ग्लोबल जेंडर गैप इंडेक्स में भारत 131वें स्थान पर बरकरार
विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) की बुधवार को जारी ग्लोबल जेंडर गैप इंडेक्स 2026 में भारत 131वें स्थान पर बना रहा। 145 अर्थव्यवस्थाओं की सूची में आइसलैंड, फिनलैंड और नॉर्वे शीर्ष तीन स्थानों पर रहे, जबकि चाड सबसे नीचे रहा। भारत से नीचे केवल 14 देश रहे। वैश्विक स्तर पर लैंगिक अंतर 69.2 प्रतिशत तक भरा गया, भारत में यह 64.5 प्रतिशत रहा। डब्ल्यूईएफ ने कहा, पूर्ण समानता अभी 120 साल दूर है।
स्रोत
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डेस्क जाँच · स्रोत से तुलना की
डेस्क ने क्या जाँचा (5)
- India retained 131st rank on the Global Gender Gap Index 2026 among 145 economies. — Attributed to the World Economic Forum report released Wednesday; figure appears in source.
- Iceland, Finland and Norway hold the top three positions; Chad is lowest-ranked. — Stated in source and attributed to the WEF index.
- India's overall gender parity stands at 64.5%, below the global average of 69.2%. — Both figures appear in the source, attributed to WEF.
- Full gender parity is still 120 years away. — Explicitly attributed to the Geneva-based WEF.
- Quote by Saadia Zahidi, Managing Director, WEF, on parity being achievable. — Named attribution present in source.
विश्लेषकों की राय राय
जेंडर गैप इंडेक्स को आम तौर पर एक सामाजिक सूचकांक माना जाता है, पर सामरिक नज़रिए से यह राष्ट्रीय सामर्थ्य का पैमाना है। 145 देशों में भारत का 131वां स्थान और 69.2 प्रतिशत वैश्विक औसत के मुक़ाबले 64.5 प्रतिशत समानता का अर्थ है कि दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला देश अपने मानव संसाधन के आधे हिस्से को आर्थिक और राजनीतिक निर्णय-प्रक्रिया में पूरी तरह नहीं जोड़ पा रहा। स्कोर थोड़ा सुधरा, मगर रैंक जहां थी वहीं रही — यह संकेत है कि तुलनात्मक रूप से दूसरे देश तेज़ चल रहे हैं। जैसा डब्ल्यूईएफ खुद कहता है, अड़चन संसाधनों की कमी नहीं, नीतियों की गति है।
- आर्थिक भागीदारी में 41.2 प्रतिशत और श्रमबल भागीदारी में 44.1 प्रतिशत समानता सबसे कमज़ोर कड़ी है, जिसका सीधा असर दीर्घकालिक वृद्धि और औद्योगिक-तकनीकी क्षमता निर्माण पर पड़ता है।
- शिक्षा में 96.6 और स्वास्थ्य में 95.6 प्रतिशत समानता के बावजूद यह मानव पूंजी सत्ता तक नहीं पहुंच रही — विधायकों, वरिष्ठ अधिकारियों और प्रबंधकों में हिस्सेदारी मात्र 13.1 प्रतिशत है।
- राजनीतिक सशक्तीकरण भारत का सबसे बेहतर उप-सूचकांक है (वैश्विक रैंक 67), फिर भी मंत्री स्तर पर समानता 5.9 प्रतिशत है — 2019 के 30 प्रतिशत शिखर से तीव्र गिरावट, जो सुरक्षा और विदेश नीति के निर्णय मंचों का प्रतिनिधित्व आधार संकुचित करती है।
- रिपोर्ट के अनुसार एआई इंजीनियरों में महिलाएं पांच में एक से भी कम हैं — भविष्य की तकनीकी-सामरिक प्रतिस्पर्धा वाले क्षेत्र में प्रतिभा आधार सिकुड़ने की चेतावनी।
- आर्थिक भागीदारी में दक्षिण एशिया सबसे नीचे और अंतिम तीन में ईरान, पाकिस्तान व चाड — यह क्षेत्रीय प्रवृत्ति दिखाता है; वहीं नामीबिया का चौथे स्थान पर आना और ऑस्ट्रेलिया का पहली बार टॉप 10 में पहुंचना बताता है कि प्रगति आय-स्तर पर निर्भर नहीं।
किस पर नज़र रखें — देखना यह है कि आर्थिक भागीदारी और मंत्री-स्तरीय प्रतिनिधित्व में हलचल आती है या स्कोर बढ़ने के बावजूद रैंक ठहरी रहने का पैटर्न बना रहता है — इसका असर सॉफ्ट पावर और बहुपक्षीय मंचों पर भारत की पैरवी पर भी पड़ेगा।
यह एक सापेक्ष, सूचकांक-आधारित रैंकिंग है; यह खबर भारत की सुरक्षा क्षमता, सैन्य तैयारी या कूटनीतिक प्रभाव से कोई कारण-संबंध सिद्ध नहीं करती, और रैंक अपरिवर्तित रहने के कारण भी नहीं बताती।
गहराई से
शोध सारांश · 8 तथ्य · 8 तारीख़ें · परीक्षा के लिएसार
पृष्ठभूमि
विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) हर साल ग्लोबल जेंडर गैप इंडेक्स जारी करता है, जो चार आयामों—आर्थिक भागीदारी व अवसर, शैक्षिक प्राप्ति, स्वास्थ्य व जीवन-रक्षा और राजनीतिक सशक्तीकरण—पर स्त्री-पुरुष अंतर मापता है। 2026 संस्करण सूचकांक का 20वां वर्ष है और इसमें 145 अर्थव्यवस्थाओं का आकलन किया गया। भारत इस बार भी 131वें स्थान पर बना रहा, जबकि आइसलैंड, फिनलैंड और नॉर्वे शीर्ष तीन में कायम रहे। डब्ल्यूईएफ के अनुसार पूर्ण समानता अभी 120 साल दूर है।
मुख्य तथ्य
- ग्लोबल जेंडर गैप इंडेक्स 2026 बुधवार को जारी; 145 अर्थव्यवस्थाओं में भारत 131वें स्थान पर अपरिवर्तित रहा।
- शीर्ष तीन: आइसलैंड, फिनलैंड, नॉर्वे; सबसे नीचे चाड, तथा निचले तीन में ईरान और पाकिस्तान भी शामिल।
- वैश्विक स्तर पर 69.2% लैंगिक अंतर भरा गया, जो पिछले वर्ष से 0.4 प्रतिशत अंक अधिक; भारत में यह 64.5% रहा।
- भारत की लैंगिक समानता 2006 के बाद 4.3 प्रतिशत अंक बढ़ी, मुख्यतः शैक्षिक प्राप्ति में सुधार से।
- उपसूचकांक: आर्थिक भागीदारी 41.2%, शैक्षिक प्राप्ति 96.6% (0.5 अंक गिरावट), स्वास्थ्य व जीवन-रक्षा 95.6%, राजनीतिक सशक्तीकरण 24.5%।
- राजनीतिक सशक्तीकरण भारत का सर्वोच्च रैंक वाला उपसूचकांक—वैश्विक रैंक 67वां; संसद में 16.1% अंतर भरा, मंत्री स्तर पर 5.9% (2019 के 30% के उच्चतम से बहुत कम)।
- भारत में पेशेवर व तकनीकी कर्मियों में समानता 2006 के 26.6% से बढ़कर 2026 में 49.9%; विधायक/वरिष्ठ अधिकारी/प्रबंधक श्रेणी 13.1%; श्रमबल भागीदारी समानता 44.1%।
- वैश्विक: महिलाएं 19.1% सीईओ पद संभालती हैं; महिलाओं के पास आए हर 10 मंत्रालयों में से केवल एक उच्च प्रभाव वाला; एआई इंजीनियरों में महिलाएं पांच में से एक से भी कम।
समयरेखा
- 2006सूचकांक की शुरुआत; भारत में पेशेवर/तकनीकी कर्मियों में समानता 26.6% और मंत्री स्तर पर 3.5% थी।
- 2013भारत का आर्थिक भागीदारी उपसूचकांक में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन—2026 का स्कोर उससे 3.5 प्रतिशत अंक नीचे।
- 2016वैश्विक स्तर पर राजनीतिक सशक्तीकरण में 2006 से हुई बढ़त उलटने लगी।
- 2017भारत के जन्म के समय लिंगानुपात में ऊपर की ओर रुझान शुरू, फिर भी 2026 में यह 2006 से लगभग एक प्रतिशत अंक कम।
- 2019भारत का मंत्री-स्तरीय समानता स्कोर उच्चतम 30% पर।
- 2021 के बादभारत के राष्ट्राध्यक्ष संकेतक का स्कोर घटकर वर्तमान 40.7% पर आया (पहले दशक में 72.3% तक पहुंचा था)।
- 2022महिला नेतृत्व वाली अर्थव्यवस्थाओं का हिस्सा शिखर पर; अब घटकर 2016 के स्तर पर।
- बुधवार, 2026डब्ल्यूईएफ ने सूचकांक का 20वां संस्करण जारी किया; भारत 131वें स्थान पर बरकरार।
किसका दाँव
- विश्व आर्थिक मंच (जेनेवा स्थित) — सूचकांक तैयार करने वाली संस्था; 20 वर्षों के आंकड़ों के आधार पर नीतिगत सुधार की सिफारिश करता है।
- भारत — 64.5% समानता के साथ वैश्विक औसत से नीचे; स्कोर में मामूली सुधार पर रैंक 131वीं ही रही।
- भारतीय महिलाएं व कामकाजी महिलाएं — श्रमबल भागीदारी समानता 44.1% और वरिष्ठ पदों में हिस्सेदारी 13.1% पर सीमित अवसर।
- सरकारें व नियोक्ता — साडिया जाहिदी के अनुसार कारगर नीतियों से सीखकर उन्हें तेजी से लागू करने की जिम्मेदारी।
- दक्षिण एशिया क्षेत्र — आर्थिक भागीदारी व अवसर में सबसे कम स्कोर वाला क्षेत्र।
- शीर्ष रैंक वाले देश (आइसलैंड, नामीबिया, ऑस्ट्रेलिया) — आइसलैंड एकमात्र देश जिसने 90% से अधिक अंतर भरा; नामीबिया चार स्थान चढ़कर चौथे पर, ऑस्ट्रेलिया पहली बार शीर्ष 10 में।
क्यों अहम है
दुनिया की सबसे अधिक आबादी वाले देश—लगभग 1.5 अरब लोग—में लैंगिक समानता वैश्विक औसत से नीचे रहना श्रमबल, उत्पादकता और प्रतिस्पर्धात्मकता पर सीधा असर डालता है। भारत की बढ़त मुख्यतः शिक्षा से आई है, जबकि आर्थिक भागीदारी और मंत्री-स्तरीय प्रतिनिधित्व में ठहराव या गिरावट दिखती है। डब्ल्यूईएफ का यह आकलन कि पूर्ण समानता 120 साल दूर है, नीतिगत तेजी की तात्कालिकता रेखांकित करता है।
UPSC नज़रिया
प्रीलिम्स संकेत
- ग्लोबल जेंडर गैप इंडेक्स विश्व आर्थिक मंच (जेनेवा) द्वारा जारी; 2026 संस्करण 20वां वर्ष, 145 अर्थव्यवस्थाएं।
- सूचकांक के चार आयाम: आर्थिक भागीदारी व अवसर, शैक्षिक प्राप्ति, स्वास्थ्य व जीवन-रक्षा, राजनीतिक सशक्तीकरण।
- भारत 2026 में 131वें स्थान पर; समानता स्कोर 64.5%, वैश्विक 69.2%।
- आइसलैंड, फिनलैंड, नॉर्वे और स्वीडन—2006 से हर वर्ष शीर्ष 10 में शामिल चार अर्थव्यवस्थाएं।
- भारत का सर्वोच्च रैंक वाला उपसूचकांक: राजनीतिक सशक्तीकरण (67वां, 24.5% अंतर भरा)।
- साडिया जाहिदी—प्रबंध निदेशक, विश्व आर्थिक मंच।
मेन्स दृष्टिकोण
डब्ल्यूईएफ का ग्लोबल जेंडर गैप इंडेक्स 2026 दिखाता है कि भारत की लैंगिक समानता 2006 के बाद केवल 4.3 प्रतिशत अंक बढ़ी है और वह भी मुख्यतः शैक्षिक प्राप्ति (96.6%) के कारण, जबकि आर्थिक भागीदारी व अवसर 41.2% पर अटका है और 2013 के अपने सर्वश्रेष्ठ स्तर से 3.5 प्रतिशत अंक नीचे है। कारणों में श्रमबल भागीदारी की धीमी वृद्धि (44.1%), विधायक/वरिष्ठ प्रबंधक श्रेणी में केवल 13.1% हिस्सेदारी, तथा मंत्री-स्तरीय प्रतिनिधित्व का 2019 के 30% से 5.9% पर गिरना शामिल है; जन्म के समय लिंगानुपात 2017 से सुधरने के बावजूद 2006 से लगभग एक प्रतिशत अंक कम है। वैश्विक चित्र भी सावधान करता है—राजनीतिक सशक्तीकरण 2016 से उलट रहा है, महिला नेतृत्व वाली अर्थव्यवस्थाओं का हिस्सा 2022 के शिखर से गिरकर 2016 के स्तर पर है, महिलाएं 19.1% सीईओ पदों तक सीमित हैं और एआई इंजीनियरों में पांच में से एक से भी कम हैं। जाहिदी का तर्क कि "बाधा संसाधनों की कमी नहीं" है, आगे का रास्ता सुझाता है: कारगर नीतियों से सीखकर उन्हें तेजी से लागू करना, शिक्षा में हासिल बढ़त को रोजगार व नेतृत्व में बदलना, और उच्च-प्रभाव वाले आर्थिक-राजनीतिक पदों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना।
मुख्य शब्द
- ग्लोबल जेंडर गैप इंडेक्स
- डब्ल्यूईएफ का वार्षिक सूचकांक जो चार आयामों पर स्त्री-पुरुष अंतर मापता है; 100% का अर्थ पूर्ण समानता।
- विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ)
- जेनेवा स्थित संस्था जो 2006 से यह सूचकांक जारी कर रही है।
- आर्थिक भागीदारी व अवसर उपसूचकांक
- श्रमबल भागीदारी, पेशेवर/तकनीकी कर्मी तथा वरिष्ठ पदों में महिलाओं की हिस्सेदारी मापने वाला आयाम; भारत का स्कोर 41.2%।
- राजनीतिक सशक्तीकरण उपसूचकांक
- संसद, मंत्रिपरिषद और राष्ट्राध्यक्ष पद में महिला प्रतिनिधित्व मापता है; भारत 67वें स्थान पर, 24.5%।
- जन्म के समय लिंगानुपात
- स्वास्थ्य व जीवन-रक्षा आयाम का संकेतक; भारत में 2017 से सुधार पर 2006 से लगभग एक प्रतिशत अंक कम।
- सी-सूट
- कंपनियों के शीर्ष कार्यकारी पद; वैश्विक स्तर पर महिलाएं 19.1% सीईओ भूमिकाओं में।
अभ्यास प्रश्न
- ग्लोबल जेंडर गैप इंडेक्स 2026 में भारत की स्थिति का चारों उपसूचकांकों के आधार पर विश्लेषण कीजिए। शिक्षा में बढ़त आर्थिक भागीदारी में क्यों नहीं बदल पाई?
- "लैंगिक समानता की बाधा संसाधनों की कमी नहीं, नीतियों का क्रियान्वयन है"—डब्ल्यूईएफ के इस आकलन के आलोक में परीक्षण कीजिए।
- राजनीतिक सशक्तीकरण में वैश्विक उलटाव (2016 से) और भारत के मंत्री-स्तरीय प्रतिनिधित्व में गिरावट के निहितार्थों पर चर्चा कीजिए।
सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।
