होशियारपुर कोर्ट ने पांच वर्षीय बच्चे की हत्या में मौत की सजा सुनाई
पंजाब के होशियारपुर की फास्ट ट्रैक विशेष अदालत ने शुक्रवार को पांच वर्षीय बच्चे से यौन हिंसा और हत्या के मामले में उत्तर प्रदेश के 33 वर्षीय प्रवासी मजदूर नंके यादव उर्फ राधे शाम को मौत की सजा सुनाई। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश मनप्रीत कौर ने इसे 'विरलतम' मामला बताया। बीएनएस और पोक्सो की धाराओं में 20, 10, सात और पांच वर्ष की सजा भी दी गई। माता-पिता को पांच लाख रुपये मुआवजा मिला। सजा की पुष्टि पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट को करनी होगी।
स्रोत
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डेस्क जाँच · स्रोत से तुलना की
डेस्क ने क्या जाँचा (5)
- A fast-track special court in Hoshiarpur sentenced Nanke Yadav alias Radhe Sham, 33, of Gonda district, UP, to death under Section 103 BNS. — Attributed in source to Additional Sessions Judge Manpreet Kaur's order; sentence details appear in source.
- Additional sentences of 10 years, seven years, 20 years and five years under BNS and POCSO sections, running concurrently, with Rs 5,000 fine under each section. — Figures appear in the source as reported court order details.
- Rs 5 lakh compensation awarded to the child's parents under the Punjab Victim or their Dependents Compensation Scheme, 2011. — Figure and scheme name appear in source; no separate official document cited.
- The boy went missing on September 9, 2025 after visiting a gurdwara in Mohalla New Deep Nagar with his nine-year-old sister; body found next morning near a cremation ground in Rahimpur. — Attributed to complainant's counsel Ashwani K Verma.
- Conviction was recorded on September 15, 2026, and the death sentence requires confirmation by the Punjab and Haryana High Court. — Dates as printed in source; the 2026 conviction date is internally inconsistent with the Friday sentencing framing and should be verified before publication.
विश्लेषकों की राय राय
यह बीएनएस और पॉक्सो के तहत एक फास्ट-ट्रैक विशेष अदालत का फैसला है — यानी प्रक्रिया की पहली सीढ़ी, अंतिम शब्द नहीं। अदालत ने जिस 'विरलतम में विरल' कसौटी का उल्लेख किया, वह सुप्रीम कोर्ट की स्थापित न्यायिक परंपरा से आती है, लेकिन उस निष्कर्ष की स्वतंत्र जांच अब हाईकोर्ट को करनी होगी। जैसा खुद ट्रायल कोर्ट ने दर्ज किया, हाईकोर्ट की पुष्टि के बिना मृत्युदंड लागू नहीं हो सकता।
- ट्रायल कोर्ट का मृत्युदंड अनिवार्य पुष्टि के अधीन होता है, जिसमें हाईकोर्ट दोषसिद्धि और सजा की मात्रा—दोनों की नए सिरे से पड़ताल करता है।
- खबर के मुताबिक दोषी को 30 दिनों में अपील का अधिकार बताया गया है, जो मृत्युदंड जैसे मामलों में विशेष महत्व रखने वाली प्रक्रियात्मक सुरक्षा है।
- यह दोषसिद्धि बीएनएस के तहत है, इसलिए नई दंड संहिता के शुरुआती मृत्युदंड मामलों में से एक होने के नाते अपील में व्याख्या के नए सवाल उठ सकते हैं।
- पॉक्सो के तहत दी गई सजाएं साथ-साथ चलेंगी और यदि ऊपरी अदालत में मृत्युदंड कम हुआ तो वही व्यावहारिक सजा बन जाएंगी।
- पंजाब पीड़ित मुआवजा योजना के तहत दिए गए 5 लाख रुपये पीड़ित अधिकारों का अलग वैधानिक उपाय हैं, सजा का विकल्प नहीं।
किस पर नज़र रखें — देखना होगा कि पुष्टि संदर्भ पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में कब सूचीबद्ध होता है और अदालत 'विरलतम में विरल' वर्गीकरण को दोषी की व्यक्तिगत परिस्थितियों के साथ किस तरह तौलती है।
यह खबर फैसले का पूरा पाठ, अदालत द्वारा भरोसा किए गए साक्ष्य, कम करने वाले कारकों पर विचार या बचाव पक्ष का अपना पक्ष स्पष्ट नहीं करती।
गहराई से
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पृष्ठभूमि
पंजाब के होशियारपुर में सितंबर 2025 में पांच वर्षीय बच्चे के साथ यौन हिंसा और हत्या के मामले में फास्ट ट्रैक विशेष अदालत ने उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के 33 वर्षीय प्रवासी मजदूर नंके यादव उर्फ राधे शाम को मौत की सजा सुनाई है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश मनप्रीत कौर ने इसे 'विरलतम में विरल' (rarest of rare) श्रेणी का मामला माना। सजा भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और पोक्सो अधिनियम की धाराओं के तहत सुनाई गई। मौत की सजा तब तक लागू नहीं हो सकती जब तक पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय इसकी पुष्टि नहीं करता।
मुख्य तथ्य
- दोषी नंके यादव उर्फ राधे शाम, 33 वर्षीय प्रवासी मजदूर, उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले का निवासी है।
- बीएनएस की धारा 103 के तहत मौत की सजा; धारा 140(1) में 10 वर्ष कठोर कारावास और धारा 238 में सात वर्ष की सजा।
- पोक्सो अधिनियम की धारा 6 के तहत 20 वर्ष और धारा 10 के तहत पांच वर्ष की सजा; सभी सजाएं साथ-साथ (concurrently) चलेंगी।
- प्रत्येक धारा के तहत 5,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया।
- पंजाब विक्टिम ऑर देयर डिपेंडेंट्स कंपंसेशन स्कीम, 2011 के तहत मृतक बच्चे के माता-पिता को 5 लाख रुपये मुआवजा।
- घटना 9 सितंबर 2025 की, जब बच्चा अपनी नौ वर्षीय बहन के साथ मोहल्ला न्यू दीप नगर के गुरुद्वारे जाने के बाद लापता हुआ।
- शव अगली सुबह रहीमपुर में श्मशान घाट की चारदीवारी के पास झाड़ियों से बरामद हुआ।
- पुलिस ने एफआईआर दर्ज होने के 24 घंटे के भीतर आरोपी को गिरफ्तार किया।
समयरेखा
- 9 सितंबर 2025होशियारपुर के मोहल्ला न्यू दीप नगर में गुरुद्वारा जाने के बाद पांच वर्षीय बच्चा लापता; आरोपी ने खिलौना दोपहिया धक्का लगाने में मदद के बहाने बहलाया।
- 10 सितंबर 2025 (अगली सुबह)रहीमपुर में श्मशान घाट की दीवार के पास झाड़ियों से बच्चे का शव बरामद।
- 10 सितंबर 2025बच्चे के पिता के बयान पर इंडस्ट्रियल फोकल पॉइंट पुरहीरां थाने में मामला दर्ज; 24 घंटे में गिरफ्तारी।
- 15 सितंबर 2026अदालत ने अपहरण, गंभीर यौन हमले और हत्या का दोषी ठहराया; सजा की मात्रा पर आदेश 18 सितंबर के लिए सुरक्षित।
- शुक्रवार (सजा का दिन)फास्ट ट्रैक विशेष अदालत ने मौत की सजा सुनाई और 5 लाख रुपये मुआवजा दिया।
किसका दाँव
- मृतक बच्चे के माता-पिता — न्याय और पंजाब पीड़ित मुआवजा योजना, 2011 के तहत 5 लाख रुपये मुआवजा।
- दोषी नंके यादव उर्फ राधे शाम — मौत की सजा; दोषसिद्धि और सजा के विरुद्ध 30 दिन में अपील का अधिकार।
- फास्ट ट्रैक विशेष अदालत, होशियारपुर (एएसजे मनप्रीत कौर) — पोक्सो व बीएनएस के तहत त्वरित सुनवाई और सजा तय करना।
- पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय — मौत की सजा की पुष्टि के बिना उसे लागू नहीं किया जा सकता।
- पंजाब पुलिस (इंडस्ट्रियल फोकल पॉइंट पुरहीरां थाना) — एफआईआर दर्ज कर 24 घंटे में गिरफ्तारी और जांच।
- शिकायतकर्ता पक्ष के वकील अश्वनी के वर्मा — पीड़ित परिवार की पैरवी और मामले के तथ्यों की प्रस्तुति।
क्यों अहम है
बच्चों के विरुद्ध यौन अपराधों में पोक्सो और नई आपराधिक संहिता बीएनएस के तहत फास्ट ट्रैक विशेष अदालतों की भूमिका इस फैसले से रेखांकित होती है। यह मामला 'विरलतम में विरल' सिद्धांत के प्रयोग, पीड़ित मुआवजा योजना और मृत्युदंड की उच्च न्यायालय द्वारा पुष्टि की संवैधानिक प्रक्रिया—तीनों को एक साथ सामने रखता है।
UPSC नज़रिया
प्रीलिम्स संकेत
- बीएनएस की धारा 103 के तहत सुनाई गई मौत की सजा; धारा 140(1) में 10 वर्ष, धारा 238 में सात वर्ष।
- पोक्सो अधिनियम: धारा 6 (गंभीर प्रवेशन यौन हमला) में 20 वर्ष, धारा 10 में पांच वर्ष।
- पंजाब विक्टिम ऑर देयर डिपेंडेंट्स कंपंसेशन स्कीम, 2011 के तहत 5 लाख रुपये मुआवजा।
- मौत की सजा पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय की पुष्टि के बिना निष्पादित नहीं हो सकती।
- दोषी को दोषसिद्धि व सजा के खिलाफ 30 दिन में अपील का अधिकार बताया गया।
- सजा सुनाने वाली अदालत: फास्ट ट्रैक विशेष अदालत, होशियारपुर; अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश मनप्रीत कौर।
मेन्स दृष्टिकोण
होशियारपुर का यह फैसला बाल यौन अपराधों से निपटने की भारतीय आपराधिक न्याय व्यवस्था की तीन कड़ियों को दर्शाता है—त्वरित पुलिस कार्रवाई (एफआईआर के 24 घंटे में गिरफ्तारी), पोक्सो अधिनियम व बीएनएस के तहत विशेष फास्ट ट्रैक अदालत में मुकदमा, और पीड़ित परिवार को राज्य योजना के तहत मुआवजा। अदालत ने अपहरण, गंभीर यौन हमले और हत्या को 'विरलतम में विरल' मानते हुए मृत्युदंड दिया, जिससे यह प्रश्न उठता है कि निवारण (deterrence) और सुधारात्मक न्याय के बीच संतुलन कैसे बने; यही कारण है कि विधि मृत्युदंड की पुष्टि उच्च न्यायालय पर छोड़ती है और दोषी को 30 दिन में अपील का अधिकार देती है। संरचनात्मक पक्ष भी महत्वपूर्ण है—प्रवासी श्रमिक बस्तियों और सार्वजनिक स्थलों के आसपास बच्चों की असुरक्षा, बच्चों को बहलाकर ले जाने (grooming/luring) की प्रवृत्ति, तथा शव बरामदगी व साक्ष्य संग्रह की गुणवत्ता। आगे का रास्ता: पोक्सो अदालतों की समयबद्ध सुनवाई, पीड़ित मुआवजा योजनाओं का तेज क्रियान्वयन, बाल सुरक्षा जागरूकता और अपीलीय पुष्टि की प्रक्रिया में विलंब घटाना—स्रोत में इनसे आगे किसी नीति की घोषणा का उल्लेख नहीं है।
मुख्य शब्द
- भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस)
- नई आपराधिक संहिता, जिसकी धारा 103 के तहत इस मामले में मौत की सजा दी गई।
- पोक्सो अधिनियम
- बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण देने वाला कानून; धारा 6 और 10 के तहत क्रमशः 20 व पांच वर्ष की सजा।
- 'विरलतम में विरल' (rarest of rare)
- न्यायिक कसौटी, जिसके आधार पर अदालत मृत्युदंड देने योग्य असाधारण मामलों की पहचान करती है।
- फास्ट ट्रैक विशेष अदालत
- गंभीर व बाल यौन अपराधों की त्वरित सुनवाई हेतु गठित विशेष अदालत, जिसने यह फैसला सुनाया।
- पंजाब विक्टिम ऑर देयर डिपेंडेंट्स कंपंसेशन स्कीम, 2011
- पंजाब की योजना जिसके तहत पीड़ित/आश्रितों को मुआवजा; यहां माता-पिता को 5 लाख रुपये मिले।
- सजाओं का साथ-साथ चलना (concurrent sentences)
- विभिन्न धाराओं की सजाएं क्रमवार नहीं, एक ही अवधि में साथ चलती हैं।
अभ्यास प्रश्न
- 'विरलतम में विरल' सिद्धांत क्या है और बाल यौन अपराधों में मृत्युदंड की उपयुक्तता पर बहस के मुख्य पक्ष क्या हैं? समीक्षा करें।
- पोक्सो अधिनियम और फास्ट ट्रैक विशेष अदालतें बच्चों के विरुद्ध अपराधों में न्याय की गति और गुणवत्ता को कैसे प्रभावित करती हैं? उदाहरण सहित चर्चा करें।
- भारत में पीड़ित मुआवजा योजनाओं की भूमिका और उनके क्रियान्वयन की चुनौतियों का परीक्षण कीजिए।
सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।
