21 राज्यों में यूसीसी की घोषणा पर ओवैसी का अमित शाह पर हमला
एआईएमआईएम अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने सोमवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की उस घोषणा की आलोचना की, जिसमें उन्होंने रविवार को मुंबई में कहा था कि भाजपा नीत एनडीए शासित 21 राज्यों में 2029 से पहले समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू की जाएगी। एक्स पर ओवैसी ने कहा कि एनडीए सहयोगियों को साबित करना चाहिए कि वे केवल "छोटी भाजपा" नहीं हैं। उन्होंने कहा कि यूसीसी गैर-हिंदुओं पर हिंदू कानून थोपना है, "इस देश की आत्मा उसका बहुलतावाद है"। उन्होंने एसआईआर से अल्पसंख्यकों, एससी/एसटी और प्रवासियों पर बोझ बढ़ने का आरोप भी लगाया।
स्रोत
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डेस्क ने क्या जाँचा (5)
- Amit Shah said UCC will be implemented in all 21 BJP-led NDA states before 2029 — Direct quote attributed to Shah, made in Mumbai on Sunday; source cites HT's earlier report
- Owaisi said a UCC would impose Hindu law on non-Hindus and target Muslims — Attributed to Owaisi's post on X; opinion, not verifiable fact
- The NDA-appointed Law Commission concluded UCC was 'neither necessary nor desirable' — Cited by Owaisi; source gives no commission report date or reference
- Uttarakhand enacted UCC in February 2024 and implemented it from January 2025; Gujarat, Assam, MP await presidential assent — Stated as fact in source without separate attribution
- Owaisi alleged SIR burdened minorities, SC/STs and migrants, and that NRC would be '100 times worse' — Attributed allegation and quote from Owaisi; unverified
विश्लेषकों की राय राय
అమిత్ షా 2029 అనే గడువు పెట్టడం ద్వారా యూసీసీని వచ్చే సాధారణ ఎన్నికల వరకు బీజేపీ కేంద్ర రాజకీయ ఎజెండాగా నిలిపే వ్యూహం స్పష్టమవుతోంది — ఇది సైద్ధాంతిక వాగ్దానాన్ని పాలనా క్యాలెండర్గా మార్చడం. ఒవైసీ దాడిని బీజేపీపై కాకుండా ఎన్డీఏ మిత్రపక్షాలపై గురిపెట్టడం ('చోటీ బీజేపీ' అనే మాటతో) ఆసక్తికరమైన ఎత్తుగడ; మిత్రపక్షాలలో అసౌకర్యం సృష్టించి, వాటి మైనారిటీ ఓటుబ్యాంకుపై ఒత్తిడి పెంచడమే లక్ష్యం. యూసీసీ, ఎస్ఐఆర్, ఎన్ఆర్సీలను ఒకే గొలుసుగా కలిపి చూపడం ద్వారా ఆయన 2019 సీఏఏ నిరసనల నాటి రాజకీయ కూటమిని పునరుజ్జీవం చేయాలని ప్రయత్నిస్తున్నారు.
- రాష్ట్రాల మార్గం ద్వారా యూసీసీని అమలు చేయడం బీజేపీకి రెండు లాభాలు — పార్లమెంటులో మిత్రపక్షాల మద్దతు కోసం ఎదురుచూడాల్సిన అవసరం తగ్గుతుంది, అదే సమయంలో ప్రతి రాష్ట్ర ఎన్నికలోనూ అంశాన్ని సజీవంగా ఉంచుకోవచ్చు.
- ఉత్తరాఖండ్ అమలు, గుజరాత్–అస్సాం–ఎంపీ ఆమోదం దశలో ఉండడం చూపుతున్నట్లుగా ఇది ప్రకటన స్థాయి నుంచి దశలవారీ అమలుకు మారుతోంది, అంటే వ్యతిరేక పక్షాలకు స్పష్టమైన స్టాండ్ తప్పనిసరి అవుతుంది.
- ఒవైసీ ఎన్డీఏ మిత్రపక్షాలను నేరుగా టార్గెట్ చేయడం, మైనారిటీ ఓట్లపై ఆధారపడే ప్రాంతీయ పార్టీలను ఇరుకున పెట్టే ప్రయత్నం — వాటికి మౌనం కూడా రాజకీయ ధరతో వస్తుంది.
- ఎన్డీఏ ప్రభుత్వం నియమించిన లా కమిషన్ నివేదికను ఉదహరించడం ద్వారా ఆయన వాదనను మతపరమైనదిగా కాకుండా చట్టపరమైన–సాంకేతికమైనదిగా చూపే ప్రయత్నం కనిపిస్తోంది.
- బీజేపీ దృష్టిలో ఈ ప్రకటన 'సేవా సంకల్ప్ అభియాన్' వంటి మోదీ కేంద్రిత ప్రచారంతో ముడిపడి ఉండడం, కోర్ ఓటర్ను సమీకరించే విస్తృత వ్యూహంలో భాగమని సూచిస్తుంది.
किस पर नज़र रखें — ఎన్డీఏలోని ప్రాంతీయ మిత్రపక్షాలు యూసీసీపై బహిరంగంగా ఎలా స్పందిస్తాయి — మద్దతు, మౌనం లేదా అభ్యంతరం — అదే ఈ ప్రకటన కూటమి రాజకీయాలకు ఎంత ఖర్చు పెడుతుందో నిర్ణయిస్తుంది.
21 రాష్ట్రాల్లో యూసీసీ చట్టాల స్వరూపం ఏమిటి, మిత్రపక్షాల వైఖరి ఏమిటి, ఎన్ఆర్సీపై తుది నిర్ణయం ఏమిటి — ఈ కథనం వీటిలో ఏదీ నిర్ధారించలేదు; ఇది ప్రధానంగా ఒక ప్రకటన మరియు దానిపై ఒక ప్రతిపక్ష విమర్శ మాత్రమే.
गहराई से
शोध सारांश · 8 तथ्य · 5 तारीख़ें · परीक्षा के लिएसार
पृष्ठभूमि
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को मुंबई में भाजपा के 'सेवा संकल्प अभियान' पर बोलते हुए घोषणा की कि भाजपा नीत एनडीए शासित सभी 21 राज्यों में 2029 से पहले समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू की जाएगी। उत्तराखंड ने फरवरी 2024 में यूसीसी कानून बनाया और जनवरी 2025 से उसे लागू किया, जबकि कई अन्य राज्य विभिन्न चरणों में हैं। एआईएमआईएम अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने सोमवार को एक्स पर इस घोषणा की आलोचना करते हुए इसे बहुलतावाद और मुसलमानों के खिलाफ बताया, और साथ ही मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) तथा संभावित एनआरसी पर भी सवाल उठाए।
मुख्य तथ्य
- अमित शाह ने रविवार को मुंबई में कहा कि भाजपा नीत एनडीए शासित सभी 21 राज्यों में 2029 से पहले यूसीसी लागू किया जाएगा।
- शाह की यह घोषणा भाजपा के 'सेवा संकल्प अभियान' के दौरान हुई — प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन एवं सत्ता में 25 वर्ष पूरे होने पर एक महीने का देशव्यापी अभियान।
- उत्तराखंड यूसीसी कानून बनाने वाला पहला राज्य बना — फरवरी 2024 में अधिनियमित, जनवरी 2025 से लागू।
- गुजरात, असम और मध्य प्रदेश राष्ट्रपति की स्वीकृति व अधिसूचना की प्रतीक्षा में हैं; महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ ने विधेयक का मसौदा तैयार करने के लिए समितियाँ बनाई हैं।
- ओवैसी ने एक्स पर लिखा कि एनडीए सहयोगियों को साबित करना चाहिए कि वे केवल "छोटी भाजपा" नहीं हैं।
- ओवैसी ने एनडीए सरकार द्वारा नियुक्त विधि आयोग का हवाला दिया, जिसने कहा था कि यूसीसी "न आवश्यक है न वांछनीय"।
- ओवैसी का आरोप: एसआईआर ने अल्पसंख्यकों, अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और प्रवासियों पर अतिरिक्त बोझ डाला है; एनआरसी "100 गुना बदतर" होगा।
- शाह ने कहा कि देशव्यापी एनआरसी पर एनडीए सहयोगियों और मणिपुर के राजनीतिक दलों से चर्चा चल रही है, जिसमें मणिपुर के लिए 1951 को आधार वर्ष बनाने का प्रश्न भी शामिल है।
समयरेखा
- 2019सीएए/एनआरसी विरोधी प्रदर्शन, जिनके लिए ओवैसी ने गृह मंत्री की "अनुचित अहंकार" और "क्रोनोलॉजी" वाली टिप्पणियों को जिम्मेदार बताया; बाद में प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट किया कि एनआरसी लागू नहीं होगा।
- फरवरी 2024उत्तराखंड यूसीसी कानून अधिनियमित करने वाला देश का पहला राज्य बना।
- जनवरी 2025उत्तराखंड में यूसीसी लागू हुआ।
- रविवार (स्रोत में तिथि नहीं दी गई)अमित शाह ने मुंबई में 'सेवा संकल्प अभियान' के मंच से 21 एनडीए शासित राज्यों में 2029 से पहले यूसीसी लागू करने की घोषणा की।
- सोमवार (स्रोत में तिथि नहीं दी गई)ओवैसी ने एक्स पर पोस्ट कर यूसीसी घोषणा, एसआईआर और एनआरसी की आलोचना की।
किसका दाँव
- अमित शाह / भाजपा नीत एनडीए — 21 राज्यों में 2029 से पहले यूसीसी लागू करने की घोषित प्रतिबद्धता और उसे पूरा करने की राजनीतिक साख।
- असदुद्दीन ओवैसी / एआईएमआईएम — यूसीसी, एसआईआर और एनआरसी को अल्पसंख्यक-विरोधी बताकर विपक्षी-अल्पसंख्यक राजनीति में जगह।
- एनडीए सहयोगी दल — यूसीसी और एनआरसी पर स्वतंत्र राजनीतिक आवाज़ — ओवैसी के "छोटी भाजपा" तंज का जवाब देने का दबाव।
- राज्य सरकारें (उत्तराखंड, गुजरात, असम, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़) — यूसीसी कानून बनाने, राष्ट्रपति की स्वीकृति पाने और अधिसूचित करने की प्रक्रिया।
- अल्पसंख्यक, अनुसूचित जाति/जनजाति और प्रवासी — ओवैसी के अनुसार एसआईआर और संभावित एनआरसी में नागरिकता व दस्तावेज़ सिद्ध करने का अतिरिक्त बोझ।
- विधि आयोग — इसका यह निष्कर्ष कि यूसीसी "न आवश्यक है न वांछनीय", बहस का केंद्रीय संदर्भ बिंदु बना हुआ है।
क्यों अहम है
यूसीसी व्यक्तिगत कानूनों, धार्मिक स्वतंत्रता और राज्यों की विधायी शक्ति के टकराव को छूता है, और 2029 की समयसीमा इसे अगले आम चुनाव तक की केंद्रीय राजनीतिक बहस बना देती है। साथ ही एसआईआर और संभावित एनआरसी को लेकर उठे सवाल नागरिकता तथा मताधिकार के दस्तावेज़ीकरण पर हाशिये के समूहों के जोखिम को सामने लाते हैं। यह विवाद यह भी परखता है कि गठबंधन सहयोगी ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर अपनी स्वतंत्र स्थिति रख पाते हैं या नहीं।
UPSC नज़रिया
प्रीलिम्स संकेत
- उत्तराखंड यूसीसी कानून बनाने वाला पहला राज्य — फरवरी 2024 में अधिनियमित, जनवरी 2025 से लागू।
- अमित शाह की घोषणा: भाजपा नीत एनडीए शासित 21 राज्यों में 2029 से पहले यूसीसी।
- गुजरात, असम, मध्य प्रदेश — राष्ट्रपति की स्वीकृति और अधिसूचना की प्रतीक्षा में; महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़ — मसौदा समितियाँ गठित।
- विधि आयोग (एनडीए सरकार द्वारा नियुक्त) का निष्कर्ष — यूसीसी "न आवश्यक है न वांछनीय" (ओवैसी द्वारा उद्धृत)।
- एसआईआर = मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण; एनआरसी = राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर।
- शाह के अनुसार मणिपुर में एनआरसी के लिए 1951 को आधार वर्ष बनाने पर चर्चा जारी।
मेन्स दृष्टिकोण
समान नागरिक संहिता की बहस अब घोषणा-स्तर से क्रियान्वयन-स्तर पर पहुँच गई है: गृह मंत्री ने एनडीए शासित 21 राज्यों में 2029 से पहले यूसीसी का लक्ष्य रखा है, उत्तराखंड ने फरवरी 2024 में कानून बनाकर जनवरी 2025 से लागू कर दिया, तीन राज्य राष्ट्रपति की स्वीकृति की प्रतीक्षा में हैं और तीन ने मसौदा समितियाँ बनाई हैं। समर्थकों के लिए यह कानूनी एकरूपता और समानता का प्रश्न है; आलोचक — जैसे ओवैसी — इसे गैर-हिंदुओं पर हिंदू कानून थोपने और मुसलमानों को निशाना बनाने वाला बताते हैं, और एनडीए सरकार द्वारा नियुक्त विधि आयोग के उस निष्कर्ष का हवाला देते हैं कि यूसीसी \"न आवश्यक है न वांछनीय\"। इसमें दो और परतें जुड़ती हैं: राज्यों द्वारा बनाए गए कानून (जैसे कथित 'लव जिहाद' कानून, डिस्टर्ब्ड एरियाज एक्ट) पर भेदभाव के आरोप, और एसआईआर तथा संभावित एनआरसी से अल्पसंख्यकों, एससी/एसटी व प्रवासियों पर दस्तावेज़ी बोझ की आशंका, जिसकी तुलना 2019 के सीएए/एनआरसी विरोधी प्रदर्शनों से की जा रही है। आगे का रास्ता व्यापक परामर्श, प्रभावित समुदायों के भरोसे का निर्माण और यह पारदर्शिता है कि सुधार समानता के लिए हो, किसी समूह को निशाना बनाने के लिए नहीं।
मुख्य शब्द
- समान नागरिक संहिता (यूसीसी)
- विवाह, तलाक, उत्तराधिकार आदि व्यक्तिगत मामलों में सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून; स्रोत में इसे 2029 तक 21 राज्यों में लागू करने का लक्ष्य बताया गया।
- एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण)
- मतदाता सूचियों का चल रहा गहन पुनरीक्षण, जिस पर ओवैसी ने अल्पसंख्यकों, एससी/एसटी और प्रवासियों पर अतिरिक्त बोझ डालने का आरोप लगाया।
- एनआरसी
- राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर — जिसमें ओवैसी के अनुसार सभी को कतार में लगकर नागरिकता सिद्ध करनी होगी; असम का अनुभव उद्धृत।
- सेवा संकल्प अभियान
- भाजपा का एक महीने का देशव्यापी जनसंपर्क अभियान, प्रधानमंत्री मोदी के सार्वजनिक जीवन और सत्ता में 25 वर्ष के अवसर पर।
- डिस्टर्ब्ड एरियाज एक्ट
- भाजपा शासित राज्यों का कानून, जिसके बारे में ओवैसी का आरोप है कि यह मुसलमानों और हिंदुओं के बीच संपत्ति लेन-देन को प्रतिबंधित करता है।
- "छोटी भाजपा"
- ओवैसी का तंज कि एनडीए सहयोगी दलों की अपनी स्वतंत्र राजनीतिक आवाज़ नहीं है।
अभ्यास प्रश्न
- समान नागरिक संहिता को लेकर 2029 तक 21 एनडीए शासित राज्यों में लागू करने की घोषणा भारत के संघीय ढाँचे और व्यक्तिगत कानूनों की बहुलता पर क्या प्रभाव डाल सकती है? समीक्षा कीजिए।
- मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और प्रस्तावित एनआरसी से जुड़े दस्तावेज़ीकरण के बोझ के आरोपों का हाशिये के समूहों के अधिकारों के संदर्भ में परीक्षण कीजिए।
- क्या विधि आयोग का यह निष्कर्ष कि यूसीसी "न आवश्यक है न वांछनीय" है, आज भी प्रासंगिक है? पक्ष और विपक्ष के तर्कों के साथ चर्चा कीजिए।
सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।
