अपराध बेंगलुरु

केपीएससी घोटाला: बिचौलिए ने आईएएस अधिकारी को 1.3 करोड़ दिए, ईडी

प्रवर्तन निदेशालय ने सोमवार को विशेष पीएमएलए अदालत को बताया कि कर्नाटक लोक सेवा आयोग (केपीएससी) में पशु चिकित्सकों की भर्ती में कथित अनियमितताओं के मामले में गिरफ्तार बिचौलिए बसवराज कन्नाले ने तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक और आईएएस अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार को 1.30 करोड़ रुपये नकद दिए तथा आभूषण खरीदवाए। ईडी के अनुसार गंगवार ने 7 जनवरी को पेन ड्राइव में प्रश्नपत्र और उत्तर सौंपे। जनवरी में 400 पदों के लिए 1,400 अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी, 329 चुने गए।

स्रोत

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डेस्क जाँच · कुछ दावे ध्यान से पढ़ें

डेस्क ने क्या जाँचा (5)
  • Middleman Basavaraj Kannale paid Rs 1.3 crore in cash to IAS officer Gyanendra Kumar Gangwar. — Attributed to ED, citing Kannale's statements during questioning; not independently verified.
  • Gangwar bought a diamond necklace worth Rs 23 lakh with funds funnelled by Kannale; CID said he also bought a gold necklace worth over Rs 28 lakh. — Two separate figures attributed to ED and CID respectively; source notes CID made claim at bail hearing.
  • Gangwar gave the question paper with answers to Kannale on a pen drive on January 7, ahead of the January 9 exam. — Attributed to ED's probe findings; appears in source.
  • ED is examining proceeds of crime from other KPSC exams during Gangwar's 2024 to March 2026 tenure. — Attributed to unnamed sources familiar with the PMLA probe — unnamed sourcing.
  • 1,400 candidates wrote the January exam for 400 veterinary doctor posts and 329 were selected; an FIR alleged 29 aspirants with poor records scored above 450 of 600. — Figures appear in source; FIR attributed to unsuccessful candidate Dr S Manjunath, dated July 24, 2026.

विश्लेषकों की राय राय

AI क़ानूनी विश्लेषक

यह मामला अब दो समानांतर पटरियों पर चल रहा है — कथित भर्ती घोटाले पर राज्य सीआईडी की जांच, और धन के लेन-देन पर पीएमएलए, 2002 के तहत ईडी की अलग जांच। ईडी का दावा बड़े हिस्से में हिरासत में दर्ज एक सह-आरोपी बिचौलिये के बयान पर टिका है, जो हिरासत मांगने जैसे जांच-उद्देश्यों के लिए उपयोगी होता है, पर अदालतें आम तौर पर ऐसे बयान को दस्तावेज़, बरामदगी और लेन-देन के सबूतों से पुष्टि हुए बिना निर्णायक नहीं मानतीं। इसलिए बयान से ज़्यादा अहम है बताई गई आभूषणों की बरामदगी और बैंक हस्तांतरण, क्योंकि पीएमएलए में असली प्रश्न 'अपराध की आय' को मूल अपराध से जोड़ना है।

  • पीएमएलए एक व्युत्पन्न अपराध है, इसलिए ईडी का मुकदमा कथित पेपर लीक और रिश्वत पर सीआईडी के मूल मामले की मज़बूती पर ही निर्भर करेगा।
  • पूछताछ में दर्ज सह-आरोपी का बयान जांच की दिशा तय करने में मान्य है, लेकिन दोष सिद्ध करने के लिए अदालतें सामान्यतः स्वतंत्र पुष्टि मांगती हैं।
  • रिकॉर्ड में अंतर — ईडी का 23 लाख रुपये के हीरे के हार का उल्लेख और सीआईडी का 28 लाख से अधिक के सोने के हार का — ठीक वही विसंगति है जिसे बचाव पक्ष ज़मानत और सुनवाई के चरणों में उठा सकता है।
  • 19 सितंबर को सीआईडी हिरासत में रहते हुए कन्नाले को पेश न किया जाना और उसके बाद बॉडी वारंट का सहारा लेना दर्शाता है कि एक ही तथ्यों पर राज्य और केंद्रीय एजेंसियों की जांच में हिरासत-साझेदारी को लेकर टकराव स्वाभाविक है।
  • अधिकारी के कार्यकाल की अन्य परीक्षाओं तथा केपीएससी अध्यक्ष व सदस्यों की भूमिका की पड़ताल अभी जांच के स्तर पर है; जांच में नाम आना आरोप सिद्ध होना नहीं, और निर्दोषता की धारणा सभी पर लागू है।

किस पर नज़र रखें — देखना होगा कि सीआईडी और पीएमएलए अदालतों में ज़मानत व रिमांड पर क्या आदेश आते हैं, ईडी वैधानिक समय-सीमा में अभियोजन शिकायत दाखिल करती है या नहीं, और जनवरी की परीक्षा के परिणामों की वैधता पर कोई अलग प्रशासनिक या न्यायिक प्रक्रिया शुरू होती है या नहीं।

यहां कुछ भी सिद्ध नहीं है — ये जांच एजेंसियों के अदालत में दिए कथन हैं, आरोपियों पर दोष सिद्ध नहीं हुआ, उनका पक्ष इस खबर में दर्ज नहीं है, और अन्य परीक्षाओं या केपीएससी पदाधिकारियों से जुड़े संदेह पड़ताल से आगे बढ़े हैं, यह खबर स्थापित नहीं करती।

गहराई से

शोध सारांश · 8 तथ्य · 7 तारीख़ें · परीक्षा के लिए

सार

पृष्ठभूमि

कर्नाटक लोक सेवा आयोग (केपीएससी) द्वारा सरकारी सेवाओं में पशु चिकित्सा अधिकारियों की भर्ती के लिए जनवरी में हुई प्रवेश परीक्षा में प्रश्नपत्र लीक और रिश्वत के आरोप सामने आए हैं। राज्य के अपराध अन्वेषण विभाग (सीआईडी) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) दोनों इस मामले की जांच कर रहे हैं — सीआईडी आपराधिक पहलू पर और ईडी धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत धन के पहलू पर। ईडी ने सोमवार को बेंगलूरु की विशेष पीएमएलए अदालत में बताया कि बिचौलिए बसवराज कन्नाले ने तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक और आईएएस अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार को 1.30 करोड़ रुपये नकद दिए और आभूषण भी खरीदवाए। एक असफल अभ्यर्थी की शिकायत पर दर्ज एफआईआर से यह मामला खुला।

मुख्य तथ्य

  • ईडी ने विशेष पीएमएलए अदालत को बताया कि बिचौलिए बसवराज कन्नाले ने आईएएस अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार को 1.30 करोड़ रुपये नकद दिए, साथ ही आभूषण खरीद का खर्च उठाया।
  • ईडी के अनुसार कन्नाले द्वारा पहुंचाए गए धन से गंगवार ने बेंगलूरु के एक प्रमुख शोरूम से 23 लाख रुपये का हीरे का हार खरीदा; सीआईडी ने जमानत सुनवाई में 28 लाख रुपये से अधिक के सोने के हार की भी बात कही।
  • ईडी का कहना है कि गंगवार ने 7 जनवरी को अपने घर आए कन्नाले को पेन ड्राइव में प्रश्नपत्र और उत्तर सौंपे; मुख्य परीक्षा 9 जनवरी को हुई।
  • जांच के अनुसार कन्नाले ने अभ्यर्थियों से करीब 1.5 करोड़ रुपये अग्रिम रिश्वत जुटाई, जिसमें लगभग 80 लाख रुपये बैंक हस्तांतरण से आए।
  • प्रश्नों तक पहुंच देने के लिए बिचौलिए को प्रति मामले 30 लाख से 40 लाख रुपये मिले, ऐसा सीआईडी और ईडी की जांच में सामने आया।
  • जनवरी में 400 पशु चिकित्सक पदों के लिए 1,400 अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी और 329 चुने गए।
  • असफल अभ्यर्थी डॉ. एस. मंजूनाथ ने 24 जुलाई 2026 को एफआईआर दर्ज कराई कि कमजोर शैक्षणिक रिकॉर्ड वाले 29 अभ्यर्थियों ने 600 में से 450 से अधिक अंक पाकर चयन पा लिया।
  • सीआईडी ने 29 अगस्त को गंगवार को गिरफ्तार किया; ईडी ने पिछले सप्ताह गंगवार और कन्नाले को गिरफ्तार कर गंगवार को छह दिन की हिरासत में लिया।

समयरेखा

  1. 7 जनवरीईडी के अनुसार गंगवार ने अपने घर आए बिचौलिए कन्नाले को पेन ड्राइव में प्रश्नपत्र और उत्तर सौंपे।
  2. 9 जनवरीपशु चिकित्सक पदों की मुख्य प्रवेश परीक्षा; आरोप है कि भुगतान करने वाले अभ्यर्थियों को पहले ही प्रश्नपत्र दे दिए गए और वे एयरबीएनबी विला में ठहरे थे।
  3. 24 जुलाई 2026असफल अभ्यर्थी डॉ. एस. मंजूनाथ ने एफआईआर दर्ज कराई, आरोप कि 29 अभ्यर्थियों ने 600 में से 450+ अंक पाकर चयन पाया।
  4. 29 अगस्तकर्नाटक सीआईडी ने आईएएस अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार को गिरफ्तार किया।
  5. 19 सितंबरकर्नाटक सीआईडी ने कन्नाले को दो दिन की अतिरिक्त हिरासत में लिया; बिचौलिए को अदालत में पेश नहीं किया गया।
  6. पिछला सप्ताहईडी ने गंगवार और कन्नाले को गिरफ्तार किया तथा सीआईडी अदालत से बॉडी वारंट लिया; सीआईडी ने अदालत में बताया कि आभूषण गंगवार के एक मित्र से बरामद हुए।
  7. सोमवारईडी ने विशेष पीएमएलए न्यायाधीश के समक्ष कन्नाले के बयान का हवाला देते हुए 1.30 करोड़ रुपये के भुगतान की जानकारी दी और गंगवार की हिरासत ली।

किसका दाँव

  • ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार, तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक (आईएएस) — प्रश्नपत्र लीक और 1.30 करोड़ रुपये नकद व आभूषण लेने के आरोप; सीआईडी व ईडी दोनों की हिरासत और पीएमएलए जांच का सामना।
  • बसवराज कन्नाले, बिचौलिया — अभ्यर्थियों से करीब 1.5 करोड़ रुपये रिश्वत जुटाने और अधिकारी तक धन पहुंचाने का आरोप; गिरफ्तार और दोनों एजेंसियों की हिरासत में।
  • प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) — पीएमएलए, 2002 के तहत अपराध की आय और धनशोधन की जांच; गंगवार के 2024 से मार्च 2026 के कार्यकाल की अन्य केपीएससी परीक्षाओं की भी पड़ताल।
  • कर्नाटक सीआईडी — आपराधिक जांच, गिरफ्तारियां, आभूषण बरामदगी और अदालत में जमानत का विरोध।
  • केपीएससी और उसके अध्यक्ष साहूकार शिवशंकरप्पा तथा सदस्य — सूत्रों के अनुसार फर्जी तरीकों से मिले धन के शोधन में भूमिका जांच के दायरे में; आयोग की विश्वसनीयता दांव पर।
  • 1,400 अभ्यर्थी और चयनित 329 उम्मीदवार — मेरिट के आधार पर चयन का अधिकार; चयन सूची की वैधता पर सवाल।

क्यों अहम है

राज्य लोक सेवा आयोग की परीक्षा में प्रश्नपत्र स्वयं परीक्षा नियंत्रक स्तर से लीक होने का आरोप सार्वजनिक भर्ती की निष्पक्षता और योग्यता-आधारित चयन की जड़ पर चोट करता है। 400 पदों के लिए बैठे 1,400 अभ्यर्थियों में से 329 के चयन पर संदेह का असर ईमानदार उम्मीदवारों के भविष्य और संस्थागत भरोसे पर पड़ता है। पीएमएलए जांच का विस्तार बताता है कि यह एकल घटना नहीं, बल्कि लंबे समय तक चली धन-लेनदेन की श्रृंखला हो सकती है।

UPSC नज़रिया

प्रीलिम्स संकेत

  • पीएमएलए = धनशोधन निवारण अधिनियम, 2002; इसके तहत जांच प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) करता है और मामले विशेष पीएमएलए अदालतों में चलते हैं।
  • केपीएससी = कर्नाटक लोक सेवा आयोग; इस मामले में जनवरी में 400 पशु चिकित्सक पदों की परीक्षा में 1,400 अभ्यर्थी बैठे, 329 चयनित।
  • ईडी के अनुसार बिचौलिए कन्नाले ने आईएएस अधिकारी गंगवार को 1.30 करोड़ रुपये नकद दिए; 23 लाख का हीरे का हार व 28 लाख से अधिक का सोने का हार भी चर्चा में।
  • एफआईआर 24 जुलाई 2026 को डॉ. एस. मंजूनाथ ने दर्ज कराई — 29 अभ्यर्थियों के 600 में 450+ अंक का आरोप।
  • गंगवार का परीक्षा नियंत्रक के रूप में कार्यकाल 2024 से मार्च 2026 तक; ईडी इस दौरान की अन्य परीक्षाओं की भी जांच कर रहा है।
  • बॉडी वारंट: एक एजेंसी की हिरासत में बंद आरोपी को दूसरी अदालत/एजेंसी के समक्ष पेश कराने के लिए अदालत से लिया गया आदेश — ईडी ने सीआईडी अदालत से यह लिया।

मेन्स दृष्टिकोण

केपीएससी पशु चिकित्सक भर्ती प्रकरण दिखाता है कि भर्ती अनियमितताएं केवल परीक्षा केंद्र स्तर की चूक नहीं, बल्कि संस्था के शीर्ष पर बैठे अधिकारियों और बिचौलियों के गठजोड़ से जन्म लेती हैं — ईडी के अनुसार परीक्षा नियंत्रक ने 7 जनवरी को पेन ड्राइव में प्रश्नपत्र और उत्तर सौंपे, 9 जनवरी की परीक्षा से पहले भुगतान करने वाले अभ्यर्थियों को वे उपलब्ध कराए गए, और बदले में 1.30 करोड़ रुपये नकद तथा महंगे आभूषण दिए गए। कारणों में परीक्षा सामग्री पर एक ही पद का अत्यधिक नियंत्रण, कमजोर आंतरिक निगरानी, नकद व बेनामी लेनदेन की गुंजाइश और आयोग के भीतर जवाबदेही का अभाव शामिल दिखते हैं; निहितार्थ यह कि योग्य अभ्यर्थी बाहर रह जाते हैं, सार्वजनिक पदों पर अक्षम चयन होता है और संवैधानिक निकाय की वैधता क्षीण होती है। यह भी उल्लेखनीय है कि मामला किसी आंतरिक तंत्र से नहीं, एक असफल अभ्यर्थी की एफआईआर से खुला, और दो एजेंसियों — सीआईडी तथा ईडी — की समांतर जांच में हिरासत व पेशी को लेकर प्रक्रियात्मक टकराव भी उभरा। आगे का रास्ता स्रोत के दायरे में यही सुझाता है कि जांच गंगवार के 2024–मार्च 2026 के पूरे कार्यकाल की परीक्षाओं तक फैले, आयोग के अध्यक्ष व सदस्यों की भूमिका की निष्पक्ष पड़ताल हो, अपराध की आय की पहचान और वसूली हो, तथा चयन सूची की वैधता पर समयबद्ध निर्णय हो।

मुख्य शब्द

केपीएससी (कर्नाटक लोक सेवा आयोग)
राज्य सेवाओं में भर्ती करने वाला आयोग, जिसकी पशु चिकित्सक भर्ती परीक्षा में लीक और रिश्वत के आरोप हैं।
पीएमएलए, 2002
धनशोधन निवारण अधिनियम, जिसके तहत ईडी अपराध की आय की जांच करता है और मामले विशेष पीएमएलए अदालत में चलते हैं।
ईडी (प्रवर्तन निदेशालय)
केंद्रीय एजेंसी, जो इस मामले में धन के पहलू यानी रिश्वत की रकम और उसके शोधन की जांच कर रही है।
सीआईडी (अपराध अन्वेषण विभाग)
कर्नाटक की जांच इकाई, जिसने 29 अगस्त को गंगवार को गिरफ्तार किया और आभूषण बरामद किए।
बॉडी वारंट
अदालत का आदेश जिससे एक एजेंसी की हिरासत में बंद आरोपी को दूसरी अदालत के समक्ष पेश किया जा सके।
अपराध की आय (प्रोसीड्स ऑफ क्राइम)
अपराध से सीधे या परोक्ष रूप से अर्जित संपत्ति या धन, जिसकी पहचान पीएमएलए जांच का केंद्र होती है।

अभ्यास प्रश्न

  1. राज्य लोक सेवा आयोगों की भर्ती परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक की घटनाएं संस्थागत जवाबदेही की किन कमजोरियों की ओर संकेत करती हैं? केपीएससी प्रकरण के उदाहरण से समझाइए।
  2. धनशोधन निवारण अधिनियम, 2002 के तहत ईडी की जांच सामान्य आपराधिक जांच से किस प्रकार भिन्न है, और समांतर जांच से कौन-सी प्रक्रियात्मक चुनौतियां उत्पन्न होती हैं?
  3. सार्वजनिक भर्ती में योग्यता-आधारित चयन की रक्षा के लिए परीक्षा सामग्री की सुरक्षा और निगरानी तंत्र में क्या सुधार आवश्यक हैं? चर्चा कीजिए।

सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।

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