख़बर इनमें से कुछ भी स्थापित नहीं करती; रिक्तियों के आंकड़े शिक्षकों के कथन हैं, सरकार द्वारा पुष्ट नहीं।

गहराई से

शोध सारांश · 8 तथ्य · 3 तारीख़ें · परीक्षा के लिए

सार

पृष्ठभूमि

तमिलनाडु के राज्य संचालित विश्वविद्यालयों में वर्षों से शिक्षक भर्ती रुकी होने और वित्तीय संकट के मुद्दे पर मद्रास विश्वविद्यालय (UoM) की सीनेट बैठक में चर्चा हुई। बैठक की अध्यक्षता उच्च शिक्षा सचिव धीरज कुमार ने की, जिन्होंने कहा कि अधिक छात्र नामांकन वाले पाठ्यक्रमों/विभागों में रिक्तियां भरने को प्राथमिकता दी जाएगी। शिक्षकों ने रिक्तियों, घाटे के बजट, कॉर्पस फंड में कमी, कैरियर एडवांसमेंट स्कीम (CAS) में देरी और पेंशन योजना जैसे मुद्दे उठाए। 170 वर्ष पुराने इस विश्वविद्यालय में स्वीकृत पदों की तुलना में कार्यरत संकाय सदस्यों की संख्या एक-तिहाई से भी कम है।

मुख्य तथ्य

  • उच्च शिक्षा सचिव धीरज कुमार ने शुक्रवार को मद्रास विश्वविद्यालय सीनेट को बताया कि अधिक छात्र नामांकन वाले कार्यक्रमों में रिक्तियां भरने को प्राथमिकता मिलेगी।
  • विभाग ने सभी राज्य संचालित विश्वविद्यालयों से विभागवार रिक्तियों की सूची और शिक्षक-छात्र अनुपात मांगा है।
  • इतिहास विभाग के प्रमुख एस.एस. सुंदरम के अनुसार 170 वर्ष पुराने विश्वविद्यालय में स्वीकृत 540 संकाय पदों में से 175 से भी कम कार्यरत हैं।
  • पिछले 12 वर्षों में कोई भर्ती अभियान नहीं हुआ और 20 से अधिक विभाग एक ही संकाय सदस्य के सहारे चल रहे हैं।
  • विश्वविद्यालय ने सीनेट के समक्ष घाटे का बजट प्रस्तुत किया; इस वर्ष की शुरुआत में सेवानिवृत्त कर्मचारियों के टर्मिनल लाभ चुकाने के लिए कॉर्पस फंड से ₹77 करोड़ निकाले गए।
  • कॉर्पस फंड घटकर ₹300 करोड़ से कुछ अधिक रह गया (वी. चंद्र कुमार, पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान विभाग प्रमुख)।
  • संस्कृत विभाग के प्रमुख सी. मुरुगन ने वित्तीय संकट से उबरने के लिए ₹500 करोड़ की एकमुश्त सहायता मांगी।
  • सचिव ने कहा कि स्वायत्त निकाय होने के नाते UoM को आय बढ़ाने के उपाय तलाशने चाहिए; कमी होने पर सरकार आगे आएगी।

समयरेखा

  1. पिछले 12 वर्षमद्रास विश्वविद्यालय में रिक्तियां भरने के लिए कोई भर्ती अभियान नहीं हुआ।
  2. इस वर्ष की शुरुआतसेवानिवृत्त कर्मचारियों के टर्मिनल लाभ चुकाने के लिए कॉर्पस फंड से ₹77 करोड़ निकाले गए।
  3. शुक्रवार (रिपोर्ट 19 सितंबर 2026 को प्रकाशित)उच्च शिक्षा सचिव धीरज कुमार की अध्यक्षता में मद्रास विश्वविद्यालय सीनेट की बैठक; रिक्तियों, बजट, CAS और पेंशन पर चर्चा।

किसका दाँव

  • तमिलनाडु उच्च शिक्षा विभाग / सचिव धीरज कुमार — रिक्तियों को प्राथमिकता के आधार पर भरने की नीति स्पष्टता और राज्य विश्वविद्यालयों की वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करना।
  • मद्रास विश्वविद्यालय (UoM) — 540 स्वीकृत पदों में भारी रिक्तियां, घाटे का बजट और घटता कॉर्पस फंड; स्वायत्त निकाय के रूप में आय बढ़ाने का दबाव।
  • विभागाध्यक्ष एवं शिक्षक — नियमित संकाय भर्ती, CAS लाभों में देरी और वेतन-पेंशन भुगतान की सुरक्षा।
  • छात्र — 20 से अधिक विभागों में केवल एक संकाय सदस्य होने से पठन-पाठन की गुणवत्ता और शिक्षक-छात्र अनुपात प्रभावित।
  • संबद्ध कॉलेज (जैसे डीजी वैष्णव कॉलेज, रामकृष्ण मिशन विवेकानंद कॉलेज) — संबद्धता प्रक्रिया में तेजी और तमिलनाडु एश्योर्ड पेंशन स्कीम के शीघ्र कार्यान्वयन की मांग।

क्यों अहम है

राज्य विश्वविद्यालय सार्वजनिक उच्च शिक्षा की रीढ़ हैं, लेकिन एक 170 वर्ष पुराने संस्थान में स्वीकृत 540 पदों के मुकाबले 175 से कम शिक्षक होना और 12 वर्षों से भर्ती न होना शिक्षण गुणवत्ता व शोध क्षमता पर सीधा असर डालता है। कॉर्पस फंड से वेतन-पेंशन चुकाने की मजबूरी बताती है कि वित्तीय संकट संस्थागत स्वायत्तता को भी कमजोर कर रहा है। नामांकन-आधारित प्राथमिकता से भर्ती सीमित संसाधनों में तत्काल कमी दूर कर सकती है, पर दीर्घकालिक वित्तपोषण का प्रश्न बना रहता है।

UPSC नज़रिया

प्रीलिम्स संकेत

  • मद्रास विश्वविद्यालय: 170 वर्ष पुराना राज्य विश्वविद्यालय; स्वीकृत संकाय पद 540, कार्यरत 175 से कम।
  • सीनेट बैठक की अध्यक्षता तमिलनाडु उच्च शिक्षा सचिव धीरज कुमार ने की।
  • इस वर्ष कॉर्पस फंड से ₹77 करोड़ निकाले गए; शेष फंड ₹300 करोड़ से कुछ अधिक।
  • ₹500 करोड़ की एकमुश्त सहायता (one-time grant) की मांग संस्कृत विभाग प्रमुख सी. मुरुगन ने की।
  • कैरियर एडवांसमेंट स्कीम (CAS) लाभों में देरी और अनुमोदन के कई चरणों को 'अनावश्यक' कहा गया।
  • तमिलनाडु एश्योर्ड पेंशन स्कीम के शीघ्र कार्यान्वयन की मांग अगली सिंडिकेट बैठक में प्रस्ताव रखने के साथ उठी।

मेन्स दृष्टिकोण

तमिलनाडु के राज्य विश्वविद्यालयों का संकट दो परस्पर जुड़े कारणों से गहराया है — एक दशक से अधिक समय तक नियमित संकाय भर्ती का ठहराव और वेतन-पेंशन जैसे आवर्ती खर्चों के लिए स्थायी वित्तीय स्रोत का अभाव। मद्रास विश्वविद्यालय में स्वीकृत 540 पदों के मुकाबले 175 से कम शिक्षक, 20 से अधिक विभागों में एकल संकाय, घाटे का बजट और कॉर्पस फंड से ₹77 करोड़ की निकासी इस दोहरे दबाव के ठोस संकेतक हैं। इसका प्रभाव शिक्षक-छात्र अनुपात, शोध उत्पादकता, संबद्धता प्रक्रिया की गति और शिक्षकों के कैरियर एडवांसमेंट (CAS) लाभों पर पड़ता है, जिससे संस्थागत मनोबल घटता है। सरकार का उत्तर दो-स्तरीय है: विभागवार रिक्ति सूची और शिक्षक-छात्र अनुपात के आधार पर अधिक नामांकन वाले विभागों में प्राथमिकता से भर्ती, और स्वायत्त निकाय के रूप में विश्वविद्यालय द्वारा आय-वृद्धि के उपाय तलाशना, जबकि कमी पड़ने पर राज्य हस्तक्षेप का आश्वासन है। आगे का रास्ता — पारदर्शी आवश्यकता-आधारित भर्ती कैलेंडर, CAS अनुमोदन के दोहराव भरे चरणों का सरलीकरण और तीव्र निपटान, पेंशन देयताओं के लिए अलग प्रावधान (जैसे तमिलनाडु एश्योर्ड पेंशन स्कीम पर स्पष्टता) तथा कॉर्पस फंड को आवर्ती व्यय से बचाना।

मुख्य शब्द

सीनेट (Senate)
विश्वविद्यालय का व्यापक निर्णायक/परामर्शी निकाय, जिसकी इस बैठक की अध्यक्षता उच्च शिक्षा सचिव ने की।
सिंडिकेट (Syndicate)
विश्वविद्यालय का कार्यकारी निकाय; पेंशन योजना पर प्रस्ताव अगली बैठक में रखने की मांग की गई।
कैरियर एडवांसमेंट स्कीम (CAS)
शिक्षकों की पदोन्नति/वेतन उन्नयन की योजना, जिसके लाभ देने में अत्यधिक देरी और अनुमोदन के दोहराव भरे चरणों की शिकायत हुई।
कॉर्पस फंड
विश्वविद्यालय का संचित निधि कोष; टर्मिनल लाभों के भुगतान से यह घटकर ₹300 करोड़ से कुछ अधिक रह गया।
एडिशनैलिटी ग्रांट
वेतन-पेंशन जैसे दैनिक खर्चों को पूरा करने के लिए सरकार से मांगी गई अतिरिक्त अनुदान राशि।
तमिलनाडु एश्योर्ड पेंशन स्कीम
तमिलनाडु की पेंशन योजना, जिसे शीघ्र लागू करने की मांग सीनेट में उठाई गई।

अभ्यास प्रश्न

  1. राज्य विश्वविद्यालयों में दीर्घकालिक संकाय रिक्तियों के शैक्षणिक और शोध संबंधी परिणामों का परीक्षण करें। नामांकन-आधारित प्राथमिकता वाली भर्ती एक व्यावहारिक समाधान है या अस्थायी उपाय? चर्चा करें।
  2. सार्वजनिक विश्वविद्यालयों की 'स्वायत्तता' और आवर्ती वेतन-पेंशन खर्च के लिए राज्य वित्तपोषण पर निर्भरता के बीच तनाव का विश्लेषण कीजिए।
  3. कैरियर एडवांसमेंट स्कीम जैसे लाभों के अनुमोदन में विलंब शिक्षकों के मनोबल और शासन-दक्षता को कैसे प्रभावित करता है? सुधार के उपाय सुझाइए।

सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।

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