नीति आयोग के 2025 ईवी सूचकांक में आंध्र प्रदेश नौवें स्थान पर

नीति आयोग और डब्ल्यूआरआई इंडिया द्वारा तैयार इंडिया इलेक्ट्रिक मोबिलिटी इंडेक्स 2025 में आंध्र प्रदेश एक स्थान चढ़कर 36 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में नौवें स्थान पर पहुंच गया, उसका स्कोर 47 से 52 हो गया। 17 बड़े राज्यों में वह छठे स्थान पर रहा। चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर तैयारी का स्कोर 51 से 62 हुआ, जबकि वाणिज्यिक ईवी पंजीकरण में केवल 19 अंक मिले। 2022 से जून 2025 के बीच राज्य में लगभग एक लाख ईवी पंजीकृत हुए।

स्रोत

NITI Aayog · मूल ख़बर पढ़ें ↗

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डेस्क ने क्या जाँचा (5)
  • Andhra Pradesh ranked 9th among 36 states and UTs in the India Electric Mobility Index 2025, with its score rising from 47 to 52. — Attributed to the NITI Aayog index prepared with WRI India; figures appear in the source.
  • The state ranked sixth among 17 large states, behind Maharashtra (78), Karnataka (73), Tamil Nadu (61), Madhya Pradesh (59) and Odisha (55). — Figures appear in the source and are internally consistent with the stated ranking.
  • Charging Infrastructure Readiness score rose from 51 to 62; Transport Electrification Progress from 48 to 53; Research and Innovation dipped from 37 to 36. — Attributed to the index; sub-scores are consistent with the reported overall improvement.
  • Nearly one lakh EVs were registered in Andhra Pradesh between 2022 and June 2025, over 84,560 (about 85%) being electric two-wheelers. — Attributed to transport department data; percentage is consistent with the stated figures.
  • Five cities notified as Model E-Mobility Cities under Sustainable Electric Mobility Policy 4.0 (2024-29) with a ₹250-crore corpus, including ₹50 crore per model city. — Attributed to the state policy as described in the source; arithmetic of the corpus is not itemised further.

विश्लेषकों की राय राय

AI आर्थिक विश्लेषक

आंध्र प्रदेश की ईवी कहानी अभी आपूर्ति पक्ष — चार्जिंग ढांचा, सब्सिडी और बिजली उपलब्धता — पर मजबूत है, लेकिन मांग पक्ष अब भी सीमित है। निजी ईवी पंजीकरण में 76 और वाणिज्यिक में सिर्फ 19 के स्कोर का अंतर आर्थिक रूप से अहम है, क्योंकि ईंधन बचत, रोजगार और माल-ढुलाई लागत पर असर मुख्यतः वाणिज्यिक बेड़ों से आता है। करीब एक लाख ईवी में से 85% दोपहिया होने का मतलब है कि फायदा अब तक मुख्यतः घरों के मासिक ईंधन बिल तक सीमित है।

  • नौवां स्थान और 47 से 52 तक स्कोर बढ़ना वास्तविक सुधार दिखाता है, पर महाराष्ट्र (78) और कर्नाटक (73) से फासला बड़ा है — ईवी सप्लाई-चेन निवेश की होड़ में यह नुकसानदेह हो सकता है।
  • चार्जिंग तैयारी का स्कोर 51 से 62 होना और पूंजी सब्सिडी, भवन उपनियम व बिजली उपलब्धता में 100 अंक मिलना बताता है कि सार्वजनिक खर्च का असर दिख रहा है; लेकिन चार्जर-वाहन अनुपात का स्कोर मात्र 36 है, इसलिए अपनाने की रफ्तार बढ़ते ही दबाव बढ़ सकता है।
  • वाणिज्यिक ईवी बढ़ने पर ही बेड़ा संचालकों की परिचालन लागत घटेगी और असर डिलीवरी व यात्री किरायों में दिखेगा — नीति आयोग की पार्किंग शुल्क छूट और सस्ते चार्जिंग टैरिफ की सिफारिश का आर्थिक तर्क यही है।
  • ₹250 करोड़ की निधि और पांच मॉडल ई-मोबिलिटी शहरों की रणनीति पूंजी खर्च को केंद्रित करती है, जिससे इन शहरों में रफ्तार बढ़ सकती है, पर छोटे कस्बे और ग्रामीण इलाके पीछे छूटने का जोखिम है।
  • पेटेंट में 5 और आरएंडडी में 33 का स्कोर संकेत देता है कि राज्य अभी ईवी उपभोक्ता बाजार है, उच्च मूल्य-वर्धित निर्माण या डिजाइन केंद्र नहीं — यही लंबी अवधि में रोजगार की गुणवत्ता तय करेगा।

किस पर नज़र रखें — देखना होगा कि वाणिज्यिक ईवी पंजीकरण की हिस्सेदारी (अभी 6%) कितनी तेजी से बढ़ती है और ₹250 करोड़ की निधि का कितना हिस्सा जमीन पर चार्जरों में बदलता है।

यह खबर केवल सूचकांक स्कोर और पंजीकरण आंकड़े बताती है; राज्य में वास्तव में कितनी ईंधन लागत बची, कितने रोजगार या निवेश आए, या कीमतों पर क्या मापने योग्य असर पड़ा, यह इससे स्थापित नहीं होता।

गहराई से

शोध सारांश · 8 तथ्य · 4 तारीख़ें · परीक्षा के लिए

सार

पृष्ठभूमि

नीति आयोग ने डब्ल्यूआरआई इंडिया के साथ मिलकर 'इंडिया इलेक्ट्रिक मोबिलिटी इंडेक्स 2025' तैयार किया है, जो राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) अपनाने की प्रगति को मापता है। इस सूचकांक में परिवहन विद्युतीकरण प्रगति, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर तैयारी और ईवी शोध-नवाचार जैसे मानदंड शामिल हैं। आंध्र प्रदेश इस बार एक स्थान चढ़कर 36 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में नौवें स्थान पर पहुंचा है और 'फ्रंटरनर' श्रेणी में आ गया है। रिपोर्ट के अनुसार राज्य में चार्जिंग तैयारी में प्रगति तेज रही, लेकिन वाणिज्यिक ईवी अपनाने और शोध में पिछड़ापन बना हुआ है।

मुख्य तथ्य

  • आंध्र प्रदेश इंडिया इलेक्ट्रिक मोबिलिटी इंडेक्स 2025 में 36 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में नौवें स्थान पर; कुल स्कोर 47 से बढ़कर 52।
  • 17 बड़े राज्यों में छठा स्थान; आगे महाराष्ट्र (78), कर्नाटक (73), तमिलनाडु (61), मध्य प्रदेश (59) और ओडिशा (55)।
  • चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर तैयारी स्कोर 51 से 62; परिवहन विद्युतीकरण प्रगति 48 से 53; ईवी शोध व नवाचार 37 से घटकर 36।
  • निजी ईवी पंजीकरण में 76 अंक, पर वाणिज्यिक ईवी पंजीकरण में केवल 19 अंक।
  • 2025 में राज्य में ईवी हिस्सेदारी: निजी वाहन पंजीकरण का 7% और वाणिज्यिक वाहन पंजीकरण का 6%।
  • सार्वजनिक चार्जिंग के पूंजी अनुदान, ईवी चार्जिंग बिल्डिंग बाय-लॉ और बिजली उपलब्धता में अधिकतम 100 अंक; नवीकरणीय क्षमता 78, चार्जिंग विकास पहल 67, चार्जर-वाहन अनुपात 36।
  • 2022 से जून 2025 के बीच राज्य में लगभग एक लाख ईवी पंजीकृत; इनमें 84,560 से अधिक (लगभग 85%) इलेक्ट्रिक दोपहिया।
  • शोध क्षेत्र कमजोर: ईवी स्टार्टअप 50, आर&डी पहल 33 और पेटेंट में मात्र 5 अंक।

समयरेखा

  1. 2022 से जून 2025आंध्र प्रदेश में लगभग एक लाख ईवी पंजीकृत, जिनमें 84,560 से अधिक इलेक्ट्रिक दोपहिया।
  2. 2024-29सस्टेनेबल इलेक्ट्रिक मोबिलिटी पॉलिसी 4.0 लागू; विशाखापत्तनम, राजमहेंद्रवरम, विजयवाड़ा, नेल्लोर और तिरुपति 'मॉडल ई-मोबिलिटी सिटी' अधिसूचित।
  3. पिछला संस्करणआंध्र प्रदेश 47 स्कोर के साथ 10वें स्थान पर था।
  4. 2025इंडिया इलेक्ट्रिक मोबिलिटी इंडेक्स 2025 में राज्य 52 स्कोर के साथ नौवें स्थान पर, 'फ्रंटरनर' श्रेणी में।

किसका दाँव

  • नीति आयोग — सूचकांक तैयार करने वाली शीर्ष संस्था; राज्यों को वाणिज्यिक ईवी अपनाने व शोध मजबूत करने की सिफारिश।
  • डब्ल्यूआरआई इंडिया — सूचकांक तैयार करने में नीति आयोग की साझेदार संस्था।
  • आंध्र प्रदेश सरकार — सस्टेनेबल इलेक्ट्रिक मोबिलिटी पॉलिसी 4.0 (2024-29) और ₹250 करोड़ कोष के जरिये ईवी रोलआउट; रैंकिंग सुधारने की जिम्मेदारी।
  • राज्य परिवहन विभाग — ईवी पंजीकरण आंकड़े जुटाता है; परमिट व पार्किंग छूट जैसे प्रोत्साहन लागू करने में भूमिका।
  • वाणिज्यिक वाहन संचालक — वाणिज्यिक ईवी पंजीकरण में केवल 19 अंक; परमिट छूट, कम टैरिफ जैसे प्रोत्साहनों के लाभार्थी।
  • मॉडल ई-मोबिलिटी शहर (विशाखापत्तनम, राजमहेंद्रवरम, विजयवाड़ा, नेल्लोर, तिरुपति) — प्रत्येक शहर को ₹50 करोड़; 3x3 किमी शहरी ग्रिड में चार्जिंग स्टेशन।
  • ईवी स्टार्टअप व शैक्षणिक संस्थान — सेंटर्स ऑफ एक्सीलेंस, स्किलिंग और उद्योग-शिक्षा सहयोग से शोध पारिस्थितिकी मजबूत करने का अवसर।

क्यों अहम है

ईवी अपनाना परिवहन क्षेत्र के कार्बन उत्सर्जन घटाने और तेल आयात पर निर्भरता कम करने की कुंजी है, और राज्य-स्तरीय रैंकिंग नीतिगत अंतर उजागर करती है। आंध्र प्रदेश का मामला दिखाता है कि चार्जिंग ढांचा और सब्सिडी में मजबूती के बावजूद वाणिज्यिक वाहनों का विद्युतीकरण और पेटेंट/आर&डी जैसे नवाचार संकेतक पिछड़ सकते हैं। अगली चरण की वृद्धि इन्हीं कमजोर कड़ियों को ठीक करने पर निर्भर होगी।

UPSC नज़रिया

प्रीलिम्स संकेत

  • इंडिया इलेक्ट्रिक मोबिलिटी इंडेक्स 2025 — नीति आयोग व डब्ल्यूआरआई इंडिया द्वारा तैयार; 36 राज्य/केंद्रशासित प्रदेश शामिल।
  • सूचकांक के तीन स्तंभ: परिवहन विद्युतीकरण प्रगति, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर तैयारी, ईवी शोध व नवाचार।
  • बड़े राज्यों में शीर्ष: महाराष्ट्र 78, कर्नाटक 73, तमिलनाडु 61, मध्य प्रदेश 59, ओडिशा 55; आंध्र प्रदेश छठा।
  • आंध्र प्रदेश: कुल स्कोर 52, समग्र रैंक 9, 'फ्रंटरनर' श्रेणी में (पिछली बार 10वां, स्कोर 47)।
  • सस्टेनेबल इलेक्ट्रिक मोबिलिटी पॉलिसी 4.0 (2024-29): ₹250 करोड़ कोष, प्रत्येक मॉडल शहर को ₹50 करोड़।
  • नीति: 3x3 किमी शहरी ग्रिड में चार्जिंग स्टेशन और अंतर-शहरी कॉरिडोर पर हर 30 किमी पर चार्जिंग।

मेन्स दृष्टिकोण

आंध्र प्रदेश की इंडिया इलेक्ट्रिक मोबिलिटी इंडेक्स 2025 में नौवें स्थान तक की छलांग (स्कोर 47 से 52) राज्य-स्तरीय ईवी संक्रमण की असमान प्रकृति को उजागर करती है। मजबूती आपूर्ति-पक्ष के ढांचे में दिखती है — सार्वजनिक चार्जिंग के पूंजी अनुदान, चार्जिंग संबंधी बिल्डिंग बाय-लॉ और बिजली उपलब्धता में अधिकतम 100 अंक, नवीकरणीय क्षमता में 78 — जिसे सस्टेनेबल इलेक्ट्रिक मोबिलिटी पॉलिसी 4.0 (2024-29) के ₹250 करोड़ कोष और पांच मॉडल ई-मोबिलिटी शहरों की शहर-केंद्रित रणनीति से समर्थन मिला है। कमजोरी मांग और ज्ञान-पक्ष में है: वाणिज्यिक ईवी पंजीकरण में 19 अंक (निजी में 76), चार्जर-वाहन अनुपात 36, तथा पेटेंट में मात्र 5 अंक, जिससे शोध स्कोर 37 से 36 पर फिसल गया। लगभग एक लाख ईवी में 85% दोपहिया होना बताता है कि विद्युतीकरण मुख्यतः व्यक्तिगत, कम-लागत खंड तक सीमित है। आगे का रास्ता नीति आयोग की सिफारिशों में निहित है — पार्किंग शुल्क व वाणिज्यिक परमिट में छूट, सार्वजनिक चार्जिंग के लिए कम टैरिफ, तथा सेंटर्स ऑफ एक्सीलेंस, ई-मोबिलिटी स्किलिंग और उद्योग-शिक्षा सहयोग के जरिये नवाचार पारिस्थितिकी को गहरा करना।

मुख्य शब्द

इंडिया इलेक्ट्रिक मोबिलिटी इंडेक्स 2025
नीति आयोग व डब्ल्यूआरआई इंडिया का सूचकांक, जो 36 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों की ईवी प्रगति को अंकों में मापता है।
चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर तैयारी
सूचकांक का स्तंभ; चार्जिंग सब्सिडी, बाय-लॉ, बिजली उपलब्धता, नवीकरणीय क्षमता व चार्जर-वाहन अनुपात मापता है।
सस्टेनेबल इलेक्ट्रिक मोबिलिटी पॉलिसी 4.0 (2024-29)
आंध्र प्रदेश की ईवी नीति; ₹250 करोड़ कोष, प्रत्येक मॉडल शहर को ₹50 करोड़।
मॉडल ई-मोबिलिटी सिटी
विशाखापत्तनम, राजमहेंद्रवरम, विजयवाड़ा, नेल्लोर और तिरुपति — शहर-केंद्रित ईवी रोलआउट के लिए अधिसूचित शहर।
फ्रंटरनर श्रेणी
सूचकांक की वह श्रेणी जिसमें आंध्र प्रदेश इस बार पहुंचा है, यानी तुलनात्मक रूप से अग्रणी प्रदर्शन।
चार्जर-टू-वाहन अनुपात
प्रति वाहन उपलब्ध चार्जरों का माप; आंध्र प्रदेश को सामान्यीकृत पैमाने पर 36 अंक मिले।

अभ्यास प्रश्न

  1. इंडिया इलेक्ट्रिक मोबिलिटी इंडेक्स 2025 के संकेतकों के आधार पर आंध्र प्रदेश के ईवी संक्रमण की मजबूतियों और कमजोरियों का आलोचनात्मक परीक्षण करें।
  2. भारत में वाणिज्यिक वाहनों के विद्युतीकरण की गति निजी वाहनों से पीछे क्यों है? राज्यों द्वारा अपनाए जा सकने वाले उपायों पर चर्चा करें।
  3. शहर-केंद्रित ईवी रोलआउट रणनीति (मॉडल ई-मोबिलिटी सिटी) चार्जिंग ढांचे के विस्तार में कितनी प्रभावी हो सकती है? आंध्र प्रदेश के उदाहरण से मूल्यांकन करें।

सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।

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