ओडिशा के नंदनकानन जू में ओरंगुटान शावक को बुखार

ओडिशा के नंदनकानन प्राणी उद्यान में 8 सितंबर से क्वारंटीन में रखे गए पांच ओरंगुटान शावकों में से एक को बुखार आ गया है, अधिकारियों ने सोमवार को बताया। शावक को रविवार से तेज बुखार है और दवाएं दी जा रही हैं, पशु चिकित्सक चौबीसों घंटे निगरानी कर रहे हैं; एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि स्थिति स्थिर है। बाकी चार स्वस्थ हैं। ओयूएटी के वन्यजीव स्वास्थ्य केंद्र के पूर्व निदेशक निरंजन साहू ने कहा कि बुखार संक्रामक है या तनाव से जुड़ा, यह तय करना होगा। शावकों को बालासोर जिले के झाऊ जंगल से बचाया गया था।

स्रोत

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डेस्क ने क्या जाँचा (5)
  • One of five baby orangutans quarantined at Nandankanan Zoological Park since September 8 has developed fever. — Attributed to unnamed officials speaking on Monday; dates and figures appear in source.
  • The infant has run a high temperature since Sunday and is being given medicines; it is stable under medical supervision. — Attributed to veterinarians and a senior zoo official, who is quoted but not named.
  • The other four infants are healthy and responding normally. — Attributed to officials, no individual named.
  • Cause of fever must be established; it could be infectious or stress-related, linked to transport or low immunity and colostrum intake. — Attributed by name to Niranjan Sahoo, former director of the Centre for Wildlife Health at OUAT; expert opinion, not confirmed diagnosis.
  • The infants were rescued from a casuarina forest in Balasore district a few days ago. — Stated in source without a named source; consistent with the September 8 quarantine reference.

गहराई से

शोध सारांश · 8 तथ्य · 4 तारीख़ें · परीक्षा के लिए

सार

पृष्ठभूमि

ओडिशा के बालासोर जिले के झाऊ (कैजुरीना) जंगल से बचाए गए पांच ओरंगुटान शावकों को 8 सितंबर से भुवनेश्वर स्थित नंदनकानन प्राणी उद्यान में क्वारंटीन में रखा गया है। ओरंगुटान भारत की देशज (नेटिव) प्रजाति नहीं है, इसलिए इनकी मौजूदगी ने तस्करी की आशंका खड़ी की है। इनमें से एक शावक को रविवार से तेज बुखार है, जिसके बाद अधिकारी सतर्क हो गए हैं और पशु चिकित्सक चौबीसों घंटे निगरानी कर रहे हैं।

मुख्य तथ्य

  • नंदनकानन प्राणी उद्यान में 8 सितंबर से पांच ओरंगुटान शावक क्वारंटीन में रखे गए हैं।
  • पांच में से एक शावक को रविवार से तेज बुखार है; उसे बुखार नियंत्रित करने की दवाएं दी जा रही हैं।
  • अधिकारियों ने सोमवार को बताया कि शावक की स्थिति स्थिर है और वह सख्त चिकित्सकीय निगरानी में है।
  • जू के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, दवा के बाद बुखार उतरता है लेकिन फिर लौट आता है; लाए जाने के दिन से ही बुखार है।
  • बाकी चार शावक स्वस्थ हैं और सामान्य प्रतिक्रिया दे रहे हैं।
  • शावकों को बालासोर जिले के झाऊ (कैजुरीना) जंगल से बचाया गया था और कुछ दिन पहले ही नंदनकानन लाया गया।
  • ओयूएटी के वन्यजीव स्वास्थ्य केंद्र के पूर्व निदेशक निरंजन साहू ने कहा कि बुखार संक्रामक है या तनावजनित, यह तय करना जरूरी है।
  • साहू ने कहा कि कोलोस्ट्रम (मां का पहला दूध) प्रतिरक्षा बनाने में मदद करता है; शावकों को यह कितना मिला, यह बड़ा सवाल है।

समयरेखा

  1. 8 सितंबर से पहले (कुछ दिन पहले)बालासोर जिले के झाऊ जंगल से पांच ओरंगुटान शावकों को बचाया गया।
  2. 8 सितंबरशावकों को नंदनकानन प्राणी उद्यान में क्वारंटीन में रखा गया।
  3. रविवारएक शावक को तेज बुखार शुरू हुआ; दवाएं दी जाने लगीं।
  4. सोमवारअधिकारियों ने बताया कि शावक की स्थिति स्थिर है और बाकी चार स्वस्थ हैं।

किसका दाँव

  • नंदनकानन प्राणी उद्यान, ओडिशा — पांच विदेशी शावकों की क्वारंटीन देखभाल, चौबीसों घंटे पशु चिकित्सा निगरानी और संक्रमण फैलने से रोकने की जिम्मेदारी।
  • पांच ओरंगुटान शावक — कमजोर प्रतिरक्षा, लंबी यात्रा का तनाव और संभावित संक्रमण के कारण जीवन-स्वास्थ्य दांव पर।
  • पशु चिकित्सक — बुखार का कारण—संक्रामक या तनावजनित—पहचानना और तापमान, दवा की प्रतिक्रिया व समग्र स्थिति का आकलन।
  • निरंजन साहू / ओयूएटी वन्यजीव स्वास्थ्य केंद्र — विशेषज्ञ राय देना कि जोखिम कितना है और अन्य शावकों तक संक्रमण फैलने की आशंका।
  • ओडिशा के वन-वन्यजीव अधिकारी — भारत में देशज न होने वाली प्रजाति की मौजूदगी—तस्करी की आशंका—और बचाव के बाद की देखरेख।

क्यों अहम है

ओरंगुटान भारत की देशज प्रजाति नहीं है, इसलिए बालासोर के जंगल से पांच शावकों का मिलना वन्यजीव तस्करी की आशंका को जन्म देता है और बचाव के बाद की चिकित्सा-देखभाल की क्षमता की परीक्षा है। शावकों में बुखार यह दिखाता है कि लंबी यात्रा का तनाव, मां का पहला दूध (कोलोस्ट्रम) न मिलने से कमजोर प्रतिरक्षा और संभावित संक्रमण—तीनों जोखिम एक साथ हैं। एक शावक में संक्रमण होने पर वह बाकी शावकों तक फैल सकता है, इसलिए क्वारंटीन प्रोटोकॉल निर्णायक हैं।

UPSC नज़रिया

प्रीलिम्स संकेत

  • नंदनकानन प्राणी उद्यान ओडिशा में स्थित है; यहां 8 सितंबर से पांच ओरंगुटान शावक क्वारंटीन में हैं।
  • ओरंगुटान भारत की देशज (नेटिव) प्रजाति नहीं है—स्रोत के अनुसार।
  • शावकों को बालासोर जिले के झाऊ (कैजुरीना) जंगल से बचाया गया।
  • ओयूएटी = ओडिशा यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर एंड टेक्नोलॉजी; इसमें वन्यजीव स्वास्थ्य केंद्र (Centre for Wildlife Health) है।
  • कोलोस्ट्रम = मां का पहला दूध, जो नवजात में प्रतिरक्षा निर्माण में सहायक होता है।
  • एक अन्य मामले में डोंबिवली की पलावा सिटी के फ्लैट से ओरंगुटान और संकटग्रस्त सरीसृप जब्त किए गए थे।

मेन्स दृष्टिकोण

भारत में देशज न होने वाली प्रजाति—ओरंगुटान—के पांच शावकों का ओडिशा के बालासोर के जंगल से बचाया जाना और उसके बाद नंदनकानन में एक शावक को बुखार आना, दो अलग-अलग किंतु जुड़े प्रश्न उठाता है: एक, विदेशी वन्यजीवों की अवैध आवाजाही और तस्करी की आशंका (डोंबिवली में फ्लैट से ओरंगुटान व संकटग्रस्त सरीसृप जब्ती इसी प्रवृत्ति का संकेत); दो, बचाव के बाद की चिकित्सा-देखभाल क्षमता। स्रोत के अनुसार विशेषज्ञ निरंजन साहू का आकलन है कि बुखार संक्रामक हो सकता है—तब दूसरे शावकों में फैलने का खतरा है—या दूर से लाए जाने के तनाव तथा पहले से कमजोर प्रतिरक्षा से जुड़ा हो सकता है; कोलोस्ट्रम मिला या नहीं, यह प्रतिरक्षा का निर्णायक कारक है। इसलिए आगे का रास्ता है: कारण की जल्द नैदानिक पुष्टि, कड़ा क्वारंटीन और चौबीसों घंटे पशु चिकित्सा निगरानी, तापमान की प्रवृत्ति व दवा-प्रतिक्रिया का व्यवस्थित आकलन, तथा जब्ती/बचाव के मामलों में विशेषज्ञ वन्यजीव स्वास्थ्य संस्थानों (जैसे ओयूएटी का वन्यजीव स्वास्थ्य केंद्र) से समन्वय।

मुख्य शब्द

ओरंगुटान
एक महाकपि प्रजाति, जो स्रोत के अनुसार भारत की देशज प्रजाति नहीं है।
नंदनकानन प्राणी उद्यान
ओडिशा का चिड़ियाघर, जहां बचाए गए पांच ओरंगुटान शावक 8 सितंबर से क्वारंटीन में हैं।
क्वारंटीन
नए लाए गए या संभावित संक्रमित पशुओं को अलग रखकर निगरानी करने की व्यवस्था, ताकि रोग न फैले।
कोलोस्ट्रम
मां का पहला दूध, जो नवजात शावक में प्रतिरक्षा (इम्युनिटी) बनाने में मदद करता है।
वन्यजीव स्वास्थ्य केंद्र, ओयूएटी
ओडिशा यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर एंड टेक्नोलॉजी का केंद्र; निरंजन साहू इसके पूर्व निदेशक हैं।
झाऊ (कैजुरीना) जंगल
तटीय क्षेत्रों में लगाए जाने वाले कैजुरीना वृक्षों का वन; बालासोर के ऐसे ही जंगल से शावक बचाए गए।

अभ्यास प्रश्न

  1. भारत में देशज न होने वाली विदेशी प्रजातियों की बरामदगी वन्यजीव तस्करी के किन आयामों की ओर संकेत करती है? नंदनकानन के ओरंगुटान प्रकरण के आधार पर चर्चा करें।
  2. बचाए गए वन्यजीव शावकों की देखभाल में क्वारंटीन, तनाव-प्रबंधन और प्रतिरक्षा (कोलोस्ट्रम) की भूमिका का परीक्षण कीजिए।
  3. चिड़ियाघरों और वन्यजीव स्वास्थ्य संस्थानों के बीच समन्वय क्यों आवश्यक है? स्रोत में उल्लिखित विशेषज्ञ आकलन के संदर्भ में समझाइए।

सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।

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