दुनिया इस्लामाबाद

एससीओ समन्वयकों की बैठक के लिए इस्लामाबाद पहुंचा भारतीय प्रतिनिधिमंडल

शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के राष्ट्रीय समन्वयकों की तीन दिवसीय बैठक में भाग लेने के लिए एक वरिष्ठ राजनयिक के नेतृत्व में भारतीय प्रतिनिधिमंडल सोमवार को इस्लामाबाद पहुंचा। पाकिस्तान ने एक सितंबर को किर्गिस्तान से एससीओ की अध्यक्षता संभाली और अगस्त 2027 में शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा। पाकिस्तानी विदेश कार्यालय ने कहा कि समन्वयक अध्यक्षता के तहत गतिविधियों और आगामी बैठकों की तैयारियों पर चर्चा करेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भागीदारी पर विदेश मंत्रालय ने कहा कि निर्णय उचित समय पर उचित अधिकारी लेंगे।

स्रोत

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डेस्क जाँच · स्रोत से तुलना की

डेस्क ने क्या जाँचा (5)
  • An Indian delegation led by a senior diplomat arrived in Islamabad on Monday for the three-day SCO national coordinators' meeting — Stated in source; the diplomat is not named, no attribution given for the arrival detail
  • Pakistan took over the SCO chair from Kyrgyzstan on September 1 and will host the leaders' summit in August 2027 — Figure and dates appear in source; summit year stated as 2027 while the text elsewhere refers to the summit 'next year', an internal inconsistency an editor should note
  • Agenda covers activities under Pakistan's chairmanship and preparations for upcoming SCO meetings — Attributed to Pakistan's Foreign Office
  • MEA said a decision on PM Modi's participation will be taken by the appropriate authority at the appropriate time — Direct quote attributed to the Ministry of External Affairs last month
  • The SCO has 10 members including India and Pakistan, which joined in 2017 — Appears in source; listing includes Turkmenistan among the Central Asian Republics, which an editor may wish to verify

विश्लेषकों की राय राय

AI रणनीतिक मामलों के विश्लेषक

एससीओ के राष्ट्रीय समन्वयकों की बैठक के लिए भारत का एक वरिष्ठ राजनयिक इस्लामाबाद भेजना 'कम्पार्टमेंटलाइज़ेशन' का उदाहरण है — यानी द्विपक्षीय रिश्ते जमे रहने के बावजूद नई दिल्ली उस बहुपक्षीय मंच में अपने हित सुरक्षित रख रही है, जिसे वह रूस, चीन और मध्य एशिया के साथ साझा करती है। खबर में ही कहा गया है कि भारतीय अधिकारी पहले भी पाकिस्तान में हुई एससीओ बैठकों में शामिल हुए हैं, इसलिए यह निरंतरता है, कोई नरमी नहीं। बड़ा सवाल — अगस्त 2027 में इस्लामाबाद में होने वाले शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री जाएंगे या नहीं — विदेश मंत्रालय ने जानबूझकर खुला छोड़ा है, और खबर का आकलन है कि इस समय ऐसी यात्रा असंभावित लगती है।

  • कार्य-स्तरीय एससीओ बैठकों में शामिल होने की भारत को कीमत बहुत कम चुकानी पड़ती है, और इससे पाकिस्तान को यह दिखाने का मौका नहीं मिलता कि भारत रूस-चीन के लिए महत्वपूर्ण संगठन में अड़चन डाल रहा है।
  • तकनीकी भागीदारी और नेता-स्तरीय उपस्थिति के बीच का अंतर ही असली संकेत है: विदेश मंत्रालय का 'उचित समय पर उचित प्राधिकारी' वाला फॉर्मूला निचले स्तर के प्रतिनिधिमंडल सहित हर विकल्प खुला रखता है।
  • सुरक्षा पृष्ठभूमि स्पष्ट है — मन की बात में सर्जिकल स्ट्राइक, बालाकोट और ऑपरेशन सिंदूर का प्रधानमंत्री का उल्लेख तथा संयुक्त राष्ट्र महासभा में जयशंकर का आत्मरक्षा के अधिकार पर ज़ोर बताते हैं कि आतंकवाद पर भारत के रुख में कोई ढील नहीं है।
  • भारत क्षेत्र में अपना समानांतर प्रभाव-तंत्र भी गढ़ रहा है और 2027 में भारत-मध्य एशिया शिखर सम्मेलन की मेज़बानी की योजना है — यानी मध्य एशिया तक पहुंचने का एससीओ ही एकमात्र रास्ता नहीं है।
  • 2028-29 के लिए सुरक्षा परिषद की अस्थायी सीट पर ताजिकिस्तान से मुकाबला याद दिलाता है कि एससीओ के भीतर भारत के हित केवल पाकिस्तान से ही नहीं, अन्य सदस्यों से भी टकरा सकते हैं।

किस पर नज़र रखें — देखना होगा कि पाकिस्तान की अध्यक्षता में आगामी एससीओ बैठकों में भारत किस स्तर पर भाग लेता है, अगस्त 2027 के लिए नेता-स्तरीय इरादे का संकेत कब आता है, और बीजिंग तथा मॉस्को पूरी उपस्थिति के लिए कितना दबाव बनाते हैं।

खबर से केवल इतना सिद्ध होता है कि एक राजनयिक के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल एक प्रक्रियात्मक बैठक के लिए पहुंचा है; इससे किसी द्विपक्षीय संपर्क, भारत-पाक तनाव में कमी या 2027 शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री की भागीदारी पर किसी फैसले का पता नहीं चलता।

गहराई से

शोध सारांश · 8 तथ्य · 10 तारीख़ें · परीक्षा के लिए

सार

पृष्ठभूमि

शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) एक 10 सदस्यीय बहुपक्षीय संगठन है, जिसकी अध्यक्षता पाकिस्तान ने 1 सितंबर को किर्गिस्तान से संभाली है। पाकिस्तान अगस्त 2027 में एससीओ शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा और उससे पहले विभिन्न बैठकों का आयोजन कर रहा है। इसी क्रम में एससीओ के राष्ट्रीय समन्वयकों की तीन दिवसीय बैठक में शामिल होने के लिए एक वरिष्ठ राजनयिक के नेतृत्व में भारतीय प्रतिनिधिमंडल सोमवार को इस्लामाबाद पहुंचा। यह यात्रा ऐसे समय हो रही है जब ऑपरेशन सिंदूर और आतंकवाद के मुद्दे पर भारत-पाकिस्तान संबंधों में तनाव है।

मुख्य तथ्य

  • एक वरिष्ठ राजनयिक के नेतृत्व में भारतीय प्रतिनिधिमंडल सोमवार को एससीओ राष्ट्रीय समन्वयकों की तीन दिवसीय बैठक के लिए इस्लामाबाद पहुंचा।
  • पाकिस्तान ने 1 सितंबर को किर्गिस्तान से एससीओ की अध्यक्षता संभाली और अगस्त 2027 में नेताओं का शिखर सम्मेलन आयोजित करेगा।
  • पाकिस्तानी विदेश कार्यालय के अनुसार अध्यक्षता का ध्यान कनेक्टिविटी, नवाचार, आर्थिक सहयोग और जन-से-जन संपर्क बढ़ाने पर रहेगा।
  • विदेश मंत्रालय ने पिछले महीने कहा कि पीएम मोदी की भागीदारी पर 'उचित समय पर उचित अधिकारी' निर्णय लेंगे।
  • मोदी ने पिछले दो एससीओ शिखर सम्मेलनों—तियानजिन (चीन) और बिश्केक (किर्गिस्तान), दोनों अगस्त 2025—में भाग लिया; 2024 संस्करण छोड़ा और 2023 में भारत ने वर्चुअल अध्यक्षता की।
  • पाकिस्तान की अंतिम मंत्री-स्तरीय भारतीय यात्रा विदेश मंत्री एस जयशंकर की अक्टूबर 2024 की इस्लामाबाद यात्रा थी; उससे पहले सुषमा स्वराज 8-9 दिसंबर 2015 को हार्ट ऑफ एशिया सम्मेलन में गई थीं।
  • 10 सदस्यीय एससीओ में पांच मध्य एशियाई गणराज्य (तुर्कमेनिस्तान, उज्बेकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान, कजाखस्तान), रूस, चीन, भारत और पाकिस्तान (दोनों 2017 में शामिल), ईरान और बेलारूस हैं।
  • भारत 2027 में भारत-मध्य एशिया शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा; पहला सम्मेलन 27 जनवरी 2022 को वर्चुअल रूप से हुआ था।

समयरेखा

  1. जुलाई 2015मोदी की आठ दिवसीय यात्रा में पांचों मध्य एशियाई गणराज्यों का दौरा।
  2. 8-9 दिसंबर 2015विदेश मंत्री सुषमा स्वराज हार्ट ऑफ एशिया सम्मेलन के लिए पाकिस्तान गईं।
  3. 25 दिसंबर 2015मोदी अफगानिस्तान से लौटते हुए आकस्मिक रूप से लाहौर पहुंचे, तत्कालीन पीएम नवाज शरीफ से मुलाकात—पीएम के रूप में उनकी एकमात्र पाकिस्तान यात्रा।
  4. 2 जनवरी 2016पठानकोट एयरबेस पर आतंकी हमला।
  5. सितंबर 2016उड़ी आतंकी हमला; इसके जवाब में 2016 की सर्जिकल स्ट्राइक।
  6. 2017भारत और पाकिस्तान एससीओ के सदस्य बने।
  7. 27 जनवरी 2022पहला भारत-मध्य एशिया शिखर सम्मेलन वर्चुअल रूप से आयोजित।
  8. 2023भारत ने एससीओ शिखर सम्मेलन की वर्चुअल अध्यक्षता की।
  9. अक्टूबर 2024एस जयशंकर एससीओ बैठक के लिए इस्लामाबाद गए।
  10. अगस्त 2025मोदी ने तियानजिन (चीन) और बिश्केक (किर्गिस्तान) के एससीओ शिखर सम्मेलनों में भाग लिया।

किसका दाँव

  • भारत (विदेश मंत्रालय) — एससीओ में बहुपक्षीय भागीदारी बनाए रखना, साथ ही आतंकवाद पर पाकिस्तान के खिलाफ सख्त रुख कायम रखना।
  • पाकिस्तान (अध्यक्ष, एससीओ) — अध्यक्षता के तहत कनेक्टिविटी, नवाचार, आर्थिक सहयोग और जन-संपर्क के एजेंडे को आगे बढ़ाना; अगस्त 2027 शिखर सम्मेलन की मेजबानी।
  • एससीओ (10 सदस्य) — तनावग्रस्त द्विपक्षीय संबंधों के बीच बहुपक्षीय सहयोग की निरंतरता।
  • किर्गिस्तान — 1 सितंबर को अध्यक्षता पाकिस्तान को हस्तांतरित; अगस्त 2025 में बिश्केक शिखर सम्मेलन की मेजबानी की।
  • मध्य एशियाई गणराज्य / उज्बेकिस्तान — भारत-मध्य एशिया प्रारूप को राष्ट्राध्यक्ष स्तर पर मजबूत करना; 2027 में भारत में शिखर सम्मेलन।
  • ताजिकिस्तान — 2028-29 चक्र के लिए यूएन सुरक्षा परिषद की अस्थायी सीट पर भारत के साथ प्रतिस्पर्धा।

क्यों अहम है

भारत का इस्लामाबाद में एससीओ बैठक में शामिल होना दर्शाता है कि द्विपक्षीय तनाव के बावजूद नई दिल्ली बहुपक्षीय मंचों पर अपनी उपस्थिति बनाए रखती है, जहां रूस, चीन और मध्य एशिया जैसे साझेदार भी शामिल हैं। साथ ही, पीएम मोदी की 2027 शिखर सम्मेलन में भागीदारी पर अनिश्चितता यह रेखांकित करती है कि आतंकवाद और ऑपरेशन सिंदूर के बाद संबंधों में गतिरोध कायम है। भारत की 2027 में भारत-मध्य एशिया शिखर सम्मेलन की मेजबानी की योजना क्षेत्रीय प्रभाव की प्रतिस्पर्धा को भी उजागर करती है।

UPSC नज़रिया

प्रीलिम्स संकेत

  • एससीओ के 10 सदस्य: तुर्कमेनिस्तान, उज्बेकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान, कजाखस्तान, रूस, चीन, भारत, पाकिस्तान, ईरान, बेलारूस (भारत-पाक 2017 में शामिल)।
  • पाकिस्तान ने 1 सितंबर को एससीओ अध्यक्षता संभाली; शिखर सम्मेलन अगस्त 2027 में।
  • अगस्त 2025 के एससीओ शिखर सम्मेलन: तियानजिन (चीन) और बिश्केक (किर्गिस्तान)।
  • पहला भारत-मध्य एशिया शिखर सम्मेलन 27 जनवरी 2022 को वर्चुअल; अगला 2027 में भारत में।
  • भारत और ताजिकिस्तान 2028-29 चक्र की यूएनएससी अस्थायी सीट के लिए प्रतिस्पर्धी।
  • अक्टूबर 2024: जयशंकर की इस्लामाबाद यात्रा—सुषमा स्वराज (दिसंबर 2015) के बाद पहली भारतीय विदेश मंत्री यात्रा।

मेन्स दृष्टिकोण

यह घटनाक्रम भारत की उस कूटनीतिक रणनीति को दर्शाता है जिसमें द्विपक्षीय गतिरोध के बावजूद बहुपक्षीय संस्थागत भागीदारी जारी रहती है। एक ओर पाकिस्तान एससीओ अध्यक्ष के रूप में कनेक्टिविटी, नवाचार, आर्थिक सहयोग और जन-संपर्क का एजेंडा रख रहा है; दूसरी ओर भारत ने यूएनजीए में आतंकवाद के खिलाफ आत्मरक्षा के अधिकार और शून्य-सहिष्णुता में 'कोई कमी नहीं' का स्पष्ट संदेश दिया है, तथा पीएम ने मन की बात में सर्जिकल स्ट्राइक से बालाकोट और ऑपरेशन सिंदूर तक की निरंतरता रेखांकित की। इतिहास बताता है कि 2015 की लाहौर यात्रा के एक सप्ताह बाद पठानकोट और उसके बाद उड़ी हमले ने संपर्क-प्रयासों को पलट दिया—इसलिए शीर्ष-स्तरीय यात्रा पर सतर्कता स्वाभाविक है। आगे का रास्ता यही दिखता है कि भारत अधिकारी-स्तरीय भागीदारी से एससीओ में अपना हित और आवाज बनाए रखे, आतंकवाद पर बहुपक्षीय मंचों पर दबाव जारी रखे, और 2027 के भारत-मध्य एशिया शिखर सम्मेलन जैसे स्वतंत्र प्रारूपों के जरिये क्षेत्र में अपनी स्वायत्त उपस्थिति मजबूत करे; शीर्ष-स्तरीय भागीदारी का निर्णय 'उचित समय पर उचित अधिकारी' पर छोड़ा गया है।

मुख्य शब्द

शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ)
10 सदस्यीय बहुपक्षीय संगठन—पांच मध्य एशियाई गणराज्य, रूस, चीन, भारत, पाकिस्तान, ईरान और बेलारूस।
राष्ट्रीय समन्वयक
एससीओ सदस्य देशों के वे अधिकारी जो अध्यक्षता के कार्यक्रमों और आगामी बैठकों की तैयारियों पर समन्वय करते हैं।
ऑपरेशन सिंदूर
स्रोत के अनुसार आतंकवाद के जवाब में पिछले वर्ष भारत द्वारा की गई कार्रवाई, जिसकी पाकिस्तान ने यूएनजीए में आलोचना की।
भारत-मध्य एशिया शिखर सम्मेलन
भारत और पांच मध्य एशियाई गणराज्यों का नेतृत्व-स्तरीय प्रारूप; पहला 27 जनवरी 2022 को वर्चुअल, अगला 2027 में भारत में।
हार्ट ऑफ एशिया सम्मेलन
अफगानिस्तान-केंद्रित क्षेत्रीय सम्मेलन, जिसमें सुषमा स्वराज 8-9 दिसंबर 2015 को इस्लामाबाद गई थीं।
सर्जिकल स्ट्राइक (2016)
उड़ी आतंकी हमले के जवाब में भारत की कार्रवाई, जिसे पीएम ने आतंक के खिलाफ निर्णायक जवाब बताया।

अभ्यास प्रश्न

  1. एससीओ में भारत की भागीदारी उसके क्षेत्रीय हितों को कैसे आगे बढ़ाती है, जबकि पाकिस्तान और चीन भी इसके सदस्य हैं? परीक्षण कीजिए।
  2. क्या द्विपक्षीय तनाव के दौर में बहुपक्षीय मंचों पर भागीदारी जारी रखना भारत के लिए उपयुक्त नीति है? पठानकोट और उड़ी के बाद के अनुभवों के आलोक में चर्चा कीजिए।
  3. भारत-मध्य एशिया शिखर सम्मेलन प्रारूप और एससीओ, दोनों में भारत की भूमिका की तुलना करते हुए मध्य एशिया के प्रति भारत की नीति का मूल्यांकन कीजिए।

सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।

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