शाह ने 2029 तक यूसीसी का लक्ष्य रखा, जद(यू) में अलग-अलग राय

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मुंबई में कहा कि अगले लोकसभा चुनाव से पहले सभी 21 भाजपा-राजग शासित राज्यों में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू की जाएगी। इस पर जद(यू) में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं आईं। पार्टी महासचिव श्याम रजक ने कहा कि बिहार में यूसीसी लागू करने का सवाल ही नहीं उठता, जबकि उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने कहा कि पार्टी पहले कानून का अध्ययन करेगी और बिना कारण विरोध नहीं करेगी। उत्तराखंड ने 27 जनवरी 2025 को यूसीसी लागू किया।

स्रोत

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डेस्क ने क्या जाँचा (5)
  • Amit Shah said UCC will be introduced in all 21 BJP-NDA ruled states before 2029. — Directly quoted in source, attributed to Shah's remarks in Mumbai.
  • JD(U) general secretary Shyam Rajak said the question of implementing UCC in Bihar does not arise. — Quoted and attributed by name in source.
  • Deputy CM Vijay Kumar Chaudhary said the party would study the legislation before opposing it. — Quoted and attributed by name in source.
  • Uttarakhand implemented a state UCC on January 27, 2025; Gujarat, Assam and Madhya Pradesh Bills await President's assent as of mid-September. — Dates and status appear in source; no external verification possible.
  • NDA won 202 of 243 Bihar seats; BJP 89, JD(U) 85; Samrat Choudhary is chief minister. — Figures appear in source without a named data source.

विश्लेषकों की राय राय

AI राजनीतिक विश्लेषक

यूसीसी पर 2029 की समयसीमा तय करके अमित शाह ने भाजपा के पुराने वैचारिक वादे को एक राजनीतिक कैलेंडर से बांध दिया है — और इसी के साथ बिहार में सहयोगी जद(यू) को असहज स्थिति में डाल दिया है। जद(यू) के दो स्वर — श्याम रजक का साफ 'सवाल ही नहीं उठता' और उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी का 'पहले कानून देखेंगे' — भ्रम से ज़्यादा एक जानी-पहचानी गठबंधन रणनीति लगते हैं: अपने सामाजिक आधार के लिए एक संदेश, सहयोगी के लिए दूसरा। 2025 के नतीजों के बाद भाजपा सबसे बड़ी पार्टी है और मुख्यमंत्री पद उसके पास है, इसलिए जद(यू) का मोलभाव पहले जैसा नहीं, फिर भी सरकार के अंकगणित में वह अनिवार्य है।

  • तत्काल लाभ भाजपा को है — उसने एजेंडा तय किया और सहयोगियों तथा विपक्ष दोनों को अपनी पसंद की ज़मीन पर प्रतिक्रिया देने को मजबूर किया।
  • जद(यू) अपने ही पुराने फॉर्मूले में फंसी है: संसद में विधेयक का समर्थन लेकिन बिहार में अमल का विरोध — समयसीमा आने के बाद यह संतुलन टिकाना कठिन है।
  • चुनावी पहलू अहम है: अत्यंत पिछड़ा वर्ग, महिलाएं और करीब 17.7% मुस्लिम आबादी के हिस्सों वाले सामाजिक गठजोड़ को देखते हुए जल्दबाज़ी में समर्थन महंगा पड़ सकता है।
  • कहानी में दर्ज इतिहास सावधान करता है कि इस मतभेद को बढ़ा-चढ़ाकर न देखें — तीन तलाक और अनुच्छेद 370 पर असहमति के बाद भी गठबंधन चला।
  • राजद और कांग्रेस के नीतीश को न्योते गंभीर प्रस्ताव से अधिक दबाव की रणनीति दिखते हैं, जिनका मकसद 'एनडीए में दरार' की कथा जीवित रखना है।

किस पर नज़र रखें — देखना यह है कि कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा के संकेत के मुताबिक शाह से बातचीत के बाद जद(यू) एक आधिकारिक लाइन पर आती है या नहीं, और बिहार के लिए प्रस्तावित कानून का स्वरूप क्या बनता है।

यह खबर न जद(यू) की अंतिम स्थिति स्पष्ट करती है, न यह कि बिहार में कानून बनेगा या नहीं, न प्रस्तावित प्रावधान, और न ही यह कि नीतीश कुमार ने स्वयं शाह की घोषणा पर क्या प्रतिक्रिया दी।

गहराई से

शोध सारांश · 8 तथ्य · 7 तारीख़ें · परीक्षा के लिए

सार

पृष्ठभूमि

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मुंबई दौरे के दौरान कहा कि 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले सभी 21 भाजपा-राजग शासित राज्यों में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू की जाएगी। यूसीसी विवाह, तलाक, उत्तराधिकार जैसे व्यक्तिगत कानूनों के लिए समान विधिक ढांचा बनाने का प्रयास है और संविधान के अनुच्छेद 44 (राज्य के नीति निदेशक तत्व) में इसका उल्लेख है। शाह के बयान पर भाजपा की सबसे पुरानी सहयोगी जद(यू) में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं आईं — कुछ नेताओं ने बिहार में यूसीसी लागू करने का विरोध किया, तो कुछ ने कानून का अध्ययन करने की बात कही। बिहार में अब भाजपा के सम्राट चौधरी मुख्यमंत्री हैं और नीतीश कुमार मुख्यमंत्री नहीं हैं।

मुख्य तथ्य

  • अमित शाह ने मुंबई में कहा कि 21 भाजपा-राजग शासित राज्यों में 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले यूसीसी लाई जाएगी।
  • उत्तराखंड 27 जनवरी 2025 को राज्य-विशिष्ट यूसीसी लागू करने वाला स्वतंत्र भारत का पहला राज्य बना।
  • गुजरात, असम और मध्य प्रदेश की विधानसभाओं ने यूसीसी विधेयक पारित किए; मध्य-सितंबर तक तीनों राष्ट्रपति की मंजूरी की प्रतीक्षा में थे।
  • जद(यू) महासचिव श्याम रजक ने कहा कि बिहार में यूसीसी लागू करने का सवाल ही नहीं उठता।
  • उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने कहा कि पार्टी पहले विधेयक देखेगी और 'बिना कारण' विरोध नहीं करेगी।
  • बिहार के जाति सर्वेक्षण के अनुसार राज्य की आबादी में मुसलमान लगभग 17.7% हैं।
  • 2025 विधानसभा चुनाव में जद(यू) ने चार मुस्लिम उम्मीदवार उतारे; केवल मोहम्मद ज़मा खान चैनपुर से जीते।
  • राजग ने बिहार की 243 सीटों में 202 जीतीं — भाजपा 89 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी, जद(यू) को 85 सीटें।

समयरेखा

  1. जनवरी 2017मुख्यमंत्री के रूप में नीतीश कुमार ने विधि आयोग की यूसीसी प्रश्नावली लौटा दी और व्यापक परामर्श की मांग की।
  2. 2019जद(यू) ने तीन तलाक विधेयक का विरोध किया; लोकसभा बहस से वॉकआउट और राज्यसभा में मतदान से अनुपस्थिति।
  3. अगस्त 2019जद(यू) ने अनुच्छेद 370 हटाने और जम्मू-कश्मीर के पुनर्गठन का विरोध किया, संसद में वॉकआउट किया।
  4. 2022तत्कालीन कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने राज्यसभा को लिखित उत्तर में बताया कि राज्य भी इन विषयों पर कानून बना सकते हैं।
  5. 27 जनवरी 2025उत्तराखंड ने राज्य-विशिष्ट यूसीसी लागू किया।
  6. 2025 विधानसभा चुनावराजग ने 202/243 सीटें जीतीं; भाजपा 89, जद(यू) 85; सम्राट चौधरी मुख्यमंत्री बने।
  7. मध्य-सितंबर (स्रोत के अनुसार)गुजरात, असम, मध्य प्रदेश के यूसीसी विधेयक राष्ट्रपति की मंजूरी की प्रतीक्षा में।

किसका दाँव

  • भाजपा / अमित शाह — यूसीसी दीर्घकालिक वैचारिक एजेंडा; 2029 से पहले सभी राजग राज्यों में लागू करने की समयसीमा तय की।
  • जद(यू) — सहयोगी बने रहते हुए अति पिछड़ा वर्ग, महिलाओं और अल्पसंख्यकों के सामाजिक गठबंधन को बनाए रखने की चुनौती।
  • नीतीश कुमार — लंबे समय से सहमति और व्यापक परामर्श के पक्षधर; अब मुख्यमंत्री नहीं, पर जद(यू) राजग का प्रमुख घटक।
  • बिहार के मुसलमान (आबादी का ~17.7%) — व्यक्तिगत कानूनों में बदलाव का सीधा असर; 2024 लोकसभा में इस समुदाय का सीमित हिस्सा राजग के साथ।
  • कांग्रेस और राजद (महागठबंधन) — यूसीसी विवाद का उपयोग करते हुए नीतीश कुमार को विपक्षी गठबंधन में आने का न्योता।
  • राज्य सरकारें और राष्ट्रपति — समवर्ती सूची के विषय होने से राज्य कानून बना सकते हैं; राज्य विधेयकों को राष्ट्रपति की मंजूरी आवश्यक।

क्यों अहम है

यूसीसी भाजपा के तीन पुराने वैचारिक लक्ष्यों में से एक है और शाह के बयान ने पहली बार इसे 2029 की स्पष्ट समयसीमा दी है। बिहार में भाजपा की सबसे पुरानी सहयोगी जद(यू) का रुख तय करेगा कि राजग के भीतर इस पर आम सहमति बनती है या मतभेद गहराते हैं। साथ ही यह सवाल भी उठता है कि विविध व्यक्तिगत कानूनों वाले देश में सुधार परामर्श से होगा या समयबद्ध राजनीतिक लक्ष्य से।

UPSC नज़रिया

प्रीलिम्स संकेत

  • अनुच्छेद 44 (राज्य के नीति निदेशक तत्व): राज्य पूरे भारत में नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता सुनिश्चित करने का प्रयास करेगा।
  • विवाह, तलाक, गोद लेना, वसीयत, निर्वसीयत उत्तराधिकार — सातवीं अनुसूची की समवर्ती सूची की प्रविष्टि 5 के अंतर्गत।
  • उत्तराखंड: 27 जनवरी 2025 को यूसीसी लागू करने वाला स्वतंत्र भारत का पहला राज्य।
  • गुजरात, असम, मध्य प्रदेश विधानसभाओं ने यूसीसी विधेयक पारित किए, राष्ट्रपति की मंजूरी लंबित।
  • 2019: मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक यानी तीन तलाक कानून; जद(यू) ने विरोध किया।
  • बिहार जाति सर्वेक्षण: मुस्लिम आबादी लगभग 17.7%; 2025 में राजग को 243 में 202 सीटें।

मेन्स दृष्टिकोण

समान नागरिक संहिता का प्रश्न संविधान के अनुच्छेद 44 में निहित निदेशक तत्व, समवर्ती सूची के संवैधानिक विभाजन और गठबंधन राजनीति की व्यवहारिकता — तीनों के संगम पर खड़ा है। चूंकि विवाह, तलाक, उत्तराधिकार जैसे विषय समवर्ती सूची की प्रविष्टि 5 में आते हैं (जैसा 2022 में तत्कालीन कानून मंत्री ने राज्यसभा को बताया), भाजपा ने केंद्रीय कानून के बजाय राज्य मार्ग अपनाया — उत्तराखंड (27 जनवरी 2025) से शुरू कर गुजरात, असम और मध्य प्रदेश तक। शाह द्वारा 2029 की समयसीमा तय करने से यह प्रक्रिया राजनीतिक रूप से तेज होती दिखती है, पर बिहार जैसे राज्यों में जहां मुस्लिम आबादी ~17.7% है और जद(यू) का सामाजिक आधार अति पिछड़ा वर्ग, महिलाएं और अल्पसंख्यक रहे हैं, सहयोगी दलों की असहजता स्पष्ट है। जद(यू) का ऐतिहासिक रुख — 2017 में विधि आयोग की प्रश्नावली लौटाना, तीन तलाक और अनुच्छेद 370 पर असहमति — दिखाता है कि पार्टी सहमति और परामर्श को प्राथमिकता देती है, फिर भी गठबंधन टूटा नहीं। आगे का रास्ता कानून के प्रस्तावित प्रावधानों की पारदर्शिता, प्रभावित समूहों से व्यापक परामर्श और सहयोगियों के बीच साझा स्थिति बनाने में है; अन्यथा सुधार का उद्देश्य (विधि के समक्ष समानता, महिलाओं के अधिकार) राजनीतिक ध्रुवीकरण में उलझ सकता है।

मुख्य शब्द

समान नागरिक संहिता (यूसीसी)
विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और वसीयत जैसे मामलों में सभी नागरिकों के लिए एक समान विधिक ढांचा।
अनुच्छेद 44
नीति निदेशक तत्व, जिसके अनुसार राज्य पूरे भारत में नागरिकों के लिए यूसीसी सुनिश्चित करने का प्रयास करेगा।
समवर्ती सूची (प्रविष्टि 5)
सातवीं अनुसूची की वह सूची जिसमें विवाह, तलाक, उत्तराधिकार आते हैं; केंद्र और राज्य दोनों कानून बना सकते हैं।
तीन तलाक कानून
मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक, 2019; तत्काल तीन तलाक को आपराधिक बनाने पर जद(यू) की आपत्ति थी।
महागठबंधन
बिहार का विपक्षी गठबंधन जिसमें राजद और कांग्रेस शामिल हैं; इसने नीतीश कुमार को शामिल होने का न्योता दिया।
बिहार जाति सर्वेक्षण
राज्य का सर्वेक्षण जिसके अनुसार बिहार की आबादी में मुसलमान लगभग 17.7% हैं।

अभ्यास प्रश्न

  1. अनुच्छेद 44 के निदेशक तत्व और समवर्ती सूची की प्रविष्टि 5 के आलोक में परीक्षण करें कि राज्यों द्वारा अलग-अलग यूसीसी बनाना संघीय ढांचे के लिए क्या अर्थ रखता है।
  2. गठबंधन राजनीति में वैचारिक एजेंडे और सामाजिक सहमति के बीच संतुलन — जद(यू) और भाजपा के यूसीसी पर रुख के उदाहरण से चर्चा करें।
  3. क्या समान नागरिक संहिता को समयबद्ध राजनीतिक लक्ष्य के रूप में लागू करना उचित है, या इसे व्यापक परामर्श आधारित प्रक्रिया होना चाहिए? तर्कसहित उत्तर दें।

सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।

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