राजनीति चेन्नई

पेरियार की जयंती पर स्टालिन, उदयनिधि, कनिमोझी ने दी श्रद्धांजलि

डीएमके अध्यक्ष एम.के. स्टालिन, तमिलनाडु के नेता प्रतिपक्ष उदयनिधि स्टालिन और सांसद कनिमोझी करुणानिधि ने गुरुवार को समाज सुधारक 'तंथै' पेरियार ई.वी. रामासामी की जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की। तमिलनाडु में यह दिन 'सामाजिक न्याय दिवस' के रूप में मनाया जाता है। पेरियार को "तर्कशीलता का सूर्य" बताते हुए स्टालिन ने एक्स पर लिखा, "प्रकाश रहित स्थान अंधकार है; प्रश्नों रहित समाज उससे भी बड़ा अंधकार है।" 17 सितंबर 1879 को जन्मे पेरियार ने 1925 में स्वाभिमान आंदोलन शुरू किया था।

स्रोत

DMK (M. K. Stalin) · मूल ख़बर पढ़ें ↗

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डेस्क जाँच · स्रोत से तुलना की

डेस्क ने क्या जाँचा (5)
  • MK Stalin called Periyar the 'rational sun' and said a society without questions is a greater darkness — Attributed in source to Stalin's post on X, quoted directly.
  • Udhayanidhi Stalin said the DMK government will accelerate implementation of Periyar's ideals and declared the birth anniversary as Social Justice Day — Attributed in source to Udhayanidhi's post on X; quoted directly.
  • Periyar was born on September 17, 1879 and launched the Self-Respect Movement in 1925 — Historical detail stated in source without external citation; internally consistent.
  • Kudi Arasu was launched in May 1925 and Periyar left the Congress in November 1925 — Figures and dates appear in the source; no independent source given.
  • MK Stalin is described as former Tamil Nadu Chief Minister and Udhayanidhi Stalin as Leader of Opposition — As stated in source; designations are the source's own and are internally inconsistent with the reference to 'the DMK government'.

विश्लेषकों की राय राय

AI राजनीतिक विश्लेषक

पेरियार की जयंती डीएमके के लिए केवल एक स्मृति-आयोजन नहीं, बल्कि वैचारिक विरासत पर अपना दावा सार्वजनिक रूप से दर्ज कराने का मंच है। स्टालिन, उदयनिधि और कनिमोझी का एक ही दिन एक ही सुर में बोलना नेतृत्व की निरंतरता दिखाने और 'सामाजिक न्याय' के एजेंडे को आगे बढ़ाने की सोची-समझी कोशिश लगती है। खबर के अनुसार स्टालिन अब पूर्व मुख्यमंत्री हैं और उदयनिधि नेता प्रतिपक्ष — इसलिए इन श्रद्धांजलियों को विपक्ष की कुर्सी से पार्टी के पुनर्निर्माण प्रयास के हिस्से के रूप में पढ़ा जाना चाहिए।

  • स्टालिन का 'तर्कवाद का सूर्य' कहना और 'वर्चस्व पूरी तरह हटा नहीं है' की चेतावनी जाति और सामाजिक न्याय को राजनीतिक बहस के केंद्र में बनाए रखती है।
  • युवा शाखा सचिव के रूप में उदयनिधि का अगली पीढ़ी तक पेरियार के आदर्श पहुंचाने का संकल्प पार्टी के भीतर पीढ़ीगत बदलाव के आख्यान को मजबूत करता है।
  • कनिमोझी का पेरियार के विचारों को विश्व मंच तक ले जाने का आह्वान पार्टी के संदेश को राज्य की सीमाओं से बाहर विस्तार देने की कोशिश दिखता है।
  • इस दिन को 'सामाजिक न्याय दिवस' घोषित करने का श्रेय लेकर डीएमके द्रविड़ विरासत पर दावा करने वाले प्रतिद्वंद्वियों के लिए जगह कम छोड़ती है।
  • तमिलनाडु में पेरियार की विरासत लंबे समय से विवाद का विषय रही है; ब्राह्मणवादी वर्चस्व पर उनकी आलोचना की हर याद विरोधियों की प्रतिक्रिया को आमंत्रित कर सकती है।

किस पर नज़र रखें — आगे देखना होगा कि डीएमके सामाजिक न्याय और तर्कवाद के इर्द-गिर्द अपना प्रचार आख्यान कितनी आक्रामकता से गढ़ती है और प्रतिद्वंद्वी दल उस पर कैसी प्रतिक्रिया देते हैं।

यह खबर केवल श्रद्धांजलि तक सीमित है; इसमें किसी नई नीति घोषणा, चुनावी रणनीति या विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया की पुष्टि नहीं है।

गहराई से

शोध सारांश · 8 तथ्य · 4 तारीख़ें · परीक्षा के लिए

सार

पृष्ठभूमि

तमिलनाडु में 17 सितंबर को समाज सुधारक और द्रविड़ आंदोलन के प्रतीक 'तंथै' पेरियार ई.वी. रामासामी की जयंती 'सामाजिक न्याय दिवस' के रूप में मनाई जाती है। डीएमके सरकार ने इस दिन को सामाजिक न्याय दिवस घोषित किया है। इस वर्ष डीएमके अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन, नेता प्रतिपक्ष उदयनिधि स्टालिन और लोकसभा सांसद कनिमोझी करुणानिधि ने चेन्नई से श्रद्धांजलि अर्पित की। पेरियार ने 1925 में स्वाभिमान आंदोलन शुरू किया, जिसने तर्कवाद, जाति-विरोध और स्त्री-पुरुष समानता को आगे बढ़ाया।

मुख्य तथ्य

  • चेन्नई, 17 सितंबर: डीएमके नेताओं ने गुरुवार को पेरियार ई.वी. रामासामी की जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की, जो पूरे राज्य में 'सामाजिक न्याय दिवस' के रूप में मनाई जाती है।
  • पेरियार का जन्म 17 सितंबर 1879 को हुआ था।
  • पेरियार ने 1925 में स्वाभिमान आंदोलन (Self-Respect Movement) शुरू किया, जिसका उद्देश्य ब्राह्मणवादी वर्चस्व को चुनौती देना और गैर-ब्राह्मण समुदायों का उत्थान था।
  • 1925 दो कारणों से महत्वपूर्ण है: मई में तमिल साप्ताहिक 'कुडी अरसु' (द रिपब्लिक) की शुरुआत और नवंबर में पेरियार का भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से बाहर होना।
  • एम.के. स्टालिन ने एक्स पर पेरियार को तमिल पीढ़ी का "तर्कशीलता का सूर्य" कहा और लिखा कि "प्रकाश रहित स्थान अंधकार है; प्रश्नों रहित समाज उससे भी बड़ा अंधकार है।"
  • उदयनिधि स्टालिन, जो तमिलनाडु के नेता प्रतिपक्ष और डीएमके युवा शाखा सचिव हैं, ने कहा कि पेरियार के प्रगतिशील आदर्शों के कार्यान्वयन में तेजी लाई जाएगी।
  • सांसद कनिमोझी करुणानिधि ने अपील की कि लोग पेरियार को पढ़ें और उनके विचारों को विश्व मंच पर फैलाएँ।
  • कांग्रेस छोड़ने के बाद पेरियार ने 'कुडी अरसु' के जरिए कांग्रेस और 'ब्राह्मणवाद' — हिंदू जाति रूढ़िवाद के लिए उनके द्वारा प्रयुक्त शब्द — की खुली आलोचना की।

समयरेखा

  1. 17 सितंबर 1879ई.वी. रामासामी (पेरियार) का जन्म।
  2. मई 1925तमिल साप्ताहिक 'कुडी अरसु' (द रिपब्लिक) की शुरुआत, जिसने मद्रास प्रेसीडेंसी में नई सामाजिक सुधार धारा जोड़ी।
  3. नवंबर 1925पेरियार का भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से बाहर जाना, जिसे आमतौर पर स्वाभिमान आंदोलन की औपचारिक शुरुआत माना जाता है।
  4. 17 सितंबर (गुरुवार), चेन्नईएम.के. स्टालिन, उदयनिधि स्टालिन और कनिमोझी करुणानिधि ने पेरियार जयंती पर श्रद्धांजलि दी; राज्य में 'सामाजिक न्याय दिवस'।

किसका दाँव

  • एम.के. स्टालिन, डीएमके अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री — पेरियार की तर्कवादी विरासत को दल की वैचारिक पहचान के रूप में आगे बढ़ाना।
  • उदयनिधि स्टालिन, तमिलनाडु नेता प्रतिपक्ष और डीएमके युवा शाखा सचिव — पेरियार के प्रगतिशील आदर्शों के कार्यान्वयन में तेजी और युवाओं तक उनके सिद्धांत पहुँचाने का वादा।
  • कनिमोझी करुणानिधि, लोकसभा सांसद — पेरियार के विचारों को पढ़ने और विश्व मंच पर प्रचारित करने की अपील।
  • द्रविड़ मुनेत्र कषगम (डीएमके) — पेरियार को द्रविड़ आंदोलन की नींव और पहचान बताते हुए सामाजिक न्याय की राजनीति पर दावा।
  • तमिलनाडु के गैर-ब्राह्मण समुदाय — स्वाभिमान आंदोलन जिनके उत्थान और जाति-विरोधी सुधारों के लिए शुरू हुआ था।
  • तमिलनाडु की जनता व युवा पीढ़ी — 'सामाजिक न्याय दिवस' के जरिए तर्कवाद, समानता और प्रश्न पूछने की संस्कृति का संचार।

क्यों अहम है

पेरियार जयंती तमिलनाडु में केवल स्मृति दिवस नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और तर्कवाद की राजनीतिक विरासत पर दावे का अवसर है — डीएमके सरकार ने इसे 'सामाजिक न्याय दिवस' घोषित किया है। नेताओं के बयान बताते हैं कि जाति-आधारित वर्चस्व अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ, इसलिए प्रश्न पूछने की संस्कृति को जीवित रखना आवश्यक माना जा रहा है। यह द्रविड़ आंदोलन की वैचारिक निरंतरता और अगली पीढ़ी तक उसके हस्तांतरण का प्रश्न उठाता है।

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प्रीलिम्स संकेत

  • पेरियार ई.वी. रामासामी का जन्म: 17 सितंबर 1879; तमिलनाडु में यह दिन 'सामाजिक न्याय दिवस'।
  • स्वाभिमान आंदोलन (Self-Respect Movement): 1925 में पेरियार द्वारा शुरू।
  • 'कुडी अरसु' (अर्थ: द रिपब्लिक) — तमिल साप्ताहिक, मई 1925 में शुरू।
  • नवंबर 1925 में पेरियार ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस छोड़ी।
  • पेरियार को 'तंथै' (पिता) कहा जाता है; डीएमके उन्हें द्रविड़ आंदोलन की नींव मानती है।
  • उदयनिधि स्टालिन: तमिलनाडु के नेता प्रतिपक्ष तथा डीएमके युवा शाखा सचिव; कनिमोझी करुणानिधि: लोकसभा सांसद।

मेन्स दृष्टिकोण

पेरियार जयंती को 'सामाजिक न्याय दिवस' के रूप में मनाना तमिलनाडु में सामाजिक सुधार की एक सतत राजनीतिक परंपरा को दर्शाता है। इसकी जड़ें 1925 में हैं, जब पेरियार ने स्वाभिमान आंदोलन शुरू किया, मई में तमिल साप्ताहिक 'कुडी अरसु' निकाला और नवंबर में कांग्रेस छोड़ी — जिसके बाद उन्होंने कांग्रेस तथा 'ब्राह्मणवाद' यानी हिंदू जाति रूढ़िवाद की खुली आलोचना की। आंदोलन ने तर्कवाद, स्त्री-पुरुष समानता और जाति-विरोधी सुधारों की पैरवी करते हुए एक नई द्रविड़ पहचान गढ़ी और द्रविड़ आंदोलन के उदय का मार्ग प्रशस्त किया। स्टालिन का यह कथन कि \"कई पीढ़ियों ने वर्चस्व के सामने सिर झुकाया… फिर भी वर्चस्व पूरी तरह पीछे नहीं हटा\" संकेत देता है कि सुधार का कार्य अपूर्ण माना जा रहा है; इसीलिए 'क्यों? किसलिए? कैसे?' जैसे प्रश्नों को जीवित रखने पर बल है। आगे का रास्ता, स्रोत के अनुसार, नेताओं द्वारा बताए गए उपायों तक सीमित है — पेरियार के प्रगतिशील आदर्शों के कार्यान्वयन में तेजी, उनके सिद्धांतों को युवा पीढ़ी तक पहुँचाना, और उनके लेखन को पढ़कर विचारों को व्यापक स्तर पर फैलाना।

मुख्य शब्द

पेरियार ('तंथै' ई.वी. रामासामी)
समाज सुधारक और द्रविड़ प्रतीक, जन्म 17 सितंबर 1879; तर्कवाद व जाति-विरोधी सुधारों के पुरोधा।
स्वाभिमान आंदोलन
1925 में पेरियार द्वारा शुरू आंदोलन, जिसका उद्देश्य ब्राह्मणवादी वर्चस्व को चुनौती देना और गैर-ब्राह्मण समुदायों का उत्थान था।
कुडी अरसु
मई 1925 में शुरू तमिल साप्ताहिक, जिसका अर्थ 'द रिपब्लिक'; सामाजिक सुधार और आलोचना का मुख्य माध्यम।
सामाजिक न्याय दिवस
डीएमके सरकार द्वारा पेरियार जयंती (17 सितंबर) को घोषित दिवस, पूरे तमिलनाडु में मनाया जाता है।
द्रविड़ मुनेत्र कषगम (डीएमके)
तमिलनाडु का दल, जो पेरियार को द्रविड़ आंदोलन की नींव और पहचान मानता है।
ब्राह्मणवाद
पेरियार द्वारा हिंदू जाति रूढ़िवाद की कुरीतियों के लिए प्रयुक्त शब्द।

अभ्यास प्रश्न

  1. स्वाभिमान आंदोलन (1925) ने तमिलनाडु में द्रविड़ पहचान के निर्माण में क्या भूमिका निभाई? चर्चा करें।
  2. पेरियार की तर्कवादी विरासत आज की सामाजिक न्याय की राजनीति को किस प्रकार आकार देती है? स्रोत में उद्धृत नेताओं के बयानों के आलोक में परखें।
  3. सामाजिक सुधार आंदोलनों में पत्रिकाओं/समाचारपत्रों की भूमिका का मूल्यांकन 'कुडी अरसु' के उदाहरण से कीजिए।

सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।

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