लद्दाख में 'शहीद दिवस', लेह और कारगिल में बंद
24 सितंबर 2025 की हिंसा की पहली बरसी पर बुधवार को लेह, कारगिल और लद्दाख के अन्य हिस्सों में बंद रहा। राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची के तहत संरक्षण की मांग को लेकर हुए प्रदर्शन हिंसक हो गए थे, जिसमें चार लोगों की मौत हुई थी। कुछ लोगों ने इस दिन को 'शहीद दिवस' के रूप में मनाया। सोनम वांगचुक ने लेह में करीब 20 किलोमीटर की प्रतीकात्मक पदयात्रा की और न्यायिक जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की। उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने 20 लोगों पर दर्ज मामले वापस लेने को मंजूरी दी।
स्रोत
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डेस्क जाँच · स्रोत से तुलना की
डेस्क ने क्या जाँचा (5)
- Four people died in the September 24, 2025 violence during statehood and Sixth Schedule protests — Figure appears twice in the source and is internally consistent; attributed to the source's own reporting.
- LG Vinai Kumar Saxena approved withdrawal of criminal cases against 20 people booked over the violence — Attributed to the Ladakh administration in the source; number consistent with linked report referenced in text.
- Sonam Wangchuk led a symbolic padyatra of about 20 km in Leh, reaching Shaheed Memorial Park around 7 pm — Attributed to organisers and Wangchuk; distance and time given in source, not independently verifiable.
- Automatic weapons were allegedly used against protesters and a firing order may have been issued — Presented as questions raised by Wangchuk for the judicial inquiry, not as established fact.
- Wangchuk was detained under the NSA two days after the incident and released in March this year — Stated in source without further attribution; no official document cited.
विश्लेषकों की राय राय
लद्दाख में बंद और 'शहीद दिवस' का पालन केवल शोक का प्रतीक नहीं, एक राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन भी है। एक साल बाद भी लेह एपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस का साथ बना रहना केंद्र के साथ बातचीत में उनकी मोलभाव की ताकत बनाए रखता है। दूसरी ओर पदयात्रा में सीमित भागीदारी और उसका छोटा किया जाना बताता है कि आंदोलन सड़क से बातचीत की मेज की ओर खिसक रहा है, और उसी दिन उपराज्यपाल द्वारा मुकदमे वापस लेने की मंजूरी तनाव घटाने की कोशिश लगती है।
- लेह और कारगिल दोनों में एक ही दिन बंद का पालन दर्शाता है कि मूल मांगों पर क्षेत्रीय और धार्मिक विभाजन से ऊपर एकता कायम है — जो स्थानीय नेतृत्व की बड़ी राजनीतिक पूंजी है।
- 20 लोगों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने की मंजूरी बरसी के दिन ही आना, गुस्सा ठंडा करने और संवाद जारी रखने की प्रशासनिक रणनीति के रूप में पढ़ा जा सकता है।
- एक साल बाद भी न्यायिक जांच रिपोर्ट सार्वजनिक न होना आंदोलन का सबसे तेज राजनीतिक हथियार बन गया है — मांग राज्य के दर्जे से आगे बढ़कर जवाबदेही तक फैल गई है।
- आयोजकों का लद्दाख के बाहर व्यापक अपील न करने का फैसला आंदोलन को 'स्थानीय' बनाए रखने और बाहरी राजनीतिकरण के आरोप से बचने की सोची-समझी कोशिश दिखता है।
- एनएसए के तहत हिरासत और रिहाई के बाद सोनम वांगचुक का फिर सार्वजनिक मंच पर आना संकेत देता है कि स्थानीय राजनीति में उनका कद घटा नहीं है।
किस पर नज़र रखें — देखना होगा कि न्यायिक जांच रिपोर्ट सार्वजनिक होती है या नहीं, और एपेक्स बॉडी व केडीए अनुच्छेद 371 के ढांचे को छठी अनुसूची का स्वीकार्य विकल्प मानते हैं या नहीं।
यह खबर मुकदमे वापस लेने की मंशा, बातचीत की वर्तमान स्थिति, रिपोर्ट में देरी के कारण या बंद में जन-भागीदारी के पैमाने की पुष्टि नहीं करती — ये सभी रिपोर्ट किए गए तथ्यों से निकाले गए अनुमान हैं।
गहराई से
शोध सारांश · 8 तथ्य · 6 तारीख़ें · परीक्षा के लिएसार
पृष्ठभूमि
24 सितंबर 2025 को लद्दाख में राज्य का दर्जा और संविधान की छठी अनुसूची के तहत संरक्षण की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन के दौरान लेह में प्रदर्शन हिंसक हो गए थे, जिसमें चार लोगों की मौत हुई और कई घायल हुए। केंद्रशासित प्रदेश प्रशासन ने घटना की न्यायिक जांच का आदेश दिया था, पर एक वर्ष बाद भी रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हुई। इस घटना की पहली बरसी पर बुधवार को लेह, कारगिल और लद्दाख के अन्य हिस्सों में बंद रहा और कुछ लोगों ने इसे 'शहीद दिवस' के रूप में मनाया।
मुख्य तथ्य
- 24 सितंबर 2025 की हिंसा में चार लोगों की मौत हुई और कई लोग घायल हुए; यह प्रदर्शन राज्य के दर्जे और छठी अनुसूची के तहत संरक्षण की मांग को लेकर था।
- बरसी पर बुधवार को लेह और कारगिल में दुकानें व व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद रहे, सड़कों पर यातायात कम रहा।
- लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने हिंसा से जुड़े 20 लोगों के खिलाफ आपराधिक मामले वापस लेने को बुधवार को मंजूरी दी।
- जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने लेह में प्रतीकात्मक पदयात्रा का नेतृत्व किया और घोषणा की कि 24 सितंबर को शहीद दिवस के रूप में मनाया जाएगा।
- एपेक्स बॉडी लेह (LAB) और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (KDA) द्वारा 19–24 सितंबर के लिए प्रस्तावित पदयात्रा को घटाकर बुधवार को लेह में प्रतीकात्मक मार्च तक सीमित कर दिया गया।
- मौसम बदलने के कारण मार्च छोटा किया गया; करीब 20 किलोमीटर चलने के बाद प्रतिभागी शाम लगभग 7 बजे लेह के शहीद मेमोरियल पार्क पहुंचे।
- वांगचुक ने न्यायिक जांच रिपोर्ट जल्द प्रस्तुत करने और सार्वजनिक करने की मांग की, यह पूछते हुए कि गोली चलाने का आदेश दिया गया था या नहीं और प्रदर्शनकारियों पर स्वचालित हथियारों का कथित उपयोग कैसे हुआ।
- वांगचुक को घटना के दो दिन बाद NSA के तहत हिरासत में लिया गया था और इस वर्ष मार्च में रिहा किया गया।
समयरेखा
- 24 सितंबर 2025राज्य के दर्जे और छठी अनुसूची की मांग को लेकर प्रदर्शन हिंसक हुए; लेह में चार लोगों की मौत, कई घायल।
- 25 सितंबर 2025 (गुरुवार)लेह में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पों के बाद जली हुई गाड़ी के अवशेष; प्रशासन ने बाद में न्यायिक जांच का आदेश दिया।
- घटना के दो दिन बादसोनम वांगचुक को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत हिरासत में लिया गया।
- मार्च (इस वर्ष)सोनम वांगचुक को हिरासत से रिहा किया गया।
- 19–24 सितंबर (प्रस्तावित)LAB और KDA की प्रस्तावित पदयात्रा, जो बाद में लेह में एक प्रतीकात्मक मार्च तक सीमित रही।
- बुधवार (पहली बरसी)लेह-कारगिल में बंद, श्रद्धांजलि कार्यक्रम, 20 किमी प्रतीकात्मक पदयात्रा; उपराज्यपाल ने 20 लोगों पर मामले वापस लेने को मंजूरी दी।
किसका दाँव
- लद्दाख के निवासी (लेह व कारगिल) — राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची के तहत संरक्षण की मांग; बंद से सामान्य जीवन प्रभावित।
- एपेक्स बॉडी लेह (LAB) और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (KDA) — केंद्र के साथ वार्ता में शामिल संगठन; आंदोलन और स्मृति कार्यक्रमों का नेतृत्व।
- सोनम वांगचुक — आंदोलन का प्रमुख चेहरा; NSA के तहत हिरासत में रहे, अब न्यायिक जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग।
- उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना और केंद्रशासित प्रदेश प्रशासन — कानून-व्यवस्था, न्यायिक जांच और 20 लोगों पर मामले वापस लेने का निर्णय।
- केंद्र सरकार — LAB-KDA के साथ वार्ता; स्रोत के अनुसार अनुच्छेद 371 के तहत विशेष संरक्षण का नया ढांचा बनाया जा रहा है।
- मृतकों के परिजन — गोलीबारी की परिस्थितियों पर जवाबदेही और न्यायिक जांच रिपोर्ट का सार्वजनिक होना।
क्यों अहम है
लद्दाख के 2019 में केंद्रशासित प्रदेश बनने के बाद उठी राज्य के दर्जे और संवैधानिक संरक्षण की मांग अब जानमाल के नुकसान और एक अनसुलझी न्यायिक जांच से जुड़ गई है। एक वर्ष बाद भी रिपोर्ट सार्वजनिक न होने से जवाबदेही और भरोसे का सवाल बना हुआ है, जबकि केंद्र-LAB-KDA वार्ता जारी है। यह मामला सीमावर्ती, जनजातीय बहुल क्षेत्र में शासन, प्रतिनिधित्व और असहमति से निपटने के तरीके की परीक्षा है।
UPSC नज़रिया
प्रीलिम्स संकेत
- छठी अनुसूची: जनजातीय क्षेत्रों के प्रशासन से जुड़ा संविधान का प्रावधान, जिसकी मांग लद्दाख में की जा रही है।
- 24 सितंबर 2025 की लेह हिंसा में 4 मौतें; प्रशासन ने न्यायिक जांच का आदेश दिया।
- लद्दाख के उपराज्यपाल: विनय कुमार सक्सेना; 20 लोगों पर आपराधिक मामले वापस लेने को मंजूरी।
- LAB (एपेक्स बॉडी लेह) और KDA (कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस) केंद्र के साथ वार्ता में शामिल हैं।
- सोनम वांगचुक को NSA के तहत हिरासत में लिया गया था, मार्च में रिहा हुए।
- स्रोत के अनुसार मुख्य सचिव ने कहा कि लद्दाख के विशेष संरक्षण के लिए अनुच्छेद 371 के तहत नया ढांचा बनाया जा रहा है।
मेन्स दृष्टिकोण
लद्दाख का आंदोलन केंद्रशासित प्रदेश के रूप में सीमित राजनीतिक प्रतिनिधित्व, भूमि-रोजगार-सांस्कृतिक पहचान की सुरक्षा की चिंता और राज्य के दर्जे तथा छठी अनुसूची जैसे संवैधानिक संरक्षण की मांग से उपजा है। 24 सितंबर 2025 को प्रदर्शन हिंसक होने पर चार मौतें हुईं, कई घायल हुए और आंदोलन के प्रमुख चेहरे सोनम वांगचुक को NSA के तहत हिरासत में लिया गया, जो असहमति से निपटने में कठोर कानूनों के उपयोग पर बहस को जन्म देता है। प्रशासन ने न्यायिक जांच बैठाई, लेकिन एक वर्ष बाद भी रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं होने से गोलीबारी के आदेश, स्वचालित हथियारों के कथित उपयोग और हिंसा की शुरुआत जैसे प्रश्न अनुत्तरित हैं—जिससे बंद, 'शहीद दिवस' और पदयात्रा जैसे प्रतीकात्मक विरोध जारी हैं। आगे का रास्ता स्रोत के संकेतों पर आधारित है: 20 लोगों पर मामले वापस लेने जैसे विश्वास-बहाली के कदम, LAB-KDA के साथ केंद्र की सतत वार्ता, न्यायिक जांच रिपोर्ट का समयबद्ध व सार्वजनिक प्रस्तुतीकरण, और मुख्य सचिव के अनुसार अनुच्छेद 371 के तहत विशेष संरक्षण का नया ढांचा।
मुख्य शब्द
- छठी अनुसूची
- संविधान का प्रावधान जिसके तहत जनजातीय क्षेत्रों को विशेष प्रशासनिक संरक्षण मिलता है; लद्दाख में इसकी मांग हो रही है।
- एपेक्स बॉडी लेह (LAB)
- लेह का संगठनात्मक मंच जो राज्य के दर्जे व संरक्षण की मांग पर केंद्र से वार्ता कर रहा है।
- कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (KDA)
- कारगिल आधारित संगठनों का गठबंधन, जो LAB के साथ केंद्र से वार्ता में शामिल है।
- NSA (राष्ट्रीय सुरक्षा कानून)
- निवारक हिरासत का कानून, जिसके तहत घटना के दो दिन बाद सोनम वांगचुक को हिरासत में लिया गया था।
- शहीद दिवस
- 24 सितंबर 2025 की हिंसा में मारे गए लोगों की स्मृति में मनाया जाने वाला दिन, जिसकी घोषणा वांगचुक ने की।
- अनुच्छेद 371
- स्रोत के अनुसार, लद्दाख के विशेष संरक्षण के लिए इसी अनुच्छेद के तहत नया ढांचा तैयार किया जा रहा है।
अभ्यास प्रश्न
- लद्दाख में छठी अनुसूची के तहत संरक्षण और राज्य के दर्जे की मांग के कारणों की परीक्षा कीजिए। केंद्रशासित प्रदेशों में प्रतिनिधित्व की कमी इन मांगों को कैसे प्रबल करती है?
- 24 सितंबर 2025 की लेह हिंसा की न्यायिक जांच रिपोर्ट एक वर्ष बाद भी सार्वजनिक न होने के जवाबदेही संबंधी प्रभावों पर चर्चा कीजिए।
- प्रदर्शनों से निपटने में NSA जैसे निवारक हिरासत कानूनों के उपयोग पर लद्दाख के उदाहरण से टिप्पणी कीजिए।
सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।
