राजनीति मुंबई

अमित शाह ने यूसीसी लागू करने के लिए 2029 की समयसीमा तय की

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को मुंबई में घोषणा की कि 2029 लोकसभा चुनाव से पहले एनडीए शासित सभी 21 राज्यों में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू की जाएगी। अधिकारियों ने बताया कि महाराष्ट्र म���ं मसौदा तैयार करने वाली सात सदस्यीय समिति अब तक केवल एक बार बैठक कर सकी है। पूर्व सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश रंजना देसाई की अध्यक्षता वाली समिति को जुलाई में छह महीने का समय दिया गया था। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि सरकार दिसंबर शीतकालीन सत्र में विधेयक पेश करने का लक्ष्य रखती है।

स्रोत

Indian Express — Cities · मूल ख़बर पढ़ें ↗

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डेस्क जाँच · स्रोत से तुलना की

डेस्क ने क्या जाँचा (5)
  • Amit Shah said UCC would be implemented in all 21 BJP-NDA ruled states before the 2029 Lok Sabha elections. — Attributed to Amit Shah's Sunday address in Mumbai as reported in the source.
  • Maharashtra's seven-member UCC drafting committee, headed by former Supreme Court judge Ranjana Desai, has met only once. — Stated in the source and supported by unnamed officials; no committee record cited.
  • CM Devendra Fadnavis said the state aims to table the UCC Bill in the Assembly during the December winter session. — Attributed to Fadnavis in the source.
  • Uttarakhand implemented UCC in January 2025; Gujarat, Assam and Madhya Pradesh passed Bills awaiting presidential approval. — Figure and status appear in the source, attributed to the state government.
  • The committee was given six months in July to submit its report. — Appears in source without named attribution.

विश्लेषकों की राय राय

AI राजनीतिक विश्लेषक

समान नागरिक संहिता पर 2029 की समयसीमा तय करके अमित शाह ने भाजपा के एक प्रमुख वैचारिक वादे को सीधे अगले लोकसभा चुनाव के ढांचे में जोड़ दिया है। राज्य-दर-राज्य रास्ता अपनाना ही रणनीति है — इससे केंद्र में सहयोगियों की सहमति या संसदीय संख्या के दबाव के बिना एजेंडा आगे बढ़ता है। लेकिन महाराष्ट्र की मसौदा समिति अब तक केवल एक बार बैठी है, जबकि मुख्यमंत्री दिसंबर में विधेयक लाने का लक्ष्य बता रहे हैं — यह अंतर बताता है कि राजनीतिक घोषणा की रफ्तार और प्रशासनिक प्रक्रिया की रफ्तार एक नहीं होती।

  • एनडीए शासित 21 राज्यों को एक ही समयसीमा से बांधना यूसीसी को एक राष्ट्रीय कथानक बना देता है, जो राज्यों के चुनावों से 2029 तक लगातार चल सकता है।
  • खबर के अनुसार उत्तराखंड ने सबसे पहले लागू किया, जबकि गुजरात, असम और मध्य प्रदेश के विधेयक राष्ट्रपति की मंजूरी की प्रतीक्षा में हैं — यानी घोषणा और अमल के बीच संस्थागत अड़चनें बनी हुई हैं।
  • पूर्व सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली समिति और जनता से राय लेने की प्रक्रिया प्रस्ताव को प्रक्रियात्मक वैधता तथा जल्दबाजी के आरोपों से राजनीतिक कवच देती है।
  • विवाह, तलाक, लिव-इन, उत्तराधिकार और गोद लेने जैसे विषयों पर प्रश्नावली बहस को केवल धार्मिक दायरे से हटाकर व्यापक सामाजिक और पीढ़ीगत मुद्दों तक ले जा सकती है।
  • जुलाई में मिली छह महीने की अवधि और दिसंबर सत्र का लक्ष्य मिलाकर समयसीमा बहुत कसी हुई है, जिससे विपक्ष को प्रक्रिया में जल्दबाजी का मुद्दा मिल जाता है।

किस पर नज़र रखें — देखना यह होगा कि महाराष्ट्र समिति की अगली बैठकें और जनता से राय लेने की प्रक्रिया दिसंबर के शीतकालीन सत्र में विधेयक लाने के लिए समय पर शुरू होती हैं या नहीं — इससे पता चलेगा कि यह समयसीमा राजनीतिक संदेश है या विधायी योजना।

यह खबर यह स्पष्ट नहीं करती कि मसौदे में क्या होगा, एनडीए सहयोगी या अन्य राज्य इस समयसीमा पर कैसी प्रतिक्रिया देंगे, और लंबित राष्ट्रपति मंजूरी कब मिलेगी।

गहराई से

शोध सारांश · 8 तथ्य · 7 तारीख़ें · परीक्षा के लिए

सार

पृष्ठभूमि

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को मुंबई में घोषणा की कि 2029 लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा-नीत एनडीए शासित सभी 21 राज्यों में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू की जाएगी। समान नागरिक संहिता का आशय विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेने जैसे व्यक्तिगत मामलों में सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून से है। उत्तराखंड जनवरी 2025 में यूसीसी लागू करने वाला पहला राज्य बना, जबकि गुजरात, असम और मध्य प्रदेश के विधेयक राष्ट्रपति की अंतिम मंजूरी की प्रतीक्षा में हैं। महाराष्ट्र में मसौदा तैयार करने वाली सात सदस्यीय समिति अब तक केवल एक बार बैठक कर सकी है।

मुख्य तथ्य

  • अमित शाह ने रविवार को मुंबई में कहा कि 2029 लोकसभा चुनाव से पहले एनडीए शासित सभी 21 राज्यों में यूसीसी लागू की जाएगी।
  • महाराष्ट्र की यूसीसी मसौदा समिति सात सदस्यीय है और अब तक केवल एक बार — पिछले महीने — बैठक कर पाई है।
  • समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश रंजना देसाई कर रही हैं; जुलाई में उसे रिपोर्ट देने के लिए छह महीने का समय दिया गया था।
  • समिति में पूर्व बॉम्बे हाईकोर्ट न्यायाधीश आर सी चव्हाण व एस जी मेहरे, पूर्व मुख्य सचिव डी के जैन, पूर्व महाधिवक्ता बीरेंद्र सराफ, पद्मश्री रमेश पतंगे और शिक्षा विशेषज्ञ सुवर्णा रावल शामिल हैं।
  • मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शाह की घोषणा के एक दिन बाद कहा कि सरकार दिसंबर के शीतकालीन सत्र में विधानसभा में यूसीसी विधेयक पेश करने का लक्ष्य रखती है।
  • समिति विवाह, तलाक, लिव-इन संबंध, उत्तराधिकार और गोद लेने जैसे विषयों पर प्रश्नावली तैयार कर जनता व हितधारकों की राय लेगी।
  • परामर्श उत्तराखंड की तरह वेबसाइट के जरिये हो सकता है और इसमें कानूनी व पैरा-लीगल स्वयंसेवक भी शामिल किए जा सकते हैं।
  • उत्तराखंड जनवरी 2025 में यूसीसी लागू करने वाला पहला राज्य बना; गुजरात, असम और मध्य प्रदेश के यूसीसी विधेयक राष्ट्रपति की मंजूरी के इंतजार में हैं।

समयरेखा

  1. जनवरी 2025उत्तराखंड यूसीसी लागू करने वाला देश का पहला राज्य बना।
  2. जुलाईरंजना देसाई की अध्यक्षता वाली महाराष्ट्र समिति को रिपोर्ट सौंपने के लिए छह महीने का समय दिया गया।
  3. पिछले महीनेसमिति की पहली और अब तक की एकमात्र बैठक हुई।
  4. रविवारअमित शाह ने मुंबई में एनडीए शासित सभी 21 राज्यों में 2029 चुनाव से पहले यूसीसी लागू करने की घोषणा की।
  5. अगले दिन (सोमवार)मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि मसौदा तैयार हो रहा है और जल्द ही यूसीसी लागू होगी।
  6. दिसंबर (शीतकालीन सत्र)महाराष्ट्र सरकार का विधानसभा में यूसीसी विधेयक पेश करने का लक्ष्य।
  7. 2029 लोकसभा चुनाव से पहलेएनडीए शासित 21 राज्यों में यूसीसी लागू करने की घोषित समयसीमा।

किसका दाँव

  • केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह / भाजपा-नीत एनडीए — 21 एनडीए शासित राज्यों में 2029 से पहले यूसीसी लागू करने की राजनीतिक प्रतिबद्धता।
  • महाराष्ट्र सरकार व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस — दिसंबर शीतकालीन सत्र में विधेयक पेश करने का लक्ष्य पूरा करना।
  • रंजना देसाई समिति — जुलाई से मिले छह महीने में मसौदा व सिफारिशें तैयार करना, जबकि अब तक एक ही बैठक हुई।
  • आम नागरिक व युवा, हितधारक — विवाह, तलाक, लिव-इन, उत्तराधिकार व गोद लेने पर प्रश्नावली के जरिये राय देने का अवसर।
  • गुजरात, असम, मध्य प्रदेश — पारित यूसीसी विधेयक राष्ट्रपति की अंतिम मंजूरी की प्रतीक्षा में हैं।
  • उत्तराखंड — जनवरी 2025 में यूसीसी लागू करने वाला पहला राज्य; परामर्श प्रक्रिया का मॉडल।

क्यों अहम है

यूसीसी व्यक्तिगत कानूनों — विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेना — से जुड़ा विषय है, इसलिए राज्य-स्तर पर इसे लागू करना करोड़ों नागरिकों के दैनिक जीवन को प्रभावित करता है। शाह की 2029 की समयसीमा और महाराष्ट्र की धीमी समिति प्रक्रिया के बीच का अंतर दिखाता है कि राजनीतिक घोषणा और विधायी-प्रशासनिक तैयारी में तालमेल की चुनौती है। साथ ही राष्ट्रपति की मंजूरी में अटके राज्य कानून केंद्र-राज्य विधायी संबंधों के पहलू को उजागर करते हैं।

UPSC नज़रिया

प्रीलिम्स संकेत

  • उत्तराखंड जनवरी 2025 में यूसीसी लागू करने वाला भारत का पहला राज्य बना।
  • गुजरात, असम और मध्य प्रदेश ने यूसीसी विधेयक पारित किए, जो राष्ट्रपति की मंजूरी की प्रतीक्षा में हैं।
  • महाराष्ट्र की यूसीसी मसौदा समिति की अध्यक्ष: सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश रंजना देसाई; कुल सात सदस्य।
  • अमित शाह की घोषित समयसीमा: 2029 लोकसभा चुनाव से पहले एनडीए शासित सभी 21 राज्यों में यूसीसी।
  • महाराष्ट्र समिति को जुलाई में छह महीने का समय; विधेयक दिसंबर शीतकालीन सत्र में पेश करने का लक्ष्य।
  • प्रश्नावली के विषय: विवाह, तलाक, लिव-इन संबंध, उत्तराधिकार और गोद लेना।

मेन्स दृष्टिकोण

समान नागरिक संहिता को लेकर वर्तमान बहस अब सैद्धांतिक न रहकर क्रियान्वयन की बन गई है: उत्तराखंड ने जनवरी 2025 में इसे लागू किया, गुजरात, असम व मध्य प्रदेश के विधेयक राष्ट्रपति की मंजूरी के इंतजार में हैं, और गृह मंत्री अमित शाह ने 2029 लोकसभा चुनाव से पहले एनडीए शासित सभी 21 राज्यों में इसे लागू करने की समयसीमा घोषित की है। महाराष्ट्र का उदाहरण इस राजनीतिक संकल्प और प्रशासनिक गति के अंतर को दर्शाता है — जुलाई में छह महीने का समय पाने वाली रंजना देसाई समिति अब तक केवल एक बार बैठी है, जबकि सरकार दिसंबर के शीतकालीन सत्र में विधेयक लाने का लक्ष्य रखती है। चूंकि विषय विवाह, तलाक, लिव-इन संबंध, उत्तराधिकार और गोद लेने जैसे संवेदनशील व्यक्तिगत मामलों को छूता है, इसलिए मसौदे की वैधता के लिए व्यापक सार्वजनिक परामर्श आवश्यक है; समिति प्रश्नावली, वेबसाइट-आधारित परामर्श (उत्तराखंड मॉडल) और कानूनी-पैरा-लीगल स्वयंसेवकों के उपयोग पर विचार कर रही है। आगे का रास्ता यही है कि समयसीमा की जल्दबाजी परामर्श की गुणवत्ता पर भारी न पड़े और राज्य कानूनों को राष्ट्रपति की मंजूरी सहित संवैधानिक प्रक्रिया से गुजारा जाए।

मुख्य शब्द

समान नागरिक संहिता (यूसीसी)
विवाह, तलाक, लिव-इन संबंध, उत्तराधिकार और गोद लेने जैसे व्यक्तिगत मामलों पर सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून का प्रस्ताव।
रंजना देसाई समिति
महाराष्ट्र का यूसीसी मसौदा तैयार करने वाली सात सदस्यीय समिति, अध्यक्ष सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश रंजना देसाई।
एनडीए शासित 21 राज्य
भाजपा-नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के शासन वाले वे 21 राज्य जहां 2029 से पहले यूसीसी लागू करने की घोषणा हुई।
राष्ट्रपति की मंजूरी
गुजरात, असम व मध्य प्रदेश के पारित यूसीसी कानूनों को प्रभावी होने के लिए आवश्यक अंतिम स्वीकृति, जो अभी लंबित है।
शीतकालीन सत्र
महाराष्ट्र विधानसभा का दिसंबर सत्र, जिसमें सरकार यूसीसी विधेयक पेश करने का लक्ष्य रखती है।
उत्तराखंड मॉडल परामर्श
वेबसाइट के जरिये जनता से राय लेने की प्रक्रिया, जिसे महाराष्ट्र भी अपना सकता है।

अभ्यास प्रश्न

  1. समान नागरिक संहिता को राज्य-स्तर पर लागू करने से जुड़ी संवैधानिक और प्रशासनिक चुनौतियों की चर्चा करें, महाराष्ट्र और उत्तराखंड के अनुभव के आलोक में।
  2. क्या यूसीसी जैसे संवेदनशील विषय पर तय राजनीतिक समयसीमा व्यापक सार्वजनिक परामर्श की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकती है? तर्क सहित उत्तर दें।
  3. राज्यों द्वारा पारित यूसीसी विधेयकों के लिए राष्ट्रपति की मंजूरी की आवश्यकता केंद्र-राज्य विधायी संबंधों के बारे में क्या दर्शाती है?

सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।

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