सुप्रीम कोर्ट ने नई पीढ़ी के ग्रीन पटाखों की बिक्री, निर्माण की अनुमति दी
त्योहारी मौसम से पहले सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को केंद्र की सिफारिश पर नई पीढ़ी के जुड़े ग्रीन पटाखों, यानी 'लड़ी', के निर्माण और बिक्री की अनुमति दे दी, जिन पर कोर्ट ने पहले प्रतिबंध लगाया था। एएसजी ऐश्वर्या भाटी ने सीएसआईआर-नीरी रिपोर्ट के हवाले से कहा कि पारंपरिक लड़ी में एक सेकंड में 25 लड़ियां फूटती हैं, जबकि नई में केवल पांच। बेरियम पर क्षेत्रीय परीक्षण जारी हैं, 15 अक्टूबर तक समय मांगा गया। जस्टिस एम एम सुंदरेश और प्रसन्ना बी वराले की पीठ ने कहा, दिल्ली के लिए अलग आदेश आएगा; पूर्ण प्रतिबंध नहीं, चौबीसों घंटे छूट भी नहीं।
स्रोत
Times of India — India · मूल ख़बर पढ़ें ↗
डेस्क जाँच · स्रोत से तुलना की
डेस्क ने क्या जाँचा (5)
- Supreme Court allowed manufacture and sale of next-generation joined green firecrackers ('ladi'), earlier banned by the court. — Attributed in source to a bench of Justices M M Sundresh and Prasanna B Varale; internally consistent.
- CSIR-NEERI report says 25 braids burst per second in conventional joined firecrackers versus five in next-generation ones. — Figures appear in source, submitted by ASG Aishwarya Bhati citing CSIR-NEERI.
- Barium use remains undecided, with field trials on and time sought till October 15. — Attributed to the ASG's submission; no independent confirmation in source.
- CSIR-NEERI said pollution levels of such crackers fell 40-60%, while CPCB said they contain SC-banned barium nitrate. — Source presents both positions as contradictory institutional stands; both attributed.
- Court will pass a separate order for Delhi and will neither impose a total ban nor allow bursting 24 hours. — Direct quote from the bench reproduced in source.
विश्लेषकों की राय राय
त्योहारी सीज़न से ठीक पहले आया यह आदेश राजनीतिक रूप से बीच का रास्ता है — न पूर्ण प्रतिबंध, न पूरी छूट। चूंकि अनुमति केंद्र की ही सिफ़ारिश पर मिली है, इससे उन पक्षों को राहत है जो पटाखा पाबंदी को भावना का मुद्दा बनाते हैं, जबकि समय और मानकों की शर्तें प्रदूषण की चिंता को भी जगह देती हैं। दिल्ली के लिए अलग आदेश का संकेत बताता है कि राजधानी की सर्दियों की हवा फिर राजनीतिक मुद्दा बनने वाली है।
- पूर्ण प्रतिबंध का "भावनात्मक असर" और 24 घंटे आतिशबाज़ी से बुज़ुर्गों, बीमारों और बच्चों पर असर — दोनों बातें कहकर पीठ ने दोनों राजनीतिक खेमों के तर्कों को एक साथ मान्यता दी।
- छूट केंद्र की सिफ़ारिश से आई है, इसलिए त्योहारी पाबंदियों की आलोचना का भार सरकार से हटकर तकनीकी मानकों और अनुपालन पर चला जाता है।
- सीएसआईआर-नीरी और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पहले के विरोधाभासी रुख सरकारी संस्थाओं के बीच तालमेल की कमी दिखाते हैं — विरोधियों के लिए सवाल उठाने का मौका।
- बेरियम पर फ़ैसला अटका है और 15 अक्टूबर तक समय मांगा गया है, यानी नीतिगत स्पष्टता त्योहार के कैलेंडर से होड़ कर रही है।
- निर्माताओं और इस कारोबार से जुड़ी रोज़ी-रोटी को सबसे ज़्यादा राहत; पाबंदी चाहने वाले याचिकाकर्ताओं को आधी जीत।
किस पर नज़र रखें — दिल्ली-एनसीआर के अलग आदेश में तय होने वाला समय और मंज़ूर पटाखों की सूची, तथा बेरियम के फ़ील्ड ट्रायल के नतीजे कब आते हैं, इस पर नज़र रखें।
यह खबर किसी दल की प्रतिक्रिया, दिल्ली के लिए तय होने वाली निश्चित समय-सीमा, या बेरियम पर अंतिम निर्णय स्थापित नहीं करती।
गहराई से
शोध सारांश · 8 तथ्य · 4 तारीख़ें · परीक्षा के लिएसार
पृष्ठभूमि
त्योहारी मौसम से पहले सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की सिफारिश पर नई पीढ़ी के 'जुड़े' ग्रीन पटाखों (आम भाषा में 'लड़ी') के निर्माण और बिक्री का रास्ता खोल दिया है, जिन पर अदालत ने पहले प्रतिबंध लगाया था। यह मामला दिल्ली-एनसीआर में हर सर्दी लौटने वाले वायु प्रदूषण संकट और पटाखों पर रोक की मांग वाली याचिका से जुड़ा है। सरकार की ओर से सीएसआईआर-नीरी द्वारा तय मानकों के अनुपालन की शर्त पर अनुमति की सिफारिश की गई, जबकि बेरियम रसायन के उपयोग का मुद्दा अभी तय नहीं हुआ है। इससे पहले दो सरकारी संस्थाओं — सीएसआईआर-नीरी और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड — ने अदालत में परस्पर विरोधी रुख रखे थे।
मुख्य तथ्य
- सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को केंद्र की सिफारिश के बाद नई पीढ़ी के जुड़े ग्रीन पटाखों ('लड़ी') के निर्माण और बिक्री का रास्ता साफ किया, जिन पर पहले कोर्ट ने प्रतिबंध लगाया था।
- सीएसआईआर-नीरी रिपोर्ट के अनुसार पारंपरिक जुड़े पटाखों में एक सेकंड में 25 लड़ियां (braids) फूटती हैं, जबकि नई पीढ़ी के पटाखों में केवल पांच।
- अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने जस्टिस एम एम सुंदरेश और प्रसन्ना बी वराले की पीठ को बताया कि बेरियम रसायन पर क्षेत्रीय परीक्षण (फील्ड ट्रायल) जारी हैं और 15 अक्टूबर तक समय मांगा।
- सरकार ने कहा कि निर्माताओं को सक्षम प्राधिकारी द्वारा परीक्षित और अनुमोदित विशिष्टियों/फॉर्मूलेशन तथा कानून में तय शोर सीमा, उत्सर्जन व सुरक्षा शर्तों का पालन करना होगा।
- पीठ ने कहा कि दिल्ली के लिए अलग आदेश पारित किया जाएगा; न पूर्ण प्रतिबंध पर सहमति होगी, न चौबीसों घंटे पटाखे फोड़ने की अनुमति।
- कोर्ट ने कहा कि पूर्ण प्रतिबंध का 'भावनात्मक प्रभाव' होगा, पर दिन भर पटाखे फोड़ने से बुजुर्गों, बीमारों और बच्चों समेत हर जीव पर 'भारी असर' पड़ेगा।
- सीएसआईआर-नीरी ने कहा था कि इन पटाखों का प्रदूषण स्तर 40-60% घटा है और फुलझड़ी, अनार, चक्कर, पेंसिल, लड़ी व ट्विंकलिंग स्टार के व्यावसायिक उत्पादन की सिफारिश की।
- केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का रुख था कि इनमें बेरियम नाइट्रेट होता है, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने प्रतिबंधित किया है।
समयरेखा
- पहले (तारीख स्रोत में नहीं)सुप्रीम कोर्ट ने जुड़े पटाखों ('लड़ी') पर प्रतिबंध लगाया था।
- इससे पहले (तारीख स्रोत में नहीं)सीएसआईआर-नीरी ने नई पीढ़ी के ग्रीन पटाखों को मंजूरी दी (प्रदूषण 40-60% कम), जबकि सीपीसीबी ने बेरियम नाइट्रेट की मौजूदगी बताते हुए विरोधी रुख लिया।
- बुधवार (त्योहारी मौसम से पहले)सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र की सिफारिश पर नई पीढ़ी के जुड़े ग्रीन पटाखों के निर्माण व बिक्री का रास्ता खोला; दिल्ली के लिए अलग आदेश की बात कही।
- 15 अक्टूबर तकबेरियम के उपयोग पर फील्ड ट्रायल पूरे करने के लिए सरकार ने अदालत से समय मांगा।
किसका दाँव
- सुप्रीम कोर्ट (जस्टिस एम एम सुंदरेश व प्रसन्ना बी वराले की पीठ) — पर्यावरण व स्वास्थ्य की रक्षा और त्योहार से जुड़ी भावनाओं के बीच संतुलन बनाते हुए समय व पटाखों के प्रकार तय करना।
- केंद्र सरकार (एएसजी ऐश्वर्या भाटी) — नीरी मानकों के अनुपालन की शर्त पर जुड़े पटाखों की अनुमति की सिफारिश; बेरियम पर परीक्षण पूरे करना।
- सीएसआईआर-नीरी — तकनीकी प्रमाणन देने वाली संस्था — प्रदूषण 40-60% कमी के आधार पर व्यावसायिक उत्पादन की सिफारिश।
- केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) — बेरियम नाइट्रेट की मौजूदगी पर आपत्ति — प्रतिबंध के प्रवर्तन की जिम्मेदारी।
- पटाखा निर्माता (अधिवक्ता प्रणव सचदेवा द्वारा प्रतिनिधित्व) — उत्पादन व बिक्री की अनुमति; अनुमोदित फॉर्मूलेशन, शोर, उत्सर्जन व सुरक्षा शर्तों का पालन।
- दिल्ली-एनसीआर के निवासी, विशेषकर बुजुर्ग, बीमार व बच्चे — सर्दियों में वायु प्रदूषण और शोर से स्वास्थ्य पर असर।
- याचिकाकर्ता (एनसीआर में पटाखों की बिक्री पर रोक चाहने वाले) — पूर्ण प्रतिबंध की मांग, जिसे कोर्ट ने स्वीकार करने से इनकार किया।
क्यों अहम है
यह आदेश दिल्ली-एनसीआर के वार्षिक सर्दी प्रदूषण संकट और त्योहारों से जुड़ी सामाजिक-आर्थिक वास्तविकता के बीच एक मध्यमार्ग तलाशने की कोशिश है — न पूर्ण प्रतिबंध, न असीमित छूट। इसमें नियमन का आधार वैज्ञानिक प्रमाणन (सीएसआईआर-नीरी) है, लेकिन सीपीसीबी की आपत्ति और बेरियम पर अनिर्णय दिखाते हैं कि सरकारी संस्थाओं के भीतर ही तकनीकी सहमति अधूरी है। अदालत द्वारा दिल्ली के लिए अलग आदेश का संकेत बताता है कि प्रदूषण नियमन क्षेत्र-विशेष होता जा रहा है।
UPSC नज़रिया
प्रीलिम्स संकेत
- सीएसआईआर-नीरी: राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान — ग्रीन पटाखों के मानक/फॉर्मूलेशन तय करने वाली संस्था।
- नीरी के अनुसार नई पीढ़ी के ग्रीन पटाखों में प्रदूषण स्तर 40-60% कम; सिफारिश में फुलझड़ी, अनार, चक्कर, पेंसिल, लड़ी, ट्विंकलिंग स्टार शामिल।
- पारंपरिक 'लड़ी' में 1 सेकंड में 25 लड़ियां फूटती हैं; नई पीढ़ी में केवल 5।
- बेरियम नाइट्रेट सुप्रीम कोर्ट द्वारा प्रतिबंधित; इस पर फील्ड ट्रायल के लिए 15 अक्टूबर तक समय मांगा गया।
- पीठ: जस्टिस एम एम सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्ना बी वराले; केंद्र का पक्ष एएसजी ऐश्वर्या भाटी ने रखा।
- कोर्ट का रुख: न पूर्ण प्रतिबंध, न 24 घंटे अनुमति; दिल्ली के लिए अलग आदेश।
मेन्स दृष्टिकोण
दिल्ली-एनसीआर में सर्दियों का वायु प्रदूषण एक वार्षिक संकट बन चुका है, जिसमें पटाखे एक योगदान कारक हैं; इसी संदर्भ में सुप्रीम कोर्ट ने पहले जुड़े पटाखों ('लड़ी') पर रोक लगाई थी। अब केंद्र की सिफारिश और सीएसआईआर-नीरी के निष्कर्षों — प्रदूषण में 40-60% कमी तथा पारंपरिक लड़ी में प्रति सेकंड 25 के मुकाबले नई पीढ़ी में 5 लड़ियों का फूटना — के आधार पर अदालत ने निर्माण व बिक्री का रास्ता खोला है, बशर्ते निर्माता सक्षम प्राधिकारी से अनुमोदित फॉर्मूलेशन तथा विधिक शोर, उत्सर्जन व सुरक्षा शर्तों का पालन करें। मुख्य तनाव दो स्तरों पर है: पहला, संस्थागत — नीरी की मंजूरी बनाम सीपीसीबी की आपत्ति कि इनमें प्रतिबंधित बेरियम नाइट्रेट है, और बेरियम पर फील्ड ट्रायल अभी अपूर्ण (15 अक्टूबर तक समय मांगा गया); दूसरा, अधिकारों का संतुलन — अदालत के अनुसार पूर्ण प्रतिबंध का 'भावनात्मक प्रभाव' होगा, पर चौबीसों घंटे आतिशबाजी बुजुर्गों, बीमारों व बच्चों समेत सभी जीवों पर भारी असर डालेगी। आगे का रास्ता अदालत ने स्वयं संकेतित किया है — निर्धारित समय-खिड़की और अनुमत पटाखों की स्पष्ट सूची, दिल्ली के लिए अलग आदेश, तथा वैज्ञानिक परीक्षण व प्रभावी प्रवर्तन पर आधारित नियमन, ताकि आजीविका, परंपरा और स्वच्छ वायु के अधिकार में संतुलन बने।
मुख्य शब्द
- ग्रीन पटाखे
- कम उत्सर्जन व शोर वाले पटाखे, जिनके फॉर्मूलेशन सक्षम प्राधिकारी/नीरी द्वारा परीक्षित और अनुमोदित होते हैं।
- लड़ी (जुड़े पटाखे)
- एक साथ जुड़ी शृंखला में फूटने वाले पटाखे; नई पीढ़ी में प्रति सेकंड 5 लड़ियां फूटती हैं, पारंपरिक में 25।
- सीएसआईआर-नीरी
- वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद का राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान, जिसने इन पटाखों के मानक तय किए।
- केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी)
- प्रदूषण नियंत्रण की शीर्ष नियामक संस्था, जिसने कहा कि इन पटाखों में प्रतिबंधित बेरियम नाइट्रेट है।
- बेरियम नाइट्रेट
- पटाखों में रंग/चमक के लिए प्रयुक्त रसायन, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने प्रतिबंधित किया; इस पर फील्ड ट्रायल जारी हैं।
- अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी)
- सर्वोच्च न्यायालय में केंद्र सरकार का पक्ष रखने वाला विधि अधिकारी; इस मामले में ऐश्वर्या भाटी।
अभ्यास प्रश्न
- दिल्ली-एनसीआर के वायु प्रदूषण नियंत्रण में 'पूर्ण प्रतिबंध' के बजाय 'नियंत्रित अनुमति' का दृष्टिकोण कितना प्रभावी हो सकता है? सुप्रीम कोर्ट के हाल के रुख के आलोक में परीक्षण करें।
- जब दो सरकारी वैज्ञानिक/नियामक संस्थाएं (सीएसआईआर-नीरी और सीपीसीबी) एक ही मुद्दे पर विरोधाभासी रुख रखती हैं, तो नीति-निर्माण और न्यायिक निर्णय पर इसका क्या प्रभाव पड़ता है?
- ग्रीन पटाखों के मानकों का प्रवर्तन (फॉर्मूलेशन, शोर सीमा, उत्सर्जन व सुरक्षा शर्तें) व्यवहार में क्यों कठिन है और इसे सुदृढ़ करने के उपाय सुझाइए।
सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।