विशाखापत्तनम की झुग्गी बस्ती के परिवारों को 12 मंजिला फ्लैट
आंध्र प्रदेश सरकार विशाखापत्तनम के पूर्णा मार्केट के पास वेलंपेट लक्ष्मीनगर में पांच दशकों से टिन के शेड में रह रहे 177 परिवारों के लिए स्टिल्ट सहित 12 मंजिला इमारत बना रही है। प्रत्येक परिवार को 410 वर्ग फुट का 1बीएचके फ्लैट मिलेगा, जिसके लिए केवल 3.5 लाख रुपये, हर महीने एक हजार रुपये से कम की ईएमआई में चुकाने होंगे। परियोजना लागत 28.44 करोड़ रुपये और प्रति यूनिट मूल्य 16.07 लाख रुपये है। केंद्र 1.5 लाख तथा राज्य 1 लाख रुपये सब्सिडी दे रहा है। काम नौ महीने में पूरा करने का लक्ष्य है।
स्रोत
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डेस्क ने क्या जाँचा (5)
- A stilt plus 12-storey building for 177 slum families is being built at Velampeta Lakshminagar, Visakhapatnam. — Figure appears in source; no named official cited.
- Beneficiaries pay Rs 3.5 lakh for a 410 sq ft 1BHK flat via EMIs under Rs 1,000 a month. — Stated in source without attribution.
- Project cost Rs 28.44 crore; unit value Rs 16.07 lakh. — Specific figures in source; costing source unidentified.
- Centre gives Rs 1.5 lakh under PM Awas Yojana, state Rs 1 lakh, developer bears the rest. — Scheme claim internally consistent with unit cost but unattributed.
- Nine-month completion target; developer incentivised with TDR at 1:4 and fee waivers. — Timeline and incentives in source; no sanction order referenced.
विश्लेषकों की राय राय
यह केवल एक आवास योजना नहीं है — सरकार उस 'इन-सीटू' मॉडल की राजनीतिक परीक्षा ले रही है, जिसमें शहरी गरीबों को शहर के बीच की कीमती ज़मीन से हटाए बिना पक्के घर दिए जाते हैं। विशाखापत्तनम का चयन संयोग नहीं है; इसे नगर प्रशासन पर पकड़ और शहरी गरीब वोट दोनों के लिए की गई कोशिश के रूप में पढ़ा जाना चाहिए। केंद्र और राज्य दोनों सब्सिडी दे रहे हैं, इसलिए श्रेय लेने की होड़ तय है, वहीं डेवलपर को दी गई टीडीआर और फीस माफी विपक्ष को तैयार हमला-बिंदु दे सकती है।
- पाँच दशकों से टिन शेड में रह रहे 177 परिवार संख्या में कम हैं, लेकिन राज्य की इस तरह की पहली परियोजना होने के कारण यह शहरी गरीबी पर सरकार की छवि तय करने वाला 'शोकेस' बन जाती है।
- 16.07 लाख रुपये मूल्य की यूनिट के लिए लाभार्थी से केवल 3.5 लाख रुपये और महीने में हज़ार रुपये से कम की ईएमआई — यह चुनावी संदेश में आसानी से टिकने वाला आंकड़ा है।
- पीएम आवास योजना के तहत केंद्र के 1.5 लाख और राज्य के 1 लाख रुपये के चलते 'किसने दिया' की प्रचार-प्रतिस्पर्धा लगभग तय है।
- डेवलपर को 1:4 अनुपात में टीडीआर, पार्किंग नियमों में ढील और अनुमति शुल्क माफी — डिज़ाइन-बिल्ड-फाइनेंस-ट्रांसफर रास्ते पर पारदर्शिता के सवाल खुल सकते हैं।
- नौ महीने की समयसीमा दोतरफा तलवार है: समय पर पूरा होना 'झुग्गी-मुक्त राज्य' के नारे को बल देगा, देरी विपक्ष का हथियार बनेगी।
किस पर नज़र रखें — देखना होगा कि नौ महीने की समयसीमा टिकती है या नहीं, सौंपने के मौके पर केंद्र और राज्य के नेता मंच कैसे साझा करते हैं, और यह मॉडल दूसरी बस्तियों तक कितनी तेज़ी से बढ़ता है।
यह खबर केवल परियोजना की घोषणा और डिज़ाइन का ब्योरा बताती है — लाभार्थियों या डेवलपर के चयन की प्रक्रिया, स्थानीय लोगों या विपक्ष की प्रतिक्रिया, और निर्माण की वास्तविक प्रगति के बारे में कुछ भी स्थापित नहीं करती।
गहराई से
शोध सारांश · 8 तथ्य · 3 तारीख़ें · परीक्षा के लिएसार
पृष्ठभूमि
विशाखापत्तनम शहर में पूर्णा मार्केट के पास वेलंपेट लक्ष्मीनगर में 177 परिवार पांच दशकों से 59 सेंट जमीन पर टिन के शेड (रेकुल शेड) में रह रहे हैं। तंग जगह और अपर्याप्त सुविधाओं से इन परिवारों को निकालकर पक्के घर देने की योजना के तहत आंध्र प्रदेश सरकार वहीं स्टिल्ट सहित 12 मंजिला हाईराइज अपार्टमेंट बनवा रही है। परियोजना डिजाइन, बिल्ड, फाइनेंस, ट्रांसफर (DBFT) मॉडल पर चल रही है और राज्य में इस तरह की यह पहली परियोजना बताई गई है। सफल होने पर सरकार अन्य झुग्गी बस्तियों में भी यही मॉडल लागू कर राज्य को झुग्गी-मुक्त बनाने की सोच रखती है।
मुख्य तथ्य
- वेलंपेट लक्ष्मीनगर की झुग्गी बस्ती के 177 परिवार नए फ्लैटों में स्थानांतरित होंगे; अब तक वे 59 सेंट जमीन पर टिन शेड में रह रहे थे।
- प्रत्येक परिवार को 410 वर्ग फुट का 1BHK (एक बेडरूम, हॉल, किचन) फ्लैट मिलेगा।
- लाभार्थी को केवल 3.5 लाख रुपये देने होंगे, जो हर माह एक हजार रुपये से कम की ईएमआई में चुकाए जा सकेंगे।
- कुल परियोजना लागत 28.44 करोड़ रुपये; प्रति यूनिट मूल्य 16.07 लाख रुपये।
- केंद्र प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 1.5 लाख रुपये और राज्य 1 लाख रुपये सब्सिडी दे रहा है; शेष राशि डेवलपर वहन करेगा।
- 2,691 वर्ग गज जमीन पर स्टिल्ट प्लस 12 मंजिला भवन; पहली 11 मंजिलों पर 15 फ्लैट प्रति मंजिल और ऊपरी मंजिल पर 12 फ्लैट।
- निर्माण शीयर वॉल तकनीक से हो रहा है, जिससे काम तेज़ी से पूरा होगा; नौ महीने में पूरा करने का लक्ष्य।
- डेवलपर को प्रोत्साहन के रूप में 1:4 अनुपात में टीडीआर, पार्किंग नियमों में ढील और अनुमति शुल्क माफ।
समयरेखा
- पिछले पांच दशकवेलंपेट लक्ष्मीनगर में परिवार 59 सेंट जमीन पर टिन के शेड में झुग्गी जीवन जी रहे हैं।
- 20 सितंबर 2026 (समाचार प्रकाशन)राज्य सरकार द्वारा 177 परिवारों के लिए स्टिल्ट सहित 12 मंजिला अपार्टमेंट निर्माणाधीन होने की जानकारी सामने आई।
- नौ महीने में (लक्ष्य)शीयर वॉल तकनीक से निर्माण कार्य पूरा करने का लक्ष्य।
किसका दाँव
- वेलंपेट लक्ष्मीनगर के 177 झुग्गी परिवार — टिन शेड की जगह 410 वर्ग फुट का पक्का 1BHK फ्लैट; केवल 3.5 लाख रुपये का भुगतान, 1,000 रुपये से कम मासिक ईएमआई।
- आंध्र प्रदेश सरकार — प्रति यूनिट 1 लाख रुपये सब्सिडी; मॉडल सफल होने पर राज्य को झुग्गी-मुक्त बनाने का लक्ष्य।
- केंद्र सरकार — प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत प्रति यूनिट 1.5 लाख रुपये सब्सिडी।
- डेवलपर — लागत का शेष हिस्सा वहन; बदले में 1:4 अनुपात में टीडीआर, पार्किंग नियमों में ढील और अनुमति शुल्क माफी।
- अन्य झुग्गी बस्तियों के निवासी — परियोजना सफल होने पर यही मॉडल उनके इलाकों में लागू होने की संभावना।
क्यों अहम है
शहरी झुग्गी पुनर्वास में जमीन की कमी सबसे बड़ी अड़चन है; यहां उसी 2,691 वर्ग गज जमीन पर ऊर्ध्वाधर निर्माण कर 177 परिवारों को उनके मूल स्थान पर ही पक्का आवास दिया जा रहा है। डेवलपर को टीडीआर और शुल्क माफी जैसे प्रोत्साहन देकर सरकारी खर्च घटाने का यह प्रयोग राज्य में पहली बार हो रहा है। सफल होने पर यह मॉडल अन्य बस्तियों के लिए खाका बन सकता है।
UPSC नज़रिया
प्रीलिम्स संकेत
- परियोजना स्थल: विशाखापत्तनम, पूर्णा मार्केट के पास वेलंपेट लक्ष्मीनगर; 177 लाभार्थी परिवार।
- फ्लैट आकार 410 वर्ग फुट (1BHK); लाभार्थी अंशदान 3.5 लाख रुपये।
- सब्सिडी: केंद्र (प्रधानमंत्री आवास योजना) 1.5 लाख + राज्य 1 लाख रुपये प्रति यूनिट।
- कुल लागत 28.44 करोड़ रुपये; प्रति यूनिट मूल्य 16.07 लाख रुपये।
- मॉडल: डिजाइन, बिल्ड, फाइनेंस, ट्रांसफर (DBFT); निर्माण तकनीक: शीयर वॉल।
- डेवलपर प्रोत्साहन: 1:4 अनुपात में टीडीआर, पार्किंग नियमों में ढील, अनुमति शुल्क माफ।
मेन्स दृष्टिकोण
विशाखापत्तनम की वेलंपेट लक्ष्मीनगर परियोजना शहरी झुग्गी पुनर्वास के 'इन-सीटू ऊर्ध्वाधर पुनर्विकास' मॉडल का उदाहरण है: पांच दशकों से 59 सेंट जमीन पर टिन शेड में रह रहे 177 परिवारों को 2,691 वर्ग गज पर बने स्टिल्ट प्लस 12 मंजिला भवन में 410 वर्ग फुट के 1BHK फ्लैट दिए जा रहे हैं। कारण स्पष्ट हैं — शहरी केंद्र में जमीन की कमी, तंग व असुरक्षित बसावट और अपर्याप्त सुविधाएं। वित्तीय ढांचे में लागत-बंटवारा (केंद्र 1.5 लाख, राज्य 1 लाख, शेष डेवलपर) और लाभार्थी अंशदान को 1,000 रुपये से कम मासिक ईएमआई तक सीमित रखना गरीब परिवारों पर बोझ घटाता है, जबकि 1:4 टीडीआर, पार्किंग नियमों में ढील और शुल्क माफी डेवलपर की भागीदारी सुनिश्चित करती है। निहितार्थ यह है कि सार्वजनिक भूमि के मूल्य को प्रोत्साहन में बदलकर बजटीय दबाव के बिना आवास दिया जा सकता है। आगे की राह में नौ महीने की समयसीमा का पालन, लिफ्ट-निरंतर जलापूर्ति जैसी सुविधाओं का दीर्घकालिक रखरखाव और ऊंची इमारत में रहने से जुड़ी लागतों की वहनीयता अहम रहेगी; सरकार इसकी सफलता के आधार पर अन्य बस्तियों में यही मॉडल दोहराकर राज्य को झुग्गी-मुक्त बनाने की सोच रखती है।
मुख्य शब्द
- प्रधानमंत्री आवास योजना
- केंद्र की आवास योजना, जिसके तहत इस परियोजना में प्रति यूनिट 1.5 लाख रुपये सब्सिडी दी जा रही है।
- डीबीएफटी (डिजाइन, बिल्ड, फाइनेंस, ट्रांसफर)
- वह मॉडल जिसमें डेवलपर परियोजना का डिजाइन, निर्माण और वित्तपोषण करता है और फिर उसे हस्तांतरित करता है।
- टीडीआर
- हस्तांतरणीय विकास अधिकार; यहां डेवलपर को प्रोत्साहन के तौर पर 1:4 अनुपात में दिया जा रहा है।
- शीयर वॉल तकनीक
- बहुमंजिला भवन निर्माण की तकनीक, जिससे निर्माण तेज़ी से पूरा होता है।
- स्टिल्ट प्लस 12 मंजिल
- भूतल पर खुला स्टिल्ट (पार्किंग/खाली स्थान) और उसके ऊपर 12 आवासीय मंजिलें।
- 1BHK
- एक बेडरूम, हॉल और किचन वाला फ्लैट; यहां 410 वर्ग फुट का।
अभ्यास प्रश्न
- इन-सीटू ऊर्ध्वाधर पुनर्विकास शहरी झुग्गी पुनर्वास की भूमि-कमी की समस्या का समाधान कैसे कर सकता है? विशाखापत्तनम परियोजना के उदाहरण से समझाइए।
- टीडीआर और शुल्क माफी जैसे प्रोत्साहन निजी डेवलपरों को किफायती आवास में शामिल करने में कितने प्रभावी हैं? लाभ और जोखिमों की चर्चा कीजिए।
- लाभार्थी अंशदान को 1,000 रुपये से कम मासिक ईएमआई तक सीमित रखने का निर्णय आवास की वहनीयता और परियोजना की वित्तीय टिकाऊपन को कैसे प्रभावित करता है?
सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।
