राजनीति जम्मू

भाजपा विधायकों ने जम्मू-कश्मीर सरकार को बर्खास्त करने की मांग की

भाजपा विधायकों ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली जम्मू-कश्मीर सरकार को तत्काल बर्खास्त करने की मांग की। विधायक शाम लाल शर्मा ने आरोप लगाया कि नेकां-कांग्रेस सरकार ने विधानसभा में ऐसा प्रस्ताव रखा जो स्वायत्तता और 1953 से पहले की संवैधानिक व्यवस्था को पुनर्जीवित करना चाहता है। उन्होंने कहा कि भाजपा नेतृत्व ने सदन में उचित समय पर राज्य का दर्जा देने का वादा किया है। अब्दुल्ला के प्रस्ताव में वर्ष 2000 के स्वायत्तता प्रस्ताव के उल्लेख पर भाजपा ने विरोध किया और कार्यवाही बाधित हुई।

स्रोत

Jammu and Kashmir — CM & govt · मूल ख़बर पढ़ें ↗

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डेस्क जाँच · कुछ दावे ध्यान से पढ़ें

डेस्क ने क्या जाँचा (5)
  • BJP MLAs on Friday demanded immediate dismissal of the Omar Abdullah-led J&K government. — Attributed in source to BJP MLAs, with quotes from Sham Lal Sharma at a press conference in Jammu.
  • Chief Minister Omar Abdullah moved an Assembly resolution seeking immediate restoration of full statehood, referring to two earlier resolutions. — Stated as fact in the source with no further document or official citation given.
  • The resolution's reference to a 2000 greater-autonomy resolution triggered BJP protests and disrupted proceedings. — Reported in source without named official attribution; figure/year appears in source.
  • The NC's agenda has remained unchanged since its earlier incarnation as the Muslim Conference in 1932. — Allegation explicitly attributed to Sharma; opinion, not verified.
  • Sharma questioned whether prescribed Assembly procedure was followed and said the chair failed to maintain its sanctity. — Attributed to Sharma as a claim; no response from the Speaker or government included in the source.

विश्लेषकों की राय राय

AI राजनीतिक विश्लेषक

यह एक प्रस्ताव पर हुआ हंगामा भर नहीं, बल्कि इस सवाल पर टकराव है कि जम्मू-कश्मीर में असली अधिकार किसके पास है। पूर्ण राज्य का दर्जा मांगने वाला प्रस्ताव लाकर उमर अब्दुल्ला अपना मुख्य चुनावी वादा जीवित रखते हैं और देरी का ठीकरा केंद्र पर फोड़ते हैं; वहीं उसी प्रस्ताव में वर्ष 2000 के स्वायत्तता प्रस्ताव का उल्लेख भाजपा को उसकी पसंदीदा बहस दे देता है — कि मुद्दा राज्य का दर्जा नहीं, स्वायत्तता है। सरकार बर्खास्त करने की मांग व्यवहार में पूरी होने की संभावना कम दिखती है, लेकिन जम्मू क्षेत्र में अपना आधार मजबूत करने के लिए भाजपा के लिए यह उपयोगी संकेत है।

  • केंद्र शासित प्रदेश में जहां वास्तविक अधिकार उपराज्यपाल और केंद्रीय गृह मंत्रालय के पास है, वहां निर्वाचित सरकार के लिए प्रस्ताव ही बचे-खुचे राजनीतिक औजारों में से एक हैं।
  • अब्दुल्ला को लाभ इसमें है कि राज्य के दर्जे को आगे रखकर वे घाटी के मतदाताओं को दिखा सकें कि वादा भुलाया नहीं गया।
  • भाजपा को लाभ इसमें है कि बहस को स्वायत्तता और राष्ट्रीय अखंडता की भाषा पर मोड़ दिया जाए, जो जम्मू में असरदार है — शर्मा का 1932 और शेख अब्दुल्ला के दौर का जिक्र वही ऐतिहासिक फ्रेमिंग है।
  • "उचित समय पर राज्य का दर्जा" वाला भाजपा का रुख उसे असहज मध्य में रखता है — वह दर्जे का खुला विरोध नहीं कर सकती, बस उमर को उसका श्रेय लेने से रोक सकती है।
  • प्रक्रिया और आसन की भूमिका पर सवाल उठाकर भाजपा संकेत दे रही है कि आने वाले सत्रों में यह लड़ाई नियम-प्रक्रिया के विवादों के रूप में जारी रहेगी।

किस पर नज़र रखें — देखना होगा कि केंद्र या गृह मंत्रालय किस लहजे में प्रतिक्रिया देते हैं, प्रस्ताव का अंतिम हश्र क्या होता है, और स्वायत्तता के सवाल पर नेकां और कांग्रेस एक पृष्ठ पर रहते हैं या नहीं।

यह खबर यह स्थापित नहीं करती कि केंद्र या गृह मंत्रालय बर्खास्तगी की मांग को कोई महत्व देते हैं, प्रस्ताव का वास्तविक पाठ क्या है, या नेकां और अध्यक्ष का जवाब क्या है — ये एक भाजपा विधायक के आरोप हैं।

गहराई से

शोध सारांश · 8 तथ्य · 5 तारीख़ें · परीक्षा के लिए

सार

पृष्ठभूमि

जम्मू-कश्मीर विधानसभा में 25 सितंबर (शुक्रवार) को मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने केंद्र शासित प्रदेश को "पूर्ण राज्य का दर्जा तत्काल और अविलंब बहाल" करने की मांग वाला प्रस्ताव रखा। इस प्रस्ताव में दो पुराने प्रस्तावों का उल्लेख था, जिनमें वर्ष 2000 का अधिक स्वायत्तता संबंधी प्रस्ताव भी शामिल था। इसी उल्लेख पर भाजपा सदस्यों ने तीव्र विरोध किया और सदन की कार्यवाही बाधित हुई। इसके बाद भाजपा विधायकों ने जम्मू में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर नेकां-कांग्रेस सरकार को तत्काल बर्खास्त करने की मांग की।

मुख्य तथ्य

  • 25 सितंबर, शुक्रवार को भाजपा विधायकों ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली जम्मू-कश्मीर सरकार को तत्काल बर्खास्त करने की मांग की।
  • भाजपा विधायक शाम लाल शर्मा ने जम्मू में प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाया कि नेकां-कांग्रेस सरकार अपने संवैधानिक दायरे का अतिक्रमण कर रही है।
  • उमर अब्दुल्ला ने विधानसभा में जम्मू-कश्मीर को "पूर्ण राज्य का दर्जा तत्काल और अविलंब बहाल" करने की मांग वाला प्रस्ताव पेश किया।
  • प्रस्ताव में दो पुराने प्रस्तावों का विशेष उल्लेख था; वर्ष 2000 के अधिक स्वायत्तता प्रस्ताव के संदर्भ ने भाजपा सदस्यों का तीव्र विरोध भड़काया और कार्यवाही बाधित हुई।
  • शर्मा ने कहा कि भाजपा नेतृत्व ने सदन के पटल पर "उचित समय पर राज्य का दर्जा" देने की प्रतिबद्धता जताई है।
  • शर्मा ने केंद्र सरकार, विशेष रूप से गृह मंत्री से सरकार भंग करने पर विचार करने का अनुरोध किया, यह कहते हुए कि यह केंद्र शासित प्रदेश उनके सीधे नियंत्रण में आता है।
  • शर्मा ने दावा किया कि नेकां का एजेंडा 1932 में मुस्लिम कॉन्फ्रेंस के रूप में अपने पूर्व स्वरूप से अपरिवर्तित रहा है।
  • शर्मा ने कहा कि पुनर्गठन के बाद तय हुए संवैधानिक ढांचे में विधानसभा संसद या सर्वोच्च न्यायालय पर सर्वोच्चता का दावा नहीं कर सकती।

समयरेखा

  1. 1932शर्मा के अनुसार नेशनल कॉन्फ्रेंस का पूर्व स्वरूप मुस्लिम कॉन्फ्रेंस, जिसका एजेंडा उनके दावे के मुताबिक तब से अपरिवर्तित है।
  2. 1953 से पहलेवह संवैधानिक व्यवस्था जिसे भाजपा के आरोप के अनुसार सत्तारूढ़ गठबंधन पुनर्जीवित करना चाहता है।
  3. वर्ष 2000जम्मू-कश्मीर में अधिक स्वायत्तता संबंधी प्रस्ताव, जिसका उल्लेख शुक्रवार के प्रस्ताव में विवाद का कारण बना।
  4. 25 सितंबर (शुक्रवार), दिन मेंउमर अब्दुल्ला ने पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने का प्रस्ताव रखा; भाजपा ने विधानसभा में विरोध किया, कार्यवाही बाधित।
  5. 25 सितंबर (शुक्रवार), बाद मेंजम्मू में भाजपा विधायक शाम लाल शर्मा की प्रेस कॉन्फ्रेंस, सरकार बर्खास्त करने की मांग।

किसका दाँव

  • मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला — पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल कराने का प्रस्ताव पेश किया; सरकार बर्खास्तगी की मांग का सामना।
  • नेशनल कॉन्फ्रेंस-कांग्रेस सरकार — भाजपा के आरोपों के घेरे में — संवैधानिक दायरे के अतिक्रमण और स्वायत्तता के एजेंडे का आरोप।
  • भाजपा विधायक/शाम लाल शर्मा — सदन के भीतर और बाहर विरोध; "उचित समय पर" राज्य का दर्जा देने के वादे का हवाला।
  • भारत सरकार एवं गृह मंत्री — केंद्र शासित प्रदेश उनके सीधे नियंत्रण में; सरकार भंग करने का अनुरोध उन्हीं से किया गया।
  • विधानसभा अध्यक्ष (चेयर) — भाजपा का आरोप कि प्रक्रिया की "पवित्रता" बनाए रखने में चेयर विफल रहा।
  • जम्मू-कश्मीर के नागरिक — राज्य का दर्जा, स्वायत्तता और शासन संबंधी अनिश्चितता का सीधा असर।

क्यों अहम है

यह टकराव दिखाता है कि जम्मू-कश्मीर में निर्वाचित विधानसभा और केंद्र शासित प्रदेश के संवैधानिक ढांचे के बीच अधिकार-क्षेत्र का प्रश्न अब भी अनसुलझा है। राज्य का दर्जा और स्वायत्तता दो अलग मांगें हैं, और उनका घुल-मिल जाना राजनीतिक ध्रुवीकरण को तेज करता है। सरकार बर्खास्त करने की मांग केंद्र-राज्य (केंद्र शासित प्रदेश) संबंधों और लोकतांत्रिक जनादेश की सीमाओं पर बहस को सामने लाती है।

UPSC नज़रिया

प्रीलिम्स संकेत

  • 25 सितंबर (शुक्रवार): उमर अब्दुल्ला ने जम्मू-कश्मीर विधानसभा में पूर्ण राज्य का दर्जा बहाली का प्रस्ताव पेश किया।
  • प्रस्ताव में वर्ष 2000 के अधिक स्वायत्तता प्रस्ताव के उल्लेख पर भाजपा ने विरोध किया।
  • भाजपा विधायक शाम लाल शर्मा ने जम्मू में सरकार बर्खास्तगी की मांग की।
  • जम्मू-कश्मीर एक केंद्र शासित प्रदेश है, जो स्रोत के अनुसार गृह मंत्री के सीधे नियंत्रण में आता है।
  • शर्मा का दावा: नेशनल कॉन्फ्रेंस का पूर्व स्वरूप 1932 की मुस्लिम कॉन्फ्रेंस था।
  • भाजपा का तर्क: पुनर्गठन के बाद के ढांचे में विधानसभा संसद या सर्वोच्च न्यायालय से ऊपर नहीं।

मेन्स दृष्टिकोण

जम्मू-कश्मीर में राज्य का दर्जा बहाली की मांग और स्वायत्तता के प्रश्न के बीच की महीन रेखा इस विवाद की जड़ है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला का प्रस्ताव \"पूर्ण राज्य का दर्जा तत्काल और अविलंब बहाल\" करने की मांग करता है, परंतु उसमें वर्ष 2000 के अधिक स्वायत्तता प्रस्ताव का उल्लेख भाजपा के लिए 1953 से पहले की व्यवस्था को पुनर्जीवित करने का प्रयास बन गया — जिसके आधार पर भाजपा ने सरकार की तत्काल बर्खास्तगी की मांग की। इसमें तीन स्तर के मुद्दे गुंथे हैं: संवैधानिक — पुनर्गठन के बाद केंद्र शासित प्रदेश की विधानसभा की शक्तियों की सीमा और भाजपा का यह तर्क कि विधानसभा संसद या सर्वोच्च न्यायालय पर सर्वोच्चता का दावा नहीं कर सकती; प्रक्रियात्मक — नियम-पुस्तिका के पालन और अध्यक्ष की भूमिका पर उठे सवाल; और राजनीतिक — जम्मू और कश्मीर क्षेत्रों के बीच भिन्न राजनीतिक आकांक्षाएं। आगे का रास्ता संस्थागत संवाद में है: प्रस्तावों पर विधानसभा की स्थापित प्रक्रिया का कड़ाई से पालन, राज्य का दर्जा और स्वायत्तता के प्रश्नों को अलग-अलग रखकर बहस, तथा निर्वाचित सरकार और केंद्र के बीच संवैधानिक मर्यादा के भीतर समाधान — क्योंकि भाजपा नेतृत्व ने स्वयं सदन के पटल पर \"उचित समय पर\" राज्य का दर्जा देने की प्रतिबद्धता जताई है।

मुख्य शब्द

पूर्ण राज्य का दर्जा (Full Statehood)
जम्मू-कश्मीर को केंद्र शासित प्रदेश से पुनः राज्य बनाने की मांग, जो अब्दुल्ला के प्रस्ताव का मूल विषय है।
1953 से पहले की संवैधानिक व्यवस्था
वह पुरानी व्यवस्था, जिसे पुनर्जीवित करने का आरोप भाजपा ने नेकां-कांग्रेस सरकार पर लगाया।
वर्ष 2000 का स्वायत्तता प्रस्ताव
अधिक स्वायत्तता संबंधी पुराना प्रस्ताव, जिसके उल्लेख ने शुक्रवार को विधानसभा में विरोध और गतिरोध पैदा किया।
पुनर्गठन (Reorganisation)
तत्कालीन राज्य का पुनर्गठन, जिसके बाद जम्मू-कश्मीर का वर्तमान संवैधानिक ढांचा परिभाषित हुआ।
मुस्लिम कॉन्फ्रेंस (1932)
शर्मा के अनुसार नेशनल कॉन्फ्रेंस का पूर्व स्वरूप, जिसका एजेंडा उनके दावे के मुताबिक अपरिवर्तित रहा।
सरकार की बर्खास्तगी/भंग करना
निर्वाचित सरकार को हटाने की मांग, जो भाजपा ने केंद्र सरकार और गृह मंत्री से की।

अभ्यास प्रश्न

  1. जम्मू-कश्मीर में "राज्य का दर्जा बहाली" और "अधिक स्वायत्तता" की मांगें किस प्रकार भिन्न हैं? विधानसभा में हुए हाल के विवाद के संदर्भ में परीक्षण करें।
  2. क्या किसी केंद्र शासित प्रदेश की निर्वाचित विधानसभा संवैधानिक ढांचे से संबंधित प्रस्ताव पारित कर सकती है? संसद और न्यायपालिका की सर्वोच्चता के तर्क के आलोक में चर्चा करें।
  3. विधायी कार्यवाही में प्रक्रियात्मक मर्यादा और अध्यक्ष की भूमिका सदन के गतिरोध रोकने में कितनी निर्णायक है? उदाहरण सहित समझाइए।

सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।

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