नीति आयोग के ई-मोबिलिटी सूचकांक में दिल्ली शीर्ष पर
नीति आयोग ने बुधवार को जारी इंडिया इलेक्ट्रिक मोबिलिटी इंडेक्स (आईईएमआई) 2025 में दिल्ली 84 अंकों के साथ पहले स्थान पर रही। महाराष्ट्र 78 अंकों के साथ दूसरे, इसके बाद कर्नाटक (73), चंडीगढ़ (71) और गोवा (65) रहे। पहाड़ी और पूर्वोत्तर राज्यों में मणिपुर 46 अंकों के साथ आगे रहा। सूचकांक के अनुसार 36 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में से 29 ने ईवी नीतियां अधिसूचित की हैं। मध्य प्रदेश 23वें से सातवें स्थान पर पहुंचा। दिल्ली 4,286 इलेक्ट्रिक बसों का देश का सबसे बड़ा बेड़ा चला रही है।
स्रोत
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डेस्क ने क्या जाँचा (5)
- Delhi topped the India Electric Mobility Index 2025 with 84, ahead of Maharashtra (78), Karnataka (73), Chandigarh (71) and Goa (65). — Attributed to the index released by NITI Aayog; figures appear in source.
- 29 of India's 36 states and UTs have notified EV policies; highest score rose from 77 to 84 and median from 36 to 40. — Attributed to the IEMI report; internally consistent.
- India depends on imports for nearly 89% of crude oil; auto sector is about 7.1% of GDP and supports nearly 19 million jobs. — Attributed to NITI Aayog member Rajiv Gauba in a direct address.
- Delhi operated 4,286 electric buses as of February 2026, India's largest e-bus fleet. — Attributed to the report; date is stated in source as given.
- Delhi has asked the Supreme Court to allow use of unused ECC funds; EV Policy 2.0 earmarks ₹4,000 crore over four years. — Attributed to Delhi transport secretary Niharika Rai; supported by earlier HT reporting cited in source.
विश्लेषकों की राय राय
नीति आयोग के सूचकांक में दिल्ली का पहला स्थान केंद्र और दिल्ली सरकार, दोनों के लिए राजनीतिक रूप से भुनाने लायक नतीजा है — राजधानी में अब भाजपा सत्ता में है, इसलिए वर्षों में बने ईवी और इलेक्ट्रिक बस विस्तार का श्रेय मौजूदा सरकार लेने की स्थिति में है। दूसरी ओर आम आदमी पार्टी यह तर्क दे सकती है कि यह नींव उसकी है, क्योंकि 4,286 बसों का बेड़ा और शुरुआती ईवी नीति रातोंरात नहीं खड़ी होती। महाराष्ट्र, कर्नाटक और मध्य प्रदेश की प्रगति अलग-अलग दलों की सरकारों में हुई है, यानी ईवी नीति अभी दलगत विभाजन से ज़्यादा शासन की प्रतिस्पर्धा है।
- 36 में से 29 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की ईवी नीति अधिसूचित होना बताता है कि यह किसी एक दल का एजेंडा नहीं, बल्कि निवेश और रैंकिंग की अंतर-राज्यीय होड़ बन गया है।
- मध्य प्रदेश की 23वें से सातवें स्थान तक 16 पायदान की छलांग ठीक वैसा आंकड़ा है जिसे मुख्यमंत्री प्रचार में रखते हैं; बिहार, जम्मू-कश्मीर और असम की बढ़त भी उनकी सरकारों को यही मौका देती है।
- पहाड़ी और पूर्वोत्तर राज्यों में मणिपुर का 46 अंकों के साथ आगे रहना राजनीतिक रूप से उल्लेखनीय है, मगर शीर्ष राज्यों से फासला क्षेत्र-विशेष सहयोग की मांग तेज़ कर सकता है।
- 2027 से ऑटो और हल्के व्यावसायिक वाहनों तथा 2028 से दोपहिया के 100% विद्युतीकरण का दिल्ली का प्रावधान स्कोर बढ़ाता है, पर ऑटो चालकों और डीलरों जैसे संगठित वर्गों से टकराव का जोखिम भी है।
- चार साल में ₹4,000 करोड़ की सब्सिडी योजना के लिए अनुपयुक्त ईसीसी निधि पर सुप्रीम कोर्ट की अनुमति मांगना दिखाता है कि राजधानी का शासन केंद्र, राज्य और अदालत के बीच संतुलन पर कितना निर्भर है।
किस पर नज़र रखें — दिल्ली की ईसीसी निधि की मांग पर सुप्रीम कोर्ट का रुख और 2027 की ऑटो समयसीमा पर चालक-डीलर संगठनों की प्रतिक्रिया — यही तय करेगा कि दिल्ली अपनी रैंक बचा पाती है या नहीं।
खबर केवल सूचकांक के नतीजे बताती है; यह स्थापित नहीं करती कि इस प्रगति का श्रेय किस दल या कार्यकाल को जाता है, और न ही इसमें किसी राजनीतिक दल की औपचारिक प्रतिक्रिया दर्ज है।
गहराई से
शोध सारांश · 8 तथ्य · 6 तारीख़ें · परीक्षा के लिएसार
पृष्ठभूमि
नीति आयोग ने डब्ल्यूआरआई इंडिया के सहयोग से तैयार 'इंडिया इलेक्ट्रिक मोबिलिटी इंडेक्स (आईईएमआई) 2025' का दूसरा संस्करण बुधवार को जारी किया। यह सूचकांक जनवरी से दिसंबर 2025 के आंकड़ों के आधार पर राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की ओर प्रगति मापता है। इसे दिल्ली में राज्यों की ईवी नीतियों पर आयोजित नीति आयोग की कार्यशाला के हिस्से के रूप में जारी किया गया। दिल्ली 84 अंकों के साथ शीर्ष पर रही, और इसी कार्यशाला में दिल्ली सरकार ने ईवी सब्सिडी के लिए अप्रयुक्त पर्यावरण मुआवजा शुल्क (ईसीसी) कोष के उपयोग की मांग रखी।
मुख्य तथ्य
- आईईएमआई 2025 में दिल्ली 84 अंकों के साथ प्रथम; महाराष्ट्र 78, कर्नाटक 73, चंडीगढ़ 71 और गोवा 65 अंकों के साथ क्रमशः दूसरे से पांचवें स्थान पर।
- पहाड़ी और पूर्वोत्तर राज्यों में मणिपुर 46 अंकों के साथ सर्वोच्च।
- 36 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में से 29 ने ईवी नीतियां अधिसूचित कर दी हैं; सर्वोच्च स्कोर 77 से 84 और मध्यमान (मीडियन) स्कोर 36 से 40 हुआ।
- मध्य प्रदेश सबसे बड़ी छलांग—23वें स्थान (31 अंक) से 16 पायदान चढ़कर सातवें स्थान (59 अंक) पर।
- अन्य बढ़त: गोवा 10 स्थान चढ़कर पांचवें (65), पुदुचेरी 10 स्थान चढ़कर 17वें (41), बिहार 8 स्थान चढ़कर 18वें (40), जम्मू-कश्मीर 7 स्थान चढ़कर 27वें (31), असम 3 स्थान चढ़कर 24वें (35)।
- फरवरी 2026 तक दिल्ली 4,286 इलेक्ट्रिक बसें चला रही थी—देश का सबसे बड़ा ई-बस बेड़ा; दिल्ली इलेक्ट्रिक साइकिल पर सब्सिडी देने वाला पहला राज्य भी।
- दिल्ली ईवी नीति 2.0 के तहत जनवरी 2027 से ऑटोरिक्शा व हल्के व्यावसायिक वाहनों और जनवरी 2028 से दोपहिया वाहनों के 100% विद्युतीकरण को अनिवार्य करने वाला पहला राज्य/केंद्रशासित प्रदेश।
- नीति आयोग सदस्य राजीव गौबा: भारत अपनी कच्चे तेल की लगभग 89% जरूरत आयात से पूरी करता है; ऑटोमोटिव क्षेत्र जीडीपी में करीब 7.1% योगदान देता है और लगभग 1.9 करोड़ रोजगार देता है।
समयरेखा
- जनवरी–दिसंबर 2025आईईएमआई 2025 के लिए आंकड़ों की अवधि, जिस पर राज्यों की रैंकिंग आधारित है।
- 16 सितंबरएचटी की रिपोर्ट: दिल्ली में एकत्रित ईसीसी का 60%, यानी ₹1,153 करोड़ से अधिक, अप्रयुक्त पड़ा है।
- बुधवार (सूचकांक जारी होने का दिन)नीति आयोग ने दिल्ली में राज्य ईवी नीतियों पर कार्यशाला के दौरान आईईएमआई 2025 जारी किया; दिल्ली ने ईसीसी कोष के उपयोग की मांग बताई।
- फरवरी 2026 तकदिल्ली में 4,286 इलेक्ट्रिक बसें परिचालन में, देश का सबसे बड़ा ई-बस बेड़ा।
- जनवरी 2027दिल्ली ईवी नीति 2.0 के तहत ऑटोरिक्शा व हल्के व्यावसायिक वाहनों का 100% विद्युतीकरण अनिवार्य।
- जनवरी 2028दिल्ली में दोपहिया वाहनों का 100% विद्युतीकरण अनिवार्य।
किसका दाँव
- नीति आयोग — सूचकांक के जरिये राज्यों की ईवी प्रगति का आकलन और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य से नीति को जोड़ना।
- डब्ल्यूआरआई इंडिया — नीति आयोग के सहयोग से सूचकांक तैयार करने वाली संस्था; कार्यप्रणाली और संकेतकों की विश्वसनीयता।
- राज्य व केंद्रशासित प्रदेश सरकारें — ईवी नीति अधिसूचना, चार्जिंग ढांचा और इकोसिस्टम में प्रगति से रैंकिंग व निवेश आकर्षण प्रभावित।
- दिल्ली सरकार (परिवहन विभाग) — ईवी नीति 2.0 के तहत चार वर्षों में ₹4,000 करोड़ की सब्सिडी; सालाना ₹1,000 करोड़ से अधिक की धनराशि जुटाने की चुनौती।
- सर्वोच्च न्यायालय — अप्रयुक्त ईसीसी कोष को ईवी उपायों में लगाने की दिल्ली की अनुमति याचिका पर निर्णय।
- भारी उद्योग मंत्रालय — केंद्र के प्रोत्साहनों को राज्य नीतियों के साथ जोड़कर ईवी अपनाने की गति बढ़ाना।
- ऑटोमोटिव उद्योग व कर्मचारी — जीडीपी में 7.1% योगदान और लगभग 1.9 करोड़ रोजगार; वैश्विक ईवी बदलाव के साथ तालमेल जरूरी।
क्यों अहम है
भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का करीब 89% आयात करता है और वाहन स्वामित्व बढ़ने के साथ यह निर्भरता और बढ़ सकती है—इसलिए ईवी अपनाना आर्थिक, पर्यावरणीय और सामरिक अनिवार्यता बन गया है। सूचकांक दिखाता है कि 36 में से 29 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों ने ईवी नीतियां अधिसूचित की हैं और मध्यमान स्कोर 36 से 40 तक सुधरा है, पर राज्यों के बीच बड़ा अंतर बना हुआ है। दिल्ली का ईसीसी कोष मांगना बताता है कि नीतियों की सफलता वित्तपोषण की उपलब्धता पर टिकी है।
UPSC नज़रिया
प्रीलिम्स संकेत
- आईईएमआई 2025: नीति आयोग के सहयोग से डब्ल्यूआरआई इंडिया द्वारा तैयार, यह सूचकांक का दूसरा संस्करण है।
- शीर्ष पांच: दिल्ली (84), महाराष्ट्र (78), कर्नाटक (73), चंडीगढ़ (71), गोवा (65); पहाड़ी/पूर्वोत्तर में मणिपुर (46)।
- 36 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में से 29 ने ईवी नीति अधिसूचित की; मध्यमान स्कोर 36 से 40 हुआ।
- मध्य प्रदेश ने 16 पायदान की सबसे बड़ी छलांग लगाकर 23वें से सातवां स्थान (59 अंक) पाया।
- दिल्ली: 4,286 ई-बसों का सबसे बड़ा बेड़ा (फरवरी 2026 तक) और इलेक्ट्रिक साइकिल सब्सिडी देने वाला पहला राज्य।
- भारत में पिछले वर्ष 2.1 करोड़ दोपहिया बिके, जिनमें 14 लाख (लगभग 7.65%) इलेक्ट्रिक; तिपहिया में भारत पहले और ईवी कारों में तीसरे सबसे बड़े बाजार।
मेन्स दृष्टिकोण
इंडिया इलेक्ट्रिक मोबिलिटी इंडेक्स 2025 दर्शाता है कि भारत में ईवी परिवर्तन नीतिगत स्तर पर व्यापक हो चुका है—36 में से 29 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों की अधिसूचित ईवी नीतियां, सर्वोच्च स्कोर 77 से 84 और मध्यमान 36 से 40—लेकिन प्रगति असमान है: दिल्ली (84) और महाराष्ट्र (78) एक ओर, पहाड़ी-पूर्वोत्तर क्षेत्र में शीर्ष मणिपुर मात्र 46 अंक पर। इस बदलाव के तीन प्रेरक कारण स्रोत में स्पष्ट हैं—कच्चे तेल की लगभग 89% आयात निर्भरता, जीडीपी में 7.1% योगदान और 1.9 करोड़ रोजगार वाले ऑटोमोटिव क्षेत्र को वैश्विक ईवी संक्रमण के अनुरूप बनाए रखने की जरूरत, और विकसित भारत 2047 का लक्ष्य। मध्य प्रदेश की 16 पायदान की छलांग बताती है कि नीति, चार्जिंग ढांचा और इकोसिस्टम—तीनों पर एक साथ काम करने से तेज सुधार संभव है। आगे की राह में दो चुनौतियां प्रमुख हैं: दिल्ली जैसी अनिवार्य विद्युतीकरण समयसीमा (2027 में ऑटो व एलसीवी, 2028 में दोपहिया) को लागू करने की क्षमता, और वित्तपोषण—दिल्ली की ₹4,000 करोड़ की चार-वर्षीय सब्सिडी योजना के लिए सालाना ₹1,000 करोड़ से अधिक चाहिए, जिसके लिए वह अप्रयुक्त ईसीसी कोष के उपयोग हेतु सर्वोच्च न्यायालय गई है। साथ ही, भारी उद्योग मंत्रालय के अनुसार राज्य नीतियों को केंद्र के प्रोत्साहनों का पूरक बनाना जरूरी है, क्योंकि दोपहिया में ईवी हिस्सेदारी अभी लगभग 7.65% ही है।
मुख्य शब्द
- आईईएमआई (इंडिया इलेक्ट्रिक मोबिलिटी इंडेक्स)
- नीति आयोग व डब्ल्यूआरआई इंडिया द्वारा तैयार सूचकांक, जो राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों की इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की ओर प्रगति मापता है; 2025 इसका दूसरा संस्करण।
- दिल्ली ईवी नीति 2.0
- दिल्ली की नई ईवी नीति, जिसमें चार वर्षों में ₹4,000 करोड़ की सब्सिडी और वाहन श्रेणियों के 100% विद्युतीकरण की समयसीमा तय है।
- ईसीसी (पर्यावरण मुआवजा शुल्क)
- प्रदूषण से जुड़ा शुल्क; दिल्ली में एकत्रित राशि का 60% (₹1,153 करोड़ से अधिक) अप्रयुक्त पड़ा है, जिसे ईवी उपायों में लगाने की अनुमति मांगी गई है।
- विकसित भारत 2047
- वह राष्ट्रीय दृष्टिकोण जिससे नीति आयोग ने ईवी परिवर्तन को आर्थिक, पर्यावरणीय और सामरिक अनिवार्यता के रूप में जोड़ा।
- डब्ल्यूआरआई इंडिया
- वह संस्था जिसने नीति आयोग के सहयोग से आईईएमआई 2025 तैयार किया।
- एलसीवी (हल्के व्यावसायिक वाहन)
- वाहन श्रेणी, जिसके लिए दिल्ली ने जनवरी 2027 से 100% विद्युतीकरण अनिवार्य किया है।
अभ्यास प्रश्न
- इंडिया इलेक्ट्रिक मोबिलिटी इंडेक्स 2025 के निष्कर्षों के आलोक में परखें कि भारत में ईवी परिवर्तन की गति राज्यों के बीच असमान क्यों है और इस अंतर को कम करने के उपाय क्या हो सकते हैं।
- कच्चे तेल की लगभग 89% आयात निर्भरता और ऑटोमोटिव क्षेत्र के 1.9 करोड़ रोजगार के संदर्भ में चर्चा करें कि ईवी संक्रमण भारत के लिए आर्थिक और सामरिक अनिवार्यता क्यों है।
- दिल्ली की ईवी नीति 2.0 और अप्रयुक्त पर्यावरण मुआवजा शुल्क कोष के प्रस्तावित उपयोग के उदाहरण से बताएं कि स्वच्छ परिवहन नीतियों के वित्तपोषण की चुनौतियां क्या हैं।
सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।
