राष्ट्रीय कुनो नेशनल पार्क

कुनो में भारत, बोत्सवाना के नर चीतों का दुर्लभ गठजोड़

मध्य प्रदेश के कुनो राष्ट्रीय उद्यान में दो असंबंधित नर चीतों ने दुर्लभ गठजोड़ बनाया है, अधिकारियों ने बताया। निर्वा से जन्मा केएनजी23 और 28 फरवरी को बोत्सवाना से आया सीसीबी4 साथ शिकार करते हैं, शिकार साझा करते हैं और एक-दूसरे का बचाव करते हैं, उद्यान निदेशक उत्तम कुमार शर्मा ने कहा। छह से सात महीने के अंतर वाले ये दोनों बड़े बाड़े में हैं और अभी जंगल में नहीं छोड़े गए। परियोजना में 52 चीते हैं – कुनो में 49, गांधी सागर में तीन; इनमें 32 भारत में जन्मे।

स्रोत

Indian Express — India · मूल ख़बर पढ़ें ↗

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डेस्क जाँच · स्रोत से तुलना की

डेस्क ने क्या जाँचा (5)
  • Unrelated males KNG23 (born March this year to Nirva) and CCB4 (arrived from Botswana on February 28) have formed a coalition at Kuno. — Attributed to Kuno director Uttam Kumar Sharma and park officials; source text itself gives conflicting ages for KNG23 (born March this year, yet about 16 months old around March) — editor should note the inconsistency.
  • The pair share kills, groom each other and supported each other against a rival coalition. — Attributed to Kuno officials and an unnamed wildlife official.
  • Project cheetah population is 52 – 49 at Kuno and three at Gandhi Sagar, including 32 born in India. — Figures attributed to Kuno officials; arithmetic within source is internally consistent.
  • Seventeen of Kuno's 49 cheetahs live in the wild, the rest in soft-release enclosures. — Figure appears in source, attributed to Kuno officials.
  • The two males are in a large enclosure and have not yet been released into the wild or encountered major predators. — Directly quoted from Sharma.

विश्लेषकों की राय राय

AI राजनीतिक विश्लेषक

प्रोजेक्ट चीता शुरू से ही जितना संरक्षण का कार्यक्रम रहा है, उतना ही प्रतिष्ठा का प्रश्न भी — इसीलिए कुनो में दो असंबंधित नर चीतों की "दुर्लभ जोड़ी" जैसी खबर भी परियोजना की चौथी वर्षगांठ पर एक सकारात्मक संदेश बन जाती है। अधिकारियों के आंकड़े — कुल 52, जिनमें 32 भारत में जन्मे — केंद्र और मध्य प्रदेश सरकार को यह कहने का आधार देते हैं कि परियोजना जीवित रहने के चरण से आगे बढ़कर स्थापित होने के चरण में पहुंच गई है। दूसरी ओर, पार्क निदेशक का यह स्वीकारोक्ति कि ये दोनों नर अभी बड़े बाड़े में हैं और जंगल में नहीं छोड़े गए, आलोचकों को यह कहने की जगह देती है कि प्रचार प्रमाण से आगे चल रहा है।

  • भारत में जन्मे चीतों की बढ़ती संख्या (32) परियोजना के समर्थकों का सबसे मजबूत तर्क है, क्योंकि यह आयातित जानवरों पर घटती निर्भरता दर्शाता है।
  • कुनो में 49 और गांधी सागर में तीन का बंटवारा दूसरे आवास की ओर विस्तार का संकेत है, जिसे केंद्र-राज्य समन्वय की सफलता के रूप में पेश किया जा सकता है।
  • ठीक चार साल के पड़ाव पर व्यवहार से जुड़ी ऐसी उपलब्धि सामने आना परियोजना के प्रशासनिक पक्ष द्वारा सधे हुए कथा-प्रबंधन की ओर इशारा करता है।
  • आधिकारिक रूप से बताया गया तथ्य कि कुनो के 49 में से केवल 17 अभी जंगल में हैं और बाकी सॉफ्ट-रिलीज बाड़ों में हैं, वही आंकड़ा है जिसे संदेह जताने वाले पकड़ सकते हैं।
  • मध्य प्रदेश के लिए इसमें वन्यजीव पर्यटन और क्षेत्रीय प्रतिष्ठा का लाभ है, लेकिन कोई भी प्रतिकूल घटना उतनी ही राजनीतिक कीमत भी वसूलती है।

किस पर नज़र रखें — देखना यह होगा कि इन दोनों नर चीतों को जंगल में छोड़ने का निर्णय कब लिया जाता है, और जंगल में प्रजनन तथा शावकों के जीवित रहने के घोषित अगले लक्ष्य को सरकारी संदेश किस तरह पेश करता है।

खबर में किसी नेता की प्रतिक्रिया, सरकारी बयान या आलोचना दर्ज नहीं है — यह पार्क अधिकारियों के कथन पर आधारित है, इसलिए यहां का राजनीतिक पाठ अनुमान है, रिपोर्ट किया गया तथ्य नहीं।

गहराई से

शोध सारांश · 8 तथ्य · 6 तारीख़ें · परीक्षा के लिए

सार

पृष्ठभूमि

भारत में चीता पुनर्स्थापन परियोजना (Project Cheetah) की शुरुआत के चार वर्ष पूरे होने पर मध्य प्रदेश के कुनो राष्ट्रीय उद्यान में एक असामान्य घटना दर्ज हुई है। यहाँ दो असंबंधित नर चीतों – भारत में जन्मे केएनजी23 और बोत्सवाना से लाए गए सीसीबी4 – ने आपसी "गठजोड़" (coalition) बना लिया है, जो आमतौर पर सहोदर भाइयों के बीच ही बनता है। ये दोनों साथ शिकार करते हैं, शिकार साझा करते हैं, एक-दूसरे को पुकारते हैं और प्रतिद्वंद्वियों के सामने एक-दूसरे का बचाव करते हैं। अधिकारियों के अनुसार परियोजना अब आयातित चीतों के जीवित रहने की अवस्था से आगे बढ़कर भारत में जन्मे चीतों के क्षेत्र (टेरिटरी) स्थापित करने के चरण में पहुँच गई है।

मुख्य तथ्य

  • कुनो में केएनजी23 का जन्म इस वर्ष मार्च में मादा चीता निर्वा से हुआ; सीसीबी4 इस वर्ष 28 फरवरी को बोत्सवाना से कुनो पहुँचा।
  • दोनों नर चीतों में लगभग छह से सात महीने का आयु-अंतर है और वे आपस में असंबंधित हैं – उद्यान निदेशक उत्तम कुमार शर्मा के अनुसार यह "अत्यंत दुर्लभ परिघटना" है।
  • केएनजी23 को 30 मई को उसकी माँ, भाई और बहन के साथ जंगल में छोड़ा गया था; जुलाई के अंत में घायल होने पर उसे वापस बाड़े में लाया गया।
  • दोनों चीते फिलहाल एक बड़े बाड़े में हैं और जंगल में नहीं छोड़े गए हैं; उनका किसी तेंदुए या अन्य बड़े परभक्षी से सामना नहीं हुआ है।
  • परियोजना की कुल आबादी 52 है – कुनो में 49 और गांधी सागर में तीन; इनमें 32 चीते भारत में जन्मे हैं।
  • कुनो के 49 चीतों में से 17 वर्तमान में खुले जंगल में रह रहे हैं, शेष सॉफ्ट-रिलीज़ बाड़ों में हैं।
  • कुनो में एक पाँच नर चीतों का गठजोड़ है – तीन बड़े और दो छोटे नर; ज्वाला के दो नर शावकों तथा आशा के तीन में से दो नर शावकों ने भी गठजोड़ बनाए हैं।
  • शर्मा के अनुसार आगे का मुख्य उद्देश्य जंगल में संगम, जंगल में शावकों का जन्म और उनका जंगल में जीवित रहना है।

समयरेखा

  1. चार वर्ष पूर्व (कहानी के अनुसार ठीक चार साल पहले)भारत में महत्वाकांक्षी चीता परियोजना की शुरुआत; अफ्रीका से पहले चीते लाए गए।
  2. 28 फरवरी (इस वर्ष)सीसीबी4 बोत्सवाना से कुनो पहुँचा – अपनी बहनों के बिना।
  3. मार्च (इस वर्ष)निर्वा से केएनजी23 का जन्म; तथा लगभग इसी समय (~16 माह की आयु पर) चोट के कारण एक चीता माँ व सहोदरों से अलग कर अलगाव में रखा गया।
  4. 30 मईकेएनजी23 को उसकी माँ, भाई और बहन के साथ जंगल में छोड़ा गया; परिवार कई सप्ताह साथ रहा।
  5. जुलाई के अंत तककेएनजी23 फिर घायल हुआ; बहनें अपने आप जंगल में फैल गईं – दोनों नर पुनः पास आए और बीच की बाड़ हटाई गई।
  6. इसके बादपहला संपर्क भोजन पर हुआ – बिना आक्रामकता शिकार साझा; धीरे-धीरे साथ चलना, शिकार, ग्रूमिंग और प्रतिद्वंद्वियों के विरुद्ध सहयोग शुरू।

किसका दाँव

  • कुनो राष्ट्रीय उद्यान प्रशासन (निदेशक उत्तम कुमार शर्मा) — चीतों की निगरानी, सॉफ्ट-रिलीज़ और जंगल में स्थापन सुनिश्चित करना; गठजोड़ के जंगल में टिकने की परीक्षा।
  • चीता परियोजना (भारत) — चार वर्ष बाद सफलता का पैमाना अब आयातित चीतों का जीवित रहना नहीं, बल्कि भारत में जन्मे चीतों का जंगल में प्रजनन और जीवित रहना।
  • केएनजी23 और सीसीबी4 — बड़े होने पर क्षेत्र, भोजन, प्रतिद्वंद्वी नरों और मादाओं तक पहुँच के दबाव में गठजोड़ बनाए रखना।
  • बोत्सवाना (स्रोत देश) — चीतों की आपूर्ति के जरिए अंतर-महाद्वीपीय पुनर्स्थापन सहयोग; सीसीबी4 वहीं से आया।
  • गांधी सागर अभयारण्य (मध्य प्रदेश) — परियोजना का दूसरा स्थल, जहाँ वर्तमान में तीन चीते हैं – आबादी के विस्तार का ठिकाना।
  • वन्यजीव वैज्ञानिक/शोधकर्ता — असंबंधित नरों के गठजोड़ से चीतों के सामाजिक व्यवहार की लचीलता (flexibility) पर नई समझ।

क्यों अहम है

असंबंधित नर चीतों का गठजोड़ दर्शाता है कि चीतों का सामाजिक व्यवहार पूर्वानुमान से अधिक लचीला हो सकता है, और गठजोड़ शिकार तथा प्रतिद्वंद्वियों से सुरक्षा में लाभ देता है – जो नए परिवेश में आबादी के टिकाऊ बनने के लिए महत्वपूर्ण है। कुनो में नर गठजोड़ों का क्षेत्र स्थापित करना और मादाओं का उन क्षेत्रों को पार करना "चीते की स्वाभाविक पारिस्थितिकी" उभरने का संकेत है। परियोजना की असली कसौटी यही है कि संरक्षित बाड़ों के बाहर जंगल में संगम हो, शावक जन्में और जीवित रहें।

UPSC नज़रिया

प्रीलिम्स संकेत

  • कुनो राष्ट्रीय उद्यान – मध्य प्रदेश; चीता परियोजना का प्रमुख स्थल। गांधी सागर भी परियोजना स्थल, जहाँ तीन चीते।
  • परियोजना की कुल चीता आबादी 52 – कुनो 49 + गांधी सागर 3; इनमें 32 भारत में जन्मे।
  • कुनो के 49 चीतों में 17 खुले जंगल में, शेष सॉफ्ट-रिलीज़ बाड़ों में।
  • केएनजी23 – मादा निर्वा से इस वर्ष मार्च में जन्मा; सीसीबी4 – 28 फरवरी को बोत्सवाना से लाया गया।
  • नर चीतों का "कोअलिशन" सामान्यतः सहोदरों में बनता है; कुनो में पाँच नरों का गठजोड़ भी मौजूद।
  • परियोजना का चरणबद्ध क्रम: पहला वर्ष – परिचय व जीवितता, दूसरा – प्रजनन व शावक जीवितता, तीसरा – जंगल में रिलीज़, चौथा – क्षेत्र स्थापन।

मेन्स दृष्टिकोण

भारत की चीता पुनर्स्थापन परियोजना चार वर्षों में चरणबद्ध ढंग से आगे बढ़ी है – पहले वर्ष आयातित चीतों का परिचय व जीवित रहना, दूसरे वर्ष प्रजनन और शावक-जीवितता, तीसरे वर्ष शावकों सहित जंगल में रिलीज़, और चौथे वर्ष क्षेत्र (टेरिटरी) स्थापना। कुनो में केएनजी23 (भारत में जन्मा) और सीसीबी4 (बोत्सवाना से आया) का गठजोड़ इस संक्रमण का प्रतीक है: यह अनियोजित परिस्थितियों – चोट, अलगाव और बाड़ हटाने – से उभरा और साझा शिकार से लेकर पारस्परिक ग्रूमिंग तथा प्रतिद्वंद्वी गठजोड़ के विरुद्ध सहयोग तक विकसित हुआ। निदेशक शर्मा के अनुसार परिपक्व होने पर असंबंधित नरों का साथ रहना कठिन हो जाता है, इसलिए असली परीक्षा बाड़े में नहीं बल्कि जंगल में – प्रतिद्वंद्वी नरों, क्षेत्र, भोजन और मादाओं तक पहुँच के दबाव में – होगी; दोनों का अभी तेंदुए या अन्य बड़े परभक्षी से सामना नहीं हुआ है। आगे की राह में चीतों की आवाजाही को अनावश्यक रूप से सीमित न करना, नर गठजोड़ों व मादाओं के आपस में कटते क्षेत्रों के जरिए स्वाभाविक पारिस्थितिकी को उभरने देना, और गांधी सागर जैसे अतिरिक्त स्थलों का उपयोग शामिल है। सफलता का अंतिम मानदंड संख्या (52, जिनमें 32 भारत में जन्मे) नहीं, बल्कि जंगल में संगम, जंगल में जन्म और जंगल में शावकों का जीवित रहना है।

मुख्य शब्द

कोअलिशन (गठजोड़)
नर चीतों का स्थायी समूह, जो आमतौर पर सहोदर भाइयों में बनता है और शिकार व प्रतिद्वंद्वियों से सुरक्षा में मदद करता है।
चीता परियोजना
अफ्रीका से चीते लाकर भारत में उनकी आबादी स्थापित करने की महत्वाकांक्षी पहल, जिसके चार वर्ष पूरे हुए।
सॉफ्ट-रिलीज़ बाड़ा
बड़ा घेरा जहाँ चीतों को खुले जंगल में छोड़ने से पहले अनुकूलन और निगरानी के लिए रखा जाता है।
टेरिटरी (क्षेत्र) स्थापना
चीतों द्वारा कुनो के विशिष्ट हिस्सों पर कब्जा कर उनमें विचरण करना – आबादी के बसने का सकारात्मक संकेत।
केएनजी23 / सीसीबी4
क्रमशः निर्वा से मार्च में जन्मा कुनो का नर चीता और 28 फरवरी को बोत्सवाना से आया नर चीता।
गांधी सागर
मध्य प्रदेश का दूसरा परियोजना स्थल, जहाँ वर्तमान में तीन चीते रखे गए हैं।

अभ्यास प्रश्न

  1. कुनो में असंबंधित नर चीतों के गठजोड़ का वन्यजीव पुनर्स्थापन की दृष्टि से क्या महत्व है? चीतों के सामाजिक व्यवहार की लचीलता के संदर्भ में चर्चा करें।
  2. भारत की चीता परियोजना के चार वर्षों की प्रगति का चरणबद्ध मूल्यांकन कीजिए। जंगल में प्रजनन और शावकों की जीवितता को सफलता का अंतिम मानदंड क्यों माना जा रहा है?
  3. सॉफ्ट-रिलीज़ बाड़ों से खुले जंगल में चीतों के संक्रमण में कौन-सी चुनौतियाँ आती हैं? कुनो के अनुभव के आधार पर उत्तर दीजिए।

सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।

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