नेपाल में छह फंसे मजदूरों तक पहुंचने के लिए रैट-होल माइनिंग

नेपाल की चिलिमे 22 मेगावाट पनबिजली परियोजना में 26 अगस्त की बाढ़ के बाद से फंसे छह मजदूरों तक पहुंचने के लिए बचाव दल रैट-होल माइनिंग का इस्तेमाल कर रहे हैं, यही तकनीक 2024 में उत्तराखंड के सिलक्यारा सुरंग बचाव में अपनाई गई थी। भारतीय सेना और एनडीआरएफ के 20 सुरंग विशेषज्ञ तथा नेपाली सेना के 37 जवान जुटे हैं। करीब 90 मीटर मलबा हटाकर 35 मीटर और खोदते हुए 125 मीटर गहराई तक पहुंचे, उपप्रबंधक बिमल खड्का ने बताया। मजदूरों से संपर्क नहीं हुआ। कंपनी आंकड़ों के अनुसार 11 स्थलों पर 909 लोग लापता हैं।

स्रोत

Hindustan Times — India · मूल ख़बर पढ़ें ↗

#nepal floods#rat-hole mining#tunnel rescue#chilime hydropower#ndrf

डेस्क जाँच · स्रोत से तुलना की

डेस्क ने क्या जाँचा (5)
  • Six workers have been trapped at Nepal's Chilime 22 MW hydropower project since the August 26 floods. — Stated in source and attributed to officials monitoring the rescue.
  • Rescuers have dug about 35 metres through debris using rat-hole mining, reaching a total depth of 125 metres after clearing about 90 metres of debris. — Attributed to Bimal Khadka, deputy manager, Chilime Hydropower Company Ltd; the Nepal Army separately cites about 100 metres cleared, a minor internal discrepancy.
  • Twenty tunnel experts from the Indian Army and NDRF and 37 Nepalese Army personnel are carrying out the rescue. — Figures appear in the source, attributed to officials.
  • 909 people went missing at 11 sites after the floods. — Attributed to data maintained by hydropower companies; no independent confirmation in source.
  • Clearing work is expected to continue on September 15 to reach the powerhouse. — Attributed to Indian envoy to Nepal Naveen Srivastava in a post on X.

गहराई से

शोध सारांश · 8 तथ्य · 5 तारीख़ें · परीक्षा के लिए

सार

पृष्ठभूमि

नेपाल की चिलिमे 22 मेगावाट पनबिजली परियोजना में 26 अगस्त की विनाशकारी बाढ़ के बाद छह मजदूर भूमिगत पावर स्टेशन में फंसे हुए हैं। उन तक पहुंचने के लिए बचाव दल अब रैट-होल माइनिंग तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं — वही तरीका जो 2024 में उत्तराखंड के सिलक्यारा सुरंग हादसे में 41 मजदूरों को निकालने के दौरान अपनाया गया था। भारतीय सेना और एनडीआरएफ के सुरंग विशेषज्ञ नेपाली सेना के साथ मिलकर मलबा और सुरंग में भरा पानी हटा रहे हैं। कंपनियों के आंकड़ों के अनुसार बाढ़ के बाद 11 स्थलों पर 909 लोग लापता हैं।

मुख्य तथ्य

  • चिलिमे 22 मेगावाट पनबिजली परियोजना में 26 अगस्त की बाढ़ के बाद से छह मजदूर फंसे हुए हैं।
  • भारतीय सेना और एनडीआरएफ के 20 सुरंग विशेषज्ञ तथा नेपाली सेना के 37 जवान बचाव कार्य में लगे हैं।
  • एक्सकेवेटर से करीब 90 मीटर मलबा (बड़े बोल्डरों सहित) हटाया गया; नेपाली सेना ने लगभग 100 मीटर मलबा हटाने की बात कही।
  • रैट होल बनाकर 35 मीटर और खोदा गया, कुल गहराई 125 मीटर तक पहुंची — उपप्रबंधक बिमल खड्का।
  • फंसे मजदूरों से अब तक कोई संपर्क नहीं हुआ; उन्हें आखिरी बार भूमिगत पावर स्टेशन में देखा गया था जहां पीने का पानी संग्रहित था।
  • पनबिजली कंपनियों के आंकड़ों के अनुसार बाढ़ के बाद 11 स्थलों पर 909 लोग लापता हैं।
  • सिलक्यारा बचाव अभियान करीब 17 दिन चला और सभी 41 मजदूर सुरक्षित निकाले गए; वहां लगभग 100 मीटर लंबे पाइप से भोजन-दवा पहुंचाई गई थी।
  • सोमवार सुबह बचावकर्मियों को पानी में तेल मिला मिला, जिससे पावर स्टेशन के पास होने का अनुमान — सूचना अधिकारी श्री राज बज्राचार्य।

समयरेखा

  1. 26 अगस्तनेपाल में विनाशकारी बाढ़; चिलिमे 22 मेगावाट परियोजना में छह मजदूर भूमिगत पावर स्टेशन में फंसे।
  2. बाढ़ के 9 दिन बादनेपाल पनबिजली सुरंग से 2 लोग बचाए गए और अन्य से संपर्क स्थापित हुआ (संबंधित रिपोर्ट)।
  3. सोमवार (14 सितंबर, स्रोत में तिथि स्पष्ट नहीं)रैट-होल माइनिंग से 35 मीटर खुदाई, कुल 125 मीटर गहराई; पानी में तेल मिलने की सूचना।
  4. 15 सितंबर (मंगलवार)भारतीय राजदूत नवीन श्रीवास्तव के अनुसार पावरहाउस तक पहुंचने के लिए मलबा हटाने का काम जारी रहेगा।
  5. 2024उत्तराखंड सिलक्यारा सुरंग बचाव, जिसमें रैट-होल माइनिंग अपनाई गई और 41 मजदूर बचाए गए।

किसका दाँव

  • छह फंसे मजदूर और उनके परिवार — जीवन-मृत्यु का प्रश्न; अब तक कोई संपर्क नहीं, पर संग्रहित पीने के पानी के कारण जीवित होने की आशा।
  • भारतीय सेना और एनडीआरएफ — 20 सुरंग विशेषज्ञ तैनात; सिलक्यारा का अनुभव विदेश में आपदा प्रतिक्रिया में लागू।
  • नेपाली सेना — 37 जवान अभियान में; मलबा हटाना, पानी निकालना और रस्सियों से प्रवेश का प्रयास।
  • चिलिमे हाइड्रोपावर कंपनी लिमिटेड — परियोजना संचालक; उपप्रबंधक और सूचना अधिकारी बचाव की प्रगति की जानकारी दे रहे हैं।
  • नेपाल में भारतीय राजदूत नवीन श्रीवास्तव — भारत-नेपाल संयुक्त बचाव समन्वय और प्रगति की सार्वजनिक जानकारी।
  • नेपाल का पनबिजली क्षेत्र और श्रमिक — 11 स्थलों पर 909 लोग लापता; परियोजनाओं की आपदा-सुरक्षा पर सवाल।

क्यों अहम है

यह घटना दिखाती है कि हिमालयी क्षेत्र की पनबिजली परियोजनाएं अचानक बाढ़ के सामने कितनी असुरक्षित हैं और सुरंग बचाव कितना जोखिम भरा है। भारत के सुरंग विशेषज्ञों की तैनाती पड़ोसी देशों के साथ आपदा प्रतिक्रिया सहयोग का उदाहरण है। साथ ही, अवैध कोयला खनन से जुड़ी रैट-होल तकनीक का बचाव में सहारा लेना दर्शाता है कि सुरक्षित विकल्पों की कमी बनी हुई है।

UPSC नज़रिया

प्रीलिम्स संकेत

  • चिलिमे पनबिजली परियोजना (नेपाल) की क्षमता 22 मेगावाट; संचालक चिलिमे हाइड्रोपावर कंपनी लिमिटेड।
  • रैट-होल माइनिंग: पतली कोयला परतों से खनन की संकरी, बिना वेंटिलेशन वाली सुरंग तकनीक, अक्सर अवैध।
  • 2024 सिलक्यारा (उत्तराखंड) सुरंग बचाव: करीब 17 दिन, 41 मजदूर बचाए गए, ~100 मीटर पाइप से आपूर्ति।
  • एनडीआरएफ (राष्ट्रीय आपदा मोचन बल) के 20 विशेषज्ञ भारतीय सेना के साथ नेपाल में तैनात।
  • चिलिमे में अब तक कुल खुदाई गहराई 125 मीटर; इसमें 35 मीटर रैट होल से।
  • बाढ़ के बाद नेपाल में 11 पनबिजली स्थलों पर 909 लोग लापता।

मेन्स दृष्टिकोण

नेपाल की चिलिमे परियोजना में 26 अगस्त की बाढ़ के बाद फंसे छह मजदूरों का मामला हिमालयी पनबिजली परियोजनाओं में आपदा जोखिम और बचाव क्षमता की सीमाओं को उजागर करता है। कारणों में अचानक आई विनाशकारी बाढ़, सुरंगों में पानी और बड़े बोल्डरों का भराव तथा भूमिगत पावर स्टेशन तक पहुंच का अवरुद्ध होना शामिल हैं — बचाव दल ने एक्सकेवेटर से करीब 90-100 मीटर मलबा हटाकर रैट होल से 35 मीटर आगे बढ़ते हुए 125 मीटर गहराई तक पहुंचा और मड पंप से पानी निकाल रहे हैं। निहितार्थ दोहरे हैं: एक, रैट-होल माइनिंग जैसी स्वभावतः खतरनाक और सामान्यतः अवैध कोयला खनन तकनीक पर निर्भरता; दो, सिलक्यारा से भिन्न यहां मजदूरों से संपर्क न होने के कारण भोजन-दवा पहुंचाना संभव नहीं। आगे की राह में भारत-नेपाल संयुक्त तकनीकी सहयोग (20 भारतीय विशेषज्ञ, 37 नेपाली सैनिक), राजनयिक समन्वय और परियोजना स्थलों पर आपदा-तैयारी व संचार व्यवस्था मजबूत करना अहम है; स्रोत इससे आगे किसी नीतिगत निर्णय का उल्लेख नहीं करता।

मुख्य शब्द

रैट-होल माइनिंग
एक व्यक्ति के समाने भर की संकरी, बिना हवादार सुरंग खोदकर पतली कोयला परत तक पहुंचने की तकनीक, जो जोखिमपूर्ण और अक्सर अवैध है।
सिलक्यारा सुरंग बचाव (2024)
उत्तराखंड में करीब 17 दिन चला अभियान जिसमें 41 फंसे मजदूर निकाले गए; रैट-होल तकनीक इसी में अपनाई गई।
एनडीआरएफ
राष्ट्रीय आपदा मोचन बल; इसके सुरंग विशेषज्ञ भारतीय सेना के साथ नेपाल में बचाव कार्य में शामिल।
चिलिमे हाइड्रोपावर कंपनी लिमिटेड
नेपाल की 22 मेगावाट चिलिमे पनबिजली परियोजना संचालित करने वाली कंपनी।
मड पंप/डीवाटरिंग
सुरंग में जमा पानी बाहर निकालने की प्रक्रिया, जिसका उपयोग पावरहाउस तक रास्ता खोलने के लिए किया जा रहा है।
भूमिगत पावर स्टेशन
पनबिजली परियोजना का जमीन के नीचे बना बिजलीघर, जहां छह मजदूरों को अंतिम बार देखा गया था।

अभ्यास प्रश्न

  1. हिमालयी क्षेत्र की पनबिजली परियोजनाओं में अचानक बाढ़ से उत्पन्न जोखिम और सुरंग बचाव की चुनौतियों का चिलिमे तथा सिलक्यारा के अनुभवों के आलोक में परीक्षण करें।
  2. रैट-होल माइनिंग क्या है और आपदा बचाव में इसके उपयोग के लाभ व खतरे क्या हैं? उदाहरण सहित समझाइए।
  3. पड़ोसी देशों में आपदा प्रतिक्रिया के लिए भारत की तकनीकी सहायता (सेना, एनडीआरएफ) उसकी विदेश नीति और क्षेत्रीय सहयोग को कैसे प्रभावित करती है?

सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।

अगली ख़बरगुरुग्राम हादसा: आरोपी के वकील ने महिला बाइकर को दोषी ठहराया →
← सभी ख़बरें