हर भूखंड की डिजिटल पहचान: केंद्र की 'भारत लैंड स्टैक' योजना
केंद्र सरकार हर भूखंड के इर्द-गिर्द डिजिटल सूचना ढांचा बनाने के लिए 'भारत लैंड स्टैक' की योजना बना रही है। ग्रामीण विकास मंत्रालय के भूमि संसाधन विभाग के दस्तावेजों के अनुसार, 58.76 करोड़ भूखंडों में से 39.43 करोड़ यानी करीब 67.11% के लिए यूनिक लैंड पार्सल आइडेंटिफिकेशन नंबर (भू-आधार) जारी किए गए हैं, जबकि 99.9% अधिकार अभिलेखों का कंप्यूटरीकरण हो चुका है। 10 सितंबर को शुरू हुए डीआईएलआरएमपी 3.0 के लिए 2026-31 अवधि में 565.50 करोड़ रुपये का परिव्यय है। भूमि राज्य का विषय होने से अमल राज्यों पर निर्भर है।
स्रोत
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डेस्क जाँच · स्रोत से तुलना की
डेस्क ने क्या जाँचा (5)
- ULPINs (Bhu-Aadhaar) generated for 39.43 crore of 58.76 crore land parcels, about 67.11% — Figure appears in source, attributed to Department of Land Resources documents accessed by CNN-News18; percentage is internally consistent
- About 99.9% of Records of Rights computerised (39.99 crore of 40.03 crore) — Figure appears in source; source elsewhere cites 40 crore total, a minor internal inconsistency with 40.03 crore
- DILRMP 3.0 launched on September 10, covers 2026-31 with an outlay of Rs 565.50 crore — Stated in source without naming an official announcement document; year of launch not specified
- Bharat Land Stack would layer drone and satellite imagery, cadastral maps, RoRs, registration, master plans, building plans, mortgages and litigation, circle rates and tenancy data — Described as a proposed architecture in ministry documents cited by the reporter; not independently verifiable
- Aadhaar linked to 10.89 crore RoRs (27.2%) and mobile numbers seeded in 11.48 crore RoRs (28.69%) — Figures appear in source, described as consent-based and as separate linkages rather than an integrated database
विश्लेषकों की राय राय
'भारत लैंड स्टैक' देखने में तकनीकी सुधार है, लेकिन इसका असली दांव सत्ता संतुलन पर है। भूमि संविधान के तहत राज्य का विषय है, इसलिए केंद्र यहां आदेश नहीं दे सकता — उसे पैसे, तकनीक और मानकों के जरिये ही आगे बढ़ना होगा। 2026-31 के लिए 565.50 करोड़ रुपये का सीमित आवंटन यही रणनीति बताता है: ढांचा केंद्र बनाएगा, बोझ राज्य उठाएंगे, और श्रेय या नाकामी किसके खाते में जाए, इस पर खींचतान लगभग तय है।
- भूमि राज्य का विषय होने से अमल की गति राज्यों की राजनीतिक इच्छाशक्ति पर टिकी है — यह केंद्र-राज्य टकराव का स्वाभाविक बिंदु है।
- 58.76 करोड़ भूखंडों में 39.43 करोड़ (67.11%) को भू-आधार मिला है, जबकि अधिकार अभिलेखों का कंप्यूटरीकरण 99.9% है — इस अंतर को विपक्ष 'घोषणा ज्यादा, अमल कम' के रूप में पेश कर सकता है।
- किसान और भूस्वामी जैसे बड़े मतदाता वर्ग को छूने वाला विषय होने से स्पष्ट रिकॉर्ड और आसान कर्ज का राजनीतिक श्रेय लेने की व्यापक गुंजाइश है।
- गिरवी, मुकदमे और काश्तकारी के आंकड़े एक जुड़े तंत्र में आने से निजता और भूमि पहुंच की आशंकाओं पर स्थानीय राजनीतिक विरोध उठ सकता है।
- आधार लिंकिंग 27.2% और मोबाइल सीडिंग 28.69% पर होना दिखाता है कि यह अभी एकीकृत राष्ट्रीय डेटाबेस नहीं है, यानी राजनीतिक बहस अभी लंबी चलेगी।
किस पर नज़र रखें — देखना होगा कि राज्य — खासकर विपक्ष शासित राज्य — डीआईएलआरएमपी 3.0 के मानकों को कितनी तेजी से अपनाते हैं और डेटा साझाकरण पर क्या शर्तें रखते हैं।
यह खबर केवल प्रस्तावित ढांचे और प्रगति के आंकड़े बताती है; यह साबित नहीं करती कि किसी राज्य ने आपत्ति जताई है या डेटा पहुंच के नियम तय हो चुके हैं।
गहराई से
शोध सारांश · 8 तथ्य · 4 तारीख़ें · परीक्षा के लिएसार
पृष्ठभूमि
केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय के अधीन भूमि संसाधन विभाग ने देश के बुनियादी भूमि अभिलेखों का डिजिटलीकरण लगभग पूरा कर लिया है। अब सरकार की अगली योजना 'भारत लैंड स्टैक' है, जिसमें हर भूखंड के इर्द-गिर्द एक डिजिटल सूचना ढांचा बनाकर आज अलग-अलग अभिलेखों और विभागों में बिखरी जानकारी को एक-दूसरे से जोड़ा जाएगा। इसकी रीढ़ यूनिक लैंड पार्सल आइडेंटिफिकेशन नंबर (ULPIN या भू-आधार) है, जो साझा पहचानकर्ता के रूप में काम करेगा। 10 सितंबर को शुरू हुआ DILRMP 3.0 इस कार्यक्रम को डिजिटलीकरण से आगे 'इंटरऑपरेबिलिटी' की दिशा में ले जाना चाहता है। CNN-News18 द्वारा देखे गए विभागीय दस्तावेज़ों से यह पूरी तस्वीर सामने आई है।
मुख्य तथ्य
- 58.76 करोड़ भूखंडों में से 39.43 करोड़ (लगभग 67.11%) के लिए ULPIN/भू-आधार जारी किए गए हैं।
- 40.03 करोड़ अधिकार अभिलेखों (RoR) में से 39.99 करोड़, यानी लगभग 99.9%, का कंप्यूटरीकरण हो चुका है।
- 14,05,206 कैडस्ट्रल नक्शों में से 13,69,109 (लगभग 97.43%) डिजिटाइज़ हुए; RoR के साथ नक्शों का एकीकरण 84.59% पर है।
- पंजीकरण कंप्यूटरीकरण 5,608 उप-रजिस्ट्रार कार्यालयों में से 5,550 (99.6%) में; राजस्व न्यायालय कंप्यूटरीकरण 14,507 में से 13,593 (93.70%)।
- स्वीकृत 4,636 आधुनिक रिकॉर्ड रूम में से 3,551 (76.6%) पूरे हुए।
- 10 सितंबर को शुरू DILRMP 3.0 के लिए 2026–31 अवधि में 565.50 करोड़ रुपये का परिव्यय।
- सहमति-आधारित आधार एकीकरण 10.89 करोड़ RoR (27.2%) के लिए; मोबाइल नंबर 11.48 करोड़ RoR (28.69%) में सीड किए गए।
- लैंगिक आधार पर भूमि-स्वामित्व की जानकारी 147 जिलों में MIS डेटाबेस के रूप में उपलब्ध है।
समयरेखा
- 2016 से 2026भूमि अभिलेखों को कागज़ से डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाने की यात्रा, जो मुख्यतः डिजिटलीकरण पर केंद्रित रही।
- 10 सितंबरDILRMP 3.0 की शुरुआत, जिसका लक्ष्य केवल RoR डिजिटलीकरण से आगे जाकर भूमि डेटा की इंटरऑपरेबिलिटी है।
- 2026–31DILRMP 3.0 की अवधि, 565.50 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ।
- 23 सितंबर 2026CNN-News18 द्वारा भूमि संसाधन विभाग के दस्तावेज़ों के आधार पर भारत लैंड स्टैक की रिपोर्ट प्रकाशित।
किसका दाँव
- भूमि संसाधन विभाग, ग्रामीण विकास मंत्रालय — भारत लैंड स्टैक और DILRMP 3.0 की रूपरेखा तैयार करना, राज्यों को वित्तीय व तकनीकी सहायता देना।
- राज्य सरकारें और केंद्रशासित प्रदेश — भूमि राज्य का विषय है, इसलिए अमल इन पर निर्भर; अभिलेखों का अद्यतन, सर्वे व एकीकरण उनकी ज़िम्मेदारी।
- भूमि मालिक, क्रेता और किरायेदार — भूखंड की व्यापक सूचना-श्रृंखला तक पहुँच, बंधक-मुकदमेबाज़ी की जानकारी; साथ ही निजता व डेटा साझेदारी नियमों पर निर्भरता।
- उप-रजिस्ट्रार कार्यालय और राजस्व न्यायालय — पंजीकरण व विवाद-निपटान प्रक्रियाओं का कंप्यूटरीकरण और लैंड स्टैक से जुड़ाव।
- शहरी स्थानीय निकाय (ULBs) — NAKSHA के तहत हवाई सर्वे से GIS-आधारित शहरी संपत्ति अभिलेख तैयार होना, संपत्ति कराधान पर असर।
- बैंक व ऋणदाता तथा उपयोगिता सेवाएं — ऋण, संपत्ति कराधान, बिजली-पानी उपयोगिताओं, वाटरशेड प्रबंधन जैसे उपयोग-मामलों में जुड़े डेटा का लाभ।
क्यों अहम है
भूमि भारत में संपत्ति, ऋण, कराधान, नियोजन और मुकदमेबाज़ी का केंद्रीय आधार है; बिखरे अभिलेखों को एक जुड़े सूचना-तंत्र में बदलने से खरीद-बिक्री, पट्टा, अधिग्रहण और विवाद-निपटान की पारदर्शिता बदल सकती है। लेकिन जैसे-जैसे अधिक डेटाबेस जुड़ेंगे, डेटा गवर्नेंस, पहुँच नियम और सहमति के सवाल अधिक अहम होंगे। चूंकि भूमि राज्य सूची का विषय है, सफलता राज्यों की क्षमता और इच्छाशक्ति पर टिकी है।
UPSC नज़रिया
प्रीलिम्स संकेत
- ULPIN को 'भू-आधार' भी कहा जाता है; यह भूखंड की डिजिटल पहचान है — 58.76 करोड़ में से 39.43 करोड़ (67.11%) पर जारी।
- DILRMP 3.0: 10 सितंबर को शुरू, 2026–31 के लिए 565.50 करोड़ रुपये परिव्यय, लक्ष्य — इंटरऑपरेबिलिटी।
- भारत लैंड स्टैक की आधार परत ड्रोन व उपग्रह इमेजरी; उसके ऊपर कैडस्ट्रल नक्शे और RoR।
- NAKSHA = National Geospatial Knowledge-based Land Survey of Urban Habitations — चुनिंदा शहरी स्थानीय निकायों में GIS-आधारित संपत्ति अभिलेख।
- भूमि राज्य का विषय; केंद्र की भूमिका वित्तीय-तकनीकी सहायता और इंटरऑपरेबल प्रणालियों को बढ़ावा देना।
- लैंगिक भूमि-स्वामित्व MIS डेटाबेस 147 जिलों में उपलब्ध; आधार एकीकरण 27.2% RoR तक।
मेन्स दृष्टिकोण
भारत में भूमि अभिलेख परंपरागत रूप से कागज़-आधारित, बिखरे और विभागों में अलग-अलग रहे हैं, जिससे शीर्षक-अनिश्चितता, मुकदमेबाज़ी और ऋण तक पहुँच में बाधा आती है; 2016 से 2026 तक की यात्रा मुख्यतः इन्हें डिजिटल बनाने की रही — 99.9% RoR कंप्यूटरीकृत, 97.43% कैडस्ट्रल नक्शे डिजिटाइज़, 99.6% उप-रजिस्ट्रार कार्यालय कंप्यूटरीकृत। भारत लैंड स्टैक अगला चरण है: ड्रोन-उपग्रह इमेजरी, कैडस्ट्रल नक्शे, RoR, पंजीकरण डेटा, मास्टर प्लान व भू-उपयोग, भवन योजना, बंधक व मुकदमे जैसी पाबंदियाँ, सर्किल रेट और किरायेदारी डेटा को ULPIN के साझा पहचानकर्ता पर परतों की तरह जोड़ना, जिसके उपयोग-मामले संपत्ति कर, बिजली-पानी, वाटरशेड प्रबंधन और ऋण हैं। चुनौतियाँ स्पष्ट हैं — नक्शों और RoR का एकीकरण अभी 84.59%, आधुनिक रिकॉर्ड रूम 76.6%, आधार व मोबाइल सीडिंग एक-तिहाई से कम, और ये अलग-अलग जुड़ाव हैं, कोई पूर्ण एकीकृत राष्ट्रीय डेटाबेस नहीं। आगे का रास्ता राज्यों की क्षमता-निर्माण, कैडस्ट्रल-RoR एकीकरण पूरा करना, NAKSHA के ज़रिए शहरी संपत्ति मानचित्रण, और सहमति-आधारित पहुँच व डेटा-साझेदारी ढाँचे तय करने में है, ताकि पारदर्शिता निजता की कीमत पर न आए।
मुख्य शब्द
- भारत लैंड स्टैक
- प्रत्येक भूखंड के इर्द-गिर्द परतदार डिजिटल सूचना ढांचा, जिसमें इमेजरी, नक्शे, RoR, पंजीकरण, भू-उपयोग, बंधक व किरायेदारी डेटा जुड़ते हैं।
- ULPIN / भू-आधार
- यूनिक लैंड पार्सल आइडेंटिफिकेशन नंबर — भूखंड की स्थानिक डिजिटल पहचान, जो विभिन्न डेटासेट जोड़ने का साझा पहचानकर्ता है।
- DILRMP 3.0
- डिजिटल भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम का तीसरा चरण; 10 सितंबर को शुरू, 2026–31 के लिए 565.50 करोड़ रुपये।
- RoR (अधिकार अभिलेख)
- भूखंड पर अधिकारों को दर्ज करने वाला अभिलेख; 40.03 करोड़ में से 99.9% कंप्यूटरीकृत।
- कैडस्ट्रल मैप
- भूखंड की सीमाओं और स्थिति दर्शाने वाला सर्वे नक्शा; 97.43% डिजिटाइज़, RoR से एकीकरण 84.59%।
- NAKSHA
- National Geospatial Knowledge-based Land Survey of Urban Habitations — हवाई/भू-स्थानिक सर्वे से शहरी निकायों के GIS संपत्ति अभिलेख।
अभ्यास प्रश्न
- भारत लैंड स्टैक की परतदार संरचना और ULPIN की भूमिका समझाते हुए बताइए कि यह भूमि अभिलेखों के डिजिटलीकरण से 'इंटरऑपरेबिलिटी' की ओर संक्रमण को कैसे दर्शाता है।
- भूमि राज्य सूची का विषय है — ऐसे में DILRMP 3.0 जैसी केंद्रीय पहलों के क्रियान्वयन में कौन-सी संस्थागत चुनौतियाँ आती हैं और केंद्र की भूमिका क्या होनी चाहिए?
- भूमि डेटाबेसों के परस्पर जुड़ाव से पारदर्शिता बढ़ती है, परंतु डेटा गवर्नेंस व निजता के प्रश्न भी उठते हैं। स्रोत के आँकड़ों के आलोक में इस संतुलन पर चर्चा कीजिए।
सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।
