केरल फिल्म महोत्सव: 31 फिल्मों को केंद्र की मंजूरी का इंतजार
तिरुवनंतपुरम में 25 सितंबर से शुरू हो रहे अंतरराष्ट्रीय वृत्तचित्र एवं लघु फिल्म महोत्सव (आईडीएसएफएफके) में दिखाई जाने वाली 31 फिल्मों को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से मंजूरी अब तक नहीं मिली है। महोत्सव के इंस्टाग्राम खाते ने कहा कि अनुमति नकार दी गई। मंत्रालय ने एक्स पर कहा कि किसी फिल्म को मना नहीं किया गया, छह से विस्तृत सारांश मांगा गया और कुछ क्षेत्रीय अधिकारियों को भेजी गईं। अधिकारी के अनुसार फिल्में गृह, रक्षा और विदेश मंत्रालयों को भी भेजी गईं। महोत्सव 30 सितंबर तक चलेगा।
स्रोत
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डेस्क ने क्या जाँचा (5)
- 31 films set for screening at IDSFFK are yet to receive I&B ministry clearance three days before the September 25 start. — Figure appears in source; attributed to reporting and to an Academy official.
- The festival's Instagram account said the ministry denied permission to the 31 films. — Attributed to the festival's Instagram account; contradicted by the ministry's own statement in the same source.
- I&B said on X that no film was denied permission, six films were asked for detailed synopses and some were sent to sectoral authorities. — Directly quoted from the ministry's X post in the source.
- Films were referred to the home, defence and external affairs ministries, with no responses received as of Monday morning. — Attributed to an unnamed I&B official speaking to Hindustan Times.
- The Academy sought certification exemption for 347 films, most already cleared; 19 of the 31 are international and 12 Indian. — Figures attributed to the Kerala State Chalachitra Academy and an Academy official.
विश्लेषकों की राय राय
यह सेंसरशिप बनाम प्रक्रिया की पुरानी बहस का नया अध्याय है, और तत्काल नुकसान महोत्सव के शेड्यूल और दर्शकों की योजनाओं का है। 347 फिल्मों के लिए छूट मांगी गई थी और अधिकतर को मंजूरी मिल चुकी है, ऐसे में आयोजन से तीन दिन पहले 31 फिल्मों का अटकना आयोजकों के लिए लॉजिस्टिक सिरदर्द है। महोत्सव के इंस्टाग्राम ने इसे 'अनुमति नहीं मिली' कहा, जबकि मंत्रालय ने एक्स पर कहा कि किसी को मना नहीं किया गया — छह फिल्मों का विस्तृत सारांश मांगा गया और कुछ को क्षेत्रीय अधिकारियों के पास भेजा गया; यही विरोधाभास अब असली खबर है।
- 31 में से 19 फिल्में अंतरराष्ट्रीय श्रेणी की हैं, इसलिए विदेशी फिल्मकारों की नज़र में भारतीय डॉक्यूमेंट्री मंचों की विश्वसनीयता परीक्षा में है।
- लंबित फिल्मों के विषय राजनीति, जाति, श्रम, संघर्ष और विस्थापन हैं, और गृह, रक्षा व विदेश मंत्रालयों को भेजना बताता है कि प्रक्रिया विषयवस्तु से तय हुई।
- डॉक्यूमेंट्री और लघु फिल्मों के लिए बॉक्स ऑफिस का सहारा नहीं होता — महोत्सव ही बाज़ार है, और एक स्क्रीनिंग छूटने का मतलब दर्शक, प्रेस और आगे के आमंत्रण भी छूटना है।
- दिसंबर 2025 के आईएफएफके प्रसंग में 19 फिल्मों को पहले रोका गया और बाद में चरणों में छूट मिली, जिससे संकेत मिलता है कि मंजूरी आ सकती है, पर अंतिम क्षण की मंजूरी से प्रचार और शेड्यूलिंग का नुकसान तय है।
- मंत्रालय के दिशानिर्देश आवेदन एक महीने पहले और कम-से-कम 15 दिन पहले मांगते हैं, इसलिए समय-सीमा की स्पष्टता के बिना इसे केवल अभिव्यक्ति की आज़ादी का विवाद मानना जल्दबाज़ी होगी।
किस पर नज़र रखें — देखना होगा कि 25 सितंबर से पहले तीनों मंत्रालयों का जवाब और मंत्रालय का पुनर्विचार आता है या नहीं, या अकादमी आईएफएफके की तरह स्क्रीनिंग जारी रखने का फैसला करती है।
यह खबर यह स्थापित नहीं करती कि किसी फिल्म को वास्तव में अनुमति देने से मना किया गया, न ही यह बताती है कि आवेदन कब दिए गए या कोई विशिष्ट आपत्ति क्या है।
गहराई से
शोध सारांश · 8 तथ्य · 5 तारीख़ें · परीक्षा के लिएसार
पृष्ठभूमि
केरल राज्य चलचित्र अकादमी द्वारा आयोजित 18वां अंतरराष्ट्रीय वृत्तचित्र एवं लघु फिल्म महोत्सव (आईडीएसएफएफके) तिरुवनंतपुरम में 25 से 30 सितंबर तक होना है। महोत्सव शुरू होने से तीन दिन पहले तक इसमें दिखाई जाने वाली 31 फिल्मों को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से प्रदर्शन की मंजूरी (प्रमाणन से छूट) नहीं मिली थी। सिनेमैटोग्राफ अधिनियम, 1952 के तहत सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए फिल्मों का प्रमाणन आवश्यक है, पर धारा 9 केंद्र को गैर-व्यावसायिक महोत्सवों की फिल्मों को छूट देने का अधिकार देती है। महोत्सव के इंस्टाग्राम खाते ने मंजूरी नकारे जाने की बात कही, जबकि मंत्रालय ने एक्स पर इसका खंडन किया।
मुख्य तथ्य
- 25 सितंबर से शुरू होने वाले आईडीएसएफएफके में प्रदर्शित होने वाली 31 फिल्मों को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से प्रदर्शन मंजूरी महोत्सव से तीन दिन पहले तक नहीं मिली थी।
- मंत्रालय ने एक्स पर कहा कि किसी भी फिल्म को मना नहीं किया गया; छह फिल्मों का विस्तृत सारांश मांगा गया और विषय के अनुसार कुछ फिल्में विभिन्न क्षेत्रीय अधिकारियों को समीक्षा हेतु भेजी गईं।
- एक अधिकारी के अनुसार कुछ फिल्मों के विषयों के कारण उन्हें गृह, रक्षा और विदेश मंत्रालयों को सत्यापन के लिए भेजा गया; सोमवार सुबह तक तीनों से जवाब नहीं मिला था।
- केरल राज्य चलचित्र अकादमी ने कुल 347 फिल्मों के लिए प्रमाणन से छूट मांगी थी, जिनमें से अधिकांश को मंजूरी मिल चुकी है।
- 31 वृत्तचित्रों में 19 अंतरराष्ट्रीय श्रेणी से हैं (लीबिया, स्पेन, ईरान, कनाडा, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया, अर्जेंटीना, फिलीपींस, रोमानिया, चेक गणराज्य, नेपाल), शेष 12 भारतीय फिल्में हैं जिनमें एक मलयालम फिल्म 'ग्लोब' है।
- लंबित फिल्मों में Parliament Street, Sanitised Republic: Cast(e) and Contracts, Globe, Memories of a Window, Birds of War, Put Your Soul on Your Hand and Walk तथा Our Land शामिल हैं।
- मंत्रालय के दिशानिर्देशों के अनुसार आयोजकों को आवेदन प्राथमिकता से एक माह पूर्व और कम से कम 15 दिन पूर्व पूरे दस्तावेजों के साथ देना चाहिए।
- दिसंबर 2025 के आईएफएफके में भी केंद्र ने शुरू में 19 फिल्मों की छूट रोकी थी, बाद में चरणबद्ध रूप से छूट दी गई।
समयरेखा
- 1952सिनेमैटोग्राफ अधिनियम लागू; धारा 9 केंद्र को शर्तों के साथ फिल्मों को प्रमाणन से छूट देने का अधिकार देती है।
- 2022दिल्ली के अस्पतालों के सफाई कर्मचारी, जो कोविड-19 महामारी में काम करते रहे, नौकरी से हाथ धो बैठे — 'Sanitised Republic' का विषय।
- दिसंबर 2025आईएफएफके में केंद्र ने पहले 19 फिल्मों की छूट रोकी; बाद में चरणों में छूट दी गई, केरल ने कहा था कि प्रदर्शन जारी रहेगा।
- सोमवार (महोत्सव से तीन दिन पूर्व)अधिकारी ने बताया कि गृह, रक्षा व विदेश मंत्रालयों से जवाब नहीं आया; अकादमी ने पुनर्विचार के लिए मंत्रालय को पत्र लिखा।
- 25–30 सितंबरतिरुवनंतपुरम में 18वां आईडीएसएफएफके आयोजित।
किसका दाँव
- सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय — गैर-व्यावसायिक महोत्सवों में प्रदर्शन के लिए प्रमाणन से छूट देने वाला प्राधिकरण; उसका कहना है कि किसी फिल्म को मना नहीं किया गया।
- केरल राज्य चलचित्र अकादमी — आयोजक; 347 फिल्मों के लिए छूट मांगी और 31 लंबित फिल्मों पर पुनर्विचार के लिए मंत्रालय को पत्र लिखा।
- गृह, रक्षा एवं विदेश मंत्रालय — विषयवस्तु के आधार पर कुछ फिल्मों के सत्यापन के लिए संदर्भित; उनके जवाब पर मंजूरी निर्भर।
- फिल्मकार व 31 फिल्मों की टीमें — राजनीति, जाति, श्रम, संघर्ष और विस्थापन पर बनी उनकी फिल्मों का प्रदर्शन अनिश्चित।
- दर्शक व महोत्सव प्रतिनिधि — कार्यक्रम-सूची में शामिल फिल्में देखने का अवसर अंतिम समय तक अनिश्चित।
- केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) — जिन फिल्मों के पास सीबीएफसी प्रमाणपत्र है, उन्हें मंत्रालय से छूट की आवश्यकता नहीं।
क्यों अहम है
यह मामला फिल्म महोत्सवों में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और केंद्र की नियामक शक्ति के बीच टकराव को सामने लाता है, क्योंकि लंबित 31 फिल्मों के विषय राजनीति, जाति, श्रम, संघर्ष और विस्थापन से जुड़े हैं। आईएफएफके (दिसंबर 2025) में ऐसी ही देरी के बाद यह दोहराव दिखाता है कि छूट प्रक्रिया की समयसीमा और पारदर्शिता आयोजकों के लिए व्यावहारिक चुनौती बनी हुई है। इससे केंद्र-राज्य संबंध और सांस्कृतिक आयोजनों की विश्वसनीयता भी प्रभावित होती है।
UPSC नज़रिया
प्रीलिम्स संकेत
- आईडीएसएफएफके का आयोजक: केरल राज्य चलचित्र अकादमी; 18वां संस्करण तिरुवनंतपुरम में 25–30 सितंबर।
- सिनेमैटोग्राफ अधिनियम, 1952 की धारा 9: केंद्र सरकार शर्तों के अधीन फिल्मों को प्रमाणन से छूट दे सकती है।
- सीबीएफसी प्रमाणपत्र प्राप्त फिल्मों को मंत्रालय से छूट लेने की आवश्यकता नहीं।
- मंत्रालय के दिशानिर्देश: महोत्सव आवेदन एक माह पूर्व, कम से कम 15 दिन पहले पूरे दस्तावेजों सहित।
- अकादमी ने 347 फिल्मों के लिए छूट मांगी थी; 31 लंबित, जिनमें 19 अंतरराष्ट्रीय और 12 भारतीय (एक मलयालम फिल्म 'ग्लोब')।
- दिसंबर 2025 के आईएफएफके में 19 फिल्मों की छूट पहले रोकी गई, बाद में चरणबद्ध रूप से दी गई।
मेन्स दृष्टिकोण
आईडीएसएफएफके में 31 फिल्मों की प्रदर्शन-मंजूरी लंबित रहने का मामला सिनेमैटोग्राफ अधिनियम, 1952 की धारा 9 के तहत महोत्सव फिल्मों को प्रमाणन से छूट देने की प्रशासनिक प्रक्रिया की कसौटी है। कारणों में विषयवस्तु-आधारित संवेदनशीलता (राजनीति, जाति, श्रम, संघर्ष, विस्थापन) के चलते फिल्मों को गृह, रक्षा और विदेश मंत्रालयों तथा क्षेत्रीय अधिकारियों को संदर्भित करना, तथा समयसीमा का दबाव शामिल है — मंत्रालय के दिशानिर्देश आवेदन एक माह पूर्व (न्यूनतम 15 दिन) करने की बात कहते हैं, जबकि महोत्सव से तीन दिन पहले तक तीनों मंत्रालयों के जवाब नहीं आए थे। इसके निहितार्थ दोहरे हैं: एक ओर सार्वजनिक प्रदर्शन के नियमन में राज्य की वैध भूमिका, दूसरी ओर अनुच्छेद-आधारित अभिव्यक्ति व कलात्मक स्वतंत्रता तथा महोत्सवों की कार्यक्रम-योजना की व्यवहार्यता। संचार-अंतर भी स्पष्ट है — आयोजकों के इंस्टाग्राम पर "मंजूरी नकारी गई" और मंत्रालय के एक्स पर "किसी फिल्म को मना नहीं किया गया" के बीच विरोधाभास। आगे का रास्ता: छूट आवेदनों के निपटान की स्पष्ट समयसीमा, अंतर-मंत्रालयी संदर्भ की पारदर्शी व कारण-सहित प्रक्रिया, आयोजकों द्वारा समय पर पूर्ण दस्तावेज, और आईएफएफके 2025 जैसे पूर्व अनुभवों से सीखकर संस्थागत समन्वय — जैसा अकादमी ने पुनर्विचार का अनुरोध कर मांगा है।
मुख्य शब्द
- आईडीएसएफएफके
- अंतरराष्ट्रीय वृत्तचित्र एवं लघु फिल्म महोत्सव, केरल; 18वां संस्करण तिरुवनंतपुरम में 25–30 सितंबर।
- सिनेमैटोग्राफ अधिनियम, 1952 की धारा 9
- केंद्र सरकार को शर्तों के अधीन फिल्मों को प्रमाणन से छूट देने का अधिकार देने वाला प्रावधान।
- प्रमाणन से छूट (एग्जेम्पशन)
- गैर-व्यावसायिक फिल्म महोत्सवों में दिखाई जाने वाली फिल्मों को सीबीएफसी प्रमाणन के बिना प्रदर्शित करने की अनुमति।
- सीबीएफसी
- केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड; इसका प्रमाणपत्र होने पर मंत्रालय से छूट की जरूरत नहीं।
- केरल राज्य चलचित्र अकादमी
- आईडीएसएफएफके और आईएफएफके का आयोजक राज्य संस्था; इसने 347 फिल्मों की छूट मांगी थी।
- आईएफएफके
- केरल का अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव; दिसंबर 2025 में 19 फिल्मों की छूट रोके जाने का विवाद हुआ था।
अभ्यास प्रश्न
- फिल्म महोत्सवों में प्रदर्शन हेतु प्रमाणन से छूट की प्रक्रिया की व्याख्या करते हुए बताइए कि सिनेमैटोग्राफ अधिनियम, 1952 की धारा 9 के तहत केंद्र की भूमिका क्या है।
- क्या विषयवस्तु के आधार पर फिल्मों को गृह, रक्षा और विदेश मंत्रालयों को संदर्भित करना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और राष्ट्रीय हित के बीच उचित संतुलन है? आईडीएसएफएफके प्रकरण के आलोक में परीक्षण कीजिए।
- आईएफएफके (दिसंबर 2025) और आईडीएसएफएफके के अनुभवों से सबक लेते हुए महोत्सव छूट प्रक्रिया में पारदर्शिता व समयबद्धता लाने के उपाय सुझाइए।
सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।
