सर्जिकल स्ट्राइक के दस साल, आतंकी खतरा जम्मू की ओर
उड़ी हमले में 19 सैनिकों की मौत के जवाब में भारतीय सेना ने 28-29 सितंबर 2016 की रात नियंत्रण रेखा पार सात आतंकी लॉन्चपैड पर सर्जिकल स्ट्राइक की, जिसमें अनुमानित 35-50 आतंकी मारे गए। सरकारी आंकड़ों के अनुसार 2016 में 322 आतंकी घटनाएं हुईं, 150 आतंकी और 82 सुरक्षाकर्मी मारे गए, जबकि 2025 में 12 घटनाएं और 16 सुरक्षाकर्मियों की मौत हुई। ACLED के अनुसार 2025 में 60% से अधिक हिंसक गतिविधि जम्मू संभाग में हुई, 2018 में यह 5% थी।
स्रोत
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डेस्क जाँच · स्रोत से तुलना की
डेस्क ने क्या जाँचा (5)
- On the night of September 28-29, 2016, Army Para (SF) teams struck seven terrorist launchpads across the LoC, killing an estimated 35-50 terrorists. — Figures appear in source; described as the Army's own account with an estimated range.
- The strikes followed the September 18 Uri attack in which 19 soldiers were killed. — Figure appears in source; no separate attribution given.
- Government data recorded 322 militant incidents in 2016 with 150 terrorists and 82 security personnel killed; 12 incidents in 2025 with 16 security personnel killed. — Attributed in source to government data.
- Over 60% of violent militant activity in J&K in 2025 was in Jammu division, against 5% in 2018. — Attributed to conflict-monitoring organisation ACLED.
- Improved surveillance has raised the risk of escalation, as seen during Operation Sindoor. — Attributed by name to retired Lt Gen D S Hooda, former Northern Army Commander.
विश्लेषकों की राय राय
सर्जिकल स्ट्राइक के दस साल केंद्र सरकार को एक मजबूत राजनीतिक कथा देते हैं — उड़ी से बालाकोट और ऑपरेशन सिंदूर तक 'जवाब देने वाला भारत' की एक सीधी रेखा। लेकिन इस खबर के आंकड़े दोनों तरफ काम करते हैं: 2016 में 322 घटनाएं और 2025 में 12 घटनाएं नीति की सफलता का तर्क देती हैं, वहीं जम्मू संभाग में हिंसा 2018 के 5 प्रतिशत से बढ़कर 2025 में 60 प्रतिशत से ऊपर पहुंचना यह कहने की गुंजाइश नहीं देता कि खतरा खत्म हो गया। इसलिए राजनीतिक बहस 'आतंकवाद दबा या नहीं' से हटकर 'वह कहां चला गया' की ओर मुड़ रही है।
- दशक को राष्ट्रीय सुरक्षा उपलब्धि के रूप में पेश करने का स्वाभाविक लाभ सत्तापक्ष को मिलता है; खबर के अनुसार प्रधानमंत्री ने सर्जिकल स्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर को भारत की आतंकवाद-रोधी नीति के उदाहरण बताया।
- 322 से 12 घटनाओं तक की गिरावट सरकार का पक्ष मजबूत करती है, लेकिन 2025 में 16 सुरक्षाकर्मियों की मौत का मतलब है कि 'पूर्ण सामान्य स्थिति' जैसी भाषा संभलकर इस्तेमाल करनी होगी।
- खतरा कश्मीर घाटी से जम्मू के जंगली और पहाड़ी इलाकों की ओर खिसकना — अधिकारी इसे अनुच्छेद 370 हटने के बाद सैन्य तैनाती और 2020-21 भारत-चीन सीमा संकट से भी जोड़ते हैं — क्षेत्रीय राजनीति में नया दबाव केंद्र बनाता है।
- जम्मू का सुरक्षा के लिहाज से केंद्र में आना स्थानीय प्रतिनिधियों और क्षेत्रीय दलों की सुरक्षा, तैनाती और शिकायत-निवारण की मांगों को तेज कर सकता है।
- पूर्व उत्तरी सेना कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल डी एस हुड्डा की यह चेतावनी कि तनाव बढ़ने का जोखिम बढ़ा है, याद दिलाती है कि अब हर जवाबी विकल्प की राजनीतिक कीमत ज्यादा है।
किस पर नज़र रखें — देखना होगा कि जम्मू संभाग में हिंसा के केंद्रित होने पर सरकार और विपक्ष की भाषा कैसे बदलती है, और तैनाती व निगरानी में बदलाव राजनीतिक बहस में किस रूप में आते हैं।
यह खबर केवल सुरक्षा स्थिति में आए बदलाव बताती है; यह तय नहीं करती कि दल कैसे प्रतिक्रिया देंगे, चुनावी असर क्या होगा, या खतरे के भौगोलिक बदलाव का एकमात्र कारण क्या है।
गहराई से
शोध सारांश · 8 तथ्य · 7 तारीख़ें · परीक्षा के लिएसार
पृष्ठभूमि
18 सितंबर 2016 को उड़ी में सेना की ब्रिगेड मुख्यालय पर हुए आतंकी हमले में 19 सैनिक मारे गए थे। जवाब में 28-29 सितंबर 2016 की रात भारतीय सेना की पैरा (स्पेशल फोर्सेज) टीमों ने नियंत्रण रेखा (LoC) पार कर सात आतंकी लॉन्चपैड पर हमला किया — यह पहली बार था जब सेना ने सार्वजनिक रूप से "सर्जिकल स्ट्राइक" करने की बात स्वीकार की। दस वर्ष बाद रक्षा अधिकारियों के अनुसार जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद का स्वरूप बदल गया है: घाटी शांत है, पर खतरा जम्मू संभाग के जंगली और पहाड़ी इलाकों में केंद्रित हो गया है।
मुख्य तथ्य
- 18 सितंबर 2016 को उड़ी के पास सेना की ब्रिगेड मुख्यालय पर आतंकी हमले में 19 सैनिक मारे गए।
- 28-29 सितंबर 2016 की रात पैरा (स्पेशल फोर्सेज) ने LoC पार सात आतंकी लॉन्चपैड — पीर पंजाल के उत्तर और दक्षिण — को निशाना बनाया, अनुमानित 35-50 आतंकी मारे गए।
- सैनिक तोपखाने की आड़ में गए थे और हथियार, रॉकेट लॉन्चर, फ्लेमथ्रोअर व ग्रेनेड साथ ले गए थे।
- सरकारी आंकड़े: 2016 में 322 आतंकी घटनाएं, 150 आतंकी और 82 सुरक्षाकर्मी मारे गए।
- 2025 में 12 आतंक-संबंधी घटनाएं दर्ज हुईं, जिनमें 16 सुरक्षाकर्मियों की मौत हुई।
- ACLED के अनुसार 2025 में जम्मू-कश्मीर की 60% से अधिक हिंसक आतंकी गतिविधि जम्मू संभाग में हुई, जबकि 2018 में यह 5% थी।
- ACLED इस बदलाव का आंशिक कारण जम्मू के कठिन वनाच्छादित व पहाड़ी भूभाग तथा 2020-21 भारत-चीन सीमा संकट के बाद सैन्य तैनाती में बदलाव बताता है।
- पहलगाम आतंकी हमले और ऑपरेशन सिंदूर के बाद निगरानी ड्रोन व काउंटर-ड्रोन क्षमताएं बढ़ाई गईं और संवेदनशील इलाकों में अस्थायी ऑपरेटिंग बेस बनाए गए।
समयरेखा
- 18 सितंबर 2016उड़ी के पास सेना की ब्रिगेड मुख्यालय पर आतंकी हमला, 19 सैनिक शहीद।
- 28-29 सितंबर 2016 की रातLoC पार सात आतंकी लॉन्चपैड पर सर्जिकल स्ट्राइक; अनुमानित 35-50 आतंकी मारे गए।
- 2016-18घाटी में शहरी/अर्ध-शहरी आतंकवाद, पत्थरबाजी और स्थानीय भर्ती प्रमुख।
- 2019बालाकोट हवाई हमले; जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 की समाप्ति और कश्मीर में सैनिकों की तैनाती बढ़ाई गई।
- 2020-21भारत-चीन सीमा संकट के बाद सैन्य तैनाती के स्वरूप में बदलाव।
- मई 2025पहलगाम हमले के बाद ऑपरेशन सिंदूर — एक एकीकृत (इंटीग्रेटेड) अभियान।
- 202512 आतंकी घटनाएं, 16 सुरक्षाकर्मियों की मौत; 60% से अधिक हिंसा जम्मू संभाग में।
किसका दाँव
- भारतीय सेना (पैरा स्पेशल फोर्सेज, राष्ट्रीय राइफल्स) — सीमा पार कार्रवाई और जम्मू-कश्मीर में आतंकरोधी ग्रिड का मुख्य भार; राष्ट्रीय राइफल्स ऐतिहासिक रूप से आतंकरोधी अभियानों का बड़ा हिस्सा संभालती रही है।
- जम्मू संभाग के निवासी — हिंसक गतिविधि का 60% से अधिक हिस्सा अब इसी क्षेत्र में; जंगली-पहाड़ी इलाकों में छोटे आतंकी समूहों की मौजूदगी।
- कश्मीर घाटी के लोग — 2016-18 की तुलना में स्थिति काफी शांत, पर व्यापक गश्त और निगरानी से स्थानीय-आतंकी संपर्क पर सख्ती।
- खुफिया व सुरक्षा एजेंसियां — अंतर-एजेंसी समन्वय, रीयल-टाइम सूचना साझाकरण, UAV और सैटेलाइट इमेजरी पर बढ़ती निर्भरता।
- लेफ्टिनेंट जनरल डी एस हुड्डा (सेवानिवृत्त), पूर्व उत्तरी सेना कमांडर — 2016 की सर्जिकल स्ट्राइक के पर्यवेक्षक; निगरानी सुधार के साथ बढ़े 'एस्केलेशन' जोखिम की चेतावनी देते हैं।
- सरकार/नीति-निर्माता — जमीनी स्ट्राइक से हवाई हमलों और एकीकृत अभियानों तक बदलती जवाबी नीति और उसके परिणाम।
क्यों अहम है
2016 की सर्जिकल स्ट्राइक ने सीमा पार जवाबी कार्रवाई को सार्वजनिक रूप से स्वीकार करने की शुरुआत की, जो 2019 के बालाकोट हवाई हमलों और मई 2025 के ऑपरेशन सिंदूर तक एक एकीकृत सैन्य प्रतिक्रिया में बदली। साथ ही आंकड़े दिखाते हैं कि हिंसा की मात्रा घटी है, पर खतरा अधिक बिखरा, कठिन भूभाग में केंद्रित और पहचानना मुश्किल हो गया है। हुड्डा की चेतावनी के अनुसार बेहतर क्षमताओं के साथ तनाव बढ़ने (एस्केलेशन) का जोखिम भी बढ़ा है, जिसे भविष्य की रणनीति में ध्यान में रखना होगा।
UPSC नज़रिया
प्रीलिम्स संकेत
- 28-29 सितंबर 2016: LoC पार सात आतंकी लॉन्चपैड पर सर्जिकल स्ट्राइक; सेना की पैरा (स्पेशल फोर्सेज) ने अंजाम दिया।
- उड़ी हमला: 18 सितंबर 2016, सेना की ब्रिगेड मुख्यालय पर, 19 सैनिक शहीद।
- सरकारी आंकड़े: 2016 में 322 आतंकी घटनाएं, 150 आतंकी व 82 सुरक्षाकर्मी मारे गए; 2025 में 12 घटनाएं व 16 सुरक्षाकर्मियों की मौत।
- ACLED (Armed Conflict Location & Event Data) — स्वतंत्र, गैर-लाभकारी संघर्ष-निगरानी और संकट-मानचित्रण संगठन।
- ACLED: जम्मू संभाग की हिस्सेदारी 2018 में 5% से बढ़कर 2025 में 60% से अधिक।
- बालाकोट हवाई हमले 2019; ऑपरेशन सिंदूर मई 2025 (पहलगाम हमले के बाद)।
मेन्स दृष्टिकोण
2016 की सर्जिकल स्ट्राइक के दस वर्ष भारत की आतंकरोधी नीति में तीन स्तरीय बदलाव दिखाते हैं — जवाबी कार्रवाई का स्वरूप, आतंकवाद का भूगोल और अभियानों की तकनीक। जमीनी स्ट्राइक (2016) से बालाकोट हवाई हमले (2019) और ऑपरेशन सिंदूर (मई 2025) जैसे एकीकृत अभियानों तक की यात्रा बेहतर उपकरण, निगरानी और खुफिया ढांचे से संभव हुई, पर लेफ्टिनेंट जनरल डी एस हुड्डा के अनुसार इससे तनाव बढ़ने का जोखिम भी बढ़ा। भीतर, 2019 में अनुच्छेद 370 की समाप्ति व कश्मीर में सैनिकों की तैनाती, स्थानीय-आतंकी संपर्क पर सख्ती, तथा 2020-21 भारत-चीन सीमा संकट के बाद तैनाती में बदलाव — इन कारणों से आतंकवाद शहरी-अर्ध-शहरी पत्थरबाजी और स्थानीय भर्ती के मॉडल से हटकर जम्मू के जंगलों-पहाड़ों में छोटे, दीर्घकाल तक अदृश्य रहने वाले समूहों में बदल गया; 2025 में 60% से अधिक हिंसा जम्मू संभाग में हुई। कार्यप्रणाली में बड़े कॉर्डन-एंड-सर्च से हटकर कम सैनिकों वाले, खुफिया-आधारित व तकनीक-प्रधान अभियान, UAV और सैटेलाइट इमेजरी, अंतर-एजेंसी समन्वय, दिन-रात एरिया डॉमिनेशन और अस्थायी ऑपरेटिंग बेस प्रमुख हैं। आगे का रास्ता: तकनीकी निगरानी के साथ मानवीय खुफिया (ह्यूमन इंटेलिजेंस) को न छोड़ना, जम्मू के दुर्गम भूभाग के लिए विशिष्ट क्षमता, और एस्केलेशन प्रबंधन को रणनीति में शामिल करना।
मुख्य शब्द
- सर्जिकल स्ट्राइक
- सीमित, लक्षित सैन्य कार्रवाई; 2016 में सेना ने पहली बार सार्वजनिक रूप से LoC पार समन्वित सर्जिकल स्ट्राइक करने की बात स्वीकार की।
- नियंत्रण रेखा (LoC)
- जम्मू-कश्मीर में भारत और पाकिस्तान के नियंत्रण वाले क्षेत्रों को अलग करने वाली रेखा, जिसे पार कर 2016 की स्ट्राइक की गई।
- पैरा (स्पेशल फोर्सेज)
- भारतीय सेना की विशेष बल इकाइयां, जिन्होंने 2016 की सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम दिया।
- ACLED
- Armed Conflict Location & Event Data — स्वतंत्र गैर-लाभकारी संस्था जो संघर्ष की घटनाओं की निगरानी और मानचित्रण करती है।
- राष्ट्रीय राइफल्स
- सेना की वह बल संरचना जो ऐतिहासिक रूप से जम्मू-कश्मीर में आतंकरोधी अभियानों का बड़ा भार उठाती रही है।
- ऑपरेशन सिंदूर
- मई 2025 का एकीकृत अभियान, जो पहलगाम आतंकी हमले के बाद चलाया गया।
अभ्यास प्रश्न
- 2016 की सर्जिकल स्ट्राइक से ऑपरेशन सिंदूर (2025) तक भारत की सीमा पार जवाबी कार्रवाई की नीति कैसे विकसित हुई है? इसमें निहित एस्केलेशन जोखिम की चर्चा करें।
- ACLED के आंकड़ों के आलोक में समझाइए कि जम्मू-कश्मीर में आतंकी हिंसा का केंद्र घाटी से जम्मू संभाग की ओर क्यों स्थानांतरित हुआ, और इसके सुरक्षा-नीतिगत प्रभाव क्या हैं?
- तकनीक-आधारित निगरानी (UAV, सैटेलाइट इमेजरी) के विस्तार के बावजूद आतंकरोधी अभियानों में मानवीय खुफिया की प्रासंगिकता बनी हुई है — परीक्षण कीजिए।
सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।
