ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में वैश्विक शासन सुधार पर मोदी का '3आर' रोडमैप

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 12 सितंबर 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के उद्घाटन पर वैश्विक शासन ढांचों में सुधार का आह्वान किया। उन्होंने प्रतिनिधित्व, संवेदनशीलता और नियम-निर्माण पर आधारित रोडमैप रखा और कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद सुधार को अब टाला नहीं जा सकता, वार्ता की निश्चित समयसीमा और स्पष्ट परिणाम होने चाहिए। मोदी ने कहा कि ग्लोबल साउथ संकटों की पहली पंक्ति में, पर निर्णय लेने में पिछली पंक्ति में है। भारत की अध्यक्षता में 350 से अधिक बैठकें हुईं और लगभग 30 शहरों में प्रतिनिधिमंडलों की मेजबानी की गई।

स्रोत

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डेस्क जाँच · स्रोत से तुलना की

डेस्क ने क्या जाँचा (5)
  • The 18th BRICS Summit was held at Bharat Mandapam, New Delhi, opening Saturday, September 12, 2026 under India's chairmanship. — Date, venue and chairship appear in the source; no external verification possible.
  • Modi outlined a three-part roadmap of Representation, Responsiveness and Rule-making. — Directly quoted in the source and attributed to Modi.
  • More than 350 meetings were held and delegations hosted in nearly 30 Indian cities during India's chairship. — Figures attributed to Modi's speech in the source; no independent data cited.
  • Modi said UN Security Council reform 'can no longer be postponed' and negotiations need a definite timeframe. — Presented as a direct quote attributed to Modi.
  • The New Delhi Declaration was adopted and the summit moved to its second and final day. — Stated in the source without further sourcing or detail.

विश्लेषकों की राय राय

AI రాజకీయ విశ్లేషకులు · తెలుగు

బ్రిక్స్ అధ్యక్ష స్థానాన్ని మోదీ ఒక దౌత్య వేదికగానే కాకుండా, రాజకీయ సందేశ వేదికగానూ ఉపయోగించుకున్నారు. 'ప్రాతినిధ్యం, స్పందన, నియమ రూపకల్పన' అనే '3ఆర్‌ల' ప్రణాళిక కొత్త డిమాండ్ కాదు — 2018 జొహన్నెస్‌బర్గ్, 2025 రియో సదస్సుల్లో భారత్ చెప్పిన 'సంస్కరించిన బహుపాక్షికవాద' వాదననే మరింత పకడ్బందీ చట్రంలో పెట్టడం. దీని ద్వారా భారత్ గ్లోబల్ సౌత్ ప్రతినిధి-స్వరంగా తనను నిలబెట్టుకోవాలని ప్రయత్నిస్తోంది, ఇది దేశీయంగానూ, అంతర్జాతీయంగానూ లాభదాయకమైన స్థానం.

  • భద్రతా మండలి సంస్కరణ చర్చలకు 'నిర్దిష్ట కాలపరిమితి' కోరడం భారత్‌కు ప్రధాన దౌత్య లక్ష్యం — శాశ్వత సభ్యత్వ ఆకాంక్షను నేరుగా పేర్కొనకుండానే ముందుకు నెట్టే వ్యూహం.
  • 350కి పైగా సమావేశాలు, 30 నగరాల్లో ప్రతినిధి బృందాలు — ఈ లెక్కలు విదేశాంగ విజయాన్ని దేశీయ రాజకీయ ఖాతాలో జమ చేసుకునే సుపరిచిత పద్ధతి; జీ20 ఆతిథ్య నమూనాకు కొనసాగింపు.
  • 'అధికార పిరమిడ్' నుంచి 'భాగస్వామ్య వేదిక'కు అనే భాష పశ్చిమ దేశాల పేరు ప్రస్తావించకుండానే ప్రస్తుత వ్యవస్థను ప్రశ్నించే జాగ్రత్తైన పదజాలం.
  • బ్రిక్స్‌లోని అంతర్గత ఆసక్తుల భేదాలు — ప్రత్యేకించి భద్రతా మండలి విస్తరణపై సభ్య దేశాల మధ్య ఏకాభిప్రాయం ఉందా లేదా — ఈ కథనంలో స్పష్టం కాలేదు, అదే ఈ ప్రణాళిక అసలు పరీక్ష.
  • అభివృద్ధి చెందుతున్న సాంకేతికతల నియమావళిలో గ్లోబల్ సౌత్ భాగస్వామ్యం అనే అంశం, రాబోయే సంవత్సరాల్లో అత్యధిక రాజకీయ ఘర్షణ జరిగే రంగాన్ని ముందుగానే గుర్తించడం.

किस पर नज़र रखें — న్యూఢిల్లీ డిక్లరేషన్‌లో భద్రతా మండలి సంస్కరణకు, ఆర్థిక సంస్థల్లో ఓటింగ్ వాటాల పునర్విభజనకు ఎంత నిర్దిష్టమైన భాష చేరిందో — మరియు ఆ భాషను ఐరాస సర్వప్రతినిధి సభ వేదికపై భారత్ ఎలా ముందుకు తీసుకెళ్తుందో గమనించాలి.

మోదీ ప్రతిపాదనకు ఇతర బ్రిక్స్ నేతల స్పందన ఏమిటి, ఈ '3ఆర్‌ల' ప్రణాళికకు కార్యాచరణ రూపం లేదా కాలపరిమితి ఖరారైందా అనే విషయాలను ఈ కథనం స్థాపించలేదు.

गहराई से

शोध सारांश · 8 तथ्य · 4 तारीख़ें · परीक्षा के लिए

सार

पृष्ठभूमि

12 सितंबर 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का उद्घाटन हुआ, जिसकी अध्यक्षता भारत कर रहा है। उद्घाटन भाषण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक शासन ढांचों में बुनियादी सुधार की मांग की और ग्लोबल साउथ को 'रूल-टेकर' से 'रूल-शेपर' बनाने का आह्वान किया। भारत ब्रिक्स मंचों पर 2018 के जोहानिसबर्ग शिखर सम्मेलन से ही 'सुधारित बहुपक्षवाद' की बात उठा रहा है। इसी शिखर सम्मेलन में नई दिल्ली घोषणापत्र भी अपनाया गया।

मुख्य तथ्य

  • 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 12 सितंबर 2026 (शनिवार) को नई दिल्ली के भारत मंडपम में भारत की अध्यक्षता में शुरू हुआ।
  • मोदी ने सुधार रोडमैप के तीन केंद्रीय पहलू बताए: प्रतिनिधित्व (Representation), संवेदनशीलता (Responsiveness) और नियम-निर्माण (Rule-making)।
  • भारत की अध्यक्षता के दौरान 350 से अधिक बैठकें आयोजित हुईं और सदस्य देशों के प्रतिनिधिमंडलों की मेजबानी लगभग 30 भारतीय शहरों में की गई।
  • मोदी ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद सुधार को और टाला नहीं जा सकता; वार्ता निश्चित समयसीमा और स्पष्ट परिणामों से जुड़ी होनी चाहिए।
  • उन्होंने कहा, 'आज ग्लोबल साउथ वैश्विक संकटों की पहली पंक्ति में है, लेकिन निर्णय लेने में पिछली पंक्ति में है।'
  • मोदी ने 'विशेषाधिकार के पिरामिड' (pyramid of privilege) को 'साझेदारी के मंच' (platform of partnership) में बदलने की बात कही।
  • जुलाई 2025 के रियो डी जेनेरियो ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में मोदी ने UNSC, IMF, विश्व बैंक और WTO के व्यापक सुधार की मांग की थी।
  • 12 सितंबर को नई दिल्ली घोषणापत्र अपनाया गया और शिखर सम्मेलन अपने दूसरे व अंतिम दिन की ओर बढ़ा।

समयरेखा

  1. जुलाई 2018जोहानिसबर्ग ब्रिक्स शिखर सम्मेलन (समूह की दसवीं वर्षगांठ) में मोदी ने 'सुधारित बहुपक्षवाद' का विचार पहली बार रखा।
  2. जुलाई 2025रियो डी जेनेरियो ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में मोदी ने बीसवीं सदी की संस्थाओं – UNSC, IMF, विश्व बैंक, WTO – के व्यापक सुधार और ग्लोबल साउथ को प्राथमिकता देने की मांग की।
  3. 12 सितंबर 2026नई दिल्ली के भारत मंडपम में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का उद्घाटन; मोदी का '3आर' रोडमैप भाषण और नई दिल्ली घोषणापत्र की स्वीकृति।
  4. 12 सितंबर 2026 के बादशिखर सम्मेलन नई दिल्ली में अपने दूसरे और अंतिम दिन के निर्धारित सत्रों की ओर बढ़ा।

किसका दाँव

  • भारत (अध्यक्ष देश) — जन-केंद्रित एवं मानवता-प्रथम अध्यक्षता; 350+ बैठकें और ~30 शहरों में मेजबानी के जरिये ब्रिक्स को जनता से जोड़ना और सुधार एजेंडा आगे बढ़ाना।
  • ब्रिक्स सदस्य देश — उभरती प्रौद्योगिकियों के नियम-निर्माण में ग्लोबल साउथ की सार्थक भागीदारी सुनिश्चित करना; समूह मौजूदा बहुपक्षीय व्यवस्था की अपर्याप्तता के कारण बना था।
  • ग्लोबल साउथ / विकासशील देश — संकटों का सर्वाधिक प्रभाव झेलने के बावजूद प्रमुख निर्णय-मंचों से बाहर रहना; 'रूल-टेकर' से 'रूल-शेपर' बनने की मांग।
  • संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद — पाठ-आधारित (text-based) सुधार वार्ता, जो वर्षों से महासभा में बिना निश्चित अंत-बिंदु चल रही है, पर समयसीमा और मापनीय परिणाम का दबाव।
  • अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थाएं (IMF, विश्व बैंक) — मतदान शक्ति, नेतृत्व पद और नीति प्राथमिकताओं को स्थापना-कालीन व्यवस्था के बजाय वर्तमान आर्थिक वास्तविकताओं के अनुरूप ढालने की मांग।

क्यों अहम है

यह भाषण भारत की विदेश नीति के केंद्रीय दावे – 'सुधारित बहुपक्षवाद' – को ब्रिक्स के मंच से ठोस रूप देता है, और सुरक्षा परिषद सुधार वार्ता के लिए समयसीमा तथा मापनीय परिणाम की मांग करता है। इसमें उभरती प्रौद्योगिकियों के नियम-निर्माण का मुद्दा भी जुड़ता है, जहां विकासशील देशों को डर है कि ढांचे उनकी भागीदारी के बिना बन जाएंगे। भारत की अध्यक्षता और नई दिल्ली घोषणापत्र इस एजेंडा को आगे ले जाने का माध्यम बनते हैं।

UPSC नज़रिया

प्रीलिम्स संकेत

  • 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन: 12 सितंबर 2026, भारत मंडपम, नई दिल्ली; भारत की अध्यक्षता; नई दिल्ली घोषणापत्र अपनाया गया।
  • मोदी का '3आर' रोडमैप: Representation (प्रतिनिधित्व), Responsiveness (संवेदनशीलता), Rule-making (नियम-निर्माण)।
  • ब्रिक्स का मूल पूर्ण रूप: ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका।
  • 'सुधारित बहुपक्षवाद' का विचार मोदी ने पहली बार जुलाई 2018 के जोहानिसबर्ग ब्रिक्स शिखर सम्मेलन (समूह की 10वीं वर्षगांठ) में रखा।
  • रियो डी जेनेरियो ब्रिक्स शिखर सम्मेलन, जुलाई 2025: UNSC, IMF, विश्व बैंक और WTO में व्यापक सुधार की मांग।
  • भारत की अध्यक्षता में 350+ बैठकें, लगभग 30 भारतीय शहरों में प्रतिनिधिमंडलों की मेजबानी।

मेन्स दृष्टिकोण

नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी का '3आर' रोडमैप वैश्विक शासन की उस संरचनात्मक विषमता को संबोधित करता है जिसमें, उनके शब्दों में, ग्लोबल साउथ 'संकटों की पहली पंक्ति' में परंतु 'निर्णय-निर्माण की पिछली पंक्ति' में खड़ा है। कारण स्पष्ट हैं: बीसवीं सदी में गठित संस्थाओं – संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद, IMF, विश्व बैंक, WTO – में मतदान शक्ति, नेतृत्व और नीति प्राथमिकताएं स्थापना-कालीन शक्ति-संतुलन को दर्शाती हैं, न कि आज की आर्थिक वास्तविकताओं को; भारत का तर्क है कि जो देश आज वैश्विक वृद्धि के वाहक हैं, उन्हें उस वृद्धि को नियंत्रित करने वाली संस्थाओं की नीतियां गढ़ने में भी उचित भूमिका मिले। निहितार्थ दोहरे हैं – एक ओर सुरक्षा परिषद पर पाठ-आधारित वार्ता वर्षों से महासभा में बिना निश्चित अंत-बिंदु चल रही है, दूसरी ओर उभरती प्रौद्योगिकियों के नियम-ढांचे प्रौद्योगिकीय शक्ति-केंद्रों के बाहर के देशों की पर्याप्त भागीदारी के बिना बनते जा रहे हैं। आगे का रास्ता, स्रोत के अनुसार, सुधार वार्ता को निश्चित समयसीमा व मापनीय परिणामों से जोड़ना, वित्तीय संस्थाओं में पुनर्संतुलन, और 'विशेषाधिकार के पिरामिड' को 'साझेदारी के मंच' में बदलना है, जहां प्रत्येक देश की आवाज़ और हिस्सेदारी हो तथा निर्णय मानव-केंद्रित हों।

मुख्य शब्द

ब्रिक्स (BRICS)
मूलतः ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका का समूह, जो पांच संस्थापक अर्थव्यवस्थाओं द्वारा मौजूदा बहुपक्षीय व्यवस्था को अपर्याप्त मानने के कारण अस्तित्व में आया।
सुधारित बहुपक्षवाद (Reformed Multilateralism)
भारत द्वारा ब्रिक्स मंचों पर उठाई गई मांग कि बीसवीं सदी की बहुपक्षीय संस्थाओं को इक्कीसवीं सदी की चुनौतियों के अनुरूप सुधारा जाए।
पाठ-आधारित वार्ता (Text-based negotiations)
सुरक्षा परिषद सुधार पर लिखित प्रारूप के आधार पर होने वाली वार्ता, जिसके लिए मोदी ने निश्चित समयसीमा और मापनीय परिणाम की मांग की।
रूल-टेकर से रूल-शेपर
ग्लोबल साउथ को नियम केवल स्वीकारने वाले से नियम गढ़ने वाले में बदलने का विचार, जो मोदी के भाषण का केंद्रीय आह्वान था।
नई दिल्ली घोषणापत्र
18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में 12 सितंबर 2026 को अपनाया गया दस्तावेज़, जिसके बाद सम्मेलन अपने अंतिम दिन की ओर बढ़ा।
भारत मंडपम
नई दिल्ली स्थित स्थल, जहां 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन आयोजित हुआ।

अभ्यास प्रश्न

  1. 'ग्लोबल साउथ वैश्विक संकटों की पहली पंक्ति में है, पर निर्णय लेने में पिछली पंक्ति में' – इस कथन के आलोक में वैश्विक शासन संस्थाओं में प्रतिनिधित्व के असंतुलन की परीक्षा कीजिए।
  2. भारत के 'सुधारित बहुपक्षवाद' के एजेंडा को आगे बढ़ाने में ब्रिक्स एक प्रभावी मंच किस हद तक है? 2018 जोहानिसबर्ग से 2026 नई दिल्ली तक की निरंतरता के संदर्भ में चर्चा कीजिए।
  3. उभरती प्रौद्योगिकियों के नियम-निर्माण में विकासशील देशों की सार्थक भागीदारी क्यों आवश्यक है? इसके अभाव के संभावित परिणाम बताइए।

सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।

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