गुरुग्राम हादसा: श्रमिक सुरक्षा नियमों पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से जवाब मांगा

गुरुग्राम में दीवार गिरने से सात श्रमिकों की मौत और चार के घायल होने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को उस याचिका पर केंद्र से जवाब मांगा, जिसमें नए व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य दशा (केंद्रीय) नियम, 2026 के तहत निर्माण श्रमिकों के लिए सुरक्षा नियमावली न होने का आरोप है। सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि श्रम सुरक्षा नियमों का पालन लाइसेंस में ही शर्त होनी चाहिए। याचिकाकर्ता की ओर से प्रशांत भूषण पेश हुए।

स्रोत

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डेस्क ने क्या जाँचा (5)
  • Supreme Court bench headed by CJI Surya Kant sought the Centre's response on a petition alleging absence of a construction safety code under the 2026 Rules. — Attributed to court proceedings reported in the source; bench composition named as Justices Joymalya Bagchi and V Mohana.
  • A retaining wall collapsed in March during excavation at Signature Global City of Colours project, Sidhrawali, Gurugram, killing seven workers and injuring four. — Attributed to submissions by advocate Prashant Bhushan for the petitioner; figures appear in source.
  • The Occupational Safety, Health and Working Conditions (Central) Rules, 2026 came into operation on May 7 and cover cleanliness, ventilation and dust but not worker safety. — Claim made by the petitioner; presented in source as petitioner's assertion, not independently confirmed.
  • Section 18(1) of the new code requires the Centre to notify occupational safety standards for construction work, which remains unfulfilled. — Attributed to the petition; figure and section reference appear in source.
  • Petition seeks inquiry into the collapse, compensation to victims' families and a national record of construction fatalities. — Attributed to the petition as described in the source.

विश्लेषकों की राय राय

AI राजनीतिक विश्लेषक

गुरुग्राम में दीवार गिरने की घटना अब सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि नए श्रम कानूनों पर राजनीतिक बहस का मुद्दा बन सकती है। सुप्रीम कोर्ट के नोटिस ने औपचारिक रूप से यह सवाल सामने रख दिया है कि नए कोड और 2026 के नियम श्रमिक सुरक्षा की वही गारंटी देते हैं या नहीं जो पुराने कानून में थी — इससे केंद्र पर अमल की गति दिखाने का दबाव बढ़ेगा। लाइसेंस में ही श्रम सुरक्षा संहिता के पालन को शर्त बनाने का सुझाव निर्माण उद्योग और राज्य के नगर नियोजन विभागों, दोनों के लिए असहज है। केंद्र और हरियाणा, दोनों को जवाब देना है, इसलिए जिम्मेदारी किसकी है, इस पर खींचतान तय दिखती है।

  • 1996 के कानून की जगह 2020 कोड और 2026 नियम आने से यह मामला 'सुधार बनाम श्रमिक सुरक्षा' की पुरानी राजनीतिक बहस को नया आधार देता है।
  • केंद्र, हरियाणा सरकार, राज्य विभाग और पुलिस—सभी पक्षकार होने से एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालने की कोशिश स्वाभाविक है।
  • नए नियमों और पुराने कोड की तुलना में खामियों का चार्ट मांगने से कमियां दस्तावेज़ में दर्ज होंगी, जो विपक्ष और श्रमिक संगठनों के लिए राजनीतिक सामग्री बनेगी।
  • लाइसेंस की शर्तें और बिल्डरों द्वारा कल्याण कोष बनाने जैसे सुझाव लागू हों तो रियल एस्टेट पर लागत बढ़ेगी, इसलिए क्षेत्र से विरोध की संभावना है।
  • मुआवज़े के लिए स्पष्ट मंच न होने का मुद्दा श्रमिक कल्याण को चुनावी भाषणों से हटाकर प्रशासनिक जवाबदेही की कसौटी पर ले आता है।

किस पर नज़र रखें — देखना होगा कि केंद्र धारा 18(1) के तहत निर्माण सुरक्षा मानक अधिसूचित करता है या अदालत में मौजूदा नियमों का बचाव करता है, और श्रमिक संगठन तथा विपक्ष इस मुद्दे को कितना राजनीतिक रूप देते हैं।

अदालत ने अभी कोई फैसला नहीं दिया और किसी की जिम्मेदारी तय नहीं की है; नियमों में खामी का दावा अभी याचिकाकर्ता का पक्ष है, केंद्र का जवाब आना बाकी है।

गहराई से

शोध सारांश · 8 तथ्य · 5 तारीख़ें · परीक्षा के लिए

सार

पृष्ठभूमि

गुरुग्राम के सिधरावली में सिग्नेचर ग्लोबल 'सिटी ऑफ कलर्स' परियोजना में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के लिए खुदाई के दौरान मार्च में एक रिटेनिंग वॉल गिरने से सात श्रमिकों की मौत हो गई और चार घायल हुए। इस हादसे के बाद नैशनल कैंपेन कमिटी फॉर सेंट्रल लेजिस्लेशन ऑन कंस्ट्रक्शन लेबर ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर आरोप लगाया कि नए व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य दशा (केंद्रीय) नियम, 2026 में निर्माण श्रमिकों के लिए कोई सुरक्षा संहिता नहीं है। पहले यह क्षेत्र भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार (रोजगार तथा सेवा शर्त विनियमन) अधिनियम, 1996 से नियंत्रित था, जिसे अब व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य दशा संहिता, 2020 ने प्रतिस्थापित कर दिया है।

मुख्य तथ्य

  • गुरुग्राम के सिधरावली में सिग्नेचर ग्लोबल 'सिटी ऑफ कलर्स' परियोजना में मार्च में रिटेनिंग वॉल गिरने से सात श्रमिकों की मौत, चार घायल।
  • खुदाई सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के लिए की जा रही थी।
  • सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को याचिका पर केंद्र से जवाब मांगा और नोटिस जारी किया।
  • बेंच की अध्यक्षता सीजेआई सूर्यकांत ने की; इसमें जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी मोहना भी शामिल थे।
  • नए व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य दशा (केंद्रीय) नियम, 2026 सात मई से प्रभावी हुए।
  • याचिका के अनुसार नए नियम स्वच्छता, वेंटिलेशन और धूल तक सीमित हैं, श्रमिक सुरक्षा के अहम पहलू पर मौन हैं।
  • संहिता की धारा 18(1) के तहत केंद्र सरकार को अधिसूचना द्वारा निर्माण कार्यस्थलों के लिए व्यावसायिक सुरक्षा व स्वास्थ्य मानक घोषित करने हैं; याचिका के अनुसार यह अपूर्ण है।
  • याचिका में हरियाणा सरकार, संबंधित राज्य विभाग और पुलिस अधिकारियों को पक्षकार बनाया गया है।

समयरेखा

  1. 1996भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार (रोजगार तथा सेवा शर्त विनियमन) अधिनियम निर्माण सुरक्षा को नियंत्रित करता था।
  2. 2020व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य दशा संहिता लागू, जिसने 1996 के अधिनियम को प्रतिस्थापित किया।
  3. मार्चगुरुग्राम के सिधरावली में खुदाई के दौरान रिटेनिंग वॉल गिरी; सात श्रमिकों की मौत, चार घायल।
  4. 7 मईव्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य दशा (केंद्रीय) नियम, 2026 प्रभावी हुए।
  5. सोमवार (हाल में)सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर केंद्र से जवाब मांगा और पुराने-नए नियमों के अंतर का चार्ट मांगा।

किसका दाँव

  • निर्माण श्रमिक और मृतकों/घायलों के परिजन — सुरक्षा गारंटी, मुआवजा और वैधानिक बकाया; दावों के लिए कोई मंच या ट्रिब्यूनल नहीं होने से राहत में बाधा।
  • केंद्र सरकार — धारा 18(1) के तहत निर्माण कार्य के लिए सुरक्षा व स्वास्थ्य मानक अधिसूचित करने का दायित्व; अदालत में जवाब देना है।
  • सुप्रीम कोर्ट (सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची, जस्टिस वी मोहना) — नए नियमों में अंतर की जांच; लाइसेंस शर्त और मुआवजा मंच पर दिशा तय करना।
  • नैशनल कैंपेन कमिटी फॉर सेंट्रल लेजिस्लेशन ऑन कंस्ट्रक्शन लेबर (याचिकाकर्ता) — सुरक्षा नियमावली, हादसे की पूर्ण जांच और निर्माण मृत्यु का राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनवाना।
  • हरियाणा सरकार, संबंधित विभाग व पुलिस — पक्षकार के रूप में अदालत में जवाब दाखिल करना और मार्च हादसे की जवाबदेही।
  • बिल्डर तथा नगर एवं ग्राम आयोजना निदेशक (डीटीसीपी) — लाइसेंस शर्तों में श्रम सुरक्षा संहिता का पालन और श्रमिक कल्याण के लिए कोष बनाने का प्रस्ताव।

क्यों अहम है

निर्माण क्षेत्र भारत के सबसे जोखिमपूर्ण कार्यक्षेत्रों में है, और याचिका का दावा है कि 2020 की संहिता के तहत बने नए नियमों में खुदाई, शोरिंग, स्कैफोल्डिंग या ध्वस्तीकरण जैसे कामों के लिए कोई विशिष्ट सुरक्षा प्रावधान नहीं है। इससे कानून के आधुनिकीकरण के बावजूद श्रमिकों की सुरक्षा और मुआवजे की गारंटी कमजोर पड़ने का सवाल खड़ा होता है। सुप्रीम कोर्ट का यह सुझाव कि सुरक्षा पालन को बिल्डर के लाइसेंस की शर्त बनाया जाए, प्रवर्तन का व्यावहारिक रास्ता खोल सकता है।

UPSC नज़रिया

प्रीलिम्स संकेत

  • व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य दशा संहिता, 2020 ने भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार अधिनियम, 1996 को प्रतिस्थापित किया।
  • संहिता की धारा 18(1): केंद्र सरकार अधिसूचना द्वारा भवन व अन्य निर्माण कार्य हेतु व्यावसायिक सुरक्षा व स्वास्थ्य मानक घोषित करेगी।
  • व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य दशा (केंद्रीय) नियम, 2026 सात मई से प्रभावी।
  • याचिकाकर्ता: नैशनल कैंपेन कमिटी फॉर सेंट्रल लेजिस्लेशन ऑन कंस्ट्रक्शन लेबर; अधिवक्ता प्रशांत भूषण।
  • बेंच: सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची, जस्टिस वी मोहना।
  • पुरानी संहिता में भारतीय मानक, राष्ट्रीय भवन संहिता और आईएलओ निर्माण सुरक्षा आचार संहिता नियोक्ताओं पर बाध्यकारी थीं।

मेन्स दृष्टिकोण

गुरुग्राम में खुदाई के दौरान रिटेनिंग वॉल गिरने से सात श्रमिकों की मौत ने श्रम कानूनों के समेकन के बाद पैदा हुए प्रवर्तन शून्य को उजागर किया है। याचिका के अनुसार 1996 के अधिनियम में खुदाई, टनलिंग जैसे कामों के लिए विशिष्ट सुरक्षा व स्वास्थ्य प्रावधान थे और भारतीय मानक, राष्ट्रीय भवन संहिता तथा आईएलओ की निर्माण सुरक्षा आचार संहिता नियोक्ताओं पर बाध्यकारी थीं, जबकि 2026 के नए केंद्रीय नियम मुख्यतः स्वच्छता, वेंटिलेशन और धूल तक सीमित हैं; शोरिंग, स्लोपिंग, खोदी गई सामग्री की रखाई, प्रवेश से पूर्व निरीक्षण, स्कैफोल्डिंग, फॉर्मवर्क या ध्वस्तीकरण पर नियम नहीं हैं। दूसरी कमी संस्थागत है—मुआवजा दावों के लिए कोई निर्दिष्ट मंच या ट्रिब्यूनल नहीं। संहिता की धारा 18(1) के तहत मानक अधिसूचित करने का केंद्र का दायित्व अपूर्ण बताया गया है। आगे का रास्ता अदालत के सुझावों में झलकता है: श्रम सुरक्षा संहिता के पालन को डीटीसीपी द्वारा जारी बिल्डर लाइसेंस की शर्त बनाना, बिल्डरों द्वारा श्रमिक कल्याण कोष का सृजन, मुआवजा दावों के लिए श्रम या औद्योगिक न्यायालयों की अधिसूचना, हादसे की पूर्ण जांच तथा निर्माण-मृत्यु व उनके कारणों का राष्ट्रीय रिकॉर्ड।

मुख्य शब्द

व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य दशा संहिता, 2020
श्रम संहिता जिसने भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार अधिनियम, 1996 को प्रतिस्थापित किया; इसके तहत 2026 के नियम बने।
ओएसएच (केंद्रीय) नियम, 2026
सात मई से प्रभावी नए केंद्रीय नियम, जो याचिका के अनुसार स्वच्छता, वेंटिलेशन व धूल तक सीमित हैं।
धारा 18(1)
संहिता का प्रावधान जिसके तहत केंद्र को निर्माण कार्यस्थलों के लिए व्यावसायिक सुरक्षा व स्वास्थ्य मानक अधिसूचित करने होते हैं।
रिटेनिंग वॉल
मिट्टी या सामग्री को रोकने वाली दीवार; गुरुग्राम में खुदाई के दौरान इसके गिरने से हादसा हुआ।
डीटीसीपी (नगर एवं ग्राम आयोजना निदेशक)
वह प्राधिकरण जो बिल्डरों को लाइसेंस जारी करता है; अलग कानून इन लाइसेंसों को नियंत्रित करता है।
राष्ट्रीय भवन संहिता व आईएलओ आचार संहिता
निर्माण सुरक्षा के मानक, जो पुरानी व्यवस्था में नियोक्ताओं पर बाध्यकारी थे।

अभ्यास प्रश्न

  1. श्रम कानूनों के संहिताकरण से निर्माण श्रमिकों की सुरक्षा गारंटी कमजोर होने के आरोप का परीक्षण कीजिए। गुरुग्राम हादसे के संदर्भ में उत्तर दीजिए।
  2. क्या बिल्डर लाइसेंस की शर्त के रूप में श्रम सुरक्षा संहिता का पालन अनिवार्य करना प्रवर्तन का प्रभावी उपाय है? तर्क सहित चर्चा कीजिए।
  3. व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य दशा संहिता, 2020 के तहत निर्माण श्रमिकों के मुआवजा दावों के लिए संस्थागत तंत्र की कमी के परिणामों का विश्लेषण कीजिए।

सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।

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