तेलंगाना में सिंचाई नहरों की खराब देखरेख, आयकट तक नहीं पहुंच रहा पानी
रिपोर्ट के अनुसार तेलंगाना की प्रमुख परियोजनाओं की नहरें, शाखाएं और वितरिकाएं गाद, टूटी लाइनिंग और कटाव से क्षतिग्रस्त हैं। संचालन व रखरखाव के लिए सालाना करीब 280 करोड़ रुपये, यानी प्रति तिमाही 70 करोड़ रुपये आवंटित होते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर उपयोग नहीं दिखता। गाद से निजामसागर की भंडारण क्षमता 28 टीएमसी से 17 टीएमसी रह गई, अभी केवल 7 टीएमसी पानी है। 2.52 लाख एकड़ को पानी देने वाली नागार्जुनसागर बाईं नहर की मरम्मत के टेंडर अभी नहीं बुलाए गए। मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने 360 करोड़ रुपये जारी करने के आदेश दिए हैं।
स्रोत
Rajanna Sircilla — నీరు · సాగునీరు · मूल ख़बर पढ़ें ↗
डेस्क जाँच · कुछ दावे ध्यान से पढ़ें
डेस्क ने क्या जाँचा (5)
- CM Revanth Reddy reviewed O&M funds and ordered immediate release of Rs 360 crore. — Attributed in source to a recent review by the Chief Minister; no order number or date given.
- Irrigation department is allotted about Rs 280 crore a year for O&M, at Rs 70 crore per quarter. — Figures appear in source without citing a specific budget document.
- Nizamsagar storage capacity fell from 28 TMC to 17 TMC due to silt; only 7 TMC stored now. — Specific figures appear in source; no measuring agency attributed.
- Nagarjunasagar Left Bank Canal serves 2.52 lakh acres and tenders for repairs have not been called. — Stated in source as reporter's field observation; no official confirmation quoted.
- 2020 order delegated sanction powers up to Rs 5 lakh (DEE) to Rs 5 crore (CE/ENC). — Source dates the order to 28 December 2020 under the then BRS government; no GO number cited.
विश्लेषकों की राय राय
यह उस पुराने पैटर्न का उदाहरण है जहाँ सस्ती रख-रखाव लागत टालते-टालते महँगी क्षमता-हानि बन जाती है। रिपोर्ट के मुताबिक संचालन एवं रख-रखाव के लिए हर साल करीब 280 करोड़ रुपये उपलब्ध हैं, फिर भी ज़मीन पर गाद भरी नहरें, टूटी लाइनिंग और कटे तटबंध दिख रहे हैं — यानी असली अड़चन बजट नहीं, खर्च करने की क्षमता और निगरानी है। मुख्यमंत्री द्वारा जारी करने के आदेश वाले 360 करोड़ रुपये तभी काम आएँगे जब वे पानी छोड़ने के मौसम से पहले टेंडर होकर पूरे किए गए कामों में बदलें; निजामसागर की भंडारण क्षमता 28 टीएमसी से 17 टीएमसी रह जाना सबसे बड़ी आर्थिक खबर है, क्योंकि यह परिसंपत्ति मूल्य का स्थायी नुकसान है।
- अर्थशास्त्र साफ़ तौर पर रख-रखाव के पक्ष में है: छोटा, नियमित मरम्मत खर्च बाँधों, नहरों और लिफ्ट योजनाओं में लगी बहुत बड़ी डूबी पूँजी की रक्षा करता है, इसलिए इसे टालना सबसे महँगे फ़ैसलों में गिना जाता है।
- कीमत आयकट के अंतिम छोर के किसान चुकाते हैं — रिपोर्ट के अनुसार रामडुगु के 6,104 एकड़ आयकट में अब 2,000 एकड़ से भी कम को ठीक से पानी मिल रहा है, जिसका सीधा अर्थ है फ़सल आय का नुकसान और भूजल/बोरवेल पर बढ़ती निर्भरता।
- मुख्य अभियंता स्तर तक 5 करोड़ रुपये तक के वित्तीय अधिकार दिए जाने से साफ़ है कि मंज़ूरी अड़चन नहीं है; रिपोर्ट कमज़ोर क्षेत्रीय निरीक्षण और मुख्यालय की अनुशीलन-कमी की ओर इशारा करती है, यानी क्रियान्वयन और जवाबदेही की समस्या।
- निजामसागर की क्षमता घटाने वाली गाद असल में एक सार्वजनिक परिसंपत्ति का मूल्यह्रास है, और बाद में गाद निकालकर भंडारण बहाल करना आमतौर पर रोकथाम से कहीं ज़्यादा खर्चीला पड़ता है।
- 2.52 लाख एकड़ को पानी देने वाली नागार्जुनसागर बाईं नहर के टेंडर अब तक न निकलना बताता है कि इस सीज़न का नतीजा पैसे से ज़्यादा कैलेंडर तय करेगा — देर से दिए गए काम अक्सर किसान के बोआई-फ़ैसले के बाद शुरू होते हैं।
किस पर नज़र रखें — देखना होगा कि नागार्जुनसागर बाईं नहर और अन्य लंबित कामों के टेंडर पानी छोड़ने से पहले वास्तव में आवंटित और पूरे होते हैं या नहीं, और 360 करोड़ रुपये पूरे हुए कामों में दिखते हैं या बिना खर्च पड़ी राशि बनकर रह जाते हैं।
यह रिपोर्ट यह स्थापित नहीं करती कि मौजूदा निधियाँ क्यों अनुपयोगी रहीं, कहीं धन का दुरुपयोग हुआ या नहीं, 360 करोड़ रुपये में से कितना ज़मीन तक पहुँचा, और फ़सल नुकसान तथा मरम्मत की कुल लागत रुपये में कितनी है।
गहराई से
शोध सारांश · 8 तथ्य · 5 तारीख़ें · परीक्षा के लिएसार
पृष्ठभूमि
तेलंगाना की बड़ी सिंचाई परियोजनाओं — श्रीरामसागर, निजामसागर, नागार्जुनसागर, कल्वकुर्ति आदि — की मुख्य नहरें, शाखा नहरें और वितरिकाएं गाद, झाड़ियों, टूटी लाइनिंग और कटाव से बेहाल हैं, जिससे छोड़ा गया पानी आयकट (सिंचित क्षेत्र) तक नहीं पहुंच पा रहा। जल संसाधन विभाग में संचालन एवं रखरखाव (O&M) के लिए अलग विभाग और सालाना करीब 280 करोड़ रुपये का प्रावधान है, फिर भी क्षेत्रस्तर पर काम दिखाई नहीं देता। वर्षा ऋतु से पहले मरम्मत का काम पूरा होना चाहिए था। मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने समीक्षा के बाद 360 करोड़ रुपये तुरंत जारी करने के आदेश दिए हैं।
मुख्य तथ्य
- O&M के लिए हर साल लगभग 280 करोड़ रुपये आवंटित होते हैं; हर तीन महीने में 70 करोड़ रुपये उपयोग करने की छूट है।
- गाद जमा होने से निजामसागर परियोजना की भंडारण क्षमता 28 टीएमसी से घटकर 17 टीएमसी रह गई; वर्तमान में केवल 7 टीएमसी पानी है।
- निजामसागर के तहत कामारेड्डी और निजामाबाद जिलों में 1,15,825 एकड़ में फसलें होती हैं; निजामाबाद के पास नहरों में सीमेंट लाइनिंग नहीं है।
- नागार्जुनसागर बाईं नहर 2.52 लाख एकड़ आयकट को पानी देती है; खम्मम जिले में गाद भरी है और मरम्मत के टेंडर अब तक नहीं बुलाए गए।
- 28 दिसंबर 2020 के तत्कालीन बीआरएस सरकार के आदेश: डीईई 5 लाख, ईई 25 लाख, एसई 2 करोड़, सीई व इंजीनियर-इन-चीफ 5 करोड़ रुपये तक प्रशासनिक मंजूरी दे सकते हैं।
- राजन्ना सिरसिल्ला के अपर मानेर जलाशय की दाईं मुख्य नहर का शटर तीन साल पहले खराब हुआ; पिछले साल 20 लाख रुपये मंजूर हुए, पर ठेकेदार काम को आगे नहीं आया; इससे मुस्ताबाद मंडल में 12,245 एकड़ प्रभावित।
- निजामाबाद के धर्पल्ली मंडल की रामडुगु मध्यम परियोजना में 6,104 एकड़ को पानी मिलना चाहिए, पर अब दो हजार एकड़ को भी ठीक से पानी नहीं मिल रहा।
- श्रीरामसागर की लक्ष्मी नहर 25,763 एकड़ को सींचती है और यासंगी सीजन में सालाना 3 टीएमसी पानी छोड़ा जाता है; कई जगह लाइनिंग ध्वस्त।
समयरेखा
- 28 दिसंबर 2020तत्कालीन बीआरएस सरकार ने आदेश जारी कर इंजीनियरों को आपात व रखरखाव कार्यों की प्रशासनिक मंजूरी के अधिकार दिए।
- लगभग तीन साल पहलेअपर मानेर जलाशय की दाईं मुख्य नहर का तूमु (शटर) खराब हो गया।
- पिछले वर्षशटर मरम्मत के लिए 20 लाख रुपये मंजूर; विकाराबाद के कोटपल्लिवागु के जीर्णोद्धार के लिए भी निधि आवंटित, पर काम अपूर्ण।
- हाल ही मेंमुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने सभी परियोजनाओं की O&M निधियों की समीक्षा कर 360 करोड़ रुपये जारी करने के तत्काल आदेश दिए।
- 22 जून 2026ईटीवी भारत की रिपोर्ट प्रकाशित, नहरों की दुर्दशा और निधियों के अनुपयोग का ब्योरा।
किसका दाँव
- आयकट के किसान — नहरों में गाद व टूटी लाइनिंग के कारण खेतों तक सिंचाई का पानी न पहुंचना; पानी गटों से बहकर व्यर्थ जाना।
- जल संसाधन (नीटिपारुदल) विभाग व O&M विभाग — सालाना 280 करोड़ रुपये का उपयोग और मरम्मत कार्य समय पर कराने की जिम्मेदारी।
- मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी — समीक्षा के बाद 360 करोड़ रुपये जारी करने का आदेश; परियोजनाओं के प्रदर्शन की राजनीतिक जवाबदेही।
- सिंचाई मंत्री उत्तम कुमार रेड्डी — मुख्य अभियंताओं को काम शुरू करने के निर्देश देना।
- डीईई/ईई/एसई/सीई स्तर के इंजीनियर — 5 लाख से 5 करोड़ रुपये तक की मंजूरी शक्तियां होने के बावजूद क्षेत्रस्तरीय निरीक्षण व कार्यान्वयन में शिथिलता के आरोप।
- ठेकेदार — जलाशय में पानी रहने जैसी स्थितियों में काम से पीछे हटना, जिससे मरम्मत लटकी।
क्यों अहम है
परियोजनाओं में पानी रोक लेना ही पर्याप्त नहीं; अंतिम छोर तक वितरण तंत्र चालू न रहे तो संचित जल फसलों तक नहीं पहुंचता और सिंचाई क्षमता कागजी रह जाती है। निजामसागर की क्षमता 28 से 17 टीएमसी रह जाना दिखाता है कि गाद और उपेक्षा किस तरह सार्वजनिक निवेश को घटा देती है। कमजोर कट्टे और ध्वस्त लाइनिंग वर्षा ऋतु में नहर टूटने तथा आसपास के पुल जैसे ढांचों को भी खतरे में डालते हैं।
UPSC नज़रिया
प्रीलिम्स संकेत
- आयकट (Ayacut) = किसी सिंचाई परियोजना के अंतर्गत सिंचित होने वाला क्षेत्र; टीएमसी = हजार मिलियन घन फुट।
- निजामसागर: गाद से भंडारण क्षमता 28 टीएमसी से 17 टीएमसी; वर्तमान भंडारण 7 टीएमसी; आयकट 1,15,825 एकड़।
- नागार्जुनसागर बाईं नहर (खम्मम जिला) का आयकट 2.52 लाख एकड़; मरम्मत के टेंडर लंबित।
- तेलंगाना में O&M हेतु वार्षिक आवंटन लगभग 280 करोड़ रुपये (तिमाही 70 करोड़); सीएम ने 360 करोड़ रुपये जारी करने के आदेश दिए।
- 28 दिसंबर 2020 के आदेश से इंजीनियरों को मंजूरी की सीमाएं: डीईई 5 लाख, ईई 25 लाख, एसई 2 करोड़, सीई/ईएनसी 5 करोड़ रुपये।
- निजामसागर नहरों पर लिफ्ट सिंचाई योजनाएं: अलीसागर, आर्गुल राजाराम गुत्प, जाकोरा।
मेन्स दृष्टिकोण
तेलंगाना की नहर प्रणाली का संकट सृजन (creation) और रखरखाव (maintenance) के बीच के असंतुलन का उदाहरण है: बड़ी परियोजनाएं और लिफ्ट योजनाएं बनीं, पर मुख्य नहरें, शाखाएं व वितरिकाएं गाद, झाड़ियों, टूटी लाइनिंग, क्षतिग्रस्त तूमु और एक्वाडक्ट तथा कटे कट्टों के कारण जल वहन नहीं कर पातीं। कारण संस्थागत हैं — O&M के लिए अलग विभाग, सालाना करीब 280 करोड़ रुपये और 2020 से इंजीनियरों को 5 लाख से 5 करोड़ रुपये तक की मंजूरी शक्तियां होने के बावजूद क्षेत्रस्तरीय निरीक्षण और मुख्यालय से अनुशीलन का अभाव है; काम तब होता है जब किसान दबाव डालें या जनप्रतिनिधि याद दिलाएं। परिणाम स्पष्ट हैं: रामडुगु में 6,104 एकड़ के लक्ष्य के मुकाबले दो हजार एकड़ को भी ठीक पानी नहीं, निजामसागर की क्षमता घटकर आधी से कम, अपर मानेर में शटर तीन साल से खराब और 2.52 लाख एकड़ वाली नागार्जुनसागर बाईं नहर के टेंडर तक नहीं. आगे का रास्ता: वर्षा ऋतु से पहले समयबद्ध पूडिकतीत (गाद निकासी) व लाइनिंग मरम्मत, जारी 360 करोड़ रुपये का सत्यापनयोग्य उपयोग, तिमाही निधि-उपयोग की निगरानी, ठेकेदारों के लिए जल-निकासी सहित कार्य-समय की योजना, और किसानों की शिकायतों पर आधारित उत्तरदायित्व तंत्र।
मुख्य शब्द
- आयकट
- किसी सिंचाई परियोजना या नहर से वास्तव में सिंचित होने वाला कृषि क्षेत्र।
- O&M (ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस)
- सिंचाई विभाग का वह प्रभाग जो नहरों के संचालन व रखरखाव के लिए निधि खर्च करता है; तेलंगाना में वार्षिक ~280 करोड़ रुपये।
- टीएमसी
- हजार मिलियन घन फुट — जलाशय भंडारण मापने की इकाई; निजामसागर की क्षमता 28 से 17 टीएमसी रह गई।
- लाइनिंग
- नहर की तली व दीवारों पर सीमेंट/कंक्रीट की परत, जो रिसाव और कटाव रोकती है; कई जगह ध्वस्त।
- वितरिका (डिस्ट्रिब्यूटरी)
- मुख्य व शाखा नहर से निकलकर खेतों तक पानी पहुंचाने वाली छोटी नहर; इसके तूमु व एक्वाडक्ट क्षतिग्रस्त हैं।
- कल्वकुर्ति लिफ्ट सिंचाई योजना
- संयुक्त पालमूरु क्षेत्र की महत्वपूर्ण उत्थापन सिंचाई योजना; पैकेज 29 की मुख्य नहर की लाइनिंग जीर्ण-शीर्ण।
अभ्यास प्रश्न
- सिंचाई परियोजनाओं में 'सृजित क्षमता' और 'वास्तविक उपयोग' के अंतर के कारणों की विवेचना करें। तेलंगाना की नहर प्रणाली के उदाहरण से समझाइए।
- जलाशयों में गाद जमाव भंडारण क्षमता और सिंचाई सुनिश्चितता को कैसे प्रभावित करता है? निजामसागर के आंकड़ों के आलोक में उपाय सुझाइए।
- इंजीनियरों को वित्तीय मंजूरी की शक्तियां देने के बावजूद रखरखाव कार्य क्षेत्रस्तर पर क्यों नहीं दिखते? जवाबदेही सुधारने के तरीकों पर चर्चा करें।
सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।