रक्षा खरीद में स्वदेशी हिस्सेदारी 58 से 75 प्रतिशत हुई
रक्षा मंत्रालय के अनुसार आत्मनिर्भरता की दिशा में सरकार 'मेक इन इंडिया' से आगे बढ़कर 'ओन्ड बाय इंडिया' के लक्ष्य पर काम कर रही है। पूंजीगत खरीद बजट में स्वदेशी खरीद का हिस्सा 58 प्रतिशत से 75 प्रतिशत किया गया है, जिसमें चौथाई हिस्सा निजी उद्योग के लिए रखा गया है। 100 करोड़ रुपये तक के अनुबंध एमएसएमई के लिए आरक्षित हैं, जो 150 करोड़ रुपये तक बढ़ सकते हैं। 2025-26 में रक्षा खरीद परिषद ने 6.73 लाख करोड़ रुपये की 55 प्रस्तावों को मंजूरी दी।
स्रोत
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डेस्क जाँच · कुछ दावे ध्यान से पढ़ें
डेस्क ने क्या जाँचा (5)
- Domestic share of the capital acquisition budget raised from 58% to 75%, with a quarter of that reserved for private industry — Figures appear in source, attributed to government policy changes; no document cited.
- Defence Acquisition Council cleared 55 capital acquisition proposals worth about Rs 6.73 lakh crore in 2025-26 — Figure appears in source and is attributed to the defence ministry; repeated consistently in the text.
- Acquisition cases up to Rs 100 crore reserved for MSMEs, extendable to Rs 150 crore if two eligible MSMEs participate — Stated in source as policy; no order or notification referenced.
- An S-400 unit destroyed a Pakistani special mission aircraft from 314 km, described as the longest surface-to-air kill of its kind — Presented as fact in source with no named source or official confirmation; treat with caution.
- Lt Gen PR Shankar (retd) says the politico-military leadership has not come to terms with modern war realities — Directly attributed to a named former DG Artillery; opinion, not verified fact.
विश्लेषकों की राय राय
'मेक इन इंडिया' से 'ओन्ड बाय इंडिया' की भाषा में बदलाव केवल प्रक्रियागत फेरबदल नहीं है — यह आत्मनिर्भरता को राष्ट्रीय गौरव का विषय बनाने वाली राजनीतिक रचना है। पूंजीगत खरीद बजट में घरेलू हिस्सेदारी 58 प्रतिशत से 75 प्रतिशत करना, उसका एक-चौथाई निजी उद्योग के लिए और 100 करोड़ रुपये तक के ठेके एमएसएमई के लिए आरक्षित करना — इससे केंद्र रक्षा खर्च को उद्योग और रोजगार की व्यापक राजनीति से जोड़ रहा है। वहीं इसी खबर में एक सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारी का यह आंकलन भी है कि ये कदम रणनीतिक रूप से अल्पकालिक हैं और दूरमारक क्षमताओं में कमियां बनी हुई हैं — यही तर्क आलोचकों के पास उपलब्ध है।
- करीब 6.73 लाख करोड़ रुपये के 55 प्रस्तावों की मंजूरी सरकार को राष्ट्रीय सुरक्षा पर 'काम हो रहा है' वाला आंकड़ों पर आधारित नैरेटिव देती है।
- निजी क्षेत्र का कोटा और एमएसएमई आरक्षण लाभार्थियों का दायरा सार्वजनिक उपक्रमों से हटाकर व्यापक औद्योगिक वर्ग तक, और इसके साथ नए संभावित राजनीतिक समर्थन आधार तक बढ़ाता है।
- ऑपरेशन सिंदूर के अनुभवों के आधार पर नीतिगत बदलाव पेश करना रक्षा तैयारी को चुनावी संवाद में एक प्रभावी भावनात्मक मुद्दा बनाए रखता है।
- स्वदेशी युद्धपोतों का कमीशनिंग और तेजस एमके-1ए के अतिरिक्त ऑर्डर उन राज्यों को क्षेत्रीय आर्थिक लाभ देते हैं जहां शिपयार्ड और एयरोस्पेस क्लस्टर हैं।
- उसी सूची में राफेल मरीन जैसी विदेशी खरीद होने से विपक्ष को यह पूछने की जगह मिलती है कि आत्मनिर्भरता का दावा कितना पूर्ण है।
किस पर नज़र रखें — मसौदा डीएपी 2026 का अंतिम स्वरूप और मंजूर प्रस्ताव कितनी तेजी से वास्तविक अनुबंधों व डिलीवरी में बदलते हैं — देरी होने पर यही आंकड़े विपक्ष का हथियार बन सकते हैं।
यह खबर केवल नीतिगत निर्णयों और मंजूरियों की जानकारी देती है; वास्तविक खर्च, डिलीवरी, रोजगार पर असर या किसी चुनावी परिणाम को यह स्थापित नहीं करती।
गहराई से
शोध सारांश · 8 तथ्य · 8 तारीख़ें · परीक्षा के लिएसार
पृष्ठभूमि
रक्षा मंत्रालय ने पिछले एक वर्ष के नीतिगत बदलावों और आंकड़ों के आधार पर रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की प्रगति का ब्योरा दिया है। सरकार का कहना है कि लक्ष्य अब 'मेक इन इंडिया' से आगे बढ़कर 'ओन्ड बाय इंडिया' है, यानी हथियारों का स्वामित्व और डिजाइन भी भारतीय हो। इसी क्रम में पूंजीगत खरीद बजट में स्वदेशी खरीद का अनिवार्य हिस्सा 58 प्रतिशत से 75 प्रतिशत किया गया, 2020 की रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया (डीएपी) की समीक्षा शुरू हुई और डीएपी 2026 का प्रारूप तैयार हो रहा है। साथ ही तीनों सेनाओं ने ऑपरेशन सिंदूर के अनुभवों के आधार पर ढांचागत और तकनीकी बदलाव किए हैं।
मुख्य तथ्य
- पूंजीगत अधिग्रहण बजट में केवल स्वदेशी खरीद के लिए आरक्षित हिस्सा 58 प्रतिशत से बढ़ाकर 75 प्रतिशत किया गया; इसमें से एक-चौथाई हिस्सा विशेष रूप से निजी उद्योग के लिए आरक्षित।
- 100 करोड़ रुपये तक के पूंजीगत अधिग्रहण मामले एमएसएमई के लिए आरक्षित, बशर्ते कम से कम दो योग्य एमएसएमई भाग लें; यह सीमा 150 करोड़ रुपये तक बढ़ सकती है।
- 2025-26 में रक्षा मंत्री की अध्यक्षता वाली रक्षा अधिग्रहण परिषद ने लगभग 6.73 लाख करोड़ रुपये के 55 पूंजीगत अधिग्रहण प्रस्ताव मंजूर किए।
- मंजूर सौदों में स्वदेशी क्यूआरएसएएम वायु रक्षा प्रणाली, नेत्र का एईडब्ल्यूएंडसी एमके-1ए संस्करण, तीनों सेनाओं के लिए एमएएलई ड्रोन, 97 अतिरिक्त तेजस एमके-1ए और नौसेना के लिए राफेल मरीन शामिल।
- मेक-I श्रेणी में सरकार अब प्रोटोटाइप विकास लागत का 70 प्रतिशत वहन करती है और निजी उद्योग को पहले प्रतिबंधित परीक्षण सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।
- आईडेक्स और टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट फंड अब सीधे फास्ट-ट्रैक एओएन मंजूरी से जुड़े; सफल स्टार्टअप्स को तकनीक मान्य होने पर पांच वर्ष तक सुनिश्चित ऑर्डर।
- सेना ने जुलाई 2025 के आदेशों से एक स्वतंत्र आर्मर्ड ब्रिगेड और एक माउंटेन ब्रिगेड को 'रुद्र ऑल आर्म्स ब्रिगेड' में पुनर्गठित किया; भैरव लाइट कमांडो बटालियन में करीब 264 कर्मी।
- ऑपरेशन सिंदूर में एस-400 इकाई ने 314 किलोमीटर दूर से पाकिस्तानी विशेष मिशन विमान नष्ट किया; वायुसेना कर्मियों को 219 राष्ट्रपति वीरता पुरस्कार दिए गए।
समयरेखा
- 2020रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया (डीएपी) पहली बार लागू की गई।
- अप्रैल 2025 सेनौसेना में स्वदेशी युद्धपोतों का सिलसिला शुरू — आईएनएस अर्नाला, उसके बाद आईएनएस निस्तार।
- 7 मई 2025ऑपरेशन सिंदूर के तहत नौसेना के विशेष बलों ने आतंकी ढांचे पर सटीक हमलों में भाग लिया।
- 10 मई 2025नौसेना की उत्तरी अरब सागर में आक्रामक तैनाती को पाकिस्तान के तत्काल संघर्षविराम अनुरोध में महत्वपूर्ण भूमिका का श्रेय।
- जुलाई 2025रुद्र ऑल आर्म्स ब्रिगेड के गठन के आदेश जारी।
- अगस्त 2025आईएनएस उदयगिरि और आईएनएस हिमगिरि एक साथ कमीशन — दो अलग शिपयार्ड से अग्रिम पंक्ति के युद्धपोतों की पहली संयुक्त कमीशनिंग।
- 2025डीएपी की समीक्षा शुरू; डीएपी 2026 का प्रारूप स्पाइरल एक्विजिशन और कारोबार सुगमता पर केंद्रित।
- 2026 की शुरुआतआईएनएस अंजदीप कमीशन; इसके बाद परमाणु बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी आईएनएस अरिधमन और फ्रिगेट आईएनएस तारागिरि; बाद में कोलकाता में तीन पोतों की एक ही दिन कमीशनिंग।
किसका दाँव
- रक्षा मंत्रालय — नीतिगत सुधार, खरीद समय-सीमा घटाना और आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को अमल में लाना।
- रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) — रक्षा मंत्री की अध्यक्षता में पूंजीगत खरीद प्रस्तावों को मंजूरी; 2025-26 में 6.73 लाख करोड़ रुपये के 55 प्रस्ताव।
- निजी रक्षा उद्योग — स्वदेशी आवंटन का एक-चौथाई हिस्सा आरक्षित, परीक्षण सुविधाओं तक पहुंच और प्रोटोटाइप लागत में 70 प्रतिशत सरकारी हिस्सेदारी।
- एमएसएमई व स्टार्टअप — 100 करोड़ (150 करोड़ तक) रुपये के अनुबंध आरक्षित; आईडेक्स/टीडीएफ के जरिये पांच साल के सुनिश्चित ऑर्डर।
- विदेशी मूल उपकरण निर्माता (ओईएम) — 'बाय ग्लोबल, मैन्युफैक्चर इन इंडिया' श्रेणी के तहत भारत में सहायक कंपनियां और निर्माण इकाइयां लगाने का दबाव।
- थलसेना, नौसेना, वायुसेना — ढांचागत पुनर्गठन, यूएएस/काउंटर-यूएएस क्षमता की कमी भरना और स्वदेशी प्लेटफॉर्म का शामिल होना।
- ले. जन. पीआर शंकर (सेवानिवृत्त), प्रोफेसर, आईआईटी मद्रास — विशेषज्ञ आलोचना — मौजूदा प्रयास सामरिक व अल्पकालिक, लंबी दूरी की मानवयुक्त-अमानवयुक्त युद्ध क्षमता में अंतराल।
क्यों अहम है
रक्षा पूंजीगत बजट का तीन-चौथाई हिस्सा स्वदेशी खरीद के लिए बांधना घरेलू उद्योग को बाजार की निश्चितता देता है और आयात निर्भरता घटाता है, जिससे भारत का रक्षा औद्योगिक आधार मजबूत हो सकता है। ऑपरेशन सिंदूर ने दिखाया कि ड्रोन, काउंटर-ड्रोन और लॉइटरिंग म्युनिशन जैसे विशिष्ट क्षेत्रों में घरेलू आपूर्ति कमजोर है, इसलिए नीति और क्षमता के बीच अंतर भरना जरूरी है। विशेषज्ञों की चेतावनी है कि लंबी दूरी की युद्ध क्षमता में कमी रणनीतिक जोखिम बनी हुई है।
UPSC नज़रिया
प्रीलिम्स संकेत
- पूंजीगत अधिग्रहण बजट में स्वदेशी खरीद का हिस्सा 58% से 75%; इसका 25% निजी उद्योग के लिए आरक्षित।
- रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया (डीएपी) 2020 में लागू; 2025 में समीक्षा, डीएपी 2026 का प्रारूप — 'स्पाइरल एक्विजिशन' पर जोर।
- नई श्रेणियां: 'बाय ग्लोबल, मैन्युफैक्चर इन इंडिया' और आयात प्रतिस्थापन के लिए 'मेक-III'; मेक-I में 70% प्रोटोटाइप लागत सरकार वहन करती है।
- एमएसएमई आरक्षण: 100 करोड़ रुपये तक के मामले (दो योग्य एमएसएमई हों तो), सीमा 150 करोड़ रुपये तक।
- 2025-26 में डीएसी ने 6.73 लाख करोड़ रुपये के 55 प्रस्ताव मंजूर किए; इनमें क्यूआरएसएएम, एईडब्ल्यूएंडसी एमके-1ए, 97 तेजस एमके-1ए, राफेल मरीन।
- ऑपरेशन सिंदूर: 314 किमी से एस-400 द्वारा सबसे लंबी सतह-से-हवा मार; वायुसेना को 219 राष्ट्रपति वीरता पुरस्कार।
मेन्स दृष्टिकोण
रक्षा आत्मनिर्भरता की भारतीय रणनीति अब खरीद-केंद्रित प्रोत्साहनों के जरिये घरेलू औद्योगिक आधार खड़ा करने पर टिकी है: पूंजीगत खरीद में स्वदेशी हिस्सा 58 से 75 प्रतिशत, निजी उद्योग व एमएसएमई के लिए आरक्षित खिड़कियां, आईडेक्स-टीडीएफ को एओएन से जोड़ना, मेक-I में 70 प्रतिशत लागत साझेदारी और मेक-III से आयात प्रतिस्थापन। 'बाय ग्लोबल, मैन्युफैक्चर इन इंडिया' विदेशी ओईएम को भारत में उत्पादन और पुर्जों के स्वदेशीकरण के लिए प्रेरित करता है, जबकि 'स्पाइरल एक्विजिशन' तेजी से बदलती तकनीक को चरणबद्ध रूप से लेने की छूट देता है। ऑपरेशन सिंदूर ने दोनों पहलू उजागर किए — एकीकृत वायु कमान व नियंत्रण प्रणाली और एस-400 की सफलता, पर साथ ही यूएएस, काउंटर-यूएएस और लॉइटरिंग म्युनिशन में घरेलू आपूर्ति की कमजोरी, जिसके जवाब में कोर कमेटी, विशेष प्रयोजन कंपनी और नौ फास्ट ट्रैक विकास परियोजनाएं आईं। विशेषज्ञ दृष्टि (ले. जन. पीआर शंकर) यह चेताती है कि ये कदम सामरिक और अल्पकालिक हैं; आगे संतुलित क्षमता निर्माण तथा लंबी दूरी की क्षितिज-पार मानवयुक्त व अमानवयुक्त मारक क्षमता के अंतराल भरने वाली संरचनाएं और नीतियां जरूरी हैं, वरना नीतिगत गति क्षमता में नहीं बदलेगी।
मुख्य शब्द
- ओन्ड बाय इंडिया
- 'मेक इन इंडिया' से आगे का घोषित लक्ष्य, जिसमें हथियार प्रणालियों का स्वामित्व भी भारतीय हो।
- रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया (डीएपी)
- रक्षा खरीद के नियमों का ढांचा, 2020 में लागू; 2025 में समीक्षा और डीएपी 2026 का प्रारूप तैयार।
- स्पाइरल एक्विजिशन
- तैयार अंतिम उत्पाद का इंतजार किए बिना तेजी से बदलती तकनीक को चरणों में खरीदने की पद्धति।
- मेक-III श्रेणी
- आयात प्रतिस्थापन के लिए नई श्रेणी — भारत में डिजाइन न हुए पर स्थानीय स्तर पर बनाए जा सकने वाले उपकरण/उप-प्रणालियां।
- आईडेक्स व टीडीएफ
- नवाचार व तकनीक विकास योजनाएं, जो अब फास्ट-ट्रैक एओएन और पांच वर्ष के सुनिश्चित ऑर्डर से जुड़ी हैं।
- रुद्र ऑल आर्म्स ब्रिगेड
- आर्मर्ड और माउंटेन ब्रिगेड के पुनर्गठन से बनी संरचना, जिसका उद्देश्य विभिन्न अंगों की युद्धक शक्ति का समन्वय है।
अभ्यास प्रश्न
- रक्षा पूंजीगत खरीद में स्वदेशी आवंटन 58 से 75 प्रतिशत करने से भारत का रक्षा औद्योगिक आधार कितना मजबूत हो सकता है? परीक्षण कीजिए।
- ऑपरेशन सिंदूर के अनुभवों ने भारतीय सशस्त्र बलों के ढांचागत और तकनीकी सुधारों को किस प्रकार दिशा दी है? उदाहरणों सहित चर्चा करें।
- 'खरीद-केंद्रित प्रोत्साहन अल्पकालिक सामरिक समाधान हैं, दीर्घकालिक क्षमता निर्माण नहीं' — इस कथन के आलोक में भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता नीति का मूल्यांकन कीजिए।
सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।