एसआईआर में 7.8 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाने का कांग्रेस का आरोप
कांग्रेस ने चुनाव आयोग की जारी विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटाए जाने का आरोप लगाया है। महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि पहले दो चरणों में 7.8 करोड़ नाम, यानी एसआईआर से पहले की सूची के 13 प्रतिशत, हटाए गए। मौजूदा चरण में 36.06 करोड़ मतदाताओं में से 6.18 करोड़ नाम हटाए गए और 5.43 करोड़ को दस्तावेज मांगते नोटिस दिए गए। रमेश ने एसआईआर को संविधान पर हमला कहा।
स्रोत
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डेस्क जाँच · कुछ दावे ध्यान से पढ़ें
डेस्क ने क्या जाँचा (5)
- 7.8 crore voter names were deleted in Phases 1 and 2 of SIR, 13% of the pre-SIR roll — Attributed to Congress leader Jairam Ramesh; figure appears in source, no ECI confirmation given
- 6.18 crore of 36.06 crore voters covered in the ongoing phase deleted, a rate over 17% — Attributed to Ramesh citing data from 12 states and two UTs; source of the underlying data not specified
- 5.43 crore voters issued notices seeking additional documents, taking total deleted or at risk to 32% — Ramesh's calculation as quoted in source; arithmetic not independently checked
- More than 3.16 million Delhi voters, including CM Rekha Gupta and Arvind Kejriwal, served notices over discrepancies — Attributed to unnamed officials involved in the exercise; Delhi CEO category-wise numbers cited in source
- Phase 3 of SIR began in 16 states and three UTs in mid-2026 — Attributed to Ramesh; date references in the source are inconsistent with a present-day timeline and need editor review
विश्लेषकों की राय राय
कांग्रेस एसआईआर को तकनीकी चुनावी प्रक्रिया के दायरे से निकालकर संवैधानिक अधिकारों की बहस में बदल रही है — यह फ्रेमिंग राष्ट्रीय स्तर पर चलने के लिए बनाई गई है। केवल चुनाव आयोग पर निशाना साधने के बजाय "शाह इंस्टिगेटेड रिमूवल" जैसे जुमले से पार्टी जिम्मेदारी गृह मंत्रालय की ओर मोड़ती है, जिससे संस्थागत विवाद सरकार-बनाम-मतदाता की लड़ाई बन जाता है। महिलाओं और आर्थिक-सामाजिक रूप से वंचित वर्गों पर ज्यादा असर पड़ने का दावा साफ तौर पर विशेष सामाजिक वोट समूहों को जोड़ने की कोशिश है। लेकिन दिए गए आंकड़े पार्टी के दावे हैं, इस खबर में चुनाव आयोग द्वारा पुष्ट नहीं।
- दिल्ली, तेलंगाना, झारखंड और महाराष्ट्र के राज्यवार प्रतिशत आगे रखकर कांग्रेस इस मुद्दे को राज्यों की राजनीति में भी उतारना चाहती है।
- खबर के अनुसार दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और आप प्रमुख अरविंद केजरीवाल को भी नोटिस मिले — विपक्ष के लिए यह प्रक्रिया की खामियां दिखाने का तैयार हथियार है।
- किन राज्यों ने जोखिम वाले मतदाताओं की सूची सार्वजनिक की और किन्होंने नहीं, इसे उठाकर पारदर्शिता को भाजपा शासित राज्यों पर दबाव का बिंदु बनाया गया है।
- भाजपा शासित राज्यों के साथ पंजाब का नाम लेना कांग्रेस को निष्पक्षता का दावा देता है, पर इससे आप के साथ विपक्षी तालमेल के सवाल भी उठते हैं।
- अनियमितताएं साबित हुईं तो सरकार और आयोग बचाव की मुद्रा में आएंगे; प्रक्रिया टिकी तो विपक्ष पर भय फैलाने का आरोप मजबूत होगा।
किस पर नज़र रखें — 22 सितंबर को दिल्ली एसआईआर पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और बंगाल में लंबित अपीलों पर आयोग का रुख — यही तय करेगा कि मामला अदालती लड़ाई बनेगा या चुनावी नारा भर रहेगा।
यह खबर केवल कांग्रेस के आरोप दर्ज करती है; हटाए गए नामों के आंकड़ों की सत्यता, कारण, प्रभावित वर्ग और चुनाव आयोग का पक्ष इसमें स्थापित नहीं है।
गहराई से
शोध सारांश · 8 तथ्य · 8 तारीख़ें · परीक्षा के लिएसार
पृष्ठभूमि
चुनाव आयोग (ECI) देशभर में मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) करा रहा है, जिसका पहला चरण जून 2025 में बिहार में शुरू हुआ था। इसके बाद नवंबर 2025 में नौ राज्यों और तीन केंद्रशासित प्रदेशों में दूसरा चरण तथा 2026 के मध्य में 16 राज्यों व तीन केंद्रशासित प्रदेशों में तीसरा चरण शुरू हुआ। कांग्रेस का आरोप है कि इस प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर नाम हटाए जा रहे हैं और नागरिकों पर दस्तावेज जुटाने का बोझ डाला जा रहा है। पार्टी महासचिव (संचार) जयराम रमेश ने इसे संविधान पर हमला और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की ओर इशारा करते हुए "शाह इंस्टिगेटेड रिमूवल" कहा है।
मुख्य तथ्य
- जयराम रमेश के अनुसार एसआईआर के पहले और दूसरे चरण में 7.8 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए गए, जो एसआईआर से पहले की सूची का 13 प्रतिशत है।
- मौजूदा (तीसरे) चरण में 12 राज्यों व दो केंद्रशासित प्रदेशों के आंकड़ों के अनुसार 36.06 करोड़ मतदाताओं में से 6.18 करोड़ नाम हटाए गए—हटाने की दर 17 प्रतिशत से अधिक।
- अतिरिक्त 5.43 करोड़ मतदाताओं को नाम बनाए रखने के लिए दस्तावेज मांगते नोटिस जारी हुए; यह करीब 15 प्रतिशत का अतिरिक्त जोखिम।
- रमेश के अनुसार कुल 32 प्रतिशत यानी लगभग हर तीन में से एक मतदाता का नाम हटाया गया या हटने के जोखिम में है।
- राज्यवार आंकड़े: दिल्ली 53.73%, चंडीगढ़ 52.58%, तेलंगाना 48.90%, झारखंड 39.57%, हरियाणा 37.5%, उत्तराखंड 35.71%, मेघालय 35.36%, महाराष्ट्र 33.88%, कर्नाटक 27.6%, ओडिशा 23.67%, आंध्र प्रदेश 21.17%, पंजाब 15.23%।
- दिल्ली में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और आम आदमी पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवाल सहित 31.6 लाख से अधिक मतदाताओं को "विसंगतियों" पर नोटिस दिए गए।
- दिल्ली की मसौदा सूची के 97,53,577 मतदाताओं में से 13,79,785 "नो मैपिंग" और 19,33,134 "लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी" श्रेणी में रखे गए।
- रमेश का दावा: कर्नाटक, तेलंगाना और झारखंड ने जोखिम वाली सूची सार्वजनिक की; दिल्ली ने 19 सितंबर 2026 को जन दबाव के बाद, अन्य भाजपा शासित राज्यों व पंजाब ने अब तक नहीं।
समयरेखा
- जून 2025बिहार में एसआईआर का पहला चरण शुरू।
- नवंबर 2025नौ राज्यों और तीन केंद्रशासित प्रदेशों में एसआईआर का दूसरा चरण।
- 2026 के मध्य16 राज्यों और तीन केंद्रशासित प्रदेशों में तीसरा चरण शुरू।
- 31 अगस्त (2026)दिल्ली में एसआईआर के बाद मसौदा मतदाता सूची जारी।
- 19 सितंबर 2026दिल्ली ने हटने के जोखिम वाले मतदाताओं की सूची सार्वजनिक की (जन दबाव के बाद)।
- शुक्रवार देर रातदिल्ली मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने नोटिस पाए मतदाताओं की सूची प्रकाशित की।
- 22 सितंबरदिल्ली एसआईआर के खिलाफ याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई निर्धारित।
- रविवारकांग्रेस ने 7.8 करोड़ नाम हटाए जाने का आरोप लगाते हुए बयान जारी किया।
किसका दाँव
- भारत निर्वाचन आयोग (ECI) — एसआईआर का संचालन कर रहा है; प्रक्रिया की पारदर्शिता, विश्वसनीयता और कानूनी टिकाऊपन पर सवाल। बंगाल में 37 लाख अपील लंबित, 42 चुनाव न्यायाधिकरणों का प्रस्ताव।
- कांग्रेस / जयराम रमेश — आरोप लगा रही है कि एसआईआर "बहिष्करण की मशीन" और संविधान पर हमला है; राजनीतिक व कानूनी विमर्श का नेतृत्व।
- नोटिस पाए मतदाता — 5.43 करोड़ मतदाताओं को नाम बनाए रखने के लिए दस्तावेज देने होंगे; अंतिम सूची से बाहर होने का जोखिम।
- आर्थिक-सामाजिक रूप से वंचित वर्ग और महिलाएं — रमेश के अनुसार इन वर्गों पर असमान असर; ज्यादातर बड़े राज्यों में पुरुषों से अधिक महिलाओं के नाम हटे।
- दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता व आप प्रमुख अरविंद केजरीवाल — 31.6 लाख से अधिक नोटिस पाने वालों में शामिल; प्रक्रिया की व्यापकता के प्रतीक बने।
- सुप्रीम कोर्ट — दिल्ली एसआईआर के खिलाफ याचिका पर 22 सितंबर को सुनवाई; न्यायिक समीक्षा का दायरा तय करेगा।
क्यों अहम है
मतदाता सूची लोकतंत्र का प्रवेश-द्वार है; नाम हटने का सीधा अर्थ मताधिकार से वंचित होना है। कांग्रेस के आंकड़ों के मुताबिक हर तीन में से एक मतदाता हटाया गया है या जोखिम में है, और दस्तावेजी साबिती का बोझ राज्य से हटकर नागरिक पर आ गया है—जिससे वंचित वर्गों और महिलाओं के बहिष्करण की आशंका बढ़ती है। यह विवाद अब अदालत, आयोग और राजनीतिक दलों के बीच चुनावी विश्वसनीयता की बड़ी बहस बन गया है।
UPSC नज़रिया
प्रीलिम्स संकेत
- एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) भारत निर्वाचन आयोग द्वारा संचालित; चरण 1 जून 2025 में बिहार से शुरू।
- चरण 2: नवंबर 2025, नौ राज्य व तीन केंद्रशासित प्रदेश; चरण 3: 2026 के मध्य, 16 राज्य व तीन केंद्रशासित प्रदेश।
- कांग्रेस का दावा: चरण 1 व 2 में 7.8 करोड़ नाम हटे = एसआईआर-पूर्व सूची का 13%।
- मौजूदा चरण: 36.06 करोड़ में 6.18 करोड़ हटे (17%+), 5.43 करोड़ को नोटिस (~15%), कुल जोखिम 32%।
- दिल्ली में नोटिस की दो श्रेणियां: "नो मैपिंग" (2002 की सूची से न जुड़ पाना) और "लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी"।
- पश्चिम बंगाल में 37 लाख एसआईआर अपील लंबित; ECI ने 42 चुनाव न्यायाधिकरण प्रस्तावित किए।
मेन्स दृष्टिकोण
एसआईआर विवाद मतदाता सूची की शुद्धता और मताधिकार की सार्वभौमिकता के बीच तनाव को उजागर करता है। कांग्रेस के आंकड़ों के अनुसार पहले दो चरणों में 7.8 करोड़ (13%) नाम हटे और मौजूदा चरण में 36.06 करोड़ में से 6.18 करोड़ हटाए गए तथा 5.43 करोड़ को दस्तावेज मांगते नोटिस मिले—कुल 32% मतदाता प्रभावित या जोखिम में। दिल्ली (53.73%) और चंडीगढ़ (52.58%) जैसे उच्च आंकड़े, 2002 की सूची से "मैपिंग" पर निर्भरता, और जयराम रमेश का यह तर्क कि राज्य ने अपनी जिम्मेदारी छोड़कर नागरिकों पर वे दस्तावेज जुटाने का बोझ डाल दिया जो उसने कभी दिए ही नहीं—प्रक्रियात्मक खामियों की ओर इशारा करते हैं; रमेश इसे "बहिष्करण की मशीन" और संविधान पर हमला कहते हैं। वंचित वर्गों तथा महिलाओं पर असमान असर का दावा समानता और समावेशी प्रतिनिधित्व के सवाल खड़ा करता है। आगे का रास्ता: जोखिम वाली सूचियों का सार्वभौमिक व समयबद्ध सार्वजनिक प्रकाशन (जैसा कर्नाटक, तेलंगाना, झारखंड ने किया), शिकायत-निवारण की सुगम व्यवस्था—बंगाल में 37 लाख लंबित अपीलों और 42 प्रस्तावित चुनाव न्यायाधिकरणों से क्षमता की कमी स्पष्ट—और सुप्रीम कोर्ट की 22 सितंबर की सुनवाई से मिलने वाली न्यायिक स्पष्टता। स्रोत में आयोग का पक्ष उल्लिखित नहीं है।
मुख्य शब्द
- एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण)
- चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूचियों का गहन पुनरीक्षण, जिसमें मतदाताओं का सत्यापन व नाम हटाने-जोड़ने की प्रक्रिया शामिल है।
- नो मैपिंग
- दिल्ली में वे मतदाता जिन्हें 2002 के पिछले पुनरीक्षण की मतदाता सूची से जोड़ा नहीं जा सका—13,79,785 मतदाता।
- लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी
- वे प्रविष्टियां जिनमें पिछली सूची के मुकाबले विसंगतियां पाई गईं—दिल्ली में 19,33,134 मतदाता।
- मसौदा मतदाता सूची
- एसआईआर के बाद प्रकाशित प्रारंभिक सूची; दिल्ली में 31 अगस्त को जारी, जिसमें 97,53,577 मतदाता शामिल थे।
- "शाह इंस्टिगेटेड रिमूवल"
- जयराम रमेश द्वारा गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधते हुए एसआईआर के लिए गढ़ा गया व्यंग्यात्मक विस्तार।
- चुनाव न्यायाधिकरण
- एसआईआर अपीलों के निपटारे के लिए ECI द्वारा प्रस्तावित तंत्र; बंगाल की 37 लाख लंबित अपीलों के लिए 42 न्यायाधिकरण प्रस्तावित।
अभ्यास प्रश्न
- विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर उठे विवाद के प्रमुख बिंदुओं की चर्चा करें। मतदाता सूची की शुद्धता और मताधिकार की समावेशिता के बीच संतुलन कैसे साधा जा सकता है?
- "दस्तावेजी साबिती का बोझ राज्य से नागरिक पर स्थानांतरित करना समावेशी लोकतंत्र के लिए चुनौती है।" एसआईआर के आंकड़ों के आलोक में परीक्षण करें।
- मतदाता सूची पुनरीक्षण में शिकायत-निवारण तंत्र की भूमिका क्या है? पश्चिम बंगाल में लंबित अपीलों और प्रस्तावित चुनाव न्यायाधिकरणों के संदर्भ में मूल्यांकन करें।
सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।
