विकासशील देशों पर अन्याय से दोष मढ़ा जाता है: मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को कहा कि कार्बन उत्सर्जन के लिए विकासशील देशों पर अन्याय से दोष मढ़ा जाता है, जबकि भारत का प्रति व्यक्ति उत्सर्जन वैश्विक औसत से आधे से भी कम है और विकसित देशों का छह गुना अधिक है। उन्होंने विज्ञान भवन में पर्यावरण एवं जलवायु पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन कर एनजीटी मोबाइल ऐप जारी किया। सौर क्षमता 2014 के लगभग 2 गीगावाट से बढ़कर 160 गीगावाट से अधिक हुई। मंत्री भूपेंद्र यादव ने गैर-जीवाश्म स्रोतों की हिस्सेदारी 54.18% बताई।
स्रोत
Hindustan Times — India · मूल ख़बर पढ़ें ↗
डेस्क जाँच · स्रोत से तुलना की
डेस्क ने क्या जाँचा (5)
- Developing nations are unjustly blamed though developed nations emit up to six times more carbon per capita than India; India's per-capita emissions are less than half the global average. — Directly attributed to PM Narendra Modi in the source; figures appear as his statement, not independently verified.
- India's solar capacity rose from about 2 GW in 2014 to over 160 GW now. — Figure appears in source, attributed to Modi's speech.
- Electric vehicles increased 950-fold, from under 3,000 before 2014 to 2.5 million last year. — Attributed to Modi; source provides no independent data.
- Non-fossil sources account for 54.18% of installed electricity capacity, surpassing the 2030 target of 50% nine years early. — Attributed to Union environment minister Bhupender Yadav in the source.
- The conference involves stakeholders from 17 countries, UNEP and ADB; President Droupadi Murmu to attend the valedictory session on Sunday. — Stated as fact in source without named official attribution; scheduled event, subject to change.
विश्लेषकों की राय राय
यह जलवायु भाषण के रूप में रखा गया एक राजनीतिक तर्क है। प्रति व्यक्ति उत्सर्जन को आगे रखकर प्रधानमंत्री मोदी भारत को आरोपी के कठघरे से हटाकर पीड़ित और समाधान देने वाले की जगह पर ले जाते हैं — इससे ग्लोबल साउथ की आवाज़ वाली उनकी छवि मजबूत होती है। सौर क्षमता 2 गीगावाट से 160 गीगावाट पार और गैर-जीवाश्म हिस्सेदारी 54.18 प्रतिशत जैसे आंकड़ों को समय से पहले लक्ष्य पूरा करने के रूप में पेश करना घरेलू राजनीतिक संदेश भी है।
- "अन्यायपूर्ण ढंग से दोष" वाली भाषा वैश्विक वार्ताओं में नैतिक बढ़त हासिल करने की रणनीति है, जो जिम्मेदारी विकसित देशों की ओर मोड़ती है।
- 2014 को आधार वर्ष बनाकर पेश हर आंकड़ा अंतरराष्ट्रीय मंच से भी घरेलू पहले-बाद वाले संदेश की तरह काम करता है।
- इंटरनेशनल सोलर अलायंस और ग्लोबल बायोफ्यूल अलायंस जैसे मंचों का उल्लेख भारत को नियम मानने वाले की बजाय नियम बनाने वाले देश के रूप में पेश करता है।
- सीजेआई, अटॉर्नी जनरल और एनजीटी अध्यक्ष की उपस्थिति सरकार के पक्ष को संस्थागत वजन देती है, हालांकि न्यायिक टिप्पणियां पर्यावरण न्यायशास्त्र पर केंद्रित रहीं, उत्सर्जन की राजनीति पर नहीं।
- विपक्ष स्वच्छ ऊर्जा के आंकड़ों को सीधे चुनौती देने के बजाय वायु गुणवत्ता और स्थानीय पर्यावरण मंजूरियों पर सवाल उठा सकता है।
किस पर नज़र रखें — रविवार को समापन सत्र में राष्ट्रपति की टिप्पणियां और आगामी अंतरराष्ट्रीय जलवायु वार्ताओं में भारत इस प्रति व्यक्ति समानता के तर्क को कितने जोर से उठाता है, इस पर नजर रखें।
यह खबर सरकारी मंच से रखे गए दावों और आंकड़ों की रिपोर्ट है; इसमें स्वतंत्र पुष्टि, विपक्ष या अन्य देशों की प्रतिक्रिया शामिल नहीं है।
गहराई से
शोध सारांश · 8 तथ्य · 6 तारीख़ें · परीक्षा के लिएसार
पृष्ठभूमि
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विज्ञान भवन में "द फ्यूचर ऑफ एनवायरनमेंट एंड क्लाइमेट डायनामिक्स" विषय पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन किया और राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) का मोबाइल ऐप जारी किया। उन्होंने कहा कि कार्बन उत्सर्जन के लिए विकासशील देशों पर अन्याय से दोष मढ़ा जाता है, जबकि भारत का प्रति व्यक्ति उत्सर्जन वैश्विक औसत से आधे से कम है। सम्मेलन में 17 देशों के न्यायविद, शिक्षाविद और पर्यावरण विशेषज्ञ तथा यूएनईपी व एशियाई विकास बैंक शामिल हो रहे हैं। कार्यक्रम में मुख्य न्यायाधीश, अटॉर्नी जनरल और केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भी उपस्थित थे।
मुख्य तथ्य
- मोदी के अनुसार भारत का प्रति व्यक्ति उत्सर्जन वैश्विक औसत के आधे से भी कम है, जबकि विकसित देश भारत से छह गुना अधिक प्रति व्यक्ति कार्बन उत्सर्जित करते हैं।
- भारत एकमात्र जी-20 देश है जिसने पेरिस कॉप-21 में की गई सभी प्रतिबद्धताएँ समय से बहुत पहले पूरी कीं।
- सौर क्षमता 2014 के लगभग 2 गीगावाट से बढ़कर अब 160 गीगावाट से अधिक हुई, मुख्यतः पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना और पीएम कुसुम योजना से।
- पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव: गैर-जीवाश्म स्रोतों की स्थापित बिजली क्षमता में हिस्सेदारी 54.18%, जो 2030 के 50% लक्ष्य से नौ वर्ष पहले हासिल।
- इलेक्ट्रिक वाहनों में 950 गुना वृद्धि — 2014 से पहले 3,000 से कम, पिछले वर्ष 25 लाख।
- पवन क्षमता में तीन गुना वृद्धि, जलविद्युत का विस्तार, और परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में निजी खिलाड़ियों का प्रवेश।
- देश में लगभग 5,000 किलोमीटर अंतर्देशीय जलमार्ग चालू; एक मानक जलयान दर्जनों ट्रकों के बराबर भार ढो सकता है।
- सम्मेलन में 17 देशों के प्रतिभागी, यूएनईपी और एशियाई विकास बैंक; राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू रविवार को समापन सत्र में भाग लेंगी।
समयरेखा
- 2014 से पहलेदेश में इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या 3,000 से कम; सौर क्षमता 2014 में लगभग 2 गीगावाट।
- कॉप-21 (पेरिस)भारत ने जलवायु प्रतिबद्धताएँ कीं; 'कन्वीनिएंट एक्शन- कंटिन्युटी फॉर चेंज' पुस्तक का विमोचन।
- पिछला वर्षइलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या 25 लाख तक पहुँची।
- हाल ही मेंभारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी, जिसे दुनिया की सबसे लंबी ऐसी ट्रेन बताया गया।
- शनिवारमोदी ने विज्ञान भवन में अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन किया और एनजीटी मोबाइल ऐप जारी किया।
- रविवारराष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू सम्मेलन के समापन सत्र में भाग लेंगी।
किसका दाँव
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी — वैश्विक जलवायु विमर्श में विकासशील देशों का पक्ष रखना और भारत की स्वच्छ ऊर्जा उपलब्धियाँ प्रस्तुत करना।
- राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) — मोबाइल ऐप के जरिए पर्यावरण न्याय तक पहुँच; अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव सम्मेलन में शामिल।
- सर्वोच्च न्यायालय / मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्य कांत — प्रदूषण-मुक्त पर्यावरण को मूल अधिकार मानने वाली पर्यावरणीय न्यायशास्त्र परंपरा को रेखांकित करना।
- केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव — गैर-जीवाश्म क्षमता लक्ष्य समय से पहले पूरा होने का दावा और नीति क्रियान्वयन की जिम्मेदारी।
- विकासशील देश — कार्बन उत्सर्जन के लिए दोषारोपण और ऐतिहासिक जिम्मेदारी के प्रश्न पर उनका हित।
- किसान और घरेलू उपभोक्ता — पीएम कुसुम और पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना से सौर ऊर्जा व बिजली लाभ।
- यूएनईपी और एशियाई विकास बैंक — सम्मेलन में अंतरराष्ट्रीय संगठनों के रूप में भागीदारी और जलवायु सहयोग।
क्यों अहम है
यह बयान जलवायु वार्ताओं के मूल विवाद—ऐतिहासिक और प्रति व्यक्ति उत्सर्जन के आधार पर जिम्मेदारी के बँटवारे—को फिर केंद्र में लाता है, जहाँ भारत विकासशील देशों की आवाज़ बनकर उभर रहा है। साथ ही यह भारत के ऊर्जा संक्रमण के ठोस आँकड़े प्रस्तुत करता है, जिनसे "तेज़ और सतत विकास" के दावे को परखा जा सकता है। न्यायपालिका की भागीदारी दिखाती है कि पर्यावरण संरक्षण नीति और न्यायशास्त्र दोनों का विषय है।
UPSC नज़रिया
प्रीलिम्स संकेत
- गैर-जीवाश्म स्रोत भारत की स्थापित बिजली क्षमता का 54.18%; 2030 का 50% लक्ष्य नौ वर्ष पहले प्राप्त (भूपेंद्र यादव)।
- सौर क्षमता: 2014 में लगभग 2 गीगावाट से बढ़कर 160 गीगावाट से अधिक।
- भारत द्वारा पहल किए गए मंच: वन सन वन वर्ल्ड वन ग्रिड, अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन, सीडीआरआई, वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन, अंतरराष्ट्रीय बिग कैट अलायंस।
- सर्वोच्च न्यायालय द्वारा विकसित सिद्धांत: एहतियाती सिद्धांत, प्रदूषक भुगतान सिद्धांत, पूर्ण दायित्व और लोक न्यास सिद्धांत।
- एनजीटी मोबाइल ऐप प्रधानमंत्री द्वारा जारी; एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव।
- भारत एकमात्र जी-20 देश जिसने कॉप-21 की सभी प्रतिबद्धताएँ समय-पूर्व पूरी कीं।
मेन्स दृष्टिकोण
वैश्विक जलवायु विमर्श में उत्सर्जन की जिम्मेदारी का प्रश्न केंद्रीय है, और प्रधानमंत्री का यह तर्क कि विकासशील देशों पर "अन्याय से" दोष मढ़ा जाता है, प्रति व्यक्ति उत्सर्जन के मानक को आधार बनाता है—भारत का प्रति व्यक्ति उत्सर्जन वैश्विक औसत से आधे से कम, जबकि विकसित देश छह गुना अधिक उत्सर्जन करते हैं। भारत अपने दावे को ठोस आँकड़ों से पुष्ट करता है: सौर क्षमता 2 गीगावाट (2014) से 160 गीगावाट से अधिक, गैर-जीवाश्म स्रोतों की हिस्सेदारी 54.18% (2030 लक्ष्य से नौ वर्ष पूर्व), पवन क्षमता में तीन गुना वृद्धि, ईवी में 950 गुना वृद्धि, पहली हाइड्रोजन ट्रेन और लगभग 5,000 किमी अंतर्देशीय जलमार्ग—जो परिवहन में कम कार्बन विकल्प देते हैं। साथ में भारत ने अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन, सीडीआरआई, वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन, वन सन वन वर्ल्ड वन ग्रिड जैसे मंचों के जरिए बहुपक्षीय नेतृत्व गढ़ा है। घरेलू स्तर पर सर्वोच्च न्यायालय द्वारा विकसित एहतियाती सिद्धांत, प्रदूषक भुगतान, पूर्ण दायित्व और लोक न्यास सिद्धांत तथा एनजीटी की संस्थागत भूमिका इस ढाँचे को कानूनी आधार देती है। आगे का रास्ता नवीकरणीय क्षमता के साथ-साथ स्वच्छ गतिशीलता, परमाणु क्षेत्र में निजी भागीदारी और जलमार्ग जैसे कम-कार्बन विकल्पों के विस्तार, तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समानता-आधारित जिम्मेदारी के मानक पर जोर देने में है, जैसा स्रोत में वर्णित है।
मुख्य शब्द
- प्रति व्यक्ति उत्सर्जन
- किसी देश की जनसंख्या पर विभाजित कार्बन उत्सर्जन; मोदी के अनुसार भारत का यह आँकड़ा वैश्विक औसत के आधे से कम है।
- कॉप-21 (पेरिस)
- पेरिस जलवायु सम्मेलन, जहाँ भारत ने प्रतिबद्धताएँ कीं और 'कन्वीनिएंट एक्शन- कंटिन्युटी फॉर चेंज' पुस्तक जारी हुई।
- एनजीटी
- राष्ट्रीय हरित अधिकरण, जिसका मोबाइल ऐप प्रधानमंत्री ने जारी किया; अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव।
- पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना
- छत पर सौर ऊर्जा से घरों को बिजली देने वाली योजना, जिसे सौर क्षमता वृद्धि का प्रमुख कारण बताया गया।
- पीएम कुसुम योजना
- किसानों के लिए सौर ऊर्जा से जुड़ी योजना, जो भारत की सौर क्षमता बढ़ाने में सहायक बताई गई।
- प्रदूषक भुगतान सिद्धांत
- सर्वोच्च न्यायालय द्वारा विकसित सिद्धांत, जिसके तहत प्रदूषण की क्षतिपूर्ति का दायित्व प्रदूषक पर होता है।
अभ्यास प्रश्न
- जलवायु जिम्मेदारी तय करने में प्रति व्यक्ति उत्सर्जन को मानक बनाने के पक्ष और विपक्ष के तर्कों का परीक्षण कीजिए।
- भारत के ऊर्जा संक्रमण की उपलब्धियों (सौर, पवन, गैर-जीवाश्म हिस्सेदारी, ईवी) का मूल्यांकन करते हुए बताइए कि 'तेज़ और सतत विकास' के दावे की कसौटियाँ क्या होनी चाहिए।
- भारत में पर्यावरणीय न्यायशास्त्र के विकास में सर्वोच्च न्यायालय और एनजीटी की भूमिका पर चर्चा कीजिए।
सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।
