शिक्षा जम्मू-कश्मीर

जम्मू-कश्मीर में 21.8 लाख किताबों की जांच, 4,249 हटाई गईं

जम्मू-कश्मीर सरकार ने सरकारी डिग्री कॉलेजों में 21,81,582 किताबों और प्रकाशनों की जांच की है। उच्च शिक्षा विभाग ने विधानसभा में लिखित उत्तर में यह जानकारी दी। इसमें जम्मू संभाग की 9,32,941 और कश्मीर संभाग की 12,48,641 किताबें शामिल हैं। पांच अगस्त 2025 के एस.ओ. 203 के तहत प्रतिबंधित किताबों की 518 प्रतियां और अतिरिक्त 4,249 किताबें हटाई गईं, जबकि 1,752 विशेषज्ञ जांच के लिए भेजी गईं। लंगेट के निर्दलीय विधायक खुर्शीद अहमद शेख ने इसे राज्य का इतिहास विकृत करने का प्रयास कहा।

स्रोत

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डेस्क जाँच · स्रोत से तुलना की

डेस्क ने क्या जाँचा (5)
  • 21,81,582 books and publications examined in government degree colleges — 9,32,941 in Jammu division and 12,48,641 in Kashmir division. — Attributed to a written reply by the Higher Education Department in the J&K Legislative Assembly; divisional figures add up to the stated total.
  • 518 copies of banned books withdrawn under S.O. 203 dated August 5, 2025, and 4,249 other books withdrawn. — Figures appear in the source and are attributed to the government reply; however the article's opening states 4,767 books withdrawn, an internal inconsistency an editor should reconcile.
  • 1,752 books referred to the Director Colleges for expert examination. — Figure appears in the source, attributed to the Assembly reply.
  • Independent Langate MLA Khurshed Ahmad Sheikh said the exercise is an attempt to distort J&K's history. — Direct quote attributed to the MLA, given to News18.
  • Earlier actions: 668 books seized in Srinagar in February 2025; 25 books forfeited in August 2025; eight education officials suspended after a July 2026 school textbook row. — Background attributed to police and the Home Department in the source; dates and numbers as given, not independently verified.

विश्लेषकों की राय राय

AI नीति विश्लेषक

बड़ा आंकड़ा — 21.8 लाख पुस्तकों की जाँच और 4,767 का प्रचलन से हटाया जाना — इस नीति के निष्कर्षों से ज़्यादा इसके ढाँचे के बारे में बताता है। इनमें केवल 518 पुस्तकें ही किसी औपचारिक कानूनी आदेश (5 अगस्त 2025 का एस.ओ. 203) के तहत हटाई गईं; इससे कहीं बड़ा हिस्सा, 4,249 पुस्तकें, प्रशासनिक स्तर पर हटाई गईं — और शासन-व्यवस्था का सवाल ठीक यहीं है। सरकार इसे संवैधानिक मूल्यों और शैक्षणिक स्वतंत्रता की रक्षा बताती है, लेकिन जिन मानकों को वह 'स्पष्ट और वस्तुनिष्ठ' कहती है, वे इस खबर में सार्वजनिक नहीं हैं — और उच्च शिक्षा में यही अंतर तय करता है कि ऐसी जाँच नियमन लगती है या पूर्व-रोक।

  • एक साथ दो कानूनी रास्ते अपनाए जा रहे हैं: 518 प्रतियों के लिए अधिसूचित जब्ती आदेश, और बाकी 4,249 के लिए विभागीय विवेक — जिसके लिए किसी अपील या पुनर्विचार प्रक्रिया का उल्लेख नहीं है।
  • 9 जुलाई 2026 के परिपत्र ने जाँच का दायरा पुस्तकों से आगे बढ़ाकर पत्रिकाओं, शोध-प्रबंधों, थीसिस और डिजिटल संसाधनों तक कर दिया है, जो इसे पुस्तकालय-प्रबंधन से आगे शोध-अभिलेख के चयन की दिशा में ले जाता है।
  • 1,752 पुस्तकों को 'विशेषज्ञ परीक्षण' के लिए निदेशक, कॉलेज को भेजना यहाँ सबसे नज़दीकी सुरक्षा-उपाय है, पर खबर यह नहीं बताती कि विशेषज्ञ कौन हैं, कसौटी क्या है, और निर्णय दर्ज होते हैं या नहीं।
  • क्रियान्वयन का बोझ वास्तविक है और सरकार खुद इसे 'श्रमसाध्य कार्य' कहती है; पिछले चरण में आठ शिक्षा अधिकारियों के निलंबन जैसे कदमों के बाद सतर्क पुस्तकालयाध्यक्ष संतुलित निर्णय की जगह ज़रूरत से ज़्यादा हटाने की ओर झुक सकते हैं।
  • तुलना के लिहाज़ से दिशा महत्वपूर्ण है: 2025 की दुकानों पर जब्ती और 25 शीर्षकों की फॉरफीचर कार्रवाई विक्रेताओं पर केंद्रित कानून-व्यवस्था कदम थे, जबकि यह चरण सार्वजनिक वित्त-पोषित शैक्षणिक संस्थानों के भीतर चल रहा है, जहाँ शैक्षणिक स्वतंत्रता का दावा सबसे मज़बूत होता है।

किस पर नज़र रखें — देखना यह होगा कि विभाग जाँच के वास्तविक मानक, शीर्षकवार सूची और अपील की व्यवस्था सार्वजनिक करता है या नहीं, और शेष सामग्री तथा 1,752 भेजी गई पुस्तकों का क्या होता है — आंकड़ों से ज़्यादा यही बताएगा कि यह नियम-आधारित ऑडिट है या खुला विवेकाधिकार।

खबर यह स्पष्ट नहीं करती कि कौन-सी पुस्तकें हटाई गईं, कौन-सी कसौटी लगी, निर्णय किसने लिया, या किसी हटाने को चुनौती/पुनर्विचार मिला — इसलिए इन आंकड़ों से 4,249 पुस्तकों के हटाए जाने का गुण-दोष तय नहीं किया जा सकता।

गहराई से

शोध सारांश · 8 तथ्य · 6 तारीख़ें · परीक्षा के लिए

सार

पृष्ठभूमि

जम्मू-कश्मीर सरकार ने सरकारी डिग्री कॉलेजों और सार्वजनिक वित्त पोषित पुस्तकालयों में रखी किताबों, पत्रिकाओं, शोध-प्रकाशनों और डिजिटल संसाधनों की व्यापक "अकादमिक एवं कंटेंट ऑडिट" शुरू की है। प्रशासन का कहना है कि उद्देश्य "आपत्तिजनक", अलगाववादी या "राष्ट्र-विरोधी" सामग्री की पहचान है। यह कवायद पिछले दो वर्षों में किताब दुकानों पर पुलिस छापों, जब्ती और सरकारी आदेशों की श्रृंखला के बाद आई है। उच्च शिक्षा विभाग ने विधानसभा में लिखित उत्तर के जरिए पहली बार इस ऑडिट के उच्च शिक्षा हिस्से का आकार बताया है।

मुख्य तथ्य

  • सरकारी डिग्री कॉलेजों में अब तक 21,81,582 किताबों और प्रकाशनों की जांच हुई है।
  • इनमें जम्मू संभाग की 9,32,941 और कश्मीर संभाग की 12,48,641 किताबें शामिल हैं।
  • कुल 4,767 किताबें प्रचलन से हटाई गईं — 5 अगस्त 2025 के एस.ओ. 203 के तहत प्रतिबंधित किताबों की 518 प्रतियां और अन्य 4,249 किताबें।
  • 1,752 किताबें विशेषज्ञ जांच के लिए निदेशक, कॉलेज को भेजी गई हैं।
  • फरवरी 2025 में जम्मू-कश्मीर पुलिस ने श्रीनगर की किताब दुकानों पर तलाशी लेकर 668 किताबें जब्त कीं, जिन्हें एक प्रतिबंधित संगठन की विचारधारा से जोड़ा गया।
  • अगस्त 2025 में गृह विभाग ने 25 किताबें ज़ब्त (forfeited) घोषित कीं; सूची में ए.जी. नूरानी, अरुंधति रॉय, सुमंत्र बोस, क्रिस्टोफर स्नेडन और अनुराधा भसीन की रचनाएं थीं।
  • जुलाई 2026 में स्कूलों को दी गई दो किताबों पर विवाद के बाद आठ शिक्षा अधिकारी निलंबित किए गए और जांच का आदेश दिया गया।
  • उच्च शिक्षा विभाग के 9 जुलाई 2026 के परिपत्र ने कॉलेजों और सार्वजनिक वित्त पोषित पुस्तकालयों में व्यापक अकादमिक व कंटेंट ऑडिट का आदेश दिया।

समयरेखा

  1. फरवरी 2025पुलिस ने श्रीनगर की किताब दुकानों पर तलाशी ली, 668 किताबें जब्त; पुलिस ने सामग्री को जमात-ए-इस्लामी से जोड़ा, विक्रेताओं ने कहा कई रचनाएं अबुल मौदूदी की थीं।
  2. 5 अगस्त 2025एस.ओ. 203 जारी, जिसके तहत प्रतिबंधित किताबों की 518 प्रतियां कॉलेजों से हटाई गईं।
  3. अगस्त 2025जम्मू-कश्मीर गृह विभाग ने 25 किताबें ज़ब्त घोषित कीं; इसके बाद घाटी भर में किताब दुकानों पर तलाशी।
  4. जुलाई 2026सरकारी स्कूलों को दी गई दो किताबों में मकबूल भट, सैयद अली शाह गिलानी और मसरत आलम के उल्लेख पर विवाद; आठ शिक्षा अधिकारी निलंबित।
  5. 9 जुलाई 2026उच्च शिक्षा विभाग के परिपत्र से कॉलेजों और सार्वजनिक पुस्तकालयों में किताबों, जर्नलों, थीसिस व डिजिटल संसाधनों का ऑडिट शुरू।
  6. 22 सितंबर 2026विधानसभा में लिखित उत्तर के आंकड़े सामने आए; खबर प्रकाशित।

क्यों अहम है

21.8 लाख से अधिक किताबों की जांच और 4,767 किताबों का प्रचलन से हटना दिखाता है कि साहित्य की जांच अब स्कूलों से आगे बढ़कर उच्च शिक्षा प्रणाली तक पहुंच गई है। इससे अकादमिक स्वतंत्रता, पुस्तकालय स्वायत्तता और राज्य की सुरक्षा चिंताओं के बीच संतुलन का सवाल खड़ा होता है। सरकार इसे संवैधानिक मूल्यों और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को बढ़ावा देने वाला कदम बताती है, जबकि आलोचक इसे इतिहास के चयनात्मक पुनर्लेखन के रूप में देखते हैं।

UPSC नज़रिया

मेन्स दृष्टिकोण

जम्मू-कश्मीर में पुस्तकालय-ऑडिट का मामला राज्य की सुरक्षा-केंद्रित चिंताओं और उच्च शिक्षा की अकादमिक स्वतंत्रता के बीच टकराव को उजागर करता है। कारण श्रृंखला स्पष्ट है: फरवरी 2025 में श्रीनगर में 668 किताबों की जब्ती, अगस्त 2025 में 25 किताबों की ज़ब्ती और एस.ओ. 203, और जुलाई 2026 में स्कूली किताबों में अलगाववादी हस्तियों के उल्लेख पर विवाद—जिसके बाद आठ अधिकारी निलंबित हुए और 9 जुलाई 2026 के परिपत्र से जांच कॉलेजों, जर्नलों, थीसिस और डिजिटल संसाधनों तक फैल गई। परिणाम दोहरे हैं: एक ओर सरकार का दावा है कि "स्पष्ट और वस्तुनिष्ठ मानदंड" अपनाए गए हैं और लक्ष्य संवैधानिक मूल्यों, अकादमिक स्वतंत्रता, समीक्षात्मक चिंतन, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और उत्तरदायी नागरिकता वाला वातावरण बनाना है; दूसरी ओर विधायक खुर्शीद अहमद शेख का आरोप है कि यह इतिहास को विकृत करने और साहित्य को राष्ट्र-विरोधी ठहराने की कोशिश है। आगे का रास्ता पारदर्शी और सार्वजनिक रूप से ज्ञात मानदंड, अकादमिक विशेषज्ञों की स्वतंत्र समीक्षा (जैसा 1,752 किताबों के मामले में निदेशक, कॉलेज को भेजना), हटाई गई पुस्तकों के कारणों का लिखित प्रकटीकरण और प्रभावित पक्षों के लिए अपील व्यवस्था में निहित हो सकता है—ताकि शोध व अध्ययन की गुंजाइश अनावश्यक रूप से संकुचित न हो।

सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।

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