भारत ने सुरक्षा परिषद में स्थायी सीट की मांग दोहराई

1945 में बने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में चीन, फ्रांस, रूस, ब्रिटेन और अमेरिका अब भी वीटो अधिकार के साथ स्थायी सदस्य हैं। भारत ने 1994 में 49वीं महासभा में स्थायी सीट के लिए औपचारिक दावेदारी पेश की थी और तब से स्थायी व अस्थायी, दोनों श्रेणियों में विस्तार की मांग कर रहा है। भारत आठ बार अस्थायी सदस्य रहा, अंतिम बार 2021-22 में। 1965 में सदस्य संख्या 11 से 15 हुई थी।

स्रोत

Hindustan Times — India · मूल ख़बर पढ़ें ↗

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डेस्क जाँच · स्रोत से तुलना की

डेस्क ने क्या जाँचा (5)
  • India has served as a non-permanent UNSC member eight times, most recently in 2021-22. — Figure and term list appear in the source; no external verification possible.
  • India formally proposed its candidature for a permanent seat at the 49th General Assembly in 1994. — Stated in source without a named document or official; internally consistent.
  • India has contributed nearly 300,000 personnel to about 50 UN peacekeeping missions and has over 4,300 personnel in 10 missions now. — Attributed in source to external affairs minister S Jaishankar.
  • UNSC membership was expanded once, in 1965, from 11 to 15 via a UN Charter amendment. — Appears in source as factual background; no source cited.
  • Four of the five permanent members support India's bid; China has not explicitly backed it. — Source states this without direct attribution; treat as the publication's assessment.

विश्लेषकों की राय राय

AI राजनीतिक विश्लेषक

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता की भारत की मांग अब केवल कूटनीतिक अनुरोध नहीं, बल्कि घरेलू राजनीति और ग्लोबल साउथ के नेतृत्व की होड़ — दोनों में एक असरदार औजार बन गई है। 1994 से हर महासभा में इस दावेदारी को दोहराना, वाजपेयी के दौर से लेकर वर्तमान सरकार तक, विदेश नीति के उन गिने-चुने मुद्दों में है जिन पर दलगत सहमति है। लेकिन असली अड़चन राजनीतिक है — परिषद का विस्तार 1965 में केवल एक बार हुआ, 1993 से चल रहा कार्यसमूह किसी सहमति पर नहीं पहुंचा, और चीन ने स्पष्ट समर्थन नहीं दिया है।

  • वीटो रखने वाले पांच देश ही सुधार के द्वारपाल हैं, और कोई भी मौजूदा शक्ति अपनी ताकत बांटने में स्वाभाविक रुचि नहीं रखती — यही तीन दशकों की गतिरोध की वजह है।
  • स्थायी और अस्थायी, दोनों श्रेणियों में विस्तार पर भारत का आग्रह रणनीतिक रूप से सटीक है: केवल घूर्णनशील सीटें बढ़ाने से निर्णय-प्रक्रिया का ढांचा नहीं बदलेगा।
  • पांच स्थायी सदस्यों में चार का लंबे समय से समर्थन होने के बावजूद चीन का स्पष्ट समर्थन न देना — ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में सकारात्मक शब्दों के बाद भी — निर्णायक राजनीतिक बाधा है।
  • लगभग 3 लाख शांतिरक्षक, लोकतांत्रिक व्यवस्था और आर्थिक वजन पर आधारित दावा योग्यता-आधारित है, जो विकासशील देशों की आवाज़ बनने के भारत के दावे को मजबूत करता है।
  • 2028-29 अस्थायी सीट के लिए 'शांति' अभियान एक मध्यवर्ती कदम है और महासभा में भारत की वोट जुटाने की क्षमता की असली परीक्षा भी।

किस पर नज़र रखें — देखना होगा कि 2028-29 की अस्थायी सीट के चुनाव में भारत को कितना समर्थन मिलता है, और क्या ब्रिक्स मंच पर दिखी चीन की नरमी खुले, स्पष्ट समर्थन में बदलती है।

यह खबर सुधार की कोई समयसीमा, मतदान प्रक्रिया या यह संकेत स्थापित नहीं करती कि भारत की स्थायी सदस्यता निकट भविष्य में संभव है।

गहराई से

शोध सारांश · 8 तथ्य · 10 तारीख़ें · परीक्षा के लिए

सार

पृष्ठभूमि

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की स्थापना 1945 में द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद हुई थी और तब से उसकी स्थायी सदस्यता अपरिवर्तित है — चीन, फ्रांस, रूस, ब्रिटेन और अमेरिका के पास वीटो सहित पाँच स्थायी सीटें हैं। भारत ने 1994 की 49वीं महासभा में स्थायी सीट के लिए औपचारिक दावेदारी पेश की और उसके बाद हर महासभा में इसे दोहराया है। भारत स्थायी और अस्थायी, दोनों श्रेणियों में विस्तार तथा एशिया, अफ्रीका व लैटिन अमेरिका की अधिक भागीदारी की मांग करता है। हाल ही में नई दिल्ली ने 2028-29 कार्यकाल के लिए अस्थायी सदस्यता का अभियान भी शुरू किया है।

मुख्य तथ्य

  • UNSC की स्थापना 1945 में हुई; स्रोत के अनुसार इसे 81 वर्ष हो चुके हैं और स्थायी सदस्यता अपरिवर्तित है।
  • UN चार्टर पर 26 जून 1945 को हस्ताक्षर हुए, यह 24 अक्तूबर 1945 को लागू हुआ; परिषद की पहली बैठक 17 जनवरी 1946 को चर्च हाउस, वेस्टमिंस्टर, लंदन में हुई।
  • 1965 में UN चार्टर संशोधन से सदस्य संख्या 11 से 15 हुई — चार अस्थायी सीटें जोड़ी गईं, स्थायी सीटें वही रहीं। यह एकमात्र विस्तार है।
  • भारत आठ बार अस्थायी सदस्य रहा: 1950-51, 1967-68, 1972-73, 1977-78, 1984-85, 1991-92, 2011-12 और 2021-22।
  • विदेश मंत्री एस. जयशंकर के अनुसार भारत ने लगभग 50 UN शांति मिशनों में करीब 3,00,000 कर्मी दिए; वर्तमान में 10 मिशनों में 4,300 से अधिक कर्मी तैनात हैं।
  • 2028-29 कार्यकाल के लिए भारत का अभियान: “शांति: India for the United Nations Security Council 2028–29 — Norms, Trust, Integrity”।
  • 1992 की 47वीं महासभा में पुनर्गठन की समीक्षा का निर्णय हुआ; 1993 में ओपन एंडेड वर्किंग ग्रुप (OEWG) बना, पर आकार, मॉडल या मानदंडों पर सहमति नहीं बनी।
  • 2002 में नौ देशों ने भारत की दावेदारी का समर्थन किया — मॉरिशस, भूटान, क्यूबा, डोमिनिकन गणराज्य, रूस, वियतनाम, लाओस, साइप्रस और कंबोडिया।

समयरेखा

  1. 26 जून 1945UN चार्टर पर हस्ताक्षर; सुरक्षा परिषद की स्थापना का आधार तैयार।
  2. 24 अक्तूबर 1945UN चार्टर लागू हुआ।
  3. 17 जनवरी 1946सुरक्षा परिषद की पहली बैठक चर्च हाउस, वेस्टमिंस्टर, लंदन में।
  4. 1950-51भारत पहली बार अस्थायी सदस्य बना।
  5. 1965चार्टर संशोधन से सदस्य संख्या 11 से 15; चार अस्थायी सीटें जोड़ी गईं।
  6. 1992 (47वीं महासभा)परिषद के पुनर्गठन की समीक्षा का पहला निर्णय।
  7. 1993पुनर्गठन के सभी पहलुओं की समीक्षा के लिए ओपन एंडेड वर्किंग ग्रुप (OEWG) गठित।
  8. 1994 (49वीं महासभा)भारत ने स्थायी सीट के लिए औपचारिक दावेदारी पेश की।
  9. सितंबर 2000न्यूयॉर्क में UN मिलेनियम समिट में प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने भारत की स्थायी सदस्यता की मांग दोहराई।
  10. 2002नौ देशों ने UN में भारत की दावेदारी का समर्थन जताया।

किसका दाँव

  • भारत — स्थायी सीट व वीटो के जरिए वैश्विक निर्णयों में बड़ी भूमिका; 2028-29 अस्थायी सदस्यता का चुनाव।
  • पाँच स्थायी सदस्य (चीन, फ्रांस, रूस, ब्रिटेन, अमेरिका) — वीटो से मिली विशेष स्थिति; विस्तार से उनका सापेक्ष प्रभाव प्रभावित होगा।
  • चीन — चार स्थायी सदस्यों के विपरीत भारत की दावेदारी का स्पष्ट समर्थन नहीं किया, हालांकि ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में पक्ष में बात कही।
  • UN महासभा — अस्थायी सदस्यों का दो-वर्षीय कार्यकाल के लिए चुनाव करती है; सुधार पर चर्चा का मंच।
  • ओपन एंडेड वर्किंग ग्रुप (OEWG) — 1993 से पुनर्गठन पर चर्चा, पर आकार व मानदंडों पर सहमति नहीं।
  • विकासशील देश/ग्लोबल साउथ तथा एशिया, अफ्रीका, लैटिन अमेरिका — वैश्विक निर्णय-प्रक्रिया में अधिक प्रतिनिधित्व की मांग।
  • ब्रिक्स नेता — अधिक लोकतांत्रिक, प्रतिनिधिक और प्रभावी UNSC सुधार के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई।
  • ऑस्ट्रेलिया (प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़) — 2029 से अपने समूह की दो अस्थायी सीटों में से एक के लिए दावेदारी।

क्यों अहम है

सुरक्षा परिषद के निर्णय सभी सदस्य देशों पर बाध्यकारी हैं और वह प्रतिबंध लगाने या बल प्रयोग को अधिकृत करने तक जा सकती है — इसलिए वहाँ प्रतिनिधित्व का सीधा अर्थ वैश्विक शक्ति में हिस्सेदारी है। 1945 के बाद केवल एक बार (1965 में) विस्तार हुआ है, जबकि विश्व व्यवस्था बदल चुकी है, जिससे परिषद की वैधता और निर्णय-क्षमता पर प्रश्न उठते हैं। भारत के लिए स्थायी सीट का अर्थ वीटो सहित बड़ी भूमिका और ग्लोबल साउथ की आवाज़ को मज़बूती देना है।

UPSC नज़रिया

प्रीलिम्स संकेत

  • UNSC में 15 सदस्य: 5 स्थायी (वीटो सहित) + 10 अस्थायी, जो महासभा द्वारा दो वर्ष के लिए चुने जाते हैं।
  • परिषद की अध्यक्षता हर माह 15 सदस्यों के बीच घूमती है।
  • 1965 का चार्टर संशोधन: सदस्य संख्या 11 से 15; यही एकमात्र विस्तार।
  • भारत की पहली औपचारिक दावेदारी — 1994, 49वीं महासभा; आठ बार अस्थायी सदस्य, अंतिम 2021-22।
  • OEWG की स्थापना 1993 में (निर्णय 1992 की 47वीं महासभा में)।
  • वर्तमान अस्थायी सदस्य — 2026 में कार्यकाल समाप्त: डेनमार्क, ग्रीस, पाकिस्तान, पनामा, सोमालिया; 2027: बहरीन, कोलंबिया, डीआर कांगो, लातविया, लाइबेरिया।

मेन्स दृष्टिकोण

1945 की भू-राजनीति पर आधारित सुरक्षा परिषद की संरचना आज की बहुध्रुवीय वास्तविकता से मेल नहीं खाती: 1965 के एकमात्र विस्तार के बाद स्थायी सदस्यता अपरिवर्तित है, जबकि वीटो के कारण एक ही स्थायी सदस्य का विरोध किसी भी सारवान प्रस्ताव को रोक सकता है, जिससे निर्णय-प्रक्रिया में गतिरोध आया है। भारत का तर्क है कि केवल अस्थायी श्रेणी का विस्तार संरचनात्मक असंतुलन नहीं बदलेगा, इसलिए दोनों श्रेणियों में विस्तार आवश्यक है; अपने आकार, लोकतांत्रिक व्यवस्था, बढ़ते आर्थिक-भू-राजनीतिक वजन और शांति मिशनों में योगदान (लगभग 50 मिशनों में करीब 3,00,000 कर्मी, वर्तमान में 10 मिशनों में 4,300 से अधिक) को वह अपनी दावेदारी का आधार बताता है। बाधाएँ भी स्पष्ट हैं — 1993 से OEWG आकार, विस्तार के मॉडल और उम्मीदवारी के मानदंडों पर सहमति नहीं बना सका, और पाँच में से चार स्थायी सदस्यों के समर्थन के बावजूद चीन ने स्पष्ट समर्थन नहीं दिया। आगे का रास्ता बहुपक्षीय समर्थन जुटाने (ब्रिक्स घोषणाएँ, साइप्रस व फिलिस्तीन जैसे देशों का समर्थन), ग्लोबल साउथ की आवाज़ बनने, शांति-स्थापना में योगदान जारी रखने और 2028-29 की अस्थायी सदस्यता जैसी चरणबद्ध रणनीति से होकर जाता है।

मुख्य शब्द

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC)
1945 में गठित UN अंग जो शांति के लिए खतरे, शांति भंग या आक्रमण का निर्धारण करता है और प्रतिबंध या बल प्रयोग अधिकृत कर सकता है।
वीटो
पाँच स्थायी सदस्यों का अधिकार जिससे एक के भी विरोध पर सारवान प्रस्ताव पारित नहीं हो सकता, चाहे अन्य कितने भी समर्थन में हों।
अस्थायी सदस्य
महासभा द्वारा दो वर्ष के कार्यकाल हेतु चुने जाने वाले 10 सदस्य; इनके पास वीटो नहीं होता।
ओपन एंडेड वर्किंग ग्रुप (OEWG)
1993 में गठित समूह जो परिषद के पुनर्गठन के सभी पहलुओं की समीक्षा करता है; अब तक मुख्य प्रश्नों पर सहमति नहीं।
“शांति” अभियान
2028-29 अस्थायी सदस्यता के लिए भारत का अभियान — “Shanti: India for the UNSC 2028–29 — Norms, Trust, Integrity”।
UN चार्टर
26 जून 1945 को हस्ताक्षरित, 24 अक्तूबर 1945 को लागू संस्थापक दस्तावेज़; इसके तहत परिषद के निर्णय सभी सदस्य देशों पर बाध्यकारी हैं।

अभ्यास प्रश्न

  1. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की संरचना 1945 की भू-राजनीति को दर्शाती है। स्थायी और अस्थायी दोनों श्रेणियों में विस्तार की भारत की मांग का परीक्षण कीजिए।
  2. वीटो अधिकार सुरक्षा परिषद की निर्णय-प्रक्रिया को कैसे प्रभावित करता है? सुधार की राह में आने वाली संस्थागत बाधाओं पर चर्चा कीजिए।
  3. UN शांति-स्थापना में भारत का योगदान और ग्लोबल साउथ की आवाज़ बनने का प्रयास उसकी स्थायी सदस्यता की दावेदारी को किस हद तक मज़बूत करते हैं?

सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।

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