राजनीति महाराष्ट्र

सीईसी को हटाने की मांग, महाराष्ट्र भर में कांग्रेस का प्रदर्शन

कांग्रेस ने सोमवार को महाराष्ट्र भर में प्रदर्शन कर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने और उनके विरुद्ध कार्रवाई की मांग की। पुणे, नागपुर, नासिक, कोल्हापुर, सोलापुर, ठाणे, अमरावती और छत्रपति संभाजीनगर सहित जिला कलेक्टरेटों के बाहर प्रदर्शन हुए और कलेक्टरों को ज्ञापन सौंपे गए। पार्टी ने मतदाता सूची और विशेष गहन पुनरीक्षण में अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए कहा कि 30 राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों में मसौदा सूचियों से 13 करोड़ से अधिक नाम हटाए गए। आयोग ने कहा कि उसके निर्णय सर्वसम्मत थे।

स्रोत

The Hindu — Cities · मूल ख़बर पढ़ें ↗

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डेस्क जाँच · कुछ दावे ध्यान से पढ़ें

डेस्क ने क्या जाँचा (5)
  • Congress held protest marches outside district collectorates across Maharashtra on September 28, 2026, demanding CEC Gyanesh Kumar's removal and arrest. — Attributed to the Maharashtra Congress in the source; district list and participating leaders named.
  • Election Commissioners Sukhbir Singh Sandhu and Vivek Joshi formally objected at least 14 times in 10 months to electoral-roll decisions taken without their knowledge or approval. — Attributed in the source to an Indian Express investigation; not independently verified here.
  • More than 13 crore names were deleted from draft electoral rolls during the SIR across 30 states and Union Territories. — Figure cited by Congress and reported by Indian Express; the source explicitly notes it does not by itself establish that deletions were improper.
  • Electoral-roll revisions under Gyanesh Kumar benefited the ruling BJP. — Congress allegation, unproven; must be reported as a party claim.
  • The ECI said the internal notes were part of normal decision-making and its decisions were unanimous. — Attributed to the ECI in the source; provides required balance.

विश्लेषकों की राय राय

AI राजनीतिक विश्लेषक

कांग्रेस ने चुनाव आयोग से अपनी लड़ाई को दिल्ली के बयानों से आगे बढ़ाकर जिला स्तर की सड़क राजनीति बना दिया है — महाराष्ट्र भर में कलेक्टरेट के सामने धरने, जिनमें सांसद और पूर्व मंत्री शामिल हुए, एक संगठित राजनीतिक अभियान का संकेत हैं। पार्टी दो चुनाव आयुक्तों की कथित आंतरिक आपत्तियों को अपने पुराने 'वोट चोरी' आरोप की पुष्टि मान रही है; आयोग ने इसे खारिज करते हुए कहा है कि ये नोट सामान्य आंतरिक प्रक्रिया का हिस्सा थे और निर्णय सर्वसम्मत रहे। महाराष्ट्र का चुनाव संयोग नहीं है — वहां मतदाता सूचियों पर कांग्रेस और शिवसेना (यूबीटी) लंबे समय से सवाल उठा रही हैं।

  • कलेक्टरों को ज्ञापन और पुतला प्रदर्शन बताते हैं कि यह कानूनी या संस्थागत रास्ते से अधिक कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने की लामबंदी रणनीति है।
  • किसी संस्था को निशाना बनाना दोधारी है: पारदर्शिता की मांग के रूप में फायदा, लेकिन चुनावी हार का पूर्व-बहाना दिखने का जोखिम भी।
  • राहुल गांधी और उद्धव ठाकरे की एक ही मांग पर सहमति महाराष्ट्र में विपक्षी तालमेल के लिए तैयार मुद्दा देती है।
  • 13 करोड़ से अधिक नाम हटाए जाने का आंकड़ा राजनीतिक रूप से असरदार नारा है, पर जैसा खबर स्वयं कहती है, यह अपने आप गड़बड़ी साबित नहीं करता।
  • मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाना संवैधानिक रूप से बहुत कठिन है, इसलिए यह मांग नतीजे से ज्यादा राजनीतिक संदेश बनी रह सकती है।

किस पर नज़र रखें — देखना यह है कि आंदोलन महाराष्ट्र से बाहर और संसद तक फैलता है या नहीं, और इंडिया गठबंधन के दल संयुक्त कार्यक्रम की ओर बढ़ते हैं या नहीं।

यह खबर यह स्थापित नहीं करती कि मतदाता सूची संशोधन में अनियमितता हुई या किसी दल को लाभ मिला — ये कांग्रेस के आरोप हैं, जिन्हें आयोग ने अस्वीकार किया है।

गहराई से

शोध सारांश · 8 तथ्य · 4 तारीख़ें · परीक्षा के लिए

सार

पृष्ठभूमि

कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के विरुद्ध आंदोलन तेज करते हुए 28 सितंबर 2026 (सोमवार) को महाराष्ट्र भर में प्रदर्शन किए और मतदाता सूचियों तथा विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में कथित अनियमितताओं को लेकर उनकी बर्खास्तगी व गिरफ्तारी की मांग की। यह आंदोलन 'इंडियन एक्सप्रेस' की उस पड़ताल के बाद तेज हुआ जिसमें कहा गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार मतदाता सूची संबंधी निर्णयों पर औपचारिक आपत्तियां दर्ज कराईं। आयोग ने कहा कि ये नोट उसकी सामान्य आंतरिक निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा थे और इस अवधि के उसके निर्णय सर्वसम्मत थे।

मुख्य तथ्य

  • 28 सितंबर 2026 (सोमवार) को कांग्रेस ने महाराष्ट्र भर में जिला कलेक्टरेटों के बाहर प्रदर्शन कर सीईसी ज्ञानेश कुमार को हटाने व उनके विरुद्ध कार्रवाई की मांग की।
  • प्रदर्शन पुणे, नागपुर, नासिक, कोल्हापुर, सोलापुर, ठाणे, अमरावती और छत्रपति संभाजीनगर सहित जिलों में हुए; कलेक्टरों को ज्ञापन सौंपे गए।
  • इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीनों में कम से कम 14 बार औपचारिक आपत्ति दर्ज कराई।
  • आपत्तियां मतदाताओं के नाम जोड़ने-हटाने, फॉर्म 6 में बदलाव, मतदाता सूची संबंधी अपीलों और मतदाता डेटाबेस के नियंत्रण से जुड़ी थीं; कुछ आंतरिक नोटों में कदमों को 'अनधिकृत' या 'अवैध' बताया गया।
  • कांग्रेस ने कहा कि SIR के दौरान 30 राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों में मसौदा मतदाता सूचियों से 13 करोड़ से अधिक नाम हटाए गए; स्रोत के अनुसार यह आंकड़ा अपने आप में हटाए जाने को अनुचित सिद्ध नहीं करता।
  • अमरावती में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने ज्ञानेश कुमार का पुतला गधे पर घुमाया, ठाणे में पुतले से उठक-बैठक कराई गई।
  • कोल्हापुर प्रदर्शन का नेतृत्व विधान परिषद में कांग्रेस गुटनेता व पूर्व मंत्री सतेज पाटील ने किया; सोलापुर में सांसद प्रणिति शिंदे शामिल हुईं।
  • बीड, रत्नागिरी, सिंधुदुर्ग, रायगड, धाराशिव, यवतमाल, हिंगोली, जालना, परभणी, पालघर, नंदुरबार, भंडारा और अकोला में भी प्रदर्शन हुए।

समयरेखा

  1. पिछले 10 महीने (रिपोर्ट के अनुसार)चुनाव आयुक्त संधू और जोशी ने मतदाता सूची संबंधी निर्णयों पर कम से कम 14 बार औपचारिक आपत्तियां दर्ज कराईं।
  2. रिपोर्ट प्रकाशन के बादइंडियन एक्सप्रेस की पड़ताल सामने आने पर विपक्षी दलों ने सीईसी व आयोग की कार्यप्रणाली पर हमले तेज किए; राहुल गांधी और उद्धव ठाकरे ने कार्रवाई की मांग की।
  3. 28 सितंबर 2026 (सोमवार)महाराष्ट्र भर में कांग्रेस के प्रदर्शन, कलेक्टरों को ज्ञापन, पुतला दहन-प्रदर्शन जैसे कार्यक्रम।
  4. 29 सितंबर 2026, 02:49 पूर्वाह्न ISTसमाचार रिपोर्ट प्रकाशित।

किसका दाँव

  • मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार — उनके पद से हटाने और उनके विरुद्ध कार्रवाई की मांग; मतदाता सूची पुनरीक्षण संबंधी निर्णयों पर सवाल।
  • भारत निर्वाचन आयोग (ECI) — संस्थागत विश्वसनीयता; आयोग का कहना है कि आंतरिक नोट सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा थे और निर्णय सर्वसम्मत थे।
  • चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू व विवेक जोशी — रिपोर्ट के अनुसार उनकी जानकारी या मंजूरी के बिना लिए गए निर्णयों पर आपत्तियां दर्ज कराईं।
  • कांग्रेस व महाराष्ट्र कांग्रेस — आंदोलन जारी रखने की घोषणा; आरोप कि मतदाता सूची पुनरीक्षण से सत्तारूढ़ भाजपा को लाभ हुआ।
  • भाजपा — कांग्रेस का आरोप है कि मतदाता सूची पुनरीक्षण से उसे लाभ हुआ।
  • मतदाता जिनके नाम मसौदा सूचियों से हटे — 30 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में 13 करोड़ से अधिक नाम हटाए जाने के बीच मताधिकार का प्रश्न।
  • जिला कलेक्टर — ज्ञापन प्राप्तकर्ता; चुनावी प्रशासन में जिला-स्तरीय भूमिका।

क्यों अहम है

मतदाता सूची की शुद्धता और निर्वाचन आयोग की सामूहिक निर्णय प्रक्रिया लोकतांत्रिक विश्वास की बुनियाद है; आयोग के भीतर से आपत्तियों की रिपोर्ट और 13 करोड़ से अधिक नाम हटाए जाने का आंकड़ा इस भरोसे पर सार्वजनिक बहस खड़ी करता है। विपक्ष इसे संवैधानिक निकाय की स्वायत्तता व पारदर्शिता का प्रश्न बना रहा है, जबकि आयोग अपने निर्णयों को सर्वसम्मत बता रहा है। महाराष्ट्र जैसे बड़े राज्य में सड़क पर उतरा विरोध चुनावी प्रक्रिया की वैधता के टकराव को राजनीतिक मुद्दा बना देता है।

UPSC नज़रिया

प्रीलिम्स संकेत

  • विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR): मतदाता सूचियों का गहन पुनरीक्षण; स्रोत के अनुसार 30 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में मसौदा सूचियों से 13 करोड़ से अधिक नाम हटाए गए।
  • सीईसी ज्ञानेश कुमार के विरुद्ध कांग्रेस का आंदोलन; 28 सितंबर 2026 को महाराष्ट्र भर में प्रदर्शन।
  • चुनाव आयुक्त: सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी — रिपोर्ट के अनुसार 10 महीनों में 14 बार आपत्तियां।
  • फॉर्म 6: मतदाता सूची में नाम जोड़ने से संबंधित प्रपत्र; इसमें बदलाव आपत्तियों के विषयों में शामिल।
  • प्रदर्शन में शामिल नेता: सतेज पाटील (कोल्हापुर), प्रणिति शिंदे (सोलापुर), यशोमती ठाकुर व बलवंत वानखड़े (अमरावती), कल्याण काले (छत्रपति संभाजीनगर)।
  • ECI का रुख: आंतरिक नोट सामान्य निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा, निर्णय सर्वसम्मत।

मेन्स दृष्टिकोण

यह प्रकरण निर्वाचन आयोग की संस्थागत साख, उसके बहुसदस्यीय ढांचे में सामूहिक निर्णय-प्रक्रिया और मतदाता सूची शुद्धिकरण की प्रक्रियात्मक वैधता — तीनों को एक साथ कसौटी पर रखता है। तात्कालिक कारण एक मीडिया पड़ताल है जिसके अनुसार दो चुनाव आयुक्तों ने 10 महीनों में कम से कम 14 बार मतदाता जोड़ने-हटाने, फॉर्म 6 में बदलाव, अपीलों और मतदाता डेटाबेस के नियंत्रण से जुड़े निर्णयों पर आपत्ति दर्ज कराई और कुछ नोटों में कदमों को 'अनधिकृत' या 'अवैध' कहा गया; आयोग का उत्तर है कि ये नोट सामान्य आंतरिक प्रक्रिया का अंग थे और निर्णय सर्वसम्मत रहे। इसके निहितार्थ दोहरे हैं — एक ओर SIR के दौरान 30 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में 13 करोड़ से अधिक नाम मसौदा सूचियों से हटने पर मताधिकार और समावेशन का प्रश्न, दूसरी ओर संवैधानिक निकाय पर आरोपों के राजनीतिकरण का जोखिम; स्रोत स्वयं स्पष्ट करता है कि यह आंकड़ा अपने आप में हटाए जाने को अनुचित नहीं सिद्ध करता। आगे का रास्ता आरोपों के बजाय प्रमाणिक तथ्यों पर आधारित पारदर्शिता में है — निर्णयों की सामूहिकता का सार्वजनिक स्पष्टीकरण, हटाए गए नामों पर अपील व पुनर्स्थापन तंत्र की सुलभता, और राजनीतिक दलों द्वारा संस्थागत मंचों के उपयोग पर बल, ताकि विरोध सड़क तक सीमित न रहकर प्रक्रियात्मक सुधार में बदले।

मुख्य शब्द

SIR (विशेष गहन पुनरीक्षण)
मतदाता सूचियों के गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया, जिसके संचालन पर कांग्रेस ने अनियमितता के आरोप लगाए।
मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी)
निर्वाचन आयोग का प्रमुख; वर्तमान में ज्ञानेश कुमार, जिन्हें हटाने की मांग कांग्रेस कर रही है।
भारत निर्वाचन आयोग (ECI)
चुनाव कराने वाली संस्था, जिसका कहना है कि विवादित अवधि में उसके निर्णय सर्वसम्मत थे।
फॉर्म 6
मतदाता सूची में नाम जोड़ने से संबंधित प्रपत्र; इसमें किए गए बदलाव आयुक्तों की आपत्तियों का विषय बने।
मसौदा मतदाता सूची
पुनरीक्षण के दौरान प्रकाशित प्रारूप सूची, जिससे स्रोत के अनुसार 13 करोड़ से अधिक नाम हटाए गए।
ज्ञापन (मेमोरेंडम)
प्रदर्शन के दौरान जिला कलेक्टरों को सौंपा गया औपचारिक मांगपत्र।

अभ्यास प्रश्न

  1. निर्वाचन आयोग के बहुसदस्यीय ढांचे में 'सामूहिक निर्णय' की अवधारणा क्या है, और आंतरिक असहमति की रिपोर्टों से संस्थागत विश्वसनीयता कैसे प्रभावित होती है? चर्चा करें।
  2. मतदाता सूचियों के गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े मताधिकार और समावेशन के प्रश्नों का परीक्षण करें। नाम हटाए जाने की स्थिति में क्या प्रक्रियात्मक सुरक्षा उपाय आवश्यक हैं?
  3. चुनाव संबंधी शिकायतों को सड़क के आंदोलन के बजाय संस्थागत मंचों पर उठाने के पक्ष और सीमाएं क्या हैं? महाराष्ट्र के हालिया प्रदर्शनों के संदर्भ में विश्लेषण करें।

सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।

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