आईआईएम में समान यूजी प्रवेश परीक्षा, केंद्रीकृत एमबीए काउंसलिंग पर विचार

आईआईएम स्नातक प्रबंधन कार्यक्रमों के लिए समान प्रवेश परीक्षा, एमबीए दाखिलों के लिए केंद्रीकृत काउंसलिंग मंच, एकसमान फीस वापसी नीति और आईआईएम के बीच छात्रों के स्थानांतरण पर विचार कर रहे हैं। आरटीआई के जरिये हिंदुस्तान टाइम्स को मिले आईआईएम समन्वय मंच की बैठक के कार्यवृत्त के अनुसार, तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की अध्यक्षता में 14 मई को अहमदाबाद में निदेशकों ने इन प्रस्तावों पर चर्चा की। 22 में से 13 आईआईएम यूजी कार्यक्रम चलाते हैं। समान परीक्षा पर संस्थान बंटे रहे।

स्रोत

Hindustan Times — India · मूल ख़बर पढ़ें ↗

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डेस्क जाँच · स्रोत से तुलना की

डेस्क ने क्या जाँचा (5)
  • IIMs are considering a common UG entrance test, centralised MBA counselling, uniform fee-refund policy and inter-IIM transfers. — Attributed to official documents/minutes accessed by HT via RTI; appears in source.
  • The Coordination Forum meeting was chaired by then Union education minister Dharmendra Pradhan in Ahmedabad on May 14, 2026. — Stated in source from minutes; the source also says directors met on May 14, with dates internally consistent.
  • 13 of the 22 IIMs offer UG programmes; seven offer five-year IPMs using three admission mechanisms. — Figures appear in source, unattributed to a named official.
  • IIM Mumbai was tasked with developing a prototype of a JoSAA-style common counselling platform, sent to the ministry by end of July. — Attributed to an unnamed senior IIM Mumbai official speaking anonymously.
  • A standardised refund policy modelled on UGC guidelines is to be implemented from academic year 2026-27. — Attributed to the forum via the minutes; source notes several IIMs still follow differing rules.

विश्लेषकों की राय राय

AI नीति विश्लेषक

यह छात्रों पर पड़ने वाले परीक्षा और शुल्क के बोझ को घटाने की ईमानदार कोशिश दिखती है, लेकिन इसकी सबसे बड़ी कमज़ोरी इसके ढांचे में ही है। आईआईएम अधिनियम, 2017 के तहत समन्वय फोरम केवल सलाहकार निकाय है — आईआईटी काउंसिल की तरह इसके फैसले बाध्यकारी नहीं हैं। इसका मतलब है कि सामान्य यूजी प्रवेश परीक्षा तभी बनेगी जब आईआईएम स्वयं सहमत हों; मंत्री की मंशा भर से काम नहीं चलेगा। शुल्क वापसी और केंद्रीकृत काउंसलिंग पर सहमति आसान दिखती है, जबकि परीक्षाओं के विलय पर मतभेद खुलकर सामने आए हैं।

  • नीति-रचना की सीमा: फोरम सलाहकार होने के कारण स्वायत्तता बचाते हुए एकरूपता लाना आदेश से नहीं, सहमति बनाने से ही संभव है।
  • इसका सीधा लाभ छात्रों को, खासकर उन परिवारों को, जो कई आवेदन शुल्क और गैर-वापसी योग्य सीट बुकिंग राशि नहीं उठा सकते।
  • नए आईआईएम को भी फायदा — पुराने संस्थानों से ऑफर मिलने पर छात्र चले जाते हैं और सीटें खाली रह जाती हैं; जोसा जैसा मंच इसमें राहत दे सकता है।
  • विपरीत तर्क भी मजबूत है: एआई और एनालिटिक्स जैसे कार्यक्रम जो जेईई एडवांस्ड से प्रवेश देते हैं, अलग शैक्षणिक ज़रूरतों की ओर इशारा करते हैं, जिन्हें एक ही परीक्षा पूरा न कर पाए।
  • जेईई, सीयूईटी, सीएलएटी और आईपीएमएटी जैसे मौजूदा स्कोर का उपयोग एक व्यावहारिक मध्य मार्ग है — नई परीक्षा बनाए बिना बोझ घटाना।

किस पर नज़र रखें — उप-समिति का एसओपी, आईआईएम मुंबई के प्रोटोटाइप पर शिक्षा मंत्रालय का निर्णय, और 2026–27 से एकरूप शुल्क वापसी नीति सभी आईआईएम में वास्तव में लागू होती है या नहीं — इन पर नज़र रखें।

अभी कुछ तय नहीं है — मिनट्स केवल चर्चा दर्ज करते हैं; अंतिम निर्णय, समयसीमा या अमल की व्यवस्था यह खबर स्थापित नहीं करती, और मंत्रालय ने सवालों का जवाब नहीं दिया।

गहराई से

शोध सारांश · 8 तथ्य · 7 तारीख़ें · परीक्षा के लिए

सार

पृष्ठभूमि

भारतीय प्रबंध संस्थान (आईआईएम) अपने प्रवेश ढांचे में बड़े बदलावों पर विचार कर रहे हैं — स्नातक (यूजी) प्रबंधन कार्यक्रमों के लिए एक समान प्रवेश परीक्षा, एमबीए दाखिलों के लिए केंद्रीकृत काउंसलिंग मंच, एकसमान फीस वापसी नीति और आईआईएम के बीच छात्रों के स्थानांतरण की व्यवस्था। ये प्रस्ताव आईआईएम समन्वय मंच (कोऑर्डिनेशन फोरम) की बैठक में चर्चा में आए, जिसकी अध्यक्षता तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अहमदाबाद में 14 मई को की। भारतीय प्रबंध संस्थान अधिनियम, 2017 के तहत यह मंच केवल एक "सलाहकार निकाय" है, इसके निर्णय आईआईटी परिषद की तरह बाध्यकारी नहीं हैं। वर्तमान में 22 आईआईएम में से 13 यूजी कार्यक्रम चलाते हैं और यूजी/आईपीएम के लिए 10 से अधिक प्रवेश परीक्षाएं मौजूद हैं।

मुख्य तथ्य

  • आईआईएम समन्वय मंच की बैठक 14 मई 2026 को अहमदाबाद में तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की अध्यक्षता में हुई।
  • शिक्षा मंत्रालय ने बैठक के कार्यवृत्त 17 जून को आईआईएम को भेजे; हिंदुस्तान टाइम्स को ये 15 सितंबर को आरटीआई के जरिये मिले।
  • 22 आईआईएम में से 13 यूजी कार्यक्रम चलाते हैं; यूजी और आईपीएम के लिए 10 से अधिक प्रवेश परीक्षाएं हैं।
  • सात आईआईएम — इंदौर, रोहतक, रांची, जम्मू, बोधगया, अमृतसर और शिलांग — पांच वर्षीय आईपीएम चलाते हैं, पर तीन प्रवेश तंत्र (आईपीमैट, जेआईपीमैट और आईआईएम रोहतक की अपनी परीक्षा) उपयोग करते हैं।
  • आईआईएम लखनऊ का बीएस (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड बिजनेस एनालिटिक्स) जेईई एडवांस्ड से, आईआईएम मुंबई का बीएस (डिजिटल साइंस एंड बिजनेस मैनेजमेंट) जेईई मेन से प्रवेश देता है; आईआईएम उदयपुर बीबीए में बिना प्रवेश परीक्षा दाखिला देता है।
  • एमबीए के लिए आईआईटी की जोसा (JoSAA) की तरह एक साझा डिजिटल काउंसलिंग मंच पर चर्चा हुई; प्रोटोटाइप बनाने का काम आईआईएम मुंबई को दिया गया, जिसने जुलाई के अंत तक इसे मंत्रालय को भेज दिया।
  • मानकीकृत फीस वापसी नीति यूजीसी दिशानिर्देशों के आधार पर शैक्षणिक वर्ष 2026-27 से लागू करने की बात कही गई; कक्षाएं शुरू होने से पहले नाम वापस लेने पर केवल ₹1,000 काटकर राशि वापसी का प्रावधान है।
  • अलग-अलग नीतियां जारी: आईआईएम उदयपुर ₹30,000 कटौती के साथ कक्षा शुरू होने के बाद भी वापसी देता है, आईआईएम विशाखापत्तनम टर्म-I के बाद वापसी नहीं देता, आईआईएम कलकत्ता की कुछ कार्यक्रमों की नीति कहती है कि फीस "किसी भी परिस्थिति में वापस नहीं होगी"।

समयरेखा

  1. 2011आईआईएम इंदौर ने देश का पहला एकीकृत प्रबंधन कार्यक्रम (आईपीएम) शुरू किया।
  2. 2017भारतीय प्रबंध संस्थान अधिनियम लागू, जिसके तहत आईआईएम समन्वय मंच एक "सलाहकार निकाय" है।
  3. सितंबर 2025समन्वय मंच की आठ वर्षों में पहली बैठक हुई।
  4. 14 मई 2026अहमदाबाद में मंच की बैठक; समान यूजी प्रवेश परीक्षा, एमबीए काउंसलिंग, फीस वापसी और अंतर-आईआईएम स्थानांतरण पर चर्चा।
  5. 17 जूनशिक्षा मंत्रालय ने बैठक के कार्यवृत्त सभी आईआईएम को भेजे।
  6. जुलाई अंतआईआईएम मुंबई ने साझा डिजिटल काउंसलिंग मंच का प्रोटोटाइप शिक्षा मंत्रालय को भेजा।
  7. 15 सितंबरहिंदुस्तान टाइम्स ने आरटीआई आवेदन के जरिये कार्यवृत्त प्राप्त किए।

किसका दाँव

  • यूजी/आईपीएम प्रवेश के अभ्यर्थी — 10 से अधिक परीक्षाओं का तनाव और कई आवेदन शुल्क; समान परीक्षा से बोझ घट सकता है।
  • एमबीए अभ्यर्थी — कई आईआईएम में गैर-वापसी योग्य सीट-बुकिंग राशि जमा करने से आर्थिक नुकसान; केंद्रीकृत काउंसलिंग से राहत संभव।
  • केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय / तत्कालीन मंत्री धर्मेंद्र प्रधान — मंत्री ने कहा कि कई यूजी परीक्षाएं "टाली" जानी चाहिए और यह सरकारी हस्तक्षेप नहीं, हितधारक की भूमिका है।
  • पुराने आईआईएम (इंदौर, कोझिकोड, कलकत्ता आदि) — स्वायत्तता, भिन्न मिशन व शैक्षणिक पद्धति; "न्यूनतम नियमन" और मौजूदा परीक्षाओं के उपयोग के पक्ष में।
  • नए आईआईएम (बोधगया, जम्मू, अमृतसर, रांची) — पुराने आईआईएम के प्रस्तावों के बाद छात्र चले जाने से सीटें खाली रहती हैं; समान परीक्षा व एनटीए द्वारा संचालन के समर्थक।
  • राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) — जम्मू और बोधगया ने सुझाया कि समान प्रवेश परीक्षा एनटीए कराए।
  • आईआईएम मुंबई — जोसा की तरह साझा काउंसलिंग मंच का प्रोटोटाइप विकसित करने की जिम्मेदारी।

क्यों अहम है

आईआईएम की यूजी प्रवेश प्रणाली में 10 से अधिक परीक्षाएं होने से अभ्यर्थियों पर मानसिक और आर्थिक दोहरा बोझ पड़ता है, जबकि एमबीए में कई संस्थानों में सीट-बुकिंग राशि जमा करने से छात्रों का पैसा फंसता है और सीटें खाली रहती हैं। प्रस्तावित बदलाव संस्थागत स्वायत्तता और छात्र-हित के बीच संतुलन का प्रश्न खड़ा करते हैं, क्योंकि समन्वय मंच के फैसले आईआईटी परिषद की तरह बाध्यकारी नहीं हैं। इसलिए सुधार सहमति और मंत्रालय की समीक्षा पर निर्भर हैं।

UPSC नज़रिया

प्रीलिम्स संकेत

  • भारतीय प्रबंध संस्थान अधिनियम, 2017 के तहत आईआईएम समन्वय मंच "सलाहकार निकाय" है; आईआईटी परिषद के निर्णय बाध्यकारी होते हैं।
  • कुल आईआईएम 22; आईआईएम गुवाहाटी 22वां आईआईएम, जिसके मेंटर निदेशक आईआईएम अहमदाबाद के निदेशक भरत भास्कर हैं।
  • आईआईएम में स्नातकोत्तर प्रवेश के लिए साझा परीक्षा — कैट (CAT)।
  • पांच वर्षीय आईपीएम में प्रवेश के तीन तंत्र: आईपीमैट, जेआईपीमैट और आईआईएम रोहतक की अपनी योग्यता परीक्षा।
  • जोसा (JoSAA) — आईआईटी की संयुक्त सीट आवंटन प्रणाली, जिसके मॉडल पर एमबीए काउंसलिंग मंच प्रस्तावित।
  • मानकीकृत फीस वापसी नीति (यूजीसी दिशानिर्देश आधारित) शैक्षणिक वर्ष 2026-27 से लागू करने का प्रस्ताव।

मेन्स दृष्टिकोण

आईआईएम की प्रवेश व्यवस्था में विखंडन — यूजी व आईपीएम के लिए 10 से अधिक परीक्षाएं, आईपीएम में ही तीन प्रवेश तंत्र, और नए चार-वर्षीय कार्यक्रमों में जेईई मेन, जेईई एडवांस्ड, आईपीमैट, संस्थान-विशिष्ट परीक्षाएं या बिना परीक्षा प्रवेश — छात्रों पर तनाव व आवेदन लागत बढ़ाता है, जबकि एमबीए में गैर-वापसी योग्य सीट-बुकिंग राशि से आर्थिक हानि और सीटें अवरुद्ध होने की समस्या है। एकरूपता के पक्ष में तर्क है कि जोसा जैसा केंद्रीकृत मंच, यूजीसी-आधारित एकसमान फीस वापसी नीति और अंतर-आईआईएम स्थानांतरण की एसओपी छात्रों की वित्तीय व प्रक्रियागत परेशानी कम करेगी, तथा नए आईआईएम में खाली सीटों की समस्या घटाएगी। विपक्ष में आईआईएम इंदौर और कोझिकोड जैसे संस्थान स्वायत्तता, भिन्न मिशन व पाठ्यक्रम-विशिष्ट अकादमिक आवश्यकताओं (जैसे मजबूत गणितीय पृष्ठभूमि हेतु जेईई एडवांस्ड) का हवाला देते हैं और \"न्यूनतम नियमन\" चाहते हैं; आईआईएम उदयपुर का सुझाव है कि नई परीक्षा के बजाय जेईई, सीयूईटी, सीएलएटी के अंक उपयोग हों। आगे का रास्ता तत्कालीन उच्च शिक्षा सचिव विनीत जोशी के सुझाव के अनुरूप है — छात्रों के परीक्षा-पैटर्न और सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि का विश्लेषण, उपसमिति द्वारा एसओपी तैयार करना, तथा एकरूपता व स्वायत्तता में संतुलन बनाते हुए मौजूदा विश्वसनीय परीक्षाओं का उपयोग।

मुख्य शब्द

आईआईएम समन्वय मंच
आईआईएम अधिनियम, 2017 के तहत गठित सलाहकार निकाय, जिसकी अध्यक्षता केंद्रीय शिक्षा मंत्री करते हैं; इसके निर्णय बाध्यकारी नहीं।
आईपीएम / आईपीमैट
पांच वर्षीय एकीकृत प्रबंधन कार्यक्रम, जिसमें प्रवेश आईपीमैट परीक्षा से होता है; पहला आईपीएम 2011 में आईआईएम इंदौर ने शुरू किया।
जेआईपीमैट
कुछ आईआईएम के पांच वर्षीय एकीकृत प्रबंधन कार्यक्रमों में प्रवेश के लिए इस्तेमाल होने वाला संयुक्त प्रवेश तंत्र।
जोसा (JoSAA)
आईआईटी के लिए संयुक्त सीट आवंटन प्राधिकरण, जिसमें अभ्यर्थी विकल्प फ्रीज, स्लाइड या फ्लोट कर सकते हैं; एमबीए मंच का प्रस्तावित मॉडल।
एनटीए
राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी; आईआईएम जम्मू और बोधगया ने प्रस्तावित समान यूजी प्रवेश परीक्षा इसके द्वारा कराने का सुझाव दिया।
एसओपी
मानक संचालन प्रक्रिया; एमबीए दाखिलों, फीस वापसी और अंतर-आईआईएम छात्र स्थानांतरण के लिए उपसमिति द्वारा तैयार की जानी है।

अभ्यास प्रश्न

  1. आईआईएम के स्नातक कार्यक्रमों के लिए समान प्रवेश परीक्षा के पक्ष और विपक्ष में तर्कों का परीक्षण कीजिए। संस्थागत स्वायत्तता और छात्र-हित के बीच संतुलन कैसे बनाया जा सकता है?
  2. भारतीय प्रबंध संस्थान अधिनियम, 2017 के तहत समन्वय मंच की "सलाहकार" प्रकृति, आईआईटी परिषद की तुलना में, अखिल भारतीय प्रवेश सुधारों के कार्यान्वयन को कैसे प्रभावित करती है?
  3. एमबीए दाखिलों में जोसा जैसे केंद्रीकृत काउंसलिंग मंच और एकसमान फीस वापसी नीति से छात्रों की वित्तीय कठिनाइयां किस प्रकार कम हो सकती हैं? चर्चा कीजिए।

सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।

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