क्विक कॉमर्स पैकेजिंग कचरे पर चिंता, लेख में सुझाव
एक विचार लेख में कहा गया है कि 10 मिनट में डिलीवरी करने वाले ऐप्स के विस्तार से कार्बन उत्सर्जन, ईंधन खपत और प्लास्टिक कचरा बढ़ रहा है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की 2022-23 वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार भारत में हर साल 39 लाख टन प्लास्टिक कचरा और प्रतिदिन लगभग 10,689 टन निकलता है। प्रति व्यक्ति कचरा 2016-17 के 700 ग्राम से बढ़कर 2020 तक 2.5 किलो से अधिक हो गया। लेख में बायोप्लास्टिक, कंपोस्टेबल मेलर और रिटर्नेबल बास्केट मॉडल अपनाने का सुझाव है।
स्रोत
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डेस्क ने क्या जाँचा (4)
- India generates 3.9 million tonnes of plastic waste annually and nearly 10,689 tonnes per day. — Attributed in the source to the Central Pollution Control Board annual report for 2022-23.
- Per capita plastic waste generation rose from 700 grams in 2016-17 to over 2.5 kg by 2020. — Figure appears in source alongside the CPCB citation; described as a tripling in four years.
- Category I rigid plastic packaging must contain at least 30% recycled material, rising to 60% by 2028-29. — Attributed to the Plastic Waste Management Rules, 2016 and subsequent amendments as cited in the source.
- Quick commerce deliveries in 10-15 minutes increase carbon footprint, fuel use and packaging waste. — Author's analytical argument in an opinion column; no study or data source given.
विश्लेषकों की राय राय
यह लेख पर्यावरण की भाषा में लिखा गया है, लेकिन इसके भीतर साफ राजनीतिक-आर्थिक सवाल है — तेज डिलीवरी उद्योग पर नियमन का बोझ किस पर पड़ेगा। एक तरफ रोजगार और शहरी उपभोक्ता की सुविधा, दूसरी तरफ प्लास्टिक कचरे का प्रबंधन; ऐसे में सरकारें सख्त पाबंदी के बजाय प्रोत्साहन और स्वैच्छिक मानकों की ओर झुक सकती हैं। लेखिका जिन उपायों की बात करती हैं — EPR का कड़ा अमल और रीसाइकल्ड कंटेंट की शर्तें — वे मुख्यतः केंद्र के दायरे में हैं, जबकि कचरा संग्रह और पृथक्करण का ढांचा राज्यों तथा नगर निकायों पर निर्भर है, और यही विभाजन जवाबदेही को कमजोर करता है।
- क्विक कॉमर्स बड़े पैमाने पर रोजगार देता है, इसलिए किसी भी सख्त कार्रवाई की राजनीतिक कीमत होगी — रोजगार बनाम पर्यावरण की पुरानी खींचतान दोहराई जा सकती है।
- प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट नियम और EPR ढांचा पहले से मौजूद होने के कारण राजनीतिक बहस नए कानून की नहीं, अमल में कमी की होगी।
- नियम केंद्र बनाता है पर संग्रह-पृथक्करण स्थानीय स्तर पर होता है, इसलिए नाकामी पर केंद्र-राज्य और राज्य-नगर निकाय के बीच दोषारोपण स्वाभाविक है।
- BRSR जैसी स्वैच्छिक सस्टेनेबिलिटी रिपोर्टिंग उद्योग के लिए बाध्यकारी नियमन टालने की पूर्व-रणनीति बन सकती है।
- इन ऐप्स का मुख्य उपभोक्ता शहरी मध्यवर्ग है, इसलिए पैकेजिंग शुल्क जैसी उपभोक्ता पर लागत डालने वाली कोई भी पहल राजनीतिक रूप से संवेदनशील रहेगी।
किस पर नज़र रखें — देखना होगा कि केंद्र EPR क्रेडिट के सत्यापन को कड़ा करने की दिशा में बढ़ता है या नीति उद्योग-नेतृत्व वाले स्वैच्छिक मानकों पर ही रुक जाती है।
यह एक शोध छात्रा का विचार-लेख है; इससे यह स्थापित नहीं होता कि सरकार क्विक कॉमर्स के लिए अलग नियमन पर विचार कर रही है या किसी दल ने यह मांग उठाई है।
गहराई से
शोध सारांश · 8 तथ्य · 8 तारीख़ें · परीक्षा के लिएसार
पृष्ठभूमि
भारत में जेप्टो, ब्लिंकइट और बिगबास्केट जैसे क्विक कॉमर्स ऐप्स 10 से 15 मिनट में किराना, दवाएं और इलेक्ट्रॉनिक्स घर पहुंचा रहे हैं। कोविड-19 के दौरान बनी असामान्य परिस्थितियों से इन सेवाओं, विशेष रूप से सेम-डे डिलीवरी, में तेजी आई और अब यह कई घरों की दिनचर्या बन गई है। हैदराबाद के सेंटर फॉर इकोनॉमिक एंड सोशल स्टडीज (CESS) की पीएचडी शोधार्थी तीगला श्रुति के विचार लेख (18 सितंबर 2026 को प्रकाशित) में तर्क है कि इस अति-सुविधा से कार्बन फुटप्रिंट, ईंधन खपत और पैकेजिंग कचरा बढ़ रहा है। लेख का निष्कर्ष है कि क्विक कॉमर्स खुद दुश्मन नहीं है, असली दुश्मन अस्थिर पैकेजिंग और डिलीवरी प्रथाएं हैं।
मुख्य तथ्य
- केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) की 2022-23 वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार भारत में सालाना 39 लाख टन (3.9 मिलियन टन) प्लास्टिक कचरा पैदा होता है।
- CPCB के अनुसार भारत में प्रतिदिन लगभग 10,689 टन प्लास्टिक कचरा निकलता है।
- प्रति व्यक्ति प्लास्टिक कचरा 2016-17 के 700 ग्राम से बढ़कर 2020 तक 2.5 किलो से अधिक हो गया, यानी चार वर्षों में लगभग तीन गुना।
- एक ही ऑर्डर में बबल रैप, प्लास्टिक कैरी बैग, प्लास्टिक पाउच, चिपकने वाले टेप, इंसुलेटेड कवर और छोटे सिंगल-यूज कंटेनर शामिल हो सकते हैं।
- प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स, 2016 और उसके संशोधन प्लास्टिक पैकेजिंग, रीसाइकल्ड कंटेंट और पुनः उपयोग का नियामक ढांचा देते हैं।
- 2025-26 के लिए श्रेणी I (रिजिड) प्लास्टिक पैकेजिंग — HDPE और PET कंटेनर — पेश की गई, जिसमें कम से कम 30% रीसाइकल्ड सामग्री अनिवार्य है।
- श्रेणी I प्लास्टिक में रीसाइकल्ड सामग्री की अनिवार्यता 2028-29 तक बढ़कर 60% हो जाएगी।
- सिंगल-यूज प्लास्टिक मिट्टी में सैकड़ों साल तक नष्ट नहीं होता, वर्षाजल के रिसाव में बाधा बनता है और पेड़ों की जड़ों को रोकता है।
समयरेखा
- 2016प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स लागू; बाद में संशोधन किए गए।
- 2016-17प्रति व्यक्ति प्लास्टिक कचरा उत्पादन 700 ग्राम।
- कोविड-19 कालसेम-डे डिलीवरी और क्विक कॉमर्स सेवाओं में तेज वृद्धि।
- 2020प्रति व्यक्ति प्लास्टिक कचरा 2.5 किलो से अधिक।
- 2022-23CPCB वार्षिक रिपोर्ट: 39 लाख टन सालाना और 10,689 टन प्रतिदिन प्लास्टिक कचरा।
- 2025-26श्रेणी I रिजिड प्लास्टिक पैकेजिंग (HDPE, PET) में न्यूनतम 30% रीसाइकल्ड सामग्री की शुरुआत।
- 18 सितंबर 2026विचार लेख प्रकाशित।
- 2028-29श्रेणी I प्लास्टिक में रीसाइकल्ड सामग्री की सीमा 60% तक।
किसका दाँव
- क्विक कॉमर्स कंपनियां (जेप्टो, ब्लिंकइट, बिगबास्केट) — टिकाऊ पैकेजिंग, EPR अनुपालन और सस्टेनेबिलिटी रिपोर्टिंग अपनाना; प्रतिष्ठा जोखिम और निवेशकों का भरोसा।
- उपभोक्ता और घर-परिवार — न्यूनतम पैकेजिंग चुनना, छोटे-बिखरे ऑर्डर से बचना और अति-उपभोग की आदत पर नियंत्रण।
- सरकार और नियामक — सिंगल-यूज प्लास्टिक व ठोस कचरा नियमों का कड़ा कार्यान्वयन, EPR क्रेडिट का सत्यापन और हरित पैकेजिंग के लिए प्रोत्साहन।
- केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) — प्लास्टिक कचरे के आंकड़े जुटाना और निगरानी करना।
- डिलीवरी कर्मी / रोजगार — प्लेटफॉर्म लाखों ऑर्डर और रोजगार देते हैं, इसलिए दक्षता से समझौता किए बिना समाधान जरूरी।
- स्कूल, अभिभावक और नागरिक समाज/NGO — स्वच्छ भारत अभियान जैसे कार्यक्रमों, कार्यशालाओं और वीडियो से कचरा पृथक्करण व टिकाऊ उपभोग की जागरूकता।
- SEBI — BRSR कोर मानकों के जरिये पारदर्शिता और जवाबदेही की रूपरेखा।
क्यों अहम है
10-15 मिनट की डिलीवरी की सुविधा लाखों उपभोक्ताओं तक फैलने पर कार्बन उत्सर्जन, ईंधन खपत, भीड़भाड़, शोर और पैकेजिंग कचरे के रूप में बड़ा पर्यावरणीय बोझ बनती है। फेंका गया प्लास्टिक रीसाइकल करना मुश्किल होता है और लैंडफिल व नालियों में पहुंचकर जलीय पारिस्थितिकी को नुकसान पहुंचाता है तथा खाद्य श्रृंखला में माइक्रोप्लास्टिक फैलाता है। लेख का केंद्रीय संदेश है कि गति और सुविधा पर्यावरणीय गैर-जिम्मेदारी का बहाना नहीं बन सकती।
UPSC नज़रिया
प्रीलिम्स संकेत
- CPCB वार्षिक रिपोर्ट 2022-23: भारत में 39 लाख टन प्लास्टिक कचरा सालाना, 10,689 टन प्रतिदिन।
- प्रति व्यक्ति प्लास्टिक कचरा: 2016-17 में 700 ग्राम से 2020 तक 2.5 किलो से अधिक।
- प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स, 2016 — प्लास्टिक पैकेजिंग, रीसाइकल्ड कंटेंट और पुनः उपयोग का नियामक ढांचा।
- श्रेणी I प्लास्टिक = रिजिड पैकेजिंग (HDPE, PET); 2025-26 में 30% रीसाइकल्ड सामग्री, 2028-29 तक 60%।
- EPR (विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व) और EPR क्रेडिट का सत्यापन — कंपनियों की जवाबदेही का साधन।
- SEBI का BRSR कोर — व्यावसायिक उत्तरदायित्व एवं संधारणीयता रिपोर्टिंग का मानक।
मेन्स दृष्टिकोण
भारत का क्विक कॉमर्स उद्योग रोजगार और उपभोक्ता सुविधा देता है, लेकिन इसका तेज विस्तार पर्यावरणीय चिंताएं खड़ी करता है। कारण-पक्ष में कोविड-19 के बाद बदले उपभोग पैटर्न, न्यूनतम ऑर्डर मूल्य या डिलीवरी शुल्क बचाने के लिए अनावश्यक वस्तुएं जोड़ने से होने वाला अति-उपभोग, और बिखरे छोटे ऑर्डरों से उत्सर्जन, भीड़भाड़ व शोर में वृद्धि शामिल है; पैकेजिंग में बबल रैप, प्लास्टिक पाउच, टेप और सिंगल-यूज कंटेनर सस्ते तो हैं पर रीसाइकल करना कठिन, जिससे लैंडफिल, नालियां, जलीय पारिस्थितिकी और माइक्रोप्लास्टिक की समस्या बढ़ती है। समाधान बहुस्तरीय है: कंपनियां बायोप्लास्टिक व कंपोस्टेबल मेलर (कॉर्न स्टार्च, कसावा जैसे पादप-आधारित पॉलिमर), हनीकॉम्ब-संरचित कागज, मल्टीलेयर्ड क्राफ्ट पेपर और हाइपर-लोकल रिटर्नेबल बास्केट मॉडल अपनाएं, कच्चे माल के लिए सहकारी समितियों व अनुबंध खेती से जुड़ें, तथा श्रेणी I प्लास्टिक व BRSR कोर आधारित पारदर्शी सस्टेनेबिलिटी स्कोरकार्ड अपनाएं; सरकार सिंगल-यूज प्लास्टिक व ठोस कचरा नियमों का कड़ा कार्यान्वयन, EPR की मजबूती, हरित पैकेजिंग को प्रोत्साहन और संग्रह-पृथक्करण-रीसाइक्लिंग ढांचे को सशक्त करे; स्कूल, अभिभावक, NGO और उपभोक्ता व्यवहार-परिवर्तन में भूमिका निभाएं।
मुख्य शब्द
- क्विक कॉमर्स
- किराना, दवा, इलेक्ट्रॉनिक्स आदि को 10-15 मिनट में घर पहुंचाने वाला ई-कॉमर्स मॉडल, जैसे जेप्टो, ब्लिंकइट, बिगबास्केट।
- EPR (विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व)
- उत्पादकों को अपने उत्पाद की पैकेजिंग व कचरे के संग्रह-निस्तारण के लिए जवाबदेह बनाने वाली व्यवस्था; इसके क्रेडिट का सत्यापन आवश्यक।
- श्रेणी I प्लास्टिक
- रिजिड प्लास्टिक पैकेजिंग (HDPE और PET कंटेनर), जिसे इकट्ठा करना, अलग करना और रीसाइकल करना आसान है।
- बायोप्लास्टिक / कंपोस्टेबल मेलर
- कॉर्न स्टार्च और कसावा जैसे पादप-आधारित पॉलिमर से बने पैकेजिंग विकल्प, जो परंपरागत प्लास्टिक कवर की जगह ले सकते हैं।
- रिटर्नेबल बास्केट मॉडल
- हाइपर-लोकल, कम दूरी की डिलीवरी पर आधारित पुनः उपयोग योग्य टोकरी प्रणाली, जो प्लास्टिक पैकेजिंग कचरा खत्म करती है।
- BRSR कोर (SEBI)
- सेबी का व्यावसायिक उत्तरदायित्व एवं संधारणीयता रिपोर्टिंग मानक, जो ESG पारदर्शिता और जवाबदेही मजबूत करता है।
अभ्यास प्रश्न
- क्विक कॉमर्स के तेज विस्तार से उत्पन्न पर्यावरणीय बाह्यताओं का परीक्षण करें और सुविधा तथा संधारणीयता के बीच संतुलन के उपाय सुझाएं।
- प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स, 2016 तथा विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (EPR) भारत में प्लास्टिक पैकेजिंग कचरे पर अंकुश लगाने में कितने प्रभावी रहे हैं? चर्चा करें।
- "गति और सुविधा पर्यावरणीय गैर-जिम्मेदारी का बहाना नहीं बन सकती।" कंपनियों, सरकार और उपभोक्ताओं की भूमिका के संदर्भ में इस कथन का मूल्यांकन करें।
सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।
