उत्तर-पश्चिम भारत से मानसून की वापसी शुरू, 43% क्षेत्र में वर्षा की कमी
देश के करीब 43 प्रतिशत भौगोलिक क्षेत्र में वर्षा की कमी बनी रहने के बावजूद दक्षिण-पश्चिम मानसून ने उत्तर-पश्चिम भारत से समय पर वापसी शुरू कर दी है, आईएमडी ने शनिवार को कहा। मानसून पश्चिमी राजस्थान के कुछ हिस्सों से लौट चुका है। 19 सितंबर तक देशव्यापी वर्षा सामान्य से 15 प्रतिशत कम, 695.6 मिमी दर्ज हुई। मेघालय (-59%), आंध्र प्रदेश (-43%) और तेलंगाना (-21%) में कमी रही। उत्तरी अंडमान सागर पर बना कम दबाव 23 सितंबर के आसपास दक्षिण ओडिशा-उत्तर आंध्र तट पार कर सकता है।
स्रोत
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डेस्क ने क्या जाँचा (5)
- Southwest monsoon has withdrawn from some parts of west Rajasthan, close to the normal date of September 17 with a four-day deviation. — Attributed to IMD statement on Saturday; figure appears in source.
- Nearly 43 per cent of India's geographical area remains rain deficient. — Attributed to IMD in the source; no breakdown provided.
- Country-wide rainfall till September 19 was 15 per cent below normal at 695.6mm. — Specific figure appears in source, attributed to IMD data.
- A low pressure system over North Andaman Sea will intensify into a depression around September 21 and cross south Odisha-north Andhra Pradesh coasts around September 23. — Forecast directly quoted from IMD; predictive and subject to revision.
- State-wise deficits include Meghalaya -59%, Andhra Pradesh -43%, Telangana -21%. — Figures appear in source without individual attribution beyond IMD data.
विश्लेषकों की राय राय
सामान्य से 15 प्रतिशत कम बारिश और देश के 43 प्रतिशत भूभाग में वर्षा की कमी — यह केवल मौसम की खबर नहीं, आने वाले महीनों का एक राजनीतिक कारक भी है। आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, बिहार, कर्नाटक, केरल, राजस्थान, पंजाब और हरियाणा जैसे विविध राज्यों में 21 से 43 प्रतिशत तक की कमी एक जाना-पहचाना क्रम तैयार करती है: किसान संकट के दावे, सूखा घोषित करने और केंद्रीय राहत की मांग, तथा राज्य व केंद्र सरकारों के बीच आरोप-प्रत्यारोप। लेकिन तत्काल राजनीतिक परीक्षा प्रशासनिक है — दक्षिण ओडिशा-उत्तर आंध्र तट की ओर बढ़ रहा अल्पदबाव तंत्र सरकारों की तैयारी को कुछ ही दिनों में कसौटी पर रखेगा।
- बिहार में 36 प्रतिशत की कमी यहाँ राजनीतिक रूप से सबसे संवेदनशील आंकड़ा है, क्योंकि चुनावी रूप से सक्रिय राज्यों में ग्रामीण संकट और राहत वितरण आपस में गहराई से जुड़े रहते हैं।
- अलग-अलग दलों की सरकारों वाले कमी-प्रभावित राज्य एक ही मांग पर आ सकते हैं — बड़े केंद्रीय राहत पैकेज — जिससे यह मौसमी नतीजा केंद्र-राज्य मोलभाव का मुद्दा बन जाता है।
- आंध्र प्रदेश (-43%) और तेलंगाना (-21%) में कमजोर मानसून सिंचाई, जल बंटवारे और फसल ऋण राहत की उस स्थायी राजनीति को फिर जगाता है जो दोनों राज्यों की बहस पर छाई रहती है।
- राजस्थान, पंजाब और हरियाणा में 21 से 40 प्रतिशत तक की संभावित कमी उत्तरी कृषि पट्टी में खरीद, बिजली सब्सिडी और भूजल के सवालों को जीवित रखेगी।
- आने वाला तंत्र राजनीतिक रूप से दोतरफा असर रखता है: यह पूर्वी भारत में कमी कुछ घटा सकता है, लेकिन बाढ़ या फसल नुकसान होने पर सरकार की प्रतिक्रिया-गति ही मापदंड बनेगी।
किस पर नज़र रखें — देखना यह होगा कि राज्य सरकारें औपचारिक सूखा या संकट आकलन शुरू कर केंद्र से राहत मांगती हैं या नहीं, और तंत्र के तट से टकराने के समय ओडिशा-आंध्र तट पर निकासी तथा राहत तंत्र कितनी तेजी से दिखता है।
यह खबर केवल एक मौसम रिपोर्ट है — इसमें न फसल नुकसान, न राहत की मांग, न कोई राजनीतिक बयान और न ही यह आकलन दर्ज है कि ये वर्षा आंकड़े कृषि या चुनावी नतीजों में कैसे बदलेंगे।
गहराई से
शोध सारांश · 8 तथ्य · 7 तारीख़ें · परीक्षा के लिएसार
पृष्ठभूमि
दक्षिण-पश्चिम मानसून (जून-सितंबर) भारत की मुख्य वर्षा ऋतु है, जिसकी उत्तर-पश्चिम भारत से वापसी की सामान्य तिथि 17 सितंबर मानी जाती है। इस वर्ष मानसून की वापसी पश्चिमी राजस्थान से शुरू हो गई है, जो सामान्य तिथि के चार दिन के अंतर के साथ लगभग समय पर है। हालांकि देश के करीब 43 प्रतिशत भौगोलिक क्षेत्र में वर्षा की कमी बनी हुई है और 19 सितंबर तक देशव्यापी वर्षा सामान्य से 15 प्रतिशत कम रही। साथ ही उत्तरी अंडमान सागर पर बना कम दबाव क्षेत्र पूर्वी तट की ओर बढ़ रहा है।
मुख्य तथ्य
- आईएमडी ने शनिवार को कहा कि दक्षिण-पश्चिम मानसून पश्चिमी राजस्थान के कुछ हिस्सों से वापस लौट चुका है।
- वापसी की जलवायु-सामान्य तिथि 17 सितंबर है; इस बार चार दिन का विचलन रहा।
- शनिवार तक मानसून वापसी रेखा राजस्थान के रामगढ़, मोहनगढ़, फलोदी और खाजूवाला क्षेत्रों से गुजर रही थी।
- 19 सितंबर तक देशव्यापी वर्षा 695.6 मिमी, जो सामान्य से 15 प्रतिशत कम है।
- देश के करीब 43 प्रतिशत भौगोलिक क्षेत्र में वर्षा की कमी बनी हुई है।
- सर्वाधिक प्रभावित राज्य: मेघालय (-59%), आंध्र प्रदेश (-43%), अरुणाचल प्रदेश (-41%), बिहार (-36%), गोवा (-35%), कर्नाटक (-31%), केरल (-28%), असम (-26%), तमिलनाडु व हरियाणा (-22% प्रत्येक), तेलंगाना (-21%)।
- जून, अगस्त और सितंबर (अब तक) में वर्षा सामान्य से कम रही, जबकि जुलाई की वर्षा सामान्य से केवल 1 प्रतिशत अधिक थी।
- राजस्थान और पंजाब का मौसम 21 से 40 प्रतिशत वर्षा कमी के साथ समाप्त होने की सर्वाधिक संभावना है।
समयरेखा
- 17 सितंबरउत्तर-पश्चिम भारत से मानसून वापसी की जलवायु-सामान्य तिथि।
- 19 सितंबर तकदेशव्यापी वर्षा 695.6 मिमी, सामान्य से 15 प्रतिशत कम दर्ज।
- शनिवार (आईएमडी घोषणा)पश्चिमी राजस्थान के कुछ हिस्सों से मानसून की वापसी; वापसी रेखा रामगढ़, मोहनगढ़, फलोदी, खाजूवाला से गुजरी।
- 21 सितंबर के आसपासउत्तरी अंडमान सागर का कम दबाव क्षेत्र पश्चिम-उत्तरपश्चिम बढ़ते हुए अवदाब (डिप्रेशन) में तीव्र होने की संभावना।
- 22 सितंबर के आसपासपश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी पर गहरे अवदाब में तीव्र होने की संभावना।
- 23 सितंबर के आसपासप्रणाली के दक्षिण ओडिशा-उत्तर आंध्र प्रदेश तट को पार करने की संभावना।
- अगले तीन-चार दिनराजस्थान, पंजाब और कच्छ-सौराष्ट्र के और हिस्सों से मानसून की वापसी की संभावना।
किसका दाँव
- भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) — मानसून वापसी रेखा, वर्षा आंकड़ों और कम दबाव प्रणाली की निगरानी तथा पूर्वानुमान जारी करना।
- राजस्थान और पंजाब — मानसून की वापसी शुरू होने के साथ 21 से 40 प्रतिशत वर्षा कमी के साथ ऋतु समाप्त होने की संभावना।
- मेघालय, आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, बिहार सहित घाटे वाले राज्य — मेघालय में -59% तक की भारी वर्षा कमी; जल और कृषि पर असर।
- ओडिशा, गांगेय पश्चिम बंगाल, झारखंड, छत्तीसगढ़, सिक्किम, तटीय आंध्र प्रदेश — अगले सप्ताह मध्यम से भारी वर्षा की चेतावनी।
- किसान — वर्षा की कमी और वापसी की शुरुआत का फसल तथा सिंचाई पर प्रभाव (स्रोत में विस्तृत विवरण नहीं)।
क्यों अहम है
मानसून की वापसी की शुरुआत का अर्थ है कि वर्षा घाटे की भरपाई का समय सिमट रहा है, जबकि देश के 43 प्रतिशत भौगोलिक क्षेत्र में कमी बनी हुई है। इससे राजस्थान और पंजाब जैसे राज्यों में जल भंडारण और रबी की तैयारी पर दबाव पड़ सकता है। दूसरी ओर बंगाल की खाड़ी में बनने वाली प्रणाली पूर्वी और मध्य भारत में भारी वर्षा ला सकती है, जिससे अत्यधिक और अपर्याप्त वर्षा का असमान वितरण उभरता है।
UPSC नज़रिया
प्रीलिम्स संकेत
- उत्तर-पश्चिम भारत से दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी की सामान्य तिथि: 17 सितंबर।
- 19 सितंबर तक देशव्यापी वर्षा: 695.6 मिमी, सामान्य से 15% कम।
- सर्वाधिक वर्षा कमी वाला राज्य: मेघालय (-59%)।
- जुलाई की वर्षा सामान्य से 1% अधिक; जून, अगस्त, सितंबर में सामान्य से कम।
- कम दबाव प्रणाली का क्रम: कम दबाव (21 सितंबर) → अवदाब → गहरा अवदाब (22 सितंबर) → तट पार (23 सितंबर)।
- मानसून वापसी रेखा के स्थान: रामगढ़, मोहनगढ़, फलोदी, खाजूवाला (राजस्थान)।
मेन्स दृष्टिकोण
दक्षिण-पश्चिम मानसून की उत्तर-पश्चिम भारत से लगभग समय पर वापसी (सामान्य तिथि 17 सितंबर से चार दिन के विचलन के साथ) इस तथ्य के बीच हुई है कि देश के करीब 43 प्रतिशत भौगोलिक क्षेत्र में वर्षा की कमी बनी हुई है और 19 सितंबर तक देशव्यापी वर्षा 695.6 मिमी यानी सामान्य से 15 प्रतिशत कम रही। मासिक वितरण असंतुलित रहा—जून, अगस्त और सितंबर में कमी, जुलाई में मात्र 1 प्रतिशत अधिक—जो यह दर्शाता है कि कुल आंकड़े से अधिक महत्वपूर्ण वर्षा का समय और स्थानिक वितरण है। मेघालय (-59%) से लेकर तेलंगाना (-21%) तक फैली कमी पूर्वोत्तर, दक्षिण और गंगा के मैदानी भागों को एक साथ प्रभावित करती है, जबकि राजस्थान और पंजाब 21 से 40 प्रतिशत घाटे के साथ ऋतु समाप्त कर सकते हैं। इसी समय उत्तरी अंडमान सागर की कम दबाव प्रणाली 23 सितंबर के आसपास दक्षिण ओडिशा-उत्तर आंध्र तट पार कर ओडिशा, गांगेय पश्चिम बंगाल, झारखंड, छत्तीसगढ़, सिक्किम और तटीय आंध्र में मध्यम से भारी वर्षा दे सकती है—अर्थात सूखे और अतिवृष्टि का साथ-साथ जोखिम। आगे का रास्ता आईएमडी के पूर्वानुमानों पर आधारित जल भंडारण प्रबंधन, कमी वाले क्षेत्रों में सिंचाई सहायता और भारी वर्षा वाले राज्यों में आपदा तैयारी के समन्वय में है; स्रोत में इससे आगे की नीतिगत घोषणाओं का उल्लेख नहीं है।
मुख्य शब्द
- दक्षिण-पश्चिम मानसून
- भारत की प्रमुख वर्षा ऋतु, जिसकी उत्तर-पश्चिम भारत से वापसी की सामान्य तिथि 17 सितंबर है।
- मानसून वापसी रेखा
- वह रेखा जो दर्शाती है कि मानसून किन क्षेत्रों से लौट चुका है; शनिवार को यह रामगढ़, मोहनगढ़, फलोदी, खाजूवाला से गुजरी।
- आईएमडी
- भारत मौसम विज्ञान विभाग—राष्ट्रीय मौसम एजेंसी, जिसने वापसी और वर्षा आंकड़े जारी किए।
- कम दबाव क्षेत्र
- वायुदाब की निम्न प्रणाली; उत्तरी अंडमान सागर पर बनी प्रणाली उत्तर आंध्र-ओडिशा तट की ओर बढ़ रही है।
- अवदाब और गहरा अवदाब
- कम दबाव प्रणाली के तीव्र होने के क्रमिक चरण; 21 सितंबर के आसपास अवदाब, 22 सितंबर के आसपास गहरा अवदाब अपेक्षित।
- वर्षा की कमी (रेन डेफिसिट)
- सामान्य से कम वर्षा; इस ऋतु में देशव्यापी स्तर पर 15 प्रतिशत कमी दर्ज।
अभ्यास प्रश्न
- मानसून की वापसी की प्रक्रिया क्या है और इस वर्ष उत्तर-पश्चिम भारत से इसकी शुरुआत सामान्य तिथि के संदर्भ में कैसी रही? चर्चा करें।
- वर्षा के कुल आंकड़ों के बजाय उसके स्थानिक और मासिक वितरण पर ध्यान देना क्यों आवश्यक है? इस मानसून ऋतु के आंकड़ों के आधार पर परीक्षण करें।
- बंगाल की खाड़ी में बनने वाली कम दबाव प्रणालियाँ पूर्वी तटीय राज्यों के लिए अवसर और जोखिम दोनों कैसे बनती हैं? उदाहरण सहित समझाइए।
सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।
