उत्तर आंध्र में एल नीनो सूखा, फिर बाढ़ से किसान प्रभावित
श्रीकाकुलम, विजयनगरम और पार्वतीपुरम मन्यम जिलों के किसान, जो एल नीनो के कारण जून से सूखे की मार झेल रहे थे, आंध्र प्रदेश तट से गुजरे गहरे दबाव से आई बाढ़ में और नुकसान उठा चुके हैं। सितंबर के तीसरे सप्ताह तक वर्षा में लगभग 45% कमी रही। विजयनगरम में बोया क्षेत्र सामान्य 1.43 लाख हेक्टेयर से घटकर 45,000 हेक्टेयर और श्रीकाकुलम में 3,47,519 हेक्टेयर से 2.2 लाख हेक्टेयर रह गया। नुकसान ₹35,000 से ₹2 लाख तक।
स्रोत
Srikakulam — agriculture · मूल ख़बर पढ़ें ↗
डेस्क जाँच · स्रोत से तुलना की
डेस्क ने क्या जाँचा (5)
- El Niño conditions caused a nearly 45% rainfall deficit through the third week of September. — Figure appears in source; no agency attribution given for the deficit data.
- Cropped area fell to about 45,000 hectares in Vizianagaram (normal 1.43 lakh ha) and about 2.2 lakh hectares in Srikakulam (normal 3,47,519 ha). — Figures appear in source; no department named as the source of the data.
- Farmers invested nearly ₹9,500 per acre in paddy and up to ₹18,000 per acre in maize, with losses of ₹35,000 to ₹2 lakh. — Reported in source as farmer-level estimates; not independently documented.
- Release of nearly 75,000 cusecs from Narayanpur Anicut in two days inundated hundreds of acres in Burja mandal. — Stated in source in the context of MARKFED Director Anepu Ramakrishna's account; no irrigation department confirmation cited.
- Officials assured enumeration of crop damage and relief measures within days. — Attributed to MARKFED Director Anepu Ramakrishna.
विश्लेषकों की राय राय
यह एक ही सीज़न में दो झटकों वाला संकट है — पहले सूखे ने बोआई का रकबा घटाया, फिर बाढ़ ने जो थोड़ी फसल खड़ी थी उसे भी डुबो दिया। विजयनगरम में सामान्य 1.43 लाख हेक्टेयर का रकबा घटकर करीब 45,000 हेक्टेयर और श्रीकाकुलम में 3,47,519 से घटकर लगभग 2.2 लाख हेक्टेयर रह जाना बताता है कि इन ज़िलों की ग्रामीण आय का बड़ा हिस्सा खत्म हो गया। लागत लगभग पूरी तरह किसान पर पड़ी है — धान में प्रति एकड़ करीब ₹9,500 और मक्का में ₹18,000 तक का निवेश डूबा, और बोरवेल के सहारे खेती करने वालों की खड़ी फसल बाढ़ में गई।
- सूखा और फिर बाढ़ — इस क्रम से नुकसान दोगुना हो जाता है: बीज-खाद पर खर्च भी गया और उसे चुकाने वाली फसल भी गई।
- कहानी में दर्ज मक्का उत्पादन प्रति एकड़ 25 क्विंटल से 10 क्विंटल पर आ गया — स्थिर लागत वही रही, आय ढह गई।
- प्रति किसान ₹35,000 से ₹2 लाख तक का नुकसान छोटे किसानों के लिए तत्काल नकदी संकट और कर्ज चुकाने का दबाव बन जाता है।
- रकबा घटने का असर केवल किसान परिवारों पर नहीं — खेत मज़दूर, खाद-बीज विक्रेता, परिवहन और स्थानीय मंडी कारोबार सबका कारोबार घटता है।
- खबर के मुताबिक नारायणपुर एनीकट से दो दिन में लगभग 75,000 क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद जलभराव हुआ, जो जल प्रबंधन और निकासी ढांचे की महंगी कमज़ोरी की ओर इशारा करता है।
किस पर नज़र रखें — देखना होगा कि अधिकारियों द्वारा वादा की गई फसल नुकसान की गणना कितनी तेज़ी और कितने बड़े दायरे में होती है, और राहत रबी की बोआई के लिए समय पर किसानों तक पहुंचती है या नहीं।
यह खबर कुल ज़िला-स्तरीय नुकसान का आंकड़ा, कितने किसानों के पास फसल बीमा या बकाया कर्ज है, और मुआवज़ा पैकेज क्या होगा — कुछ भी स्पष्ट नहीं करती; नुकसान के आंकड़े किसानों के बताए अनुसार हैं, सरकारी आकलन बाकी है।
गहराई से
शोध सारांश · 8 तथ्य · 5 तारीख़ें · परीक्षा के लिएसार
पृष्ठभूमि
उत्तर तटीय आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम, विजयनगरम और पार्वतीपुरम मन्यम जिलों के किसान इस खरीफ सीजन में दोहरी आपदा से जूझ रहे हैं। एल नीनो परिस्थितियों के कारण जून से सूखा पड़ा और वर्षा में सितंबर के तीसरे सप्ताह तक लगभग 45% कमी रही, जिससे बोया गया क्षेत्र बहुत घट गया। इसके बाद आंध्र प्रदेश तट से गुजरे गहरे दबाव (deep depression) से आई अचानक बाढ़ ने हजारों एकड़ खड़ी फसल जलमग्न कर दी। बोरवेल के सहारे खेती करने वाले किसान, जिन्होंने सूखे में भी फसल बचाई थी, बाढ़ से सबसे अधिक प्रभावित हुए।
मुख्य तथ्य
- एल नीनो के कारण जून से खरीफ सीजन में सूखा; सितंबर के तीसरे सप्ताह तक वर्षा में लगभग 45% की कमी दर्ज।
- विजयनगरम जिले में सामान्य फसल क्षेत्र लगभग 1.43 लाख हेक्टेयर, लेकिन इस वर्ष बुआई केवल लगभग 45,000 हेक्टेयर तक सीमित रही।
- श्रीकाकुलम जिले में सामान्य फसल क्षेत्र 3,47,519 हेक्टेयर के मुकाबले इस वर्ष लगभग 2.2 लाख हेक्टेयर रह गया।
- विजयनगरम के 27 मंडलों और श्रीकाकुलम के 30 मंडलों में अभूतपूर्व सूखे की स्थिति रही।
- किसानों ने धान में प्रति एकड़ लगभग ₹9,500 और मक्का में प्रति एकड़ ₹18,000 तक निवेश किया, जो सिंचाई और वर्षा के अभाव में डूब गया।
- बाढ़ से फसल नुकसान के कारण कई किसानों को ₹35,000 से ₹2 लाख तक का आर्थिक नुकसान हुआ।
- बुर्जा मंडल में नारायणपुर एनीकट से दो दिनों में लगभग 75,000 क्यूसेक पानी छोड़े जाने से सैकड़ों एकड़ जलमग्न हो गए।
- राजाम क्षेत्र के किसान के अनुसार मक्का की उपज सामान्य 25 क्विंटल प्रति एकड़ से घटकर इस वर्ष 10 क्विंटल रह गई।
समयरेखा
- जून (खरीफ सीजन का पहला महीना)एल नीनो के प्रभाव के कारण अधिकांश किसान कृषि कार्य से दूर रहे; सूखे की शुरुआत।
- जून से सितंबर के तीसरे सप्ताह तकवर्षा में लगभग 45% की कमी; विजयनगरम के 27 और श्रीकाकुलम के 30 मंडलों में सूखा।
- हाल ही में (सितंबर)गहरे दबाव के आंध्र प्रदेश तट से गुजरने पर अचानक बाढ़; धान, मक्का, गन्ना, केला, पपीता की खड़ी फसल जलमग्न।
- दो दिनों मेंनारायणपुर एनीकट से लगभग 75,000 क्यूसेक पानी छोड़ा गया, बुर्जा मंडल में सैकड़ों एकड़ डूबे।
- 26 सितंबर 2026 (रिपोर्ट प्रकाशन)किसानों ने MARKFED निदेशक को ज्ञापन दिया; अधिकारियों ने कुछ दिनों में फसल नुकसान का आकलन और राहत का आश्वासन दिया।
किसका दाँव
- श्रीकाकुलम, विजयनगरम और पार्वतीपुरम मन्यम के किसान — सूखे में बीज-खाद पर निवेश और बाढ़ में खड़ी फसल—दोनों का नुकसान; ₹35,000 से ₹2 लाख तक की क्षति।
- बोरवेल पर निर्भर किसान — सूखे में सिंचाई से फसल बचाई, पर अचानक बाढ़ से खड़ी फसल जलमग्न होने की सबसे बड़ी मार पड़ी।
- आंध्र प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन — फसल नुकसान की गणना (enumeration), तत्काल वित्तीय सहायता और राहत उपायों की जिम्मेदारी।
- MARKFED निदेशक अनेपु रामकृष्ण — किसानों का ज्ञापन प्राप्त किया; उनकी स्थिति सरकार तक पहुँचाने की भूमिका।
- किसान कुर्मराव (गोपालपुरम, पालकोंडा मंडल) व पल्ला अप्पलानायडु (कागितापल्ली) — नागावली नहर के पास अच्छी उपज की आशा थी; बाढ़ और घटी मक्का उपज से आजीविका संकट।
- मामिदी अप्पन्ना व चल्ला सावरा राजू (अल्लीना गाँव, बुर्जा मंडल) — प्रत्येक को लगभग ₹30,000 का नुकसान; तत्काल वित्तीय सहायता की मांग।
क्यों अहम है
एक ही सीजन में सूखा और बाढ़ की दोहरी मार दिखाती है कि वर्षा-निर्भर खेती जलवायु परिवर्तनशीलता के सामने कितनी असुरक्षित है। बोया क्षेत्र में भारी गिरावट और प्रति एकड़ निवेश डूबने से किसानों पर कर्ज और आजीविका का दबाव बढ़ता है, जबकि राहत व फसल बीमा की गति निर्णायक बन जाती है। यह सिंचाई ढाँचे, जलाशय-संचालन और आपदा आकलन तंत्र की जरूरत को भी रेखांकित करता है।
UPSC नज़रिया
प्रीलिम्स संकेत
- एल नीनो: प्रशांत महासागर की परिघटना, भारत में मानसून की कमी से जुड़ी; 2026 खरीफ में उत्तर आंध्र में ~45% वर्षा कमी।
- विजयनगरम का सामान्य फसल क्षेत्र 1.43 लाख हेक्टेयर; श्रीकाकुलम का 3,47,519 हेक्टेयर।
- सूखा प्रभावित मंडल: विजयनगरम में 27, श्रीकाकुलम में 30।
- नारायणपुर एनीकट से दो दिनों में ~75,000 क्यूसेक पानी छोड़ा गया।
- नागावली नदी की नहरें श्रीकाकुलम के पालकोंडा क्षेत्र की सिंचाई से जुड़ी हैं।
- MARKFED: राज्य विपणन सहकारी संस्था; निदेशक अनेपु रामकृष्ण को किसानों ने ज्ञापन दिया।
मेन्स दृष्टिकोण
उत्तर तटीय आंध्र प्रदेश का यह प्रकरण जलवायु-प्रेरित कृषि संकट का उदाहरण है, जहाँ एक ही खरीफ सीजन में एल नीनो-जनित सूखा (जून से, ~45% वर्षा कमी) और गहरे दबाव से आई अचानक बाढ़ ने किसानों को दो बार मारा। कारण बहुस्तरीय हैं: वर्षा पर अत्यधिक निर्भरता, सिंचाई सुविधाओं का अभाव (जिससे धान में ₹9,500 और मक्का में ₹18,000 प्रति एकड़ का निवेश डूबा), बोरवेल-आधारित असुरक्षित सिंचाई, और नारायणपुर एनीकट से 75,000 क्यूसेक जल-निर्गम जैसे जलाशय-संचालन के प्रभाव। परिणामस्वरूप बोया क्षेत्र विजयनगरम में 1.43 लाख से 45,000 हेक्टेयर और श्रीकाकुलम में 3,47,519 से 2.2 लाख हेक्टेयर रह गया, मक्का उपज 25 से 10 क्विंटल प्रति एकड़ तक गिरी और प्रति किसान ₹35,000–₹2 लाख का नुकसान हुआ। आगे का रास्ता, स्रोत के अनुसार, तत्काल फसल नुकसान की गणना (enumeration) और राहत उपायों पर निर्भर है, जिसका आश्वासन वरिष्ठ अधिकारियों ने दिया है; व्यापक नीतिगत उपायों पर स्रोत में विवरण नहीं है।
मुख्य शब्द
- एल नीनो
- प्रशांत महासागरीय परिघटना, जिसके कारण इस खरीफ में उत्तर आंध्र में सूखा और ~45% वर्षा कमी रही।
- गहरा दबाव (Deep Depression)
- तीव्र निम्न दबाव प्रणाली; हाल ही में आंध्र प्रदेश तट से गुजरकर अचानक बाढ़ का कारण बनी।
- खरीफ सीजन
- मानसून आधारित फसल मौसम, जिसका पहला महीना जून है; इसमें धान, मक्का प्रमुख फसलें।
- एनीकट (Anicut)
- नदी पर बना छोटा बाँध/अवरोध; नारायणपुर एनीकट से जल छोड़े जाने पर बुर्जा मंडल जलमग्न हुआ।
- MARKFED
- विपणन सहकारी संस्था; इसके निदेशक अनेपु रामकृष्ण को किसानों ने राहत के लिए ज्ञापन सौंपा।
- क्यूसेक
- जल प्रवाह की इकाई (घन फुट प्रति सेकंड); एनीकट से दो दिनों में ~75,000 क्यूसेक छोड़ा गया।
अभ्यास प्रश्न
- एल नीनो जैसी जलवायु परिघटनाएँ भारत की वर्षा-निर्भर कृषि को कैसे प्रभावित करती हैं? उत्तर तटीय आंध्र प्रदेश के हाल के अनुभव के आलोक में परीक्षण करें।
- एक ही फसल मौसम में सूखा और बाढ़ की दोहरी मार से निपटने के लिए फसल नुकसान आकलन और राहत तंत्र को किस प्रकार सुदृढ़ किया जाना चाहिए?
- जलाशय व एनीकट से जल-निर्गम का प्रबंधन निचले क्षेत्रों में बाढ़ जोखिम को कैसे प्रभावित करता है? श्रीकाकुलम के बुर्जा मंडल के उदाहरण से समझाएँ।
सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।