जोधपुर में 26 सितंबर से 'तरंग शक्ति' वायु अभ्यास
बहुराष्ट्रीय वायु अभ्यास 'तरंग शक्ति' 26 सितंबर से 11 अक्टूबर तक जोधपुर स्थित भारतीय वायुसेना अड्डे पर होगा, जिसमें अमेरिका, फ्रांस और जर्मनी सहित करीब 40 देशों के भाग लेने की संभावना है। वायुसेना उपप्रमुख एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर से महत्वपूर्ण सबक मिले और उस दौरान विकसित रणनीतियां इस अभ्यास में दिखेंगी। वायुसेना राफेल और सुखोई-30एमकेआई उतारेगी, जबकि अमेरिकी एफ-35 भारतीय जमीन पर पहली बार किसी सैन्य अभ्यास में शामिल हो सकता है।
स्रोत
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डेस्क ने क्या जाँचा (5)
- Tarang Shakti will be held at the IAF base in Jodhpur from September 26 to October 11, with around 40 countries expected. — Figures and dates appear in the source; attributed to the IAF briefing, with participation described as expected.
- Operation Sindoor gave the IAF valuable takeaways and its tactics will be reflected in the exercise. — Directly attributed to IAF Vice Chief Air Marshal Ashutosh Dixit.
- The US F-35 will make its debut on Indian soil in a military exercise; IAF to field Rafale and Su-30MKI. — Source says F-35 participation is 'likely'/'expected'; hedged wording must be preserved.
- Germany, UAE, Bangladesh, Australia and Sri Lanka will send air assets; 32 more countries will attend as observers. — Figure appears in source, attributed to IAF officials briefing on the exercise.
- Layered air defence with S-400 and Akash proved critical against a foiled Pakistani aerial offensive. — Attributed to a report by the Observer Research Foundation, a New Delhi think tank.
विश्लेषकों की राय राय
'तरंग शक्ति' एक सैन्य अभ्यास है, लेकिन राजनीतिक रूप से यह वह मंच भी है जहाँ भारत ऑपरेशन सिंदूर के बाद अपनी रणनीतिक हैसियत दुनिया को दिखाएगा। करीब 40 देशों की भागीदारी और अमेरिकी एफ-35 का भारतीय ज़मीन पर संभावित पदार्पण सरकार को यह संदेश देने का अवसर देता है कि साझेदार देश भारत के साथ उड़ान भरना चाहते हैं। दूसरी ओर, वायुसेना उपप्रमुख का यह कहना कि अभ्यास मौजूदा प्रक्रियाओं और मान्यताओं को परखेगा, यह भी स्वीकारता है कि सिंदूर के सबक अभी आत्मसात किए जा रहे हैं — और यही विपक्ष के लिए सवाल उठाने की जगह बनाता है।
- ऑपरेशन सिंदूर के सबक को बहुराष्ट्रीय मंच पर परखना सरकार को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों स्तरों पर रक्षा विश्वसनीयता दिखाने का मौका देता है।
- भारत में किसी सैन्य अभ्यास में एफ-35 की पहली उपस्थिति भारत-अमेरिका रक्षा निकटता के प्रतीक के रूप में पढ़ी जाएगी, हालांकि खबर इसे किसी खरीद फैसले से नहीं जोड़ती।
- अमेरिका, फ्रांस, जर्मनी के साथ बांग्लादेश और श्रीलंका की भागीदारी क्षेत्रीय सैन्य कूटनीति में भारत की स्थिति मजबूत करती है।
- घटती लड़ाकू विमान संख्या और मजबूत ज़मीनी वायु रक्षा की ज़रूरत जैसे बिंदु विपक्ष के लिए खरीद प्रक्रिया में देरी पर सवाल का आधार बन सकते हैं।
- 26 सितंबर से 11 अक्टूबर तक इतने बड़े अभ्यास का आयोजन राष्ट्रीय सुरक्षा के विमर्श को दो हफ्तों से अधिक समय तक सार्वजनिक चर्चा में बनाए रखेगा।
किस पर नज़र रखें — देखना यह है कि सरकार इस अभ्यास को ऑपरेशन सिंदूर की सफलता के विमर्श से कितनी मजबूती से जोड़ती है, और विपक्ष लड़ाकू विमानों की कमी तथा रक्षा खरीद में देरी पर सवाल उठाता है या नहीं।
खबर एफ-35 की भागीदारी को केवल 'संभावित' बताती है; यह किसी हथियार सौदे, गठबंधन या नीति बदलाव को स्थापित नहीं करती, और किसी दल की प्रतिक्रिया का भी उल्लेख नहीं है।
गहराई से
शोध सारांश · 8 तथ्य · 4 तारीख़ें · परीक्षा के लिएसार
पृष्ठभूमि
भारतीय वायुसेना 26 सितंबर से 11 अक्टूबर तक जोधपुर स्थित अपने वायुसेना अड्डे पर बहुराष्ट्रीय वायु अभ्यास 'तरंग शक्ति' का आयोजन कर रही है। इसमें अमेरिका, फ्रांस और जर्मनी सहित करीब 40 देशों के भाग लेने की संभावना है। पिछले वर्ष मई में पाकिस्तानी वायुसेना अड्डों पर किए गए हमलों (ऑपरेशन सिंदूर) के बाद यह वायुसेना द्वारा आयोजित सबसे बड़े अभ्यासों में से एक है। अभ्यास का उद्देश्य ऑपरेशन सिंदूर से मिले संचालनात्मक सबक को एक बड़े मंच पर परखना तथा भाग लेने वाली वायुसेनाओं के बीच अंतर-संचालनीयता बढ़ाना है।
मुख्य तथ्य
- 'तरंग शक्ति' अभ्यास 26 सितंबर से 11 अक्टूबर तक जोधपुर स्थित भारतीय वायुसेना अड्डे पर होगा।
- अमेरिका, फ्रांस और जर्मनी सहित करीब 40 देशों के भाग लेने की संभावना है।
- अमेरिका, फ्रांस, जर्मनी, यूएई, बांग्लादेश, ऑस्ट्रेलिया और श्रीलंका अपने वायु प्लेटफॉर्म भेजेंगे; 32 अन्य देश पर्यवेक्षक के रूप में शामिल होंगे।
- भारतीय वायुसेना राफेल और सुखोई-30एमकेआई बेड़े उतारेगी; अमेरिकी एफ-35 किसी सैन्य अभ्यास में पहली बार भारतीय जमीन पर उतरेगा।
- एफ-35 इससे पहले भारत में केवल बेंगलुरु के एयरो-शो में प्रदर्शित हुआ था; भारतीय वायुसेना जुलाई में ऑस्ट्रेलिया के 'पिच ब्लैक' अभ्यास में एफ-35 के साथ उड़ान भर चुकी है।
- वायुसेना उपप्रमुख एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान विकसित रणनीतियां इस अभ्यास में परिलक्षित होंगी।
- अभ्यास में बड़े बल की भिड़ंत (लार्ज फोर्स एंगेजमेंट), वायु गतिशीलता संचालन, डायनामिक टार्गेटिंग और कॉम्बैट सर्च एंड रेस्क्यू मिशन शामिल होंगे।
- ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन की रिपोर्ट के अनुसार एस-400 और आकाश जैसी स्तरीय (लेयर्ड) वायु रक्षा प्रणाली पाकिस्तानी हवाई हमले को विफल करने में निर्णायक रही।
समयरेखा
- पिछले वर्ष मईभारतीय वायुसेना ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तानी वायुसेना अड्डों पर हमले किए।
- जुलाईभारतीय वायुसेना ने ऑस्ट्रेलिया में 'पिच ब्लैक' अभ्यास के दौरान एफ-35 के साथ उड़ान भरी।
- 26 सितंबरजोधपुर में बहुराष्ट्रीय अभ्यास 'तरंग शक्ति' शुरू होगा।
- 11 अक्टूबरअभ्यास 'तरंग शक्ति' का समापन।
किसका दाँव
- भारतीय वायुसेना (IAF) — ऑपरेशन सिंदूर के सबक को बड़े मंच पर परखना, अंतर-संचालनीयता बढ़ाना और अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन।
- एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित, वायुसेना उपप्रमुख — अभ्यास के दायरे की व्याख्या; मान्यताओं और मौजूदा प्रक्रियाओं को परखने का लक्ष्य।
- अमेरिका — पांचवीं पीढ़ी के एफ-35 स्टील्थ लड़ाकू विमान को पहली बार भारत में सैन्य अभ्यास में उतारना।
- भाग लेने वाले देश (फ्रांस, जर्मनी, यूएई, बांग्लादेश, ऑस्ट्रेलिया, श्रीलंका) — अपने वायु प्लेटफॉर्म भेजकर युद्ध अनुभव साझा करना और साझा प्रशिक्षण से लाभ।
- 32 पर्यवेक्षक देश — वास्तविक प्रशिक्षण वातावरण में वायु संचालन के विविध पहलुओं का अवलोकन।
- ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (ORF) — ऑपरेशन सिंदूर के आकलन और भविष्य की क्षमता-संबंधी सिफारिशों पर रिपोर्ट।
क्यों अहम है
यह अभ्यास ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारतीय वायुसेना द्वारा आयोजित सबसे बड़े बहुराष्ट्रीय आयोजनों में से एक है और इसमें युद्ध में आजमाई रणनीतियों को साझेदार वायुसेनाओं के अनुभव के साथ परखा जाएगा। अमेरिकी एफ-35 का भारतीय जमीन पर सैन्य अभ्यास में पहली बार शामिल होना रक्षा साझेदारी की गहराई का संकेत है। साथ ही यह छोटे, उच्च-तीव्रता वाले संघर्षों के लिए तेज अनुकूलन, बहु-क्षेत्रीय क्षमता और स्तरीय वायु रक्षा की अहमियत को रेखांकित करता है।
UPSC नज़रिया
प्रीलिम्स संकेत
- 'तरंग शक्ति' — भारतीय वायुसेना का बहुराष्ट्रीय वायु अभ्यास, स्थान: जोधपुर, 26 सितंबर से 11 अक्टूबर।
- करीब 40 देश अपेक्षित; वायु प्लेटफॉर्म भेजने वाले: अमेरिका, फ्रांस, जर्मनी, यूएई, बांग्लादेश, ऑस्ट्रेलिया, श्रीलंका; 32 देश पर्यवेक्षक।
- एफ-35 — अमेरिका का पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ लड़ाकू विमान; भारत में पहले केवल बेंगलुरु एयरो-शो में प्रदर्शित।
- 'पिच ब्लैक' — ऑस्ट्रेलिया में आयोजित वायु अभ्यास, जिसमें जुलाई में भारतीय वायुसेना ने एफ-35 के साथ उड़ान भरी।
- ऑपरेशन सिंदूर मॉडल: केंद्रीकृत कमान, वितरित नियंत्रण और विकेंद्रीकृत निष्पादन — ORF रिपोर्ट के अनुसार प्रमुख ताकत।
- एस-400 और आकाश — स्तरीय वायु रक्षा प्रणाली के प्लेटफॉर्म, एकीकृत कमान-एवं-नियंत्रण तंत्र द्वारा संचालित।
मेन्स दृष्टिकोण
जोधपुर में 'तरंग शक्ति' अभ्यास ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारतीय वायुसेना की सीख को संस्थागत रूप देने का प्रयास है। स्रोत के अनुसार ऑपरेशन के विस्तृत आकलन में तेज अनुकूलन, आक्रामक कार्रवाई और मजबूत बहु-क्षेत्रीय क्षमताओं को भविष्य के छोटे व उच्च-तीव्रता वाले संघर्षों के लिए प्रमुख सबक बताया गया; आश्चर्य, बल की संकेंद्रण और कमान की एकता का महत्व रेखांकित हुआ, तथा केंद्रीकृत कमान–वितरित नियंत्रण–विकेंद्रीकृत निष्पादन मॉडल को बड़ी ताकत माना गया। एस-400 और आकाश से युक्त स्तरीय वायु रक्षा, एकीकृत कमान-एवं-नियंत्रण के साथ, पाकिस्तानी हवाई आक्रमण को विफल करने में निर्णायक रही। अभ्यास में बड़े बल की भिड़ंत, वायु गतिशीलता, डायनामिक टार्गेटिंग और कॉम्बैट सर्च एंड रेस्क्यू शामिल होंगे, जिससे मान्यताओं और प्रक्रियाओं की परीक्षा तथा अंतर-संचालनीयता में सुधार होगा; ड्रोन युद्ध सहित सभी संभावित परिदृश्यों को शामिल करने के संकेत दिए गए हैं। आगे की राह के रूप में स्रोत में दूर से संचालित विमानों को आक्रामक अभियानों में एकीकृत करना, स्टैंड-ऑफ हथियारों का भंडार बढ़ाना, जमीन-आधारित वायु रक्षा मजबूत करना और घटते लड़ाकू बेड़े की समस्या का समाधान बताया गया है।
मुख्य शब्द
- तरंग शक्ति
- भारतीय वायुसेना द्वारा जोधपुर में आयोजित बहुराष्ट्रीय वायु अभ्यास, 26 सितंबर से 11 अक्टूबर तक।
- ऑपरेशन सिंदूर
- पिछले वर्ष मई में पाकिस्तानी वायुसेना अड्डों, वायु रक्षा व मिसाइल प्रणालियों पर भारतीय वायुसेना की कार्रवाई।
- एफ-35
- अमेरिका का पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ लड़ाकू विमान, जो पहली बार भारत में सैन्य अभ्यास में शामिल हो सकता है।
- अंतर-संचालनीयता (Interoperability)
- विभिन्न देशों की वायुसेनाओं की साथ मिलकर समान प्रक्रियाओं से अभियान चलाने की क्षमता।
- स्टैंड-ऑफ हथियार
- दूर से लक्ष्य पर वार करने वाले हथियार, जिनका भंडार बढ़ाने पर वायुसेना काम कर रही है।
- ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (ORF)
- नई दिल्ली स्थित थिंक टैंक, जिसकी रिपोर्ट में ऑपरेशन सिंदूर के सबक का आकलन किया गया।
अभ्यास प्रश्न
- ऑपरेशन सिंदूर से मिले सबक भारतीय वायुसेना की भविष्य की युद्ध तैयारी को किस प्रकार आकार दे रहे हैं? 'तरंग शक्ति' अभ्यास के संदर्भ में चर्चा करें।
- बहुराष्ट्रीय वायु अभ्यास अंतर-संचालनीयता और रक्षा कूटनीति को कैसे मजबूत करते हैं? उदाहरणों सहित परीक्षण करें।
- स्तरीय वायु रक्षा प्रणाली और एकीकृत कमान-एवं-नियंत्रण तंत्र आधुनिक हवाई संघर्ष में क्यों निर्णायक हैं? स्रोत में उल्लिखित तथ्यों के आधार पर समझाएं।
सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।