सुपर अल नीनो से दुनिया में 4.51 लाख अतिरिक्त मौतें संभव: अध्ययन

शिकागो विश्वविद्यालय के बुधवार को जारी अध्ययन के अनुसार, मौजूदा "सुपर अल नीनो" के कारण अगले छह महीनों में दुनिया भर में करीब 4,51,000 अतिरिक्त मौतें हो सकती हैं। भारत में गर्मी से जुड़ी 15,800 (± 1,600) अतिरिक्त मौतों का अनुमान है, जिनमें से लगभग आधी दिसंबर से फरवरी के बीच होंगी। वैश्विक भूमि तापमान सामान्य से 1.2 डिग्री सेल्सियस अधिक रहेगा और अत्यधिक गर्म दिन 44% बढ़ेंगे। सहेल में 66,800, नाइजीरिया में 31,400 मौतें संभव।

स्रोत

Hindustan Times — India · मूल ख़बर पढ़ें ↗

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डेस्क जाँच · कुछ दावे ध्यान से पढ़ें

डेस्क ने क्या जाँचा (5)
  • 451,000 additional deaths projected globally over the next six months due to Super El Niño. — Attributed to a University of Chicago study released Wednesday; figure appears in source.
  • India may see 15,800 (± 1,600) additional heat-related deaths, nearly half between December and February. — Figure and range appear in source, attributed to the same study.
  • Global land temperatures will be 1.2°C above normal, with 44% more extremely hot days than a normal year. — Figures appear in source, attributed to the study; no external verification possible.
  • Projection window given as September 2026 to February 2027, while elsewhere stated as 'next six months'. — Internally inconsistent in the source; dates should be checked against the original study.
  • 6,800 people dead or missing in a recent Nepal flash flood; floods struck a 72 km stretch of the Trishuli River on August 26. — Cited within the study as a comparison; no independent source given in the text.

विश्लेषकों की राय राय

AI रणनीतिक मामलों के विश्लेषक

छह महीनों में लगभग 4,51,000 अतिरिक्त मौतों का अनुमान केवल एक स्वास्थ्य आंकड़ा नहीं है; यह ग्लोबल साउथ में राज्य-क्षमता की कड़ी परीक्षा है, और जो देश इसमें विफल होते हैं वहाँ अस्थिरता कई गुना बढ़ती है। अनुमानित मौतों का सहेल क्षेत्र में केंद्रित होना — 66,800, जिसमें अकेले नाइजीरिया में 31,400 — उन इलाकों से मेल खाता है जहाँ शासन पहले से कमज़ोर और भूभाग विवादित है, और यही वे जगहें हैं जहाँ जलवायु दबाव सबसे तेज़ी से सुरक्षा दबाव बन जाता है। भारत के लिए यह निष्कर्ष कि उसकी अनुमानित 15,800 गर्मी-जनित मौतों में से लगभग आधी दिसंबर-फरवरी में होंगी, बताता है कि आपदा-प्रबंधन का कैलेंडर अब पारंपरिक ग्रीष्मकालीन योजना-चक्र से मेल नहीं खाता।

  • सहेल और नाइजीरिया में केंद्रित गर्मी-जनित मौतें उन राज्यों पर पड़ रही हैं जहाँ पानी, चरागाह और खेती की ज़मीन पर टकराव पहले से संघर्ष का कारण है — यानी यह स्वास्थ्य के साथ-साथ सुरक्षा का भी पूर्वानुमान है।
  • अध्ययन का यह ढाँचा कि यह एल नीनो दो दशक बाद अपेक्षित तापमान की झलक है, संकेत देता है कि रक्षा और आपदा एजेंसियों को भविष्य के स्थायी परिचालन माहौल का पूर्वाभ्यास मिल रहा है।
  • भारत में सर्दियों की ओर झुकी मृत्यु-संख्या का अर्थ है कि हीट-एक्शन योजना, स्वास्थ्य क्षमता और श्रमिक सुरक्षा को कैलेंडर में पहले लाना होगा, जिसका असर राज्य-स्तरीय आपदा तंत्र पर पड़ेगा।
  • सहेल, दक्षिण-पूर्व एशिया, इंडोनेशिया और ब्राज़ील पर एक साथ पड़ता दबाव वैश्विक मानवीय राहत तंत्र को खींच सकता है, जिससे क्षेत्रीय सहायता क्षमता प्रभाव के औज़ार के रूप में अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है।
  • लेखकों का यह ज़ोर कि लक्षित आपातकालीन कार्रवाई से हज़ारों जानें बचाई जा सकती हैं, पूर्व-चेतावनी और तैयारी को बाद के संकट-प्रबंधन की तुलना में कम लागत, अधिक लाभ वाला निवेश बनाता है।

किस पर नज़र रखें — देखना होगा कि चिह्नि�� क्षेत्रों की सरकारें और क्षेत्रीय संस्थाएँ आने वाले हफ़्तों में सलाह-परामर्श से आगे बढ़कर वित्त-पोषित हीट-एक्शन और स्वास्थ्य-क्षमता कदम उठाती हैं या नहीं, और राहत क्षमता रखने वाले दानदाता व सेनाएँ पहले से संसाधन तैनात करती हैं या घटना के बाद प्रतिक्रिया देती हैं।

ये मॉडल-आधारित अनुमान हैं, दर्ज मौतें नहीं, और खबर यह स्पष्ट नहीं करती कि अनुमानों की पुष्टि कैसे हुई, भारत के बताए अंतर के अलावा अन्य देशों के आंकड़ों में कितनी अनिश्चितता है, या इस एल नीनो और संघर्ष या पलायन के बीच कोई वास्तविक संबंध है।

गहराई से

शोध सारांश · 8 तथ्य · 5 तारीख़ें · परीक्षा के लिए

सार

पृष्ठभूमि

शिकागो विश्वविद्यालय की क्लाइमेट इम्पैक्ट लैब ने बुधवार को जारी अध्ययन में अनुमान लगाया है कि मौजूदा "सुपर अल नीनो" के कारण सामान्य वर्ष की तुलना में अगले छह महीनों में दुनिया भर में लगभग 4,51,000 अतिरिक्त मौतें हो सकती हैं। अल नीनो पूर्वी प्रशांत महासागर में समुद्री सतह के तापमान का समय-समय पर (हर दो से सात वर्ष में) होने वाला गर्म होना है, जो व्यापारिक पवनों के कमजोर पड़ने से उत्पन्न होता है और वर्षा व तापमान के स्वरूप को प्रभावित करता है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन ने चेताया है कि इस वर्ष का अल नीनो निगरानी शुरू होने के बाद का सबसे प्रबल हो सकता है। अध्ययन का उद्देश्य नीति-निर्णयकर्ताओं को यह बताना है कि तत्काल आपात कार्रवाई कहाँ की जाए।

मुख्य तथ्य

  • अध्ययन के अनुसार अगले छह महीनों में विश्व में लगभग 4,51,000 अतिरिक्त मौतें होने का अनुमान, जो सितंबर 2026 से फरवरी 2027 की अवधि के लिए बताया गया है।
  • भारत में गर्मी से जुड़ी 15,800 (± 1,600) अतिरिक्त मौतों का अनुमान; इनमें से लगभग आधी केवल दिसंबर से फरवरी के तीन महीनों में।
  • आने वाले महीनों में वैश्विक भूमि तापमान सामान्य से 1.2 डिग्री सेल्सियस अधिक रहने का अनुमान।
  • सामान्य वर्ष की तुलना में अत्यधिक गर्म दिनों की संख्या 44% अधिक रहने का अनुमान।
  • अफ्रीका के साहेल क्षेत्र (नाइजीरिया, सूडान, नाइजर, चाड) में 66,800 अतिरिक्त मौतें, जिनमें अकेले नाइजीरिया में 31,400।
  • दक्षिण-पूर्व एशिया (फिलीपींस, वियतनाम, थाईलैंड, कंबोडिया) में 19,400; इंडोनेशिया में 19,300; दक्षिण अमेरिका में सर्वाधिक प्रभावित ब्राज़ील में 13,300 मौतें संभव।
  • अध्ययन के अनुसार 4,51,000 मौतें नेपाल की हाल की फ्लैश फ्लड में मृत या लापता माने गए 6,800 लोगों से लगभग 65 गुना अधिक हैं।
  • अल नीनो जून में शुरू हुआ और उत्तरी गोलार्ध के वसंत तक चलने की संभावना है; यह 12 महीने तक रह सकता है।

समयरेखा

  1. जूनमौजूदा अल नीनो की शुरुआत; यह उत्तरी गोलार्ध के वसंत तक बने रहने का अनुमान।
  2. 26 अगस्तफ्लैश फ्लड और मलबे के बहाव से चीन-नेपाल सीमा पर ग्यिरोंग पोर्ट नष्ट; नेपाल की त्रिशूली नदी के 72 किमी हिस्से में दर्जनों बस्तियाँ प्रभावित।
  3. बुधवारशिकागो विश्वविद्यालय की क्लाइमेट इम्पैक्ट लैब का अध्ययन जारी।
  4. सितंबर 2026 से फरवरी 2027इस अवधि के लिए 4,51,000 अतिरिक्त मौतों का प्रक्षेपण, जिसका सर्वाधिक प्रभाव ग्लोबल साउथ पर।
  5. दिसंबर से फरवरीभारत की अनुमानित अतिरिक्त मौतों में से लगभग आधी इन तीन महीनों में; गर्मी के मौसम तक बढ़ती रहने की आशंका।

किसका दाँव

  • भारत — गर्मी से जुड़ी 15,800 (± 1,600) अतिरिक्त मौतों का अनुमान; लगभग आधी दिसंबर-फरवरी में और गर्मियों तक बढ़ने की आशंका।
  • साहेल देश (नाइजीरिया, सूडान, नाइजर, चाड) — 66,800 अतिरिक्त मौतों का अनुमान, जिसमें नाइजीरिया में 31,400 — सर्वाधिक प्रभावित क्षेत्र।
  • ग्लोबल साउथ के देश — अध्ययन के अनुसार मौतों का बोझ विशेष रूप से इन्हीं देशों पर पड़ेगा, जिससे जलवायु शमन की आवश्यकता उजागर होती है।
  • शिकागो विश्वविद्यालय / क्लाइमेट इम्पैक्ट लैब — अध्ययन के लेखक; तापमान के फसलों पर असर के बाद अब मृत्यु पर असर का अनुमान लगाने का दावा।
  • विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) — चेतावनी दी कि इस वर्ष का अल नीनो निगरानी शुरू होने के बाद किसी भी घटना से प्रबल और "ऑफ द चार्ट्स" हो सकता है।
  • नीति-निर्णयकर्ता व स्वास्थ्य तंत्र — हीट वॉर्निंग, कूलिंग सेंटर, हाइड्रेशन स्टेशन, श्रमिक सुरक्षा और स्वास्थ्य क्षमता विस्तार से हज़ारों जानें बचाने का अवसर।
  • कमजोर वर्ग व बाहरी कामगार — अत्यधिक गर्म दिनों में 44% वृद्धि से सर्वाधिक जोखिम; स्वास्थ्य आउटरीच के लक्षित समूह।

क्यों अहम है

अध्ययन अल नीनो को केवल मौसमी परिघटना नहीं, बल्कि एक बड़े सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल के रूप में प्रस्तुत करता है, जिसमें मौतों की संख्या हाल की नेपाल आपदा से लगभग 65 गुना है। भारत के लिए संकेत स्पष्ट है कि गर्मी से होने वाली मौतें सर्दियों के महीनों में भी होंगी और गर्मियों तक बढ़ेंगी। अध्ययन इसे "भविष्य का पोस्टकार्ड" कहता है — यानी जलवायु परिवर्तन 20 वर्ष बाद जो तापमान देगा, उसकी झलक अब मिल रही है, जिससे अनुकूलन में निवेश की तात्कालिकता बढ़ जाती है।

UPSC नज़रिया

प्रीलिम्स संकेत

  • अल नीनो: व्यापारिक पवनों के कमजोर होने से पूर्वी प्रशांत में समुद्री सतह का समय-समय पर गर्म होना, हर 2-7 वर्ष में, 12 महीने तक रह सकता है।
  • अध्ययन: शिकागो विश्वविद्यालय की क्लाइमेट इम्पैक्ट लैब; सह-संस्थापक माइकल ग्रीनस्टोन, सह-लेखक टम्मा कार्लटन (फैकल्टी हेड ऑफ रिसर्च)।
  • प्रक्षेपण: वैश्विक 4,51,000 अतिरिक्त मौतें; भारत 15,800 (± 1,600); साहेल 66,800; नाइजीरिया 31,400; इंडोनेशिया 19,300; ब्राज़ील 13,300।
  • वैश्विक भूमि तापमान सामान्य से 1.2°C अधिक; अत्यधिक गर्म दिन 44% अधिक।
  • WMO की चेतावनी: इस वर्ष का अल नीनो निगरानी शुरू होने के बाद सबसे प्रबल और "ऑफ द चार्ट्स" हो सकता है।
  • 26 अगस्त: चीन-नेपाल सीमा पर ग्यिरोंग पोर्ट नष्ट; त्रिशूली नदी के 72 किमी क्षेत्र में बस्तियाँ प्रभावित; 6,800 मृत/लापता।

मेन्स दृष्टिकोण

अल नीनो जैसी प्राकृतिक जलवायु परिवर्तनशीलता अब मानवजनित तापवृद्धि के साथ मिलकर मृत्यु-दर का सीधा कारक बन रही है: शिकागो विश्वविद्यालय की क्लाइमेट इम्पैक्ट लैब के अनुसार वैश्विक भूमि तापमान सामान्य से 1.2°C अधिक और अत्यधिक गर्म दिन 44% अधिक होने से छह महीनों में 4,51,000 अतिरिक्त मौतें संभव हैं, जिनका बोझ मुख्यतः ग्लोबल साउथ — साहेल (66,800), दक्षिण-पूर्व एशिया (19,400), इंडोनेशिया (19,300), ब्राज़ील (13,300) और भारत (15,800 ± 1,600) — पर पड़ेगा। कारण दोहरे हैं: व्यापारिक पवनों के कमजोर होने से उत्पन्न समुद्री ऊष्मा, और कम आय वाले उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में सीमित अनुकूलन क्षमता व स्वास्थ्य ढाँचा। भारत के लिए विशेष चिंता यह है कि मौतों का लगभग आधा हिस्सा दिसंबर-फरवरी में ही आएगा, यानी गर्मी का जोखिम अब केवल मई-जून तक सीमित नहीं। आगे का रास्ता अध्ययन द्वारा सुझाए उपायों में है — हीट वॉर्निंग, कमजोर आबादी तक स्वास्थ्य आउटरीच, कूलिंग सेंटर व हाइड्रेशन स्टेशन, श्रमिक सुरक्षा और स्वास्थ्य तंत्र की क्षमता विस्तार — साथ ही जलवायु शमन। जैसा कार्लटन कहती हैं, 20 वर्ष बाद जब आज का चरम तापमान सामान्य बन जाएगा तो स्थायी आपातकाल से बचने के लिए तैयारी और नियोजन के उपकरणों में अभी संसाधन जुटाने होंगे।

मुख्य शब्द

सुपर अल नीनो
अल नीनो की असामान्य रूप से प्रबल अवस्था; WMO के अनुसार इस वर्ष का अल नीनो निगरानी शुरू होने के बाद किसी भी घटना से अधिक तीव्र हो सकता है।
अल नीनो
व्यापारिक पवनों के कमजोर होने से पूर्वी प्रशांत में समुद्री सतह के तापमान का हर 2-7 वर्ष में होने वाला गर्म होना, जो वर्षा व तापमान स्वरूप बदलता है।
क्लाइमेट इम्पैक्ट लैब
शिकागो विश्वविद्यालय से जुड़ी शोध संस्था, जिसने तापमान के फसलों और अब मृत्यु पर प्रभाव का अनुमान लगाने वाला यह अध्ययन जारी किया।
अतिरिक्त मौतें (एक्सेस डेथ्स)
सामान्य वर्ष की तुलना में अपेक्षा से अधिक होने वाली मौतें; यहाँ अल नीनो की गर्मी के कारण छह महीनों में 4,51,000 का अनुमान।
साहेल
अफ्रीका का क्षेत्र जिसमें नाइजीरिया, सूडान, नाइजर और चाड शामिल; अध्ययन में सर्वाधिक 66,800 अतिरिक्त मौतों का अनुमान।
"भविष्य का पोस्टकार्ड"
अध्ययन का वाक्यांश — मौजूदा अल नीनो वही तापमान ला रहा है जो जलवायु परिवर्तन 20 वर्ष बाद देगा, यानी अनुकूलन के बिना भविष्य की झलक।

अभ्यास प्रश्न

  1. अल नीनो क्या है और यह वर्षा तथा तापमान के स्वरूप को कैसे प्रभावित करता है? "सुपर अल नीनो" के मानव स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों की विवेचना कीजिए।
  2. शिकागो विश्वविद्यालय के अध्ययन के अनुसार अल नीनो से होने वाली मौतों का बोझ ग्लोबल साउथ पर अधिक क्यों है? भारत के लिए इसके नीतिगत निहितार्थ बताइए।
  3. "अल नीनो हमारे भविष्य का पोस्टकार्ड है" — इस कथन के आलोक में ऊष्मा-अनुकूलन (हीट एडाप्टेशन) उपायों और आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र की भूमिका का मूल्यांकन कीजिए।

सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।

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